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Tuberculosis: ट्यूबरक्युलॉसिस (क्षय रोग) क्या है?

Tuberculosis: ट्यूबरक्युलॉसिस (क्षय रोग) क्या है?

ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) यानी टीबी एक ऐसा बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो हमारे बॉडी टिशू पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलॉसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक बैक्टीरिया की वजह से होती है, जो हवा के जरिए फैलती है। टीबी के बैक्टीरिया उन पर तेजी से हमला करते हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। खासतौर पर उन्हें जो एचआईवी या कैंसर से पीड़ित रह चुके हों। ज्यादातर यह बीमारी व्यक्ति के फेफड़ों को प्रभावित करती है। लेकिन, यह हड्डियों, लिम्फ ग्रंथियों, आंतों, दिल, दिमाग के साथ-साथ अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।

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ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) की बीमारी कितनी सामान्य है?

कई मामलों में ट्यूबरक्युलॉसिस का संक्रमण तेजी से फैलता है। जिन लोगों की बीमारी से लड़ने की क्षमता कमजोर होती है, उन्हें यह बीमारी हो सकती है। इसकी शुरुआत होने पर यह बीमारी दूसरों में भी तेजी से फैल सकती है। ऐसे में, नीचे बताए गए लोगों को टीबी होने का खतरा ज्यादा रहता है :

अगर व्यक्ति एचआईवी या इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त हो।

  • जो ट्यूबरक्युलॉसिस से पीड़ित लोगों के करीबी हों।
  • जो लोग टीबी के मरीज का ख्याल रखते हैं, जैसे डॉक्टर और नर्स।
  • ऐसे इलाकों में जाना जहां काफी सारे टीबी के मरीज रहते हों।
  • अस्वच्छ और संक्रमित इलाकों में रहने वाले लोग।

ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) के प्रकार

ट्यूबरक्यूलॉसिस जब लंग्स को प्रभावित करता है, तब इसे पल्मोनरी ट्यूबरक्यूलॉसिस कहा जाता है और जब यह लंग्स के बाहर होता है, तब उसे एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरक्यूलॉसिस कहते हैं। इसे एक्टिव या लेटेंट में भी वर्गीकृत किया जाता है। एक्टिव टीबी संक्रामक होता है और उसके कई लक्षण भी नजर आ सकते हैं। लेकिन, लेटेंट में कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं और न ही यह संक्रामक होता है। जानिए ट्यूबरक्यूलॉसिस के प्रकार (Types of Tuberculosis) के बारे में विस्तार से:

एक्टिव ट्यूबरक्यूलॉसिस (Active Tuberculosis)

ट्यूबरक्यूलॉसिस के दो मुख्य प्रकार हैं प्रकार एक्टिव और लेटेंट टीबी। एक्टिव टीबी को कई बार टीबी डिजीज भी कहा जाता है। इसके होने पर रोगी में कई लक्षण नजर आते हैं और यह संक्रामक है। एक्टिव टीबी के लक्षण इस चीज पर निर्भर करते हैं कि यह पल्मोनरी है या एक्स्ट्रापल्मोनरी। एक्टिव टीबी के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं

  • अचानक वजन का कम होना (Unexplained Weight Loss)
  • भूख न लगना (Loss of Appetite)
  • बुखार (Fever)
  • ठण्ड लगना (Chills)
  • थकावट (Fatigue)
  • रात को पसीना आना (Night Sweats)

एक्टिव ट्यूबरक्यूलॉसिस का अगर अच्छे से उपचार न कराया जाए, तो यह जान के लिए जोखिम हो सकता है।

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लेटेंट ट्यूबरक्यूलॉसिस (Latent Tuberculosis)

इस ट्यूबरक्यूलॉसिस के प्रकार (Types of Tuberculosis) को लेटेंट टीबी कहा जाता है। अगर आपको लेटेंट टीबी इंफेक्शन है, इसका अर्थ है कि आपके शरीर में टीबी बैक्टीरिया तो हो सकता है, लेकिन यह इनएक्टिव होता है। यानी, आपको इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते। लेटेंट ट्यूबरक्यूलॉसिस एक्टिव ट्यूबरक्यूलॉसिस में बदल सकता है। यह जोखिम उन लोगों में अधिक होता है, जिन लोगों में किसी बीमारी या अंडरलाइंग कंडीशन के कारण इम्युनिटी कमजोर होती है। अब जानते हैं एक्टिव ट्यूबरक्यूलॉसिस के प्रकारों के बारे में:

पल्मोनरी ट्यूबरक्यूलॉसिस (Pulmonary Tuberculosis)

पल्मोनरी ट्यूबरक्यूलॉसिस एक एक्टिव टीबी है, जो लंग से संबंधित है। किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर हवा के माध्यम से आप इस टीबी का शिकार हो सकते हैं। क्योंकि इसके रोगाणु हवा में कई घंटों तक रहते हैं।

जानिए क्या हैं ट्यूबरक्युलॉसिस (symptoms of Tuberculosis) के लक्षण?

ट्यूबरक्युलॉसिस के संक्रमण के बाद शुरुआती दिनों में कोई लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन जब यह संक्रमण बीमारी का रूप लेने लगता है, तब इसके लक्षण सामने आना शुरू हो जाते हैं। ये लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि टीबी ने किस अंग को प्रभावित किया है। जैसे- तीन हफ्तों तक खांसी होना, खून में कफ आना, सीने में दर्द होना, बुखार आना, रात को बहुत ज्यादा पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना, कमजोरी आना, चक्कर आना आदि। इसके अलावा, टीबी के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। अगर आपको किसी भी प्रकार की समस्या है, तो एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

इस बारे में फोर्टिस अस्पताल, मुलुंड के डॉ अंशु पंजाबी, सलाहकार.पल्मोनोलॉजिस्ट और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ का कहना है कि ट्यूबरक्युलॉसिस के बैक्टीरिया उन पर तेजी से हमला करते हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसका खतरा एचआईवी या कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित रह चुके लोगों में होने की संभावना ज्यादा हो सकती है। टीबी की बीमारी ज्यादातर फेफड़ों में होती हैं। हालांकि यह हड्डियों, लिम्फ ग्रंथियों, आंतों, दिल, दिमाग के साथ-साथ अन्य अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ट्यूबरक्युलॉसिस से बचाव संभव है सिर्फ कुछ बातों को ध्यान में रखा जाये तो। आज जानेंगे क्या है ट्यूबरक्युलॉसिस से बचाव के क्या हैं तरीके?

ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) के लिए कब दिखाएं डॉक्टर को?

अगर आपका वजन अचानक बिना किसी कारण घटने लगे, रात को खूब पसीना आने लगे, तीन हफ्तों तक खांसी न रुके तो ये लक्षण ट्यूबरक्युलॉसिस के हो सकते हैं। ऐसे में आप अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं, क्योंकि कई बार ऐसे लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं।

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जानिए ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) के कारण

किस वजह से होता है ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis)?

ट्यूबरक्युलॉसिस (टीबी) का बैक्टीरिया सबसे ज्यादा हवा के जरिए व्यक्ति के शरीर में आता है। संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। शरीर में जाने के बाद यह वायरस यूं तो लंबे समय तक सोता रहता है और कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जब शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में नाकाम हो जाता है, तो यह हमला शुरू कर देता है। सबसे पहले यह फेफड़े पर हमला कर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यहीं से टीबी के लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं।

ऐसे बढ़ जाता है ट्यूबरक्युलॉसिस (Risk factor of Tuberculosis) का खतरा अगरः

  • आपको एचआईवी या एड्स होना
  • आपको डायबिटीज की बीमारी होना
  • किसी प्रकार का कैंसर होना
  • आप कुपोषण का शिकार हैं
  • आप कीमोथेरिपी या अन्य कैंसरी ट्रीटमेंट ले रहे हैं
  • बॉडी वेट कम होना
  • अंग प्रत्यारोपण के लिए दवाओं का सेवन करना
  • स्मोकिंग करना
  • रेग्यूलर एल्कोहॉल का सेवन करना

ऐसा नहीं है कि ऊपर बताई गई किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं है, तो आपको ट्यूबरक्युलॉसिस (टीबी) नहीं हो सकती। हमेशा ऐसे मामले में डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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ऐसे पता चलता है ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) का

नोट : यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

ट्यूबरक्युलॉसिस (टी.बी.) के उपचार की शुरुआत में डॉक्टर आपसे आम सवाल पूछ कर आपकी मेडिकल हिस्ट्री जानने की कोशिश करते हैं। जैसे आप किसी टीबी रोगी के करीब या आसपास तो नहीं रहते। इसके बाद चेस्ट का एक्स-रे लेकर और थूक या बलगम की लेबोरेटरी जांच की जाती है। इसके अलावा, इंजेक्शन के माध्यम से स्किन में टीबी रिएक्शन देखकर भी इसके होने का पता किया जा सकता है।

ऐसे होता है ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) का इलाज

आजकल ट्यूबरक्युलॉसिस (टी.बी.) के उपचार के लिए अलग-अलग एंटीबायोटिक्स या एंटीबेक्टेरियल दवाओं का एक साथ प्रयोग किया जाता है। यह उपचार लगातार छह से नौ महीने तक चलता है, जिसे बीच में एक बार भी छोड़ने पर इसके बैक्टीरिया फिर से पनपते लगते हैं। इसलिए, भले ही आपको दवा शुरू करने के कुछ सप्ताह बाद तक बेहतर महसूस होना शुरू हो जाए, लेकिन, इसका पूरा कोर्स करना जरूरी है।

इसके अलावा वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी (Wirelessly Observed Therapy) (WOT) की भी मदद ले सकते हैं।

ट्यूबरक्युलॉसिस के लक्षणों (Tuberculosis symptoms) का पता लगाने के लिए निम्न टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • त्वचा परीक्षण
  • रक्त परीक्षण
  • एक्स-रे

अगर सही तरीके से ट्यूबरक्युलॉसिस का इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

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ट्यूबरक्युलॉसिस (Tuberculosis) से निपटने के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

  • डॉक्टर के कहे अनुसार नियमित रूप से दवाई लें
  • शराब-सिगरेट आदि से दूर रहे
  • खांसते-छींकते वक्त मुंह पर कपड़ा रखें
  • किसी अन्य खांसते या छींकते व्यक्ति के बहुत करीब न जाए
  • संक्रमित व्यक्ति को छूने से पहले या उससे जुड़े किसी भी सामान को छूने से पहले दस्तानें पहनें
  • अगर डॉक्टर ने आपको दवाइयां दी हैं तो सभी दवाइयां समय पर लें और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श करते रहें
  • अपनी दवाईयां बीच में न छोड़े। अगर आप दवाइयां बीच में छोड़ देते हैं तो कीटाणु दोबारा से सक्रिय हो सकते हैं
  • अगर आप संक्रमित हैं तो कोशिश करें की खांसते और छींकते समय अपना मुंह ढक कर रखें। इससे संक्रमण और अधिक नहीं फैलेगा
  • खांसने या छींकने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं
  • खुली हवा और अच्छे वातावरण में रहें इससे संक्रमण में जल्द ही राहत मिलेगी
  • जब तक आप पूरी तरह संक्रमण मुक्त न हो जाएं तब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तमाल न करें
  • BCG यानि बैसिलस कैलीमैटो ग्यूरीन ट्यूबरक्युलॉसिस का टीका जरूर लगवाएं
  • घर से बाहर निकलते या भीड़-भाड़ इलाके में जाने से पहले चेहरे को फेस मास्क से ढकें
  • ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
  • कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर न रहें और वहां जाने से परहेज करें
  • टीबी के मरीजों से दूरी बनाकर रखें
  • टीबी के मरीज को हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहना चाहिए
  • एसी का इस्तेमाल न करें। हमेशा पंखें में रहें और कमरे की खिड़कियां खुला रखें, ताकि बैक्टीरिया बाहर निकल सके।

अगर आपको अपनी ट्यूबरक्युलॉसि (Tuberculosis) की ससमस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Tuberculosis. https://medlineplus.gov/tuberculosis.html. Accessed on 14 January, 2020.

Tuberculosis. https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/tuberculosis. Accessed on 14 January, 2020.

Tuberculosis. https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/tuberculosis/symptoms-causes/syc-20351250. Accessed on 14 January, 2020.

Tuberculosis (TB) Disease: Symptoms and Risk Factors. https://www.cdc.gov/features/tbsymptoms/index.html. Accessed on 14 January, 2020.

Tuberculosis – https://www.niaid.nih.gov/diseases-conditions/tuberculosis Accessed on 14 January, 2020.

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Piyush Singh Rajput द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड