ऑटिज्म की बीमारी के कारण कम हो सकता है शरीर मेंअच्छा कोलेस्ट्रॉल

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Update Date जनवरी 5, 2020
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ऑटिज्म की बीमारी

ऑटिज्म की बीमारी मेडिकल साइंस के लिए अब भी पहेली बनी हुई है। इस बीमारी के लिए जितनी जानकारी मिले उतनी कम है। इसे लेकर अब भी बहुत कुछ समझा जाना बाकी है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हर रोगी में इसके लक्षण, कारण और इलाज अलग होते हैं। ऑटिज्म को समझने और इसके इलाज का विकसित करने के लिए की शोध चलते रहते हैं। 

ऑटिज्म की बीमारी का दिमाग की संरचना पर भी असर पड़ता है। साथ ही किए गए शोधों में यह भी सामने आया है कि जन्म के समय सामान्य कम वजन और असामान्य दिमागी संरचना वाले बच्चों में ऑटिज्म की बीमारी का शिकार होने की आशंका बहुत अधिक होती है। इसके अलावा शोध के दौरान पाया गया कि ऑटिज्म की बीमारी से जूझ रहे बच्चों में दिमाग के वे भाग असामान्य पाए गए, जो भावनाओं और विचारों को कंट्रोल करते हैं ।

ऑटिज्‍म की बीमारी के लक्षण

ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण बच्चों में बहुत ही जल्दी दिखने लगते हैं। एक से तीन साल तक के बच्चों में इसके लक्षणों को देखा जा सकता है। एक साल का शिशु अगर इशारे करने या खिलौने दिखाने के बाद भी मुस्कुराता या कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो ऐसे में यह ऑटिज्म की बीमारी का संकेत हो सकता है और पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसके अलावा ऑटिज्म की बीमारी में जब बच्चा बोलने की कोशिश करता है, तो वह अजीबो-गरीब आवाजें निकालता है। ऑटिज्म की बीमारी के लक्षण बच्चों में अलग-अलग भी हो सकते हैं। ऑटिज्म के ऐसे ही कुछ आम लक्षण हैं।

  •  आमतौर पर बच्चे के आस-पास पेरेंट्स या अन्य किसी के होने पर या उनके साथ बात करने पर वे प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन, ऑटिज्म की बीमारी से जूझ रहे बच्चे इस तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। वे किसी भी खिलौने या गतिविधी पर मुस्कुराते या रिस्पॉन्स नहीं देते हैं। साथ ही ऑटिज्म की बीमारी का असर का दिमाग पर देखा जा सकता है।
  • कई बार मां-बाप को लगता है कि बच्चे को सुनने में परेशानी है और वे इसको लेकर परेशान हो जाते हैं और कान की समस्या के लिए बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाते हैं। लेकिन, बच्चे का आवाजें सुनने के बाद भी प्रतिक्रिया न देने का कारण ऑटिज्म की बीमारी भी हो सकती है। ऐसे में पेरेंट्स काफी समय तर समझ ही नहीं पाते कि ऐसा क्यों है।
  • ऑटिज्म की बीमारी में बच्चों के प्रतिक्रिया न देने के अलावा उन्हें बोलने या अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी परेशानी होती है। इसके चलते बच्चे कई बार हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं। अक्सर यह भी देखा जाता है ऑटिज्म की बीमारी के शिकार बच्चे चिड़चिड़े भी हो जाते हैं।
  • ऑटिज्म की बीमारी से जुझ रहे बच्चे अक्सर अपने अंगों को हिलाते रहते हैं या यह कहें कि उनके शरीर के अंगों में लगातार कंपन होता रहता है।
  • ऑटिज्म का शिकार बच्चे लोगों के साथ ज्यादा घुलते मिलते नहीं हैं। साथ ही वे अपने में ही खोए रहते हैं। इस कारण ऐसे बच्चे सोशल स्किल्स नहीं सीख पाते हैं, जो पेरेंट्स के लिए चिंता की बात हो सकती है।
  • ऑटिज्म की समस्या के दौरान बच्चों को कई बार एक काम को करने में जरूरत से कहीं ज्यादा समय भी लग सकता है। कई मामलों में तो ऐसे बच्चे मिनटों के काम के लिए घंटों तक का समय ले लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि पेरेंट्स उन पर नजर रखें और ऐसी स्थिति होने पर बच्चों को ब्रेक लेने के लिए कहें।
  • इसके अलावा ऑटिज्म का दिमाग पर असर होने के कारण कई बार यह बच्चों के मानसिक विकास को भी अवरुद्ध कर सकता है।

क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम? (autism spectrum)

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को बोलने और सामाजिक व्यवहार करने में भी परेशान होती है। इसकी वजह से बच्चे समाज में घुलने मिलने से डरने लगते हैं और हमेशा डरे हुए नजर आते हैं। ऑटिज्म के कई प्रकार और लक्षण हैं और ये हर रोगी में भिन्न होते हैं। इसी वजह से इसके लिए ऑटिज्म स्पेक्ट्रम शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। ऑटिज्म की बीमारी के सटीक कारणों की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है कि किस वजह से ऑटिज्म होता है। हालांकि, ऐसा माना जाता है कि ये बीमारी हमारे जीन्स और वातावरण की वजह से होती है।

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क्यों एचडीएल कोलेस्ट्रॉल HDL cholesterol हमारे लिए है जरूरी?

कोलेस्ट्रॉल एक जरूरी फैट है, जो हमारे शरीर के हर सेल को संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल दो तरीके के होते हैं एक एचडीएल (HDL cholesterol) जिसे अच्छा कोर्लेस्ट्रॉल कहते हैं। वहीं दूसरा होता है एलडीएल (LDL कोलेस्ट्रॉल) जिसे बुरा केलेस्ट्रॉल कहते हैं। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल पूरे शरीर में खून के माध्यम से प्रवाहित होकर बुरे कोलेस्ट्रॉल को हटाता है। इसके अलावा ये रक्त वाहिकाओं के अंदर एक कवच बनाकर उसे साफ भी रखता है। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा दिल की बीमारियों से बचाती है।

एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और ऑटिस्टिक बच्चे

यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा में डॉक्टर यास्मिन नेगर्स द्वारा की गई रिसर्च में सामने आया कि ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल की मात्रा कम हो जाती है। इस रिसर्च में दो बच्चों के ग्रुप पर अध्ययन किया गया। जिसमें से एक में स्वस्थ बच्चे तो दूसरे में ऑटिज्म ग्रस्त बच्चे थे। पाया गया कि एक जैसा भोजन लेने के बावजूद ऑटिस्टिक बच्चों में ओमेगा-3 से ओमेगा-6 फैटी एसिड का संतुलन कम था और साथ ही एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का भी स्तर कम पाया गया।

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रिसर्च का नतीजा

इस रिसर्च से साफ हो गया कि ऑटिज्म प्रभावित बच्चों में कोलेस्ट्रॉल की इस गड़बड़ी से दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना रहता है। वहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है कि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर ऑटिज्म से राहत मिल सकती है। अभी भी ऑटिज्म और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के बीच संबंध का कोई खास आधार नहीं मिला है।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।

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