सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) लंग्स यानी फेफड़ों संबंधि बीमारी है। जो व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होता है, उसे सांस लेने में समस्या होती है और साथ ही खांसी भी आती है। जो लोग स्मोकिंग यानी धूम्रपान करते हैं, उन्हें सीओपीडी का अधिक खतरा रहता है। सीओपीडी डिजीज में ब्रोंकियल ट्यूब में सूजन आ जाती है और साथ ही म्यूकस भी अधिक मात्रा में बनने लगता है। अधिक म्यूकस की समस्या के कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ये बीमारी धीमे-धीमे बढ़ती जाती है। कुछ लोगों को तो सीओपीडी के लक्षणों का भी पता नहीं चल पाता है।
अगर आप सीओपीडी बीमारी के बारे में जानते हैं तो आपको ये जानकारी भी होगी कि इस बीमारी के लक्षण समय-समय पर बदलते रहते हैं। सीओपीडी बीमारी के लक्षण महीनों में या फिर साल भर बाद बदल जाते हैं। लक्षणों के बदलने के साथ ही डॉक्टर ट्रीटमेंट भी चेंज कर सकते हैं। सीओपीडी बीमारी को चार प्रकार में बांटा गया है। बीमारी के प्रकार को जानने के बाद डॉक्टर उसी के अनुसार पेशेंट को ट्रीट करते हैं। जानिए सीओपीडी बीमारी कितने प्रकार की होती है ?
जानिए सीओपीडी के प्रकार (Types of COPD)
सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) की अर्ली स्टेज
सीओपीडी की अर्ली स्टेज की जानकारी धीरे-धीरे ही लगती है। सीओपीडी की बीमारी फेफड़ों को डैमेज कर सकती है। यदि सीओपीडी के शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए तो फेफड़ों को डैमेज होने से बचाया जा सकता है। अर्ली स्टेज को प्रोग्रेस करने में साल भर का समय भी लग जाता है। अक्सर लोगों को सीओपीडी की जानकारी तभी मिल पाती है जब लंग्स डैमेज हो चुके होते हैं। कफ या फिर सूखी खांसी के साथ ही सांस लेने में थोड़ी समस्या होना सीओपीडी के प्रारंभिक लक्षण हैं।
सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) की अर्ली स्टेज के लिए टेस्ट
सीओपीडी की समस्या होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिख सकते हैं। अगर किसी भी व्यक्ति को सांस लेने में समस्या महसूस हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। सीओपीडी का बेस्ट ट्रीटमेंट उसकी सही समय पर पहचान कर लेना है। अगर आपको सांस लेने में समस्या हो रही है तो डॉक्टर टेस्ट के लिए सलाह दे सकता है।
फिजिकल टेस्ट (Physical test) : डॉक्टर पेशेंट का फिजिकल टेस्ट भी कर सकता है।
स्पिरोमेट्री टेस्ट ( Spirometry test) : इस टेस्ट के दौरान डॉक्टर पेशेंट को स्पाइरोमीटर मशीन से जुड़ी एक ट्यूब देगा और गहरी सांस लेने के लिए कहेगा। इस प्रोसेस से फेफड़ों के कार्य के बारे में जानकारी मिलती है। साथ ही पता चलता है कि लंग्स सही से काम कर रहे हैं या फिर नहीं।
डॉक्टर अल्फा-1-एंटीट्रीप्सिन (एएटी) की कमी की जांच के लिए टेस्ट, चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट आदि कर सकते हैं।
सीओपीडी के प्रकार: सीओपीडी की सेकेंड स्टेज (COPD’s Second Stage)
सीओपीडी की सेकेंड स्टेज में बीमारी के लक्षण अधिक दिखते हैं। सीओपीडी के प्रकार सीओपीडी के प्रकार शरीर में विभिन्न प्रकार की परेशानियां खड़ी करते हैं। दूसरी स्टेज में पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति का FEV1 यानी माप के दौरान फोर्स्ड एक्सपिरेट्री वॉल्युम (forced expiratory volume in 1 second, measured during a spirometry test) 50% से 80% के बीच है तो उस व्यक्ति को सेकेंड स्टेज में माना जाएगा। सेकेंड स्टेज के लक्षणों से छुटकारा दिलाने के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।
सीओपीडी के प्रकार: सीओपीडी की थर्ड स्टेज (COPD’s Third Stage)
सीओपीडी की थर्ड स्टेज को गंभीर अवस्था भी माना जाता है। इस स्टेज में पेशेंट को अधिक गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं। ज्यादा खांसी आना, खांसी के साथ ही कफ की समस्या, सांस लेने में अधिक समस्या महूस होना, छाती में कसापन लगना, एंकल और फीट में सूजन आना आदि लक्षण दिखने लगते हैं। अगर समय पर ट्रीटमेंट न कराया जाए तो स्थिति बदतर हो सकती है। आप ऐसे में डॉक्टर की सलाह से पल्मोनरी रिहेबिलिटेशन प्रोग्राम में कम्प्लीट कर सकते हैं। साथ ही एक्सरसाइज ट्रेनिंग क्लासेज भी ली जा सकती हैं। इस बारे में आपका डॉक्टर आपको बेहतर ढंग से समझा सकता है।
सीओपीडी के प्रकार: सीओपीडी की चौंथी स्टेज ( Very Severe)
सीओपीडी की चौंथी स्टेज अधिक गंभीर होती है। ये स्टेज शरीर के महत्वपूर्ण कार्यों में रुकावट डालने का काम करती है। आपको सांस लेना बहुत मुश्किल लग सकता है। क्रॉनिक रेस्पिरेट्री फेलियर की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में फेफड़ों से ऑक्सीजन सही मात्रा में ब्लड में नहीं पहुंच पाती है और न ही ब्लड से कार्बन डाइ ऑक्साइड निकल पाती है। समस्या अधिक गंभीर लगने पर डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं
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लाइफस्टाइल में सुधार है जरूरी
सीओपीडी की समस्या (COPD problem) से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव बहुत जरूरी है। अगर आप स्मोकिंग कर रहे हैं तो तुरंत बंद कर दें। स्मोकिंग खुद के साथ ही दूसरे व्यक्ति को भी नुकसान पहुंचाती है। आपको एक्सरसाइज के साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। आप चाहे तो रोजाना योगा (Yoga) को भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। अगर आपके आसपास प्रदूषण अधिक मात्रा में है तो घर में सुरक्षित रहे। आप घर से बाहर जाते समय मास्क का उपयोग भी कर सकते हैं। ऐसा करने से वायु प्रदूषण (Air pollution) से बचने में मदद मिलेगी। साथ ही स्ट्रेस से बचाव भी बीमारी से बचाने का काम करता है।
किसी भी बीमारी की यदि आप समय पर पहचान कर लेते हैं तो उसका ट्रीटमेंट आसान हो जाता है। बीमारी के बढ़ने के साथ ही रिस्क भी बढ़ जाता है। बेहतर होगा कि आप शरीर में होने वाले किसी भी तरह के बदलाव को नजरअंदाज न करें और किसी भी तरह के लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से तुरंत इलाज कराएं।आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।