बच्चे को चोट से बचाने के लिए ध्यान रखें इन बातों का

By

बच्चे नटखट होते हैं, इसलिए बदमाशियां भी बहुत करते हैं। इन्हीं बदमाशियों के कारण उन्हें चोट भी लगती है। माता-पिता घर में बच्चे की सुरक्षा के इंतजाम में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं। फिर भी बच्चे किसी न किसी तरह से खुद को घायल कर लेते हैं। इन तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पेरेंट्स बहुत चिंतित रहते हैं। हैलो स्वास्थ्य आपको बताएगा कि किस तरह के हादसों से अपने बच्चे को चोट लगाने से कैसे बचाएं। यदि शिशु को चोट लग भी जाए तो क्या उपाय सबसे पहले किए जाने चाहिए।

बच्चे को जलने से बचाने के लिए-

बर्न यानी जलना सबसे आम तरह की चोट है। स्टोव, लैंप, माचिस, जलाई हुई सिगरेट, फायरप्लेस, गर्म सतहों या सामानों को छूना, जैसे कि स्टोव, हीटर और माइक्रोवेव कंटेनर, गर्म तरल और भाप पान, कप, गर्म पानी के हीटर और नहाने के गर्म पानी से बच्चे जल सकते हैं।

सुरक्षा के लिए टिप्स

  • वॉटर हीटर सेट करें जो 120 डिग्री फेरानहाइट से अधिक नहीं है।
  • चूल्हे पर खाना पकाने के बाद कभी न छोड़ें। बर्तन के हैंडल को बच्चे के पहुंच से दूर रखें। किचन में बच्चों को अकेला न जाने दें।
  • अपने घर में स्मोक अलार्म लगा कर रखें।

यह भी पढ़ें : बच्चे की दूसरों से तुलना न करें, नहीं तो हो सकते हैं ये नकारात्मक प्रभाव

इलेक्ट्रिक स्वीच से बच्चे को चोट

इलेक्ट्रिक स्वीच से बच्चे को चोट लग सकती है। अक्सर बच्चे इलेक्ट्रिक स्वीच के टक-टक की आवाज सुन कर आकर्षित होते हैं और बार-बार स्वीच को ऑन-ऑफ करना चाहते हैं। ऐसा करने से कभी भी बच्चे को करंट का झटका तक लग सकता है। साथ ही अगर स्वीच ऊपर है तो बच्चा उसे पाने के चक्कर में गिर भी सकता है। ऐसे में कोशिश करें कि इलेक्ट्रिक स्वीच बच्चे के पहुंच से दूर लगा हो।

यह भी पढ़ें : बच्चों को एक्टिव रखना है तो अपनाएं ये 10 टिप्स

गिरने से बच्चे को चोट

बच्चों को सबसे ज्यादा चोटें गिरने के कारण लगती है। एनआईएच के अनुसार, हर रोज लगभग 8,000 बच्चे गिरने के कारण चोटिल होते हैं।

सुरक्षा कैसे करें

बच्चे टेबल और बेड को बदलने से गिर सकते हैं। ऐसे में बच्चे को कभी भी बेड पर अकेला न छोड़ें। अगर छोड़ना भी है तो गद्दे और तकिया लगा कर चारों तरफ से बच्चे को सुरक्षित कर दें। इसके अलावा दूसरी मंजिल पर ऊंची खिड़कियों में विंडो गार्ड लगा दें।

यह भी पढ़ें : बच्चे की परवरिश के लिए इन पांच पुराने तरीकों को कहें ‘बाय’

बाथटब में डूबने से

अक्सर खबर आती है कि छोटा बच्चा टब में डूबने के कारण मर गया। ऐसा होता है पेरेंट्स की लापरवाही के कारण। वे टब या बाल्टी में पानी भर कर छोड़ देते हैं और बाथरूम का दरवाजा लॉक नहीं करते हैं। ऐसे में बच्चा अगर वहां जाता है तो पानी से खेलने के चक्कर में उसमें गिर जाता है।

सावधानियां

  • वॉशरूम, बाथटब, और बाल्टी में पानी के आसपास छोटे बच्चों को न जाने दें।
  • सुनिश्चित करें कि गर्म टब, स्पा और स्विमिंग पूल आपके बच्चे की पहुंच से दूर हैं।
  • अपने बच्चे को फव्वारे और कुओं से दूर रखें।
  • जब भी वह पानी के आसपास खेल रहा हो, अपने बच्चे पर नजर बनाए रखें।

यह भी पढ़ें : ओपोजिशनल डिफाइएंट डिसऑर्डर (ODD) के कारण भी हो जाते हैं बच्चे जिद्दी!

कटने से बच्चे को चोट लगना

अक्सर हम कैंची या चाकू कहीं भी रख के भूल जाते हैं। जब उस पर बच्चे की नजर पड़ती है तो वह उससे खेलने लग जाता है। ऐसे में अक्सर बच्चे चोटिल हो जाते हैं। कभी-कभी यह गंभीर घटना को जन्म देती है।

सावधानियां

  • बच्चे को किचन से दूर रखें, हो सके तो चाकू स्टैंड को बच्चे की पहुंच से ही दूर रखें।
  • बच्चे को खेलने के लिए कभी भी कोई धारदार चीज न दें।
  • अगर बच्चा स्कूल जाता है तो अपनी देखरेख में ही कैंची संबंधी क्राफ्ट का काम कराएं।

यह भी पढ़ें : बच्चों का स्कूल जाना होगा आसान, पेरेंट‌्स फॉलो करें ये टिप्स

बच्चे को चोट लगने पर प्राथमिक उपचार

अगर छोटे बच्चे को चोट लग गई है और हड़बड़ी में आपको समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें? कौन से डॉक्टर के पास ले जाएं तो नीचे बताए गए प्राथमिक उपचार को अपनाएं और जब बच्चे को थोड़ा रिलीफ मिल जाए तो डॉक्टर के पास ले जाएं।

  • यदि बच्चे को चोट लगने पर शरीर के उस हिस्से से लगातार खून बह रहा हो तो, सबसे पहले खून रोकने का उपाय करना चाहिए। जैसे – घाव पर फिटकरी लगाया जा सकता है। इससे तुरंत खून बहना बंद हो जाएगा।
  • इसके अलावा छोटे-मोटे कट के लिए बर्फ के टुकड़ें को घाव वाली जगह पर रगड़ने से खून बहना बंद हो जाता है।
    बच्चे को चोट लगने पर इस बात का ध्यान रखे की कही उसे अंदरूनी चोट तो नहीं लग गई है, ऐसा होने पर लहसुन, हल्दी और गुड़ को मिलाकर लेप करने से बच्चे की चोट ठीक हो जाती है। लहसुन की कली को थोड़े से नमक के साथ पीसकर उसकी पोटली बनाकर बांधने से चोट ओर दर्द में आराम मिलता है।
  • कभी-कभी बच्चे के गिर जाने उसके माथे या सिर के पीछे के भाग में सूजन आ जाती है। ऐसे में प्रभावित हिस्से पर तुरंत बर्फ रगड़ने से बच्चे को चोट के दर्द से आराम मिलता है। प्रभावित क्षेत्र पर सीधे एक आइस पैक लगाएं। ठंडी बर्फ वासोकोनस्ट्रक्शन (vasoconstriction) को बढ़ाकर रक्त वाहिकाओं की सूजन को सीमित करती है। इससे दर्द कम महसूस होता है।
  • अगर बच्चे को फ्रैक्चर हो गया है और ब्लीडिंग हो रही है तो किसी कपड़े या पट्टी की मदद से प्रभावित क्षेत्र पर दबाव बनाकर रक्तस्त्राव रोकें। प्रभावित क्षेत्र को हिलने न दें और बच्चे को जल्द-से-जल्द डॉक्टर के पास ले जाएं।

नोट: बच्चे को चोट लगने पर फर्स्ट ऐड या प्राथमिक चिकित्सा देने से एक बार पहले ही डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए। अपने बच्चे को किसी भी प्रकार की चोट लगने पर घबराए नहीं। पहले यह देखे कि उसे किस तरह की चोट लगी है। यह समझते हुए उसका प्राथमिक इलाज करें। यदि चोट गंभीर हो तो डॉक्टर के पास तुरंत ले जाएं।

बच्चे को चोट से बचाने के लिए जरूरी है कि आप उसकी सुरक्षा के साथ इन सभी बातों का ध्यान रखें। इसके अलावा, बच्चों को भी समझाएं कि उन्हें किन चीजों के पास नहीं जाना चाहिए। ऊपर बताए गए टिप्स (बच्चे को चोट लगने पर पेरेंट्स को क्या करना चाहिए) आपको कैसे लगे? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं साथ ही अगर आपका इस विषय से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है तो वो भी हमारे साथ शेयर करें।

और भी पढ़ें: 

Ear Pain: कान में दर्द सिर्फ बच्चे नहीं बड़ों का भी कर देता है बुरा हाल

सांस फूलना : इस परेशानी से छुटकारा दिलाएंगे ये टिप्स

डिजिटल वर्ल्ड में बच्चे के लिए घर में बनाएं एक ‘टेक-फ्री जोन’

Say Cheese! बच्चे की फोटोग्राफी करते समय ध्यान रखें ये बातें

Share now :

रिव्यू की तारीख अक्टूबर 6, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया फ़रवरी 10, 2020

शायद आपको यह भी अच्छा लगे