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एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस क्या हैं और कैसे उबरा जाए इन समस्याओं से?

एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस क्या हैं और कैसे उबरा जाए इन समस्याओं से?

लेस्बियन, गे, बायसेक्शुल, ट्रांसजेंडर या क्वीर (LGBTQ) समुदाय के बारे में बात करना हमारे समाज में आज भी सामान्य नहीं माना जाता है। जैसे ही इस विषय के बारे में बात होती है, लोग झिझकने लगते हैं। भले ही कानूनी रूप से एलजीबीटीक्यू समुदाय को हरी झंडी मिल गई हो, लेकिन फिर भी लेस्बियन, गे, बायसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर के लिए समाज में रहना और अपना घर बसाना मुश्किलों से भरा है। अपनी सेक्शुअल आइडेंटिटी की जानकारी देना किसी के लिए मुसीबत बन सकता है। ये मुसीबत घर से शुरू होती है जो कि स्कूल, कॉलेज और ऑफिस तक पहुंच जाती है। ऐसे में व्यक्ति की मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव तो पड़ता ही है और साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि एलजीबीटीक्यू समुदाय से जुड़े लोगों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के चैलेंजेस क्या हैं।

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एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस: मेंटल हेल्थ पर असर

किसी लड़की ने अच्छे संस्थान से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है और फिर उसे फाइव स्टार होटल में अच्छी नौकरी भी मिल जाती है, लेकिन अपनी सेक्शुअल आइडेंटिटी बताने के कारण उसके साथ गलत व्यवहार शुरू हो जाता है। ऐसे मामलों में नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है। LGBTQ कम्युनिटी से जुड़े लोग वाकई एक अच्छी जिंदगी जीना चाहते हैं, जैसे कि अन्य लोग जीते हैं, लेकिन समाज में अब तक इस बात को स्वीकार नहीं किया गया है। अगर कोई लेस्बियन घर में इस बात को स्वीकार कर ले कि वो लेस्बियन है तो घर वाले “घर की इज्जत का क्या होगा” का ताना देकर चुप कराने की कोशिश करते हैं, जबकि कॉलेज या वर्कप्लेस में सेक्शुअल आइडेंटिटी बताने पर लोग दूर भागना शुरू कर देते हैं। एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस में सेक्शुअल आइडेंटिटी को उजागर करना सबसे बड़ा चैलेंज है। ये परिस्थिति व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्वस्थ भी कर सकती है।

एक वेबिनार के जरिए LGBTQ कम्युनिटी के बारे में बात करते हुए LGBT टास्कफोर्स के चेयरमैन आईपीएस डॉ. अजीत भीड़े कहते हैं कि, ”LGBTQ कम्युनिटी के लोगों को घर के सदस्यों को मन की बात बताने से पहले खुद को प्रिपेयर करना बहुत जरूरी है। घर में इस बात का खुलासा करने पर परिवार वाले घराने की इज्जत का ताना दे सकते हैं। हो सकता है कि इस बात पर हिंसा भी हो या फिर आपका कोई निराश हो जाए।”

वे आगे कहते हैं कि, ”मुझसे एक लड़की के पिता ने अपनी परेशानी शेयर की और बताया कि मेरी लड़की की सेक्शुअल आइडेंटिटी के कारण मैं परेशान हूं। अब क्या किया जा सकता है ? मेरी लड़की को अन्य लड़की से प्यार हो गया है। ऐसे केसेज में लोग घर की इज्जत के लिए ये सही नहीं है, जैसी बातों पर ज्यादा जोर देते हैं। ऐसे में जबरदस्ती शादी के बंधन में बांध दिया जाना समस्या का हल नहीं होता है।”

एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी की चुनौतियों से निपटने में क्या है मनोचिकित्सक का रोल?

LGBTQ समुदाय से जुड़े लोगों को अवसाद यानी डिप्रेशन की समस्या आसानी से हो सकती है। इसका मुख्य कारण है कि LGBTQ वर्ग के लोगों से किया जाने वाला भेदभाव। घर के माहौल के साथ ही उन्हें बाहर के माहौल में भी हीन दृष्टि से देखा जाता है। इन्हीं कारणों की वजह से डिप्रेशन LGBTQ कम्युनिटी के चैलेंजेस में शामिल है। अगर कोई व्यक्ति खुद को अकेला महसूस कर रहा है या फिर अधिक स्ट्रेस महसूस कर रहा है तो उसे मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए। मनोचिकित्सक के सामने अपनी बात रखने से समस्या का हल भी निकाला जा सकता है। साइकोथेरिपी के जरिए स्ट्रेस कम होता है।

ऐसे में व्यक्ति का पॉजिटिव रिलेशनशिप भी बहुत जरूरी है। साथ ही आइसोलेशन भी अवॉयड करना चाहिए। LGBT कम्युनिटी से जुड़े लोग अपने चारों ओर नकारात्मक माहौल से जूझ रहे होते हैं, ऐसे में साइकेट्रिस्ट की सकारात्मक सोच व्यक्ति को सही दिशा प्रदान कर सकती है।

मुंबई के पी डी हिंदुजा नेशनल और हिंदुजा हेल्थकेयर के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. केरसी चावड़ा ने LGBT कम्युनिटी के सदस्यों के अकेलेपन को लेकर कहा कि, ”करीब 31 प्रतिशत एलजीबीटीक्यू एल्डर को क्लीनिकल डिप्रेशन की समस्या होती है, जबकि ओल्डर एडल्ट्स को कई बार और 71 प्रतिशत ट्रांसजेंडर को आत्महत्या करने का ख्याल आता है। ऐसा सोशल आइसोलेशन, अकेलापन, अपनों का सपोर्ट न मिल पाने कारण या समाज के भेदभाव के कारण होता है। LGBTQ कम्युनिटी के करीब 53 प्रतिशत लोगों को लगता है कि वो अकेले हैं। सही समय पर इलाज न मिल पाने के कारण परेशानी अधिक बढ़ जाती है। अगर समय पर साइकेट्रिस्ट से कंसल्ट किया जाए तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है।”

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एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस: आसपास के माहौल से उभरने के लिए क्या करें?

LGBTQ समुदाय के लोगों को अपने आसपास के माहौल से उभरने के लिए कुछ जरूरी प्रयास करने की जरूरत है। अगर घर में कोई आपका विरोध कर रहा हो तो उन्हें कुछ समय दें। हो सकता है कि कुछ समय बाद वे आपकी बातों को समझें। उनसे कुछ समय बाद बात करें और साथ ही उनकी बातों को भी ध्यान से सुनें। कई बार परिस्थितियां समय के साथ बदल जाती हैं। अगर पॉजिटिव थिकिंग के साथ ही काउंसलर या साइकेट्रिस्ट की हेल्प ली जाए तो समस्या का समाधान भी निकल सकता है।

अगर आपके साथ कोई भी बुरा व्यवहार कर रहा है तो अपने नजदीकी पुलिस से तुरंत संपर्क करें। साथ ही आप ग्रुप या कम्युनिटी के लोगों की मदद भी ले सकते हैं। आसपास के माहौल को बेहतर बनाने के लिए उन लोगों से मिलना बंद कर दें जो आपको प्रोत्साहित न करते हो और साथ ही नकारात्मक विचारों से भरे हो। आप अपने पसंदीदा लेखक की बुक को पढ़ कर मोटिवेट हो सकते हैं। अपने अच्छे दोस्त या भाई बहन से रोजाना अपने मन की बातें शेयर करना न भूलें। आपको ये याद रखना चाहिए कि कुछ बातों को अपनाने में अधिक समय लग सकता है। एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस से निपटने में सकारात्मक विचार मदद कर सकते हैं।

एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस: अकेलेपन और स्ट्रेस से बाहर निकलने का क्या हो सकता है तरीका?

आइसोलेशन से रहें दूर

अकेलेपन और स्ट्रेस से बचने के लिए आइसोलेशन से बचना बहुत जरूरी है। अगर व्यक्ति अपने आप को किसी ऐसे के साथ व्यस्त रखें, जो उसका करीबी हो और उसकी बातों को समझता हो तो ऐसा करने से स्ट्रेस की समस्या या फिर डिप्रेशन से निपटने में हेल्प मिलेगी।

जरूरत पड़ने पर मेडिकेशन

अगर व्यक्ति बहुत ही हताश और आक्रामक है, उसे आत्महत्या के विचार आ रहे हैं या फिर पैनिक अटैक हो रहें हैं तो ऐसी सिचुएशन में मेडिकेशन की जरूरत होती है।

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अच्छे दोस्त बनाएं

अक्सर सेक्शुअल आइडेंटिटी के बारे में घर में बताने से घर वाले दूरी बना लेते हैं या फिर दवाब डालते हैं कि ऐसी बातें किसी और को बताने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में एक बात ध्यान रखनी चाहिए कि खुद को निगेटिविटी से दूर रखा जाए और अच्छे और सच्चे दोस्तों से संपर्क रखा जाए। अपनी मन की बातों को उस व्यक्ति से जरूर शेयर करना चाहिए, जो आपके मन की बात समझता हो। ऐसा करने से स्ट्रेस का लेवल कम होगा।

हिंसा नहीं है समस्या का हल

समाज में एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के साथ हिंसा की घटनाएं आए दिन सामने आती हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि ऐसी घटनाएं बाहर ही हो। कई बार घर के सदस्य अपनी बात मनवाने के लिए सेक्शुअल आइडेंटिटी बताने वाले व्यक्ति के साथ हिंसा भी कर सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो उसे मदद के लिए गुहार लगानी चाहिए। हिंसा को सहना गलत है और ये समस्या को अधिक बढ़ा सकता है।

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उम्मीद करते हैं कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। आर्टिकल में एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी चैलेंजेस के बारे में जानकारी दी गई है। अगर आपको इस बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी अन्य जानकारी से अपडेट रहने के लिए आप हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज को लाइक कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/08/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड