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बच्चे की देखभाल करते वक्त क्या करें और क्या नहीं?

बच्चे की देखभाल करते वक्त क्या करें और क्या नहीं?

नवजात शिशु की देखभाल करना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। यदि आप पहली बार माता-पिता बने हैं तो यह और भी मुश्किल हो जाता है। अक्सर बच्चे की देखभाल करते वक्त आप उसे इतना लाड़-प्यार करते हैं, कि अनजाने में कुछ गलतियां भी कर देते हैं। इस आर्टिकल में आपको बताएंगे कि बच्चे की देखभाल करते वक्त क्या करें और क्या ना करें?

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बच्चे की देखभाल में क्या करें?

शिशु को सही तरीके से थपकी दें

अक्सर दूध पीने के बाद नवजात शिशु उल्टी कर देते हैं क्योंकि कई बार इस दौरान उनके पेट में हवा भी चली जाती है, जिससे उन्हें गैस की दिक्कत होती है। इस स्थिति को रोकने के लिए उन्हें दूध पिलाने के बाद एक प्यार की थपकी देना जरूरी होता है। जिससे उन्हें डकार आ जाती है। ऐसा करते वक्त आपको सावधानी बरतनी है। सबसे पहले शिशु को सीने से लगाएं। उसके बाद एक हाथ से हल्के से उसकी पीठ पर थपकी दें। इस तरह से बच्चे की देखभाल करेंगी तो उसे गैस की समस्या नहीं होगी।

शिशु को गोद में लेने से पहले अपने हाथों को अच्छे से वॉश करें

आप शिशु को संभालने के साथ घर का काम भी करती हैं। ऐसे में हाथ में कीटाणु हो सकते हैं, जो आसानी से शिशु के संपर्क में आ सकते हैं। इससे बचने के लिए शिशु को हाथ में लेने से पहले अपने हाथों को जरूर साफ करें। यहां तक कि शिशु को खिलाने, नहलाने, कपड़े बदलने आदि से पहले हाथों को साफ करें। शिशु को किसी तरह के कीटाणु या संक्रमण की चपेट में आने से बचाने कि लिए उनकी हर चीज को उन्हें देने से पहले जीवाणुरोधी डिटरजेंट से साफ करें और हवा में सुखाएं।

शिशु के लिए प्रोडक्ट्स का चयन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

शिशु के लिए आप वही प्रोडक्ट खरीदें जो शिशु की त्वचा को शुष्क न करें व आंखों के लिए भी तेज न हो। शिशु के लिए हमेशा सौम्य और सुरक्षित उत्पादों का चयन करें। कई माता पिता जिन साबुन व अन्य उत्पादों का खुद इस्तेमाल करते हैं वहीं बच्चे के लिए भी इस्तेमाल कर लेते हैं। आपको समझना होगा कि बच्चों की त्वचा बेहद नाजुक होती है। इसलिए इसका खास ख्याल रखना जरूरी होता है।

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सही तरीके से शिशु को उठाएं

कई बार पेरेंट्स को लगता है कि नवजात को उठाने से बच्चे चोट पहुंच सकती है। इसकी वजह होती है शिशु की स्किन का कोमल होना। हकीकत में ऐसा नहीं है। नवजात शिशु को आप उठा सकते हैं लेकिन, उसके सही तरीके को फॉलो करना होगा। सबसे पहले एक हाथ को उसकी कमर के नीचे रखें दूसरे हाथ को कंधे और गर्दन के पास रखें। इसके बाद उसे गोद में उठा लें। ऐसे करते वक्त आपको बच्चे की देखभाल का ध्यान रखना चाहिए।

बच्चे की देखभाल में फीडिंग और नींद के लिए पैटर्न फॉलो करें

शिशु को हमेशा दूध पिलाकर ही सुलाएं। कभी भी शिशु को जबरदस्ती ना सुलाएं। ज्यादातर बच्चे दूध पीने के बाद अपने आप ही सो जाते हैं। बच्चे की नींद और फीडिंग में हमेशा एक अंतराल रखें। आपको बच्चे की जरूत के अनुसार उन्हें फीडिंग कराना होगा। इसके साथ ही आपको बच्चे को सही तरीके से दूध पिलाना भी आना चाहिए। बहुत सारी माओं को बच्चों को दूध पिलाने का सही तरीका ही मालूम नहीं होता है, जिससे बच्चे को बहुत परेशानी होती है।

कई बार शिशु की दूध पीते वक्त नाक दब जाती है जिससे उसे सांस लेने में भी दिक्त होती है तो कई बार शिशु का कान दब जाता है। ऐसे में शिशु को फीड कराते वक्त आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। जब भी शिशु को फीडिंग कराएं तो उसका सिर उसकी छाती से ऊंचा रखें। कोशिश करें बैठकर बच्चे को फीडिंग कराएं, क्योंकि लेटकर फीड कराने से बच्चे के कान में इंफेक्शन होने की संभावना अधिक होती है। कभी भी शिशु को दूध पिलाने के तुरंत बाद लेटाएं नहीं।

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स्लीपिंग पुजिशन भी है बच्चे की देखभाल का हिस्सा

शिशु को कभी भी छाती के बल नहीं लेटाना चाहिए। शिशु को सुलाने के बाद हमेशा उन्हें पीठ के बल लेटा दें। इससे उसकी बॉडी को एक अच्छा पॉश्चर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही पेट के बल सोने से शिशु की नाक दब जाती है। कई बार यह स्थिति जानलेवा बन जाती है। बच्चे को पेट के बल सुलाने की गलती माता-पिता को नहीं करनी चाहिए। इससे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। एक साल से कम उम्र के शिशु को पेट के बल सुलाने से सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (sudden infant death syndrome) होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चे को पीठ के बल सुलाना ही सही रहता है।

खेलते समय बच्चे का रखें ध्यान

शिशुओं की सुरक्षा में चोट से बचाव सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बच्चे खेल या उत्सुकता के चलते कभी भी ऐसा काम कर सकते हैं, जिसके कारण उन्हें चोट लग जाए। शिशुओं की सुरक्षा के लिए पेरेंट्स को हर पल उनकी निगरानी करना बहुत जरूरी है। चोट कभी भी मौत का रूप ले सकती है। कुछ चोट बच्चों को बाय चांस या बैड लक के कारण नहीं होती है। ये जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों को चोट से बचाने के लिए घर में पहले से ही इंतजाम करके रखें।

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बच्चे की देखभाल में क्या ना करें?

शिशु को ज्यादा झुलाएं ना

अक्सर माता पिता रोते हुए शिशु को चुप कराने के लिए उन्हें गोद में लेकर ऐसे हिलाते हैं जैसे झूला झुला रहे हो। कुछ मामलो में यह सही हो सकता है लेकिन, इससे शिशु को इसकी आदत पड़ सकती है और फिर वह नॉर्मल तरीके से नहीं सोएगा।

शिशु को आसमान की तरफ ना उछालें

शिशु को खुश करने के लिए आपको उसे हवा में उछालना नहीं है। इससे दुर्घटना हो सकती है। बच्चा जब तक पूरी तरह से डेवलप ना हो जाए तब तक ऐसा ना करें। कई बार ऐसा करने से बच्चों को चक्कर आ जाता है। बच्चे की देखभाल करना आपकी प्राथमिकता है।

शिशु को ना जगाएं

यदि शिशु गहरी नींद में है तो उसे हिलाकर जगाएं नहीं। इससे अचानक डिस्ट्रेस की स्थिति पैदा हो सकती है। अपने मनोरंजन के लिए शिशु की नींद ना खराब करें। कोशिश करें कि शिशु अपनी नींद पूरी करने के बाद खुद जागे। कई बार बीच में जगा देने से बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं।

और पढ़ेंः शिशु को डायपर रैशेज से बचाने के लिए घरेलू उपाय

बच्चे को चूमे या किस न करें

नवजात शिशु पर सभी को प्यार आता है और वे उनको किस करके अपना प्यार जताते हैं, लेकिन ध्यान दें इससे आप अनजाने में शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल, जन्म के शुरुआती दिनों में न्यू बॉर्न बेबी बेहद संवेदनशील होता है। उसे किस करने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। जैसे-एक मामले में 18 दिन की एक नवजात शिशु की मृत्यु वायरल मैनिंजाइटिस (viral meningitis) से हो गई थी जो हर्पीस वायरस एचएसवी-1 (herpes virus HSV-1) की वजह से होता है। इस बात की डॉक्टरों ने भी पुष्टि की थी कि नवजात शिशु को किस करने से वायरस शिशु के अंदर पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। बच्चे की देखभाल करते समय इस बात का खास कर ध्यान रखिए।

बच्चे की नाक उंगली से साफ न करें

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं उनमें नाक और कान को साफ करने के तरीके खुद-ब-खुद डेवलप होते रहते हैं। हालांकि, शिशु ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं जिसकी वजह से उनकी नाक में गंदगी जम जाती है, लेकिन पेरेंट्स टिशू या अपने हाथ से नाक से म्यूकस बाहर न निकालें। इससे नवजात शिशु की नाक की झिल्ली (nasal membrane) को नुकसान पहुंच सकता है। नवजात शिशु की देखभाल के लिए डॉक्टर की सलाह से आप नेसल एस्पिरेटर (nasal aspirator) या सेलाइन नेजल ड्रॉप का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए बच्चे की देखभाल के साथ उसके नाक का भी ख्याल रखिए।

और पढ़ें: बेबी बर्थ अनाउंसमेंट : कुछ इस तरह दें अपने बच्चे के आने की खुशखबरी

हम यही कहेंगे कि बच्चे की देखभाल के सही तरीकों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। इससे आपकी पेरेंटिंग आसान हो जाती है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें। उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में बच्चे की देखभाल से जुड़ी जानकारी दी गई है। यदि आपका इस लेख से जुड़ा कोई प्रश्न है तो आप कमेंट सेक्शन में अपना सवाल पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Mayank Khandelwal के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Sunil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 06/09/2019
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