ये 5 लक्षण बताते हैं कि आपके बच्चे के हाथ कमजोर हो रहे हैं

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट फ़रवरी 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आज के इस यांत्रिक युग में बच्चे, बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग में काफी समय बिता रहें हैं। बाहरी खेलकूद ना के बराबर हो गया है। कोई भी शारीरिक क्रिया आजकल के बच्चे करने से कतराते हैं। इस वजह से उनकी शारीरिक क्षमता पर असर पड़ता है। यदि आपका बच्चा किसी चीज को पकड़ने और उठाने में कठिनाई महसूस कर रहा है तो इसका मतलब है कि उसके हाथ कमजोर हो रहे हैं।

ऐसे ही कई लक्षण हैं जो आपको ये बताते हैं कि आपके बच्चे के हाथ कमज़ोर हो रहे हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे ही पांच लक्षणों के बारे में। 

1.

कमजोर हाथ के लक्षण – पेंसिल पकड़ने में परेशानी :

 अगर आपका बच्चा लिखने, ड्रॉइंग बनाने, कलर करने या कोई अन्य लिखाई से जुड़ा कार्य करने में बार-बार अपना ग्रिप पैटर्न बदलता है और अपनी पेन, पेंसिल या ब्रश को बार-बार एक हाथ से दूसरे हाथ में स्विच करता है तो ये उसके कमज़ोर हाथ होने का सूचक है। यदि आपके बच्चे का हाथ कमजोर हैं, तो वह उँगलियों से पेंसिल पकड़ने की बजाय मुट्ठी से उसे पकड़ कर लिखेगा।

2. कमजोर हाथ के लक्षण – बुरी हैंड राइटिंग :

पेंसिल को पकड़ने और नियंत्रित करने में आने वाली कठिनाई से भी कहीं ज्यादा खतरनाक एक और संकेत है जो बच्चों के कमज़ोर हाथों की तरफ़ इशारा करता है और वो हैं बच्चों की बुरी लिखावट या हैंड राइटिंग। अगर आपके बच्चे की हैंड राइटिंग अस्पष्ट और अपठनीय हो जाती है तो यह भी कमजोर हाथों का संकेत हो सकता है। कमजोर हाथ के बच्चे लिखते समय बहुत हल्का दबाव लगाते हैं जिस वजह से उन्हें लिखने और पढ़ने में समस्या आती है।

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3. कमजोर हाथ के लक्षण – भोजन करने में परेशानी :

कमजोर हाथों वाले बच्चे भोजन करते समय कुछ परेशानियों का अनुभव करते हैं, जैसे कि वे टिफ़िन के ढक्कन को खोलने या पैकेट बंद भोजन को फाड़ने में असमर्थ हो सकते हैं। वो पानी की बोतलों को खोलने में मुश्किल का सामना करते हैं और अक्सर अपने टिफिन बॉक्स या खाने के डिब्बे उनके हाथ से छूटते रहते हैं।

4. कमजोर हाथ के लक्षण – कपड़े पहनने में मुश्किलें :

यह एक गुप्त संकेत है कि आपके बच्चे की शारीरिक क्षमता घट रही है और खासकर उसके हाथ बेहद कमज़ोर हो गए हैं। ऐसी परिस्थिति में आपके बच्चे को मोजा पहनने और उतारने में दिक्कत आ सकती है। इसके साथ-साथ उसे जूते का फीता बांधने में भी दिक्कत महसूस हो सकती है। शक्तिहीन हाथों वाले बच्चे बटन और जिपर्स के साथ परेशानी का सामना कर सकते हैं।

5. कमजोर हाथ के लक्षण – खेलने के समय हाथों में दर्द :

कमजोर हाथों वाले बच्चों में खिलौने या खेल के प्रति उत्साह की कमी होती है। अक्सर खेलने के बाद उन्हें हाथों में दर्द और थकान की शिकायत रहती है। ऐसे बच्चे ज्यादा देर तक किसी खिलौने को हाथ में पकड़कर नहीं रख पाते, अगर वो ड्रॉइंग करते हैं तो जल्दी थक जाते हैं और खेल के मैदान में तो बहुत जल्दी ही हाथ हेड कर देते हैं। ये सब करना उन्हें निराश और परेशान करता है जिस वजह से वो खेलने से भागते हैं।

यदि आपको अपने बच्चे में इनमे से कोई भी लक्षण मिलते हैं तो कृपया तुरंत अपने फैमिली डॉक्टर से परामर्श लें और आवश्यक उपचार कराएं।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि ये सब कमजोरी बच्चों को तभी आती है, जब उनमें पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। चूंकि बच्चों का बढ़ता शरीर होता है, इसलिए उन्हें भरपूर पोषण की जरूरत होती है। बच्चों को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े, उसके लिए उन्हें अच्छा खानपान लेने की जरूरत पड़ती है, जिससे उनके शरीर को भरपूर पोषण मिले और उनकी शारीरिक कमजोरी दूर हो। नीचे हम कुछ ऐसी खाने की चीजें बताने जा रहे हैं, जो बच्चों को खिलानी चाहिए। इससे उन्हें भरपूर पोषण मिलेगा और उन्हें कमजोरी नहीं आएगी और उनके हाथ कमजोर नहीं होंगे।

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रोजाना पिलाएं दूध : दूध के फायदों से भला कौन अंजान होगा। इसमें कैल्शियम से लेकर कई तरह के विटामिन होते हैं, जो सभी के लिए जरूरी होते हैं। इसलिए आप अपने बच्चे को दूध जरूर पिलाएं। आप एक गिलास दूध सुबह और एक गिलास दूध रात को सोते समय उसे जरूर दें। अगर उसे दूध का टेस्ट नहीं पसंद तो उसे आप फ्लेवर डालकर भी दे सकते हैं।

अंडे खिलाएं : संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे…इस लाइन को आपने टीवी ऐड्स में जरूर सुना होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि अंडा पोष्टिक तत्वों का खजाना है। इसलिए अपने बच्चों को आप उबले हुए अंडे जरूर खिलाएं।

हरी सब्जियां खिलाएं : हरी सब्जियों में आयरन, विटामिन, मिनरल, कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो बढ़ते बच्चे के लिए जरूरी होते हैं। तो आप बच्चे को खाने में हरी सब्जियां जरू दें। अगर उसे हरी सब्जियां नहीं पसंद तो, इन सब्जियों को आप अलग-अलग स्वादिष्ट डिश बनाकर उसे खिला सकती हैं। बच्चों को सब्जियां खिलाने के लिए हर मील के साथ सलाद दें। अगर आपको हर बार सलाद बनाने में परेशानी होती है तो दुकान से बना बनाया सलाद लें। अपने बच्चे को सिखाएं कि सलाद ड्रेसिंग का सही अमाउंट क्या है।

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अगर आपके बच्चों को पास्ता पसंद तो उसमें ढेर सारी सब्जियां मिलाएं और बच्चों को सब्जियां खिलाना आसान बनाएं। जब कभी बच्चे सब्जियां खाने से मना करें, तो आप उनको इसके फायदें बताएं। जैसे कि पालक खाने से आयरन मिलता है, तो खीरा स्किन के लिए अच्छा है। ऐसा करने से बच्चों को पता होगा कि जो वो खा रहें है उसके कुछ फायदे भी है। कई बार बच्चों को सब्जियां खिलाना इस तरह से भी आसान हो जाता है। एक बार जब बच्चों को उनके द्वारा खाई जाने वाली सब्जी के फायदे पता होते हैं, तो वह खुद आपसे उन सब्जियों को मांगकर खाते हैं।

फल खिलाएं : बच्चों के खाने में हर दिन कम से कम एक विटामिन-सी युक्त फल या सब्जी जैसे कि संतरे, अंगूर, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, टमाटर और ब्रोकली शामिल करें। बच्चों के लिए फल काफी जरूरी है, इसलिए इन्हें उनके खाने में जरूर शामिल करें। इसके अलावा आप उन्हें फ्रूट जूस भी दे सकते हैं। कोशिश करें कि आप जो भी फ्रूट जूस उसे दें, घर में ही खुद से निकालकर पिलाएं। बाजार के जूस में हाइजीन का इश्यू हो सकता है, इसलिए खुद जूस निकालें और बच्चे को पिलाएं।

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