किडनी छोटी होना क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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किडनी छोटी होना एक बड़ी समस्या है। सामान्यतः किडनी (गुर्दे) का साइज 10 या 12 सेंटीमीटर (करीब 5 इंच) होता है। इससे छोटी होने पर इसे किडनी एट्रोफी (Kidney Atrophy) कहा जाता है। जिसका मतलब होता है कि सामान्य आकार के मुकाबले किडनी छोटी होना।

किडनी छोटी होना

किडनी छोटी होना बहुत से कारणों से हो सकता है, जिसमें से दो प्रमुख हैं। पहला, जन्म से ही किडनी का साइज विकसित नहीं होता (एक प्रकार की जन्मजात समस्या) है। इससे किडनी छोटी होती है। इस प्रकार के मामले में (किडनी छोटी होना) किसी भी प्रकार के विशेष उपचार या ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। दूसरा कारण, जन्म के बाद किडनी छोटी होना। इस मामले में एक या दोनों  किडनी छोटी हो सकती है।

इस प्रकार की किडनी छोटी होना के पीछे किडनी तक ब्लड सप्लाई कम होती है या नेफ्रॉन न होने से होता है, जो किडनी का एक आधारभूत वर्किंग यूनिट है। क्रॉनिक इंफेक्शन या किडनी में ब्लॉकेज होने से भी किडनी छोटी होना हो सकता है। किडनी छोटी होना से गुर्दे की बीमारी हो सकती है। किडनी का साइज अधिक कम होने से, विशेषकर दोनों किडनी का आकार कम होने से किडनी फेलियर हो सकता है।

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किडनी छोटी होना क्या खतरे का संकेत है?

यदि आपकी एक किडनी दूसरी के मुकाबले छोटी है तो यह पूर्णतः सामान्य है। आमतौर पर एक किडनी छोटी होने पर आपकी सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, जिसमें सामान्य जिंदगी को जिया जा सकता है। हालांकि, किडनी छोटी होने पर हेल्श की अन्य समस्याएं जैसे ब्लड प्रेशर हो सकता है। यहां तक कि आपकी दूसरी किडनी सामान्य है फिर भी आपको इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

यदि दोनों किडनी छोटी हैं तो यह चिंता का विषय हो सकता है और यदि किडनी में पर्याप्त ऊत्तक नही हैं तो किडनी फेलियर हो सकता है। इसलिए किडनी छोटी होने की समस्या से पीढ़ित लोगों के कुछ सामान्य मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। इन टेस्ट से आंकलन किया जाता है कि व्यक्ति को आने वाले समय में इलाज की आवश्यकता है या नहीं। हालांकि, कुछ लोगों की एक ही किडनी होती है, जिसके पीछे कुछ जन्मजात कारण होते हैं। ऐसे लोग एक किडनी पर सामान्य जिंदगी व्यतीत कर सकते हैं।

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किडनी छोटी होना: कारण

जन्म के दौरान किडनी छोटी होना या शरीर के अन्य अंगों के साथ किडनी का विकास न होना भी किडनी छोटी होना का सबसे बड़ा कारण है। अक्सर इसका पता बचपन में चलता है। जन्म से किडनी छोटी होना को जन्मजात डिस्प्लेसिया (Congenital dysplasia) कहा जाता है। कुछ लोगों के मामले में किडनी छोटी होना में दोनों ही किडनी छोटी पाई जाती हैं। ऐसे मामलों में किडनी फेलियर की संभावना रहती है।

छोटी किडनी अपर बैक में सामान्य अवस्था में हो सकती है या जन्म से पहले पेट के निचले हिस्से से ऊपर जा नहीं पाती है। इस स्थिति को पेल्विक किडनी (Pelvic Kidney) कहा जाता है। कई पेल्विक किडनी सामान्य रूप से कार्य करती हैं, लेकिन कुछ लोगों के मामले में पेल्विक किडनी छोटी या ड्रेनेज सिस्टम में विसंगतियां पाई जा सकती हैं, जिससे संक्रमण दोबारा होने की संभावना होती है।

ड्रेनेज सिस्टम में खराबी आने से किडनी डैमेज हो जाती है। आमतौर पर इस स्थिति को रिफ्लक्स नेफ्रोपेथी (reflux nephropathy) कहा जाता है। बचपन के दौरान या युवाओं में किडनी छोटी होना यह एक बड़ा कारण है। रिफ्लक्स नेफ्रोपेथी दोनों ही किडनी को प्रभावित कर सकती है।

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संक्रमण और किडनी छोटी होना

संक्रमण होने से गुर्दे की (किडनी छोटी होना) की समस्या होती है। सामान्य किडनी संक्रमण से किडनी को स्थाई रूप से नुकसान नहीं पहुंचता है या यह किडनी में एक छोटा निशान छोड़ देता है। अक्सर एक गंभीर किडनी संक्रमण (एक्यूट पायलोनेफ्रिटिस (acute pyelonephritis) ) किडनी को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे किडनी की समस्या (किडनी छोटी होना) पैदा होती है। रिफ्लक्स नेफ्रोपेथी से पीढ़ित लोगों में एक संक्रमण ही इस समस्या को पैदा करने के लिए काफी होता है।

किडनी छोटी होना के पीछे एक बड़ा कारण है, इसमें ब्लड की कम सप्लाई। किडनी में ब्लड की सप्लाई करने वाली आरट्री में ब्लड की कमी होती है, जिससे वह सिकुड़ जाती है। किडनी छोटी होने की यह समस्या बुजुर्गों में सबसे ज्यादा पाई जाती है, विशेषकर यदि उन्हें एंजाइना (Angina), हार्ट अटैक या पैरों की तरफ आरट्रीज सिकुड़ी होने की समस्या रही हो। इसे रेनल आरट्री स्टेनोसिस (renal artery stenosis) कहा जाता है।

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ऐसी कई बीमारियां हैं, जो किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं और किडनी छोटी होने का एक बड़ा कारण बनती हैं। ग्लोमरुलोनेफ्रिटिस (glomerulonephritis) जैसी बीमारियों किडनी छोटी होना का कारण बन सकती है। यह बीमारी दोनों ही किडनी को छोटा या नुकसान पहुंचा सकती है।

किडनी छोटी होना: लक्षण

अन्य लक्षण

  • एसिडोसिस (acidosis)
  • अरुचि की समस्या
  • क्रेटिनाइन बढ़ना
  • इलेक्ट्रॉलायज में असमान्यताएं
  • कुपोषण (malnutrition)

एक किडनी छोटी होना

कुछ लोगों में एक किडनी छोटी होने की समस्या होती है। कैंसर, गंभीर किडनी स्टोन या दुर्घटना की वजह से कई लोगों की एक किडनी सर्जरी के माध्यम से निकाल दी जाती है। चूंकि उनकी दूसरी किडनी सामान्य अवस्था में होती है, जिससे वह एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

जन्म से पहले गर्भावस्था में ही भ्रूण की दोनों किडनी पेट के निचले हिस्से से ऊपर की तरफ जाती हैं। इस दौरान अपरिपक्व दोनों किडनी पेट के ऊपरी हिस्से में नहीं पहुंच पाती हैं और सामान्य अवस्था के मुकाबले पेट के मध्य हिस्से में फंस जाती हैं। ऐसे में दोनों किडनी आपस में जुड़ जाती हैं और एक किडनी बड़ी हो जाती है। बड़ी किडनी के विशाल आकार की वजह से उसे हॉर्सशू  किडनी (horseshoe kidney) कहा जाता है।

हालांकि, बड़ी किडनी की किसी समस्या के बिना सामान्य रूप से कार्य करती है। यदि इस बड़ी किडनी में गांठ या स्टोन जैसी बीमारी हो जाती है तो इसका इलाज करना काफी कठिन हो जाता है। हॉर्सशू  किडनी में ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ी समस्याएं होना एक सामान्य बात है और इससे संक्रमण होने की संभावना रहती है।

किडनी छोटी होना : इलाज

किडनी छोटी होने का इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है। किडनी छोटी होना खतरनाक है और इसके इलाज करने से किडनी को होने वाले अन्य नुकसान को कम किया जाता सकता है। जैसा कि ऊपर पहले ही बता दिया गया है कि किडनी छोटी होने की स्थिति में गुर्दे उचित रूप से अपना कार्य करते हैं। यदि आपकी किडनी 10-15% से कम कार्य कर रही है तो किडनी फेलियर होने की संभावना रहती है। ऐसे में किडनी को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए इलाज की जरूरत होती है।

छोटी किडनी (किडनी छोटी होना) का इलाज डायलेसिस

हेमोडायलेसिस

इस इलाज में एक आर्टिफिशियल किडनी (हेमोडायलेजर (hemodialyzer)) से ब्लड को दौड़ाया जाता है। यह ब्लड में से वेस्ट पदार्थ को निकालता है।

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पेरिटोनियल डायलेसिस (peritoneal dialysis)

  • डायलाइसेट  (dialysate) कहा जाने वाला एक फ्लूड आपके पेट में भरा जाता है, जो पेरिटोनियल डायलेसिस केथेटर (peritoneal dialysis catheter) के जरिए बॉडी में से वेस्ट पदार्थ को छानकर निकाला जाता है।
  • डायलेसिस किडनी की उन कार्यों को करने में मदद करता है, जो वह खुद से नहीं कर सकती हैं। उदाहरण के लिए ब्लड में से वेस्ट पदार्थ को निकालना। हालांकि यह कोई इलाज नहीं है। इस स्थिति में आपकी अपनी बाकी की जिंदगी में जीवित रहने के लिए हफ्ते में कई बार डायलेसिस की जरूरत पड़ सकती है या जब तक आपका किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो जाता।
  • किडनी छोटी होना एक गंभीर स्थिति है। स्थाई रूप से इसका इलाज किया जाना बेहद ही जरूरी है। इसके इलाज के लिए आप दान में में मिली किडनी या किसी मृत व्यक्ति की किडनी ट्रांसप्लांट करा सकते हैं। हालांकि, दोनों ही स्थितियां थोड़ी जटिल हैं। आपकी बॉडी के लिहाज से एक सही किडनी प्राप्त करने के लिए आपको वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद आपको एक एंटीरिजेक्शन दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे आपकी किडनी को प्रभावी रखा जा सके।
  • किडनी एट्रोफी को हमेशा रोका नहीं जा सकता है। लेकिन किडनी को स्वस्थ रखने के कुछ उपाय हैं, जिन्हें जल्द से जल्द अपनाया जा सकता है। पहला, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं से बचना चाहिए, जो किडनी डैमेज करती हैं। यदि आपको पहले ही यह समस्याए हैं तो इन्हें नियंत्रण में रखें। इसके लिए डायट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, कम फैट या फैट फ्री डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें। ज्यादा प्रोसेस्ड या तले भुने फूड्स और सोडियम वाले भोज्य पदार्थों को सीमित करें। इसके साथ ही आप प्रतिदिन 30 मिनट एक्सरसाइज कर सकते हैं। साथ ही एक हेल्दी वेट को मेंटेन करें।

अंत में हम यही कहेंगे कि किडनी छोटी होना एक सामान्य समस्या भी हो सकती है। हालांकि, इस स्थिति में जरूरी चिकित्सा जांच कराना अनिवार्य है। इससे भविष्य में गंभीर खतरों को कम किया जा सकता है।

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