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वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी की मदद से टीबी का इलाज हुआ आसान

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr Sharayu Maknikar


Bhawana Awasthi द्वारा लिखित · अपडेटेड 01/10/2020

वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी की मदद से टीबी का इलाज हुआ आसान

वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी (Wirelessly Observed Therapy) (WOT) के जरिए अब टीबी का इलाज करना और भी आसान हो गया है। बता दें कि हर साल करीब 10 लाख लोग टीबी (ट्यूबरक्युलॉसिसकी) की बीमारी के ग्रस्त होते हैं। साल 2017 के आकड़ों की बात करें, तो 1.6 लाख लोग क्रोनिक लंग्स डिसऑर्डर के कारण मौत का शिकार हुए थे। वहीं, टीबी की स्थिति तो नियंत्रित करने और उपचाप करने के लिए वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी और भी ज्यादा मददगार हो गई है। दरअशल, रिसर्च में ये दावा किया गया है कि टीबी के पेशेंट के लिए एक टीवी का सेंसर बनाया गया है, जो पेशेंट को समय से दवा देने का काम करेगा। इस सेंसर की खोज टीबी के पेशेंट के लिए वरदान है। इंफेक्शन डिजीज से लड़ रहे लोगों को समय पर दवा न मिलना या फिर याद न रख पाना मौत का कारण बन जाता है।

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वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी से पेशेंट की निगरानी करने में  होगी आसानी

बनाए गए टीबी के लिए सेंसर की हेल्प से डॉक्टर अपने टीबी पेशेंट की निगरानी आसानी से कर सकते हैं। ये खोज क्षय रोग से जान बचाने के लिए क्रांति साबित हो सकती है। पीएलओएस (PLOS) मेडिसिन जर्नल (कैलीफोर्निया) में प्रकाशित खबर के मुताबिक 93 फिसदी लोग सेंसर की हेल्प से सही समय पर दवा ले रहे हैं। जबकि 63 फिसदी लोग सही समय पर दवा नहीं ले रहे हैं। टीबी के उपचार के दौरान सही से देखभाल न हो पाने के कारण क्षय रोग दूसरों तक आसानी से पहुंच जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की देख रेख में वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी की मदद ली जाएगी।

वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी में ब्लूटूथ का इस्तेमाल

वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी (WOT) की हेल्प से टीबी के लिए बनाए गए सेंसर को आसानी से निगला जा सकता है। टीबी के लिए बनाया गया यह सेंसर एक छोटी कैप्शूल होती है। जो ब्लूटूथ की हेल्प से मेडिकेशन लेवल के बारे में जानकारी देता है। इस कैप्शूल में एक ब्लूटूथ होगा जिसे फोन से कनेक्ट किया जा सकता है। जिसकी हेल्प से फिजीशियन पेशेंट की दवाइयों के बारे में जानकारी ट्रेक कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के प्रोफेसर सारा ब्राउन कहते हैं कि ‘अगर हमे टीबी को पूरी तरह से खत्म करना है, तो रोगियों की अच्छी देखभाल करने की जरूरत पड़ेगी।’ विकासशील देशों में टीबी जैसी गंभीर बीमारी से ज्यादा मौत हो रही है। बाल स्वास्थ्य प्रोफेसर मार्क कॉटन कहते हैं कि ‘टेक्नोलॉजी भी टीबी की समस्या को बढ़ाने का काम कर रही है।’ कॉटन के मुताबिक, भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में टीबी की बीमारी तेजी से फैल रही है। यहां वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी (WOT) का प्रयोग लाखों लोगों की जान बचा सकता है।

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टीबी क्या है?

आमतौर पर टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो एक खास वायरस माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलॉसिस के कारण होती है। जो दो तरह के हो सकते हैं, जो एक्टिव (Active Tuberculosis) या छिपे हुए ((Latent Tuberculosis) हो सकते हैं। जब शरीर का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है, तो छिपे हुए वायरस एक्टिव हो जाते हैं जो टीबी के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। मूल रूप से टीबी की बीमारी हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है, जो हड्डियां, लिम्फ ग्रंथियां, आंत, हमारे दिल, दिमाग और अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है। शुरुआती अवस्था में इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है लेकिल अगर ये बिगड़ जाए, तो जानलेवा साबित हो सकती है।

एक्टिव टीबी के लक्षण क्या हैं?

एक्टिव टीबी के निम्न लक्षण हो सकते हैंः

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छिपे हुए टीबी के लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर छिपे हुए टीबी के संक्रमण निष्क्रिय होते हैं। जिसके किसी भी तरह के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। हालांकि, इनके लक्षणों की पहचान ब्लड और स्किन टेस्ट से पता किया जा सकता है। लगभग 5 से 10 फिसदी लोगों में ही छिपे हुए टीबी के संक्रमण एक्टिव टीबी का कारण बनते हैं।

इसके अलावा टीबी को दो प्रकारों में विभाजि किया जा सकता हैः

1.प्लमोनरी टीबी

प्लमोनरी टीबी, क्षय रोग का शुरूआती चरण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। आमतौर पर यह बहुत छोटे बच्चों या बड़े उम्र-दराज के लोगों में होता है।

2.एक्सट्राप्लमोनरी टीबी

एक्सट्राप्लमोनरी टीबी फेफड़ों से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है।

टीबी होने के कारण क्या हैं?

ज्यादातर लोगों में शुरुआती स्तर पर टीबी की बीमारी लेटेंट टीबी यानी छिपे हुए टीबी के रूप में होती है। धीरे-धीरे जब इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगती है, तो लेटेंट ट्यूबरक्यूलॉसिस और अधिक सक्रिय हो जाती है। खासकर तब जब कोई कैंसर का इलाज करवा रहा हो। इस दौरान कीमोथेरेपी की वजह से भी ट्यूबरक्यूलॉसिस का खतरा और भी अधिक बढ़ सकता है।

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शरीर के किन अंगों में हो सकती है टीबी?

टीबी शरीर के निम्न अंगो को प्रभावित कर सकती हैः

  • आंत की टीबी
  • फेफड़े की टीबी
  • हड्डियों और जोड़ों की टीबी
  • टीबी से बचाव कैसे करें?

    टीबी से बचाव करने के निम्न तरीके हैंः

    • संक्रमित व्यक्ति को छूने से पहले या उससे जुड़े किसी भी सामान को छूने से पहले दस्तानें पहनें।
    • अगर डॉक्टर ने आपको दवाइयां दी हैं तो सभी दवाइयां समय पर लें और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श करते रहें।
    • अपनी दवाईयां बीच में न छोड़े। अगर आप दवाइयां बीच में छोड़ देते हैं तो कीटाणु दोबारा से सक्रिय हो सकते हैं।
    • अगर आप संक्रमित हैं तो कोशिश करें की खांसते और छींकते समय अपना मुंह ढक कर रखें। इससे संक्रमण और अधिक नहीं फैलेगा।
    • खांसने या छींकने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं।
    • खुली हवा और अच्छे वातावरण में रहें इससे संक्रमण में जल्द ही राहत मिलेगी।
    • जब तक आप पूरी तरह संक्रमण मुक्त न हो जाएं तब तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तमाल न करें।
    • BCG यानि बैसिलस कैलीमैटो ग्यूरीन ट्यूबरक्युलॉसिस का टीका जरूर लगवाएं।
    • घर से बाहर निकलते या भीड़-भाड़ इलाके में जाने से पहले चेहरे को फेस मास्क से ढकें।
    • ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
    • कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर न रहें और वहां जाने से परहेज करें।
    • टीबी के मरीजों से दूरी बनाकर रखें।
    • टीबी के मरीज को हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहना चाहिए।
    • एसी का इस्तेमाल न करें। हमेशा पंखें में रहें और कमरे की खिड़कियां खुला रखें, ताकि बैक्टीरिया बाहर निकल सके।

    ऊपर दी गई टीबी की बीमारी से जुड़ी सलाह या वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी की सलाह किसी भी चिकित्सा को प्रदान नहीं करती हैं। वायरलेस ऑब्जर्व थेरिपी के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

    डिस्क्लेमर

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

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