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जानें शिशु को घमौरी होने पर क्या करनी चाहिए?

जानें शिशु को घमौरी होने पर क्या करनी चाहिए?

नवजात शिशु की त्वचा बेहद कोमल और नाजुक होती है। शिशु को घमौरी होने के कारण असुविधाजनक व खुजली जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यदि आपको लगता है कि आपका शिशु सामान्य से ज्यादा रो रहा है या अधिक झुंझला रहा है तो यह शिशु को घमौरी होने का संकेत हो सकता है। शिशु में घमौरी होने का खतरा अधिक होता है क्योंकि उनमें अभी तक पसीने की ग्रंथिया (sweat glands) विकसित नहीं हुई होती हैं। हालांकि, अधिकतर मामलों में शिशु में घमौरी होना कोई चिंताजनक बात नहीं होती है। इसे बिना किसी डॉक्टरी इलाज के घर पर भी ठीक किया जा सकता है।

आज हम आपको बताएंगे कि शिशु को घमौरी क्यों होती है और इसका कारण क्या है। साथ ही इस लेख के माध्यम से हम आपको इसके घरेलू उपचार व लक्षणों के बारे में बताएंगे जिनकी मदद से आप अपने शिशु को हो रही असुविधा को कम कर सकेंगे।

जब पसीना त्वचा से किसी कारण फस (ब्लॉक) जाता है तो हीट रैश जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। पसीना त्वचा की बाहरी परत को प्रभावित करता है जिसके कारण जलन महसूस होती है और शिशु को घमौरी होने लगती हैं। निम्न शिशु को होने वाली घमौरी के प्रकर हैं जिनकी बनावट विभिन्न हो सकती है :

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  • शिशुओ में होने वाली घमौरियों में मिलियारिया रुबा सबसे सामान्य प्रकार होता है। इस प्रकार के रैश त्वचा की सतह पर स्वैट ग्लैंड्स में रुकावट आने के कारण होते हैं। यह एपिडर्मिस व डर्मिस के आसपास की त्वचा को भी प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार की घमौरी के कारण शिशु की त्वचा पर लाल चकत्ते, छोटे दाने, खुजली या लालिमा हो सकती है।
  • मिलियारिया क्रिस्टालिना सबसे कम गंभीर घमौरियों होती हैं। यह आमतौर पर एपिडर्मिस (त्वचा के निचे की सतह) पर स्वैट ग्लैंड में ब्लॉकेज के कारण होती है। शिशुओं में इस प्रकार की घमौरी छोटे-छोटे दानों या सफेद छालों के रूप में प्रभावित करती है।
  • मिलियारिया प्रोफंडा सबसे गंभीर प्रकार की घमौरियां होती है। यह एक दुर्लभ स्थिति है लेकिन होने पर शिशु को गंभीरता से प्रभावित कर सकती है। जब पसीना डर्मिस (एपिडर्मिस के निचे की सतह) से लीक हो कर वही रह जाता है तो इसके कारण तीव्र जलन और खुजली होने लगती है। शिशु में मिलियारिया प्रोफंडा के लक्षण त्वचा के जलने के रूप में भी विकसित हो सकते हैं। इस प्रकार की घमौरी संक्रमित भी हो सकती है।
  • डॉक्टर इन घमौरियों को हीट रैश वेसिकल्स कहते हैं। कभी-कभी इन वेसिकल्स के कारण सूजन उत्पन्न होने लगती है जो मिलियारिया पुस्टुलोसा (miliaria pustulosa) का रूप ले सकती हैं। इस प्रकार के रैश शिशुओ में अधिक रूप से फैलते हैं। मिलियारिया पुस्टुलोसा से प्रभावित शिशु को पसीना नहीं आता है जिसके कारण गर्म त्वचा संबंधी विकार होने की आशंका बढ़ जाती है।

शिशु की हल्के रंग की त्वचा पर घमौरी के कारण होने वाली लालिमा गहरे रंग की त्वचा के मुकाबले आसानी से देखे जाते हैं। हालांकि, दोनों ही रंग की त्वचा को उसी तरह से प्रभावित करती है और इसके होने की प्रक्रिया भी एक जैसी ही होती है।

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शिशु को घमौरी होने के लक्षण

शिशुओं को घमौरी छोटे लाल व तरल पदार्थ से भरे हुए दानों का गुच्छा लगता है। यह आमतौर पर चेहरे और गर्दन, बांह, पैरों, ऊपरी छाती और डायपर पहनने वाली जगह पर दबी हुई त्वचा के आसपास होते हैं। इसके अलावा शिशुओं में हीट रैश के लक्षणों में खुजली और दर्दनाक गुदगुदी शामिल होती है। कोई भी शिशु अपने माता-पिता को अपनी त्वचा पर होने वाली तकलीफ के बारे में नहीं बता सकता है। माता-पिता को स्वयं ही शिशु के असुविधाजनक व्यवहार के जरिए इसे पहचानना होता है। ऐसी स्थिति में शिशु को सोते समय सामान्य से अधिक परेशानी होती है।

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शिशु में घमौरी के कारण

शिशु में होने वाली घमौरी को हीट रैश और मिलियारिया भी कहा जाता है। यह अक्सर बच्चों में पसीने की ग्रंथियों से अत्यधिक पसीना आने पर त्वचा की अंदरूनी या ऊपरी सतह पर ब्लॉक होने के कारण होता है। यह सबसे अधिक गर्मियों और नमी भरे मौसम में होती हैं। शिशु को अधिक टाइट कपड़े पहनाने व ज्यादा कपड़े पहनाने के कारण गर्मी या जलन की वजह से हीट रैश उत्पन्न हो सकते हैं।

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घमौरियों का इलाज

शिशुओं को घमौरी आमतौर पर बिना किसी इलाज के कुछ ही दिनों में अपने आप चली जाती है। हालांकि, माता-पिता या बच्चे का ख्याल रखने वाले व्यक्ति शिशु में बेचैनी और जलन को कम करने व इलाज में तेजी लाने के लिए निम्न तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं :

  • हीट रैश के लक्षण दिखाई देने पर शिशु को ठंडे क्षेत्र में ले जाएं।
  • त्वचा को ठंडा और सूखा रखें।
  • प्रभावित त्वचा पर ठंडे पानी या कपड़े में बर्फ लपेट कर सिकाई करें।
  • ठंडे पानी से तेल और पसीने को दूर करें, फिर धीरे से बच्चे की त्वचा को थपथपाएं।
  • रोजाना नियमित रूप से शिशु की त्वचा को साफ करने से पसीना या तेल एक जगह लंबे समय तक इकट्ठा नहीं होता है जिससे स्थिति के और खराब होने की आशंका कम रहती है।
  • बच्चे को त्वचा को ठंडा रखने के लिए बिना कपड़ों के रहने दें।
  • त्वचा को ठंडा रखने में मदद करने के लिए एयर कंडीशनिंग या पंखें का उपयोग करें।
  • डिहाइड्रेशन जैसी समस्या से बचाने के लिए शिशु को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। ऐसा करने के लिए शिशु को भूख लगने पर स्तनपान करवाएं और थोड़े बड़े बच्चे को नियमित रूप से पानी पिलाते रहें।

डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे की त्वचा पर किसी भी प्रकार की क्रीम या लोशन का इस्तेमाल न करें। हीट रैश के लिए बाजार में विशेष क्रीम और दवाएं उपलब्ध हैं जिन्हें केवल डॉक्टरी सलाह के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। गलत क्रीम के उपयोग से स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है। शिशुओं को घमौरी किसी एलर्जिक रिएक्शन के कारण नहीं होती है। इस स्थिति में त्वचा सुखी रहती है जिसमें क्रीम या लोशन के इलाज से कोई मदद नहीं मिल पाती है।

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कुछ दुलर्भ मामलों में शिशुओ में घमौरी संक्रमित भी हो सकती है खासतौर से जब शिशु प्रभावित हिस्से पर खुजली करने की कोशिश करता है। हीट रैश अपने आप न जाएं और स्थिति गंभीर होने लगे तो डॉक्टर शिशु की त्वचा के आधार पर दवा की सलाह दे सकते हैं जिससे इलाज की प्रक्रिया में तेजी आती है।अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Shivam Rohatgi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/08/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड