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यदि आपके बच्चे को होती है बोलने में समस्या तो जरूर कराएं स्पीच थेरेपी

    यदि आपके बच्चे को होती है बोलने में समस्या तो जरूर कराएं स्पीच थेरेपी

    स्पीच थेरेपी के नाम से ही इसके अर्थ का अनुभव आपको हो ही गया होगा। यह एक ऐसी थेरेपी है जिसमें बच्चों के बोलने में आने वाली कठिनाई को दूर करके उन्हें बोलने में मदद की जाती है। इसका सबसे अधिक उपयोग बच्चों में किया जाता है। बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) का उपयोग अलग-अलग कारणों से किया जा सकता है। स्पीच थेरेपी यानि भाषण चिकित्सा भाषा और संचार के साथ चुनौतियों का सामना करती है। यह ऑटिज्म वाले बच्चों को अपने मौखिक, अशाब्दिक और सामाजिक संचार में सुधार करने में मदद कर सकता है। इस थेरेपी का लक्ष्य व्यक्ति को सही तरीके से संवाद यानि बात करने में मदद करना है।

    इस इलाज में कई तरह की चुनौतियां भी होती है। कई बार ऑटिज्म या अन्य विकार से पीड़ित लोगों के कारण अलग-अलग होते हैं, जिससे उन लोगों को इस थेरेपी की आवश्यकता पड़ती हैं।ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर कुछ व्यक्ति बोलने में सक्षम नहीं हैं। तो वहीं दूसरों को बात करना पसंद है, लेकिन उन लोगों को बातचीत करने में कठिनाई होती है या दूसरों के साथ बात करते समय शरीर की भाषा और चेहरे के भाव समझने में कठिनाई होती है। ऑटिज्म एक विकासात्मक विकलांगता है जो आमतौर पर 3 साल की उम्र से पहले दिखाई देती है। ऑटिज्म न्यूरोलॉजिकल विकारों के एक समूह का हिस्सा है जिसमें बात करने में समस्या पैदा होती है। बच्चों में स्पीच थेरेपी प्रोग्राम शुरू करने से पहले एक स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट द्वारा मूल्यांकन करने के बाद शुरू किया जाता है।

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    बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies): स्पीच थेरेपी का उपयोग

    स्पीच थेरेपी का उपयोग कई प्रकार के कारणों और मदद के लिए किया जा सकता है। यह जरूरी नहीं कि जब आप किसी स्पीच डिसआर्डर से ग्रस्त हो तभी आपको स्पीच थेरेपी की जरूरत हो सकती है। स्पीच डिसार्डर के अलावा भी कुछ लोगों को बोलने के साथ-साथ कुछ गड़बड़ी (जैसे,शब्दों का साफ न होना) हो सकती है। अपने वार्तालाप कि क्रिया को बेहतर बनाने के लिए भी स्पीच थेरेपी का उपयोग किया जाता है। स्पीच थेरेपी पर इन कारणों से काम कर सकते हैं जैसे,

    • मुंह, जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए।
    • स्पष्ट बोलने के लिए।
    • चेहरे के सही हाव-भाव के साथ भावनाओं को मिलाने के लिए।
    • बॉडी लैंग्वेज को समझाने के लिए।
    • सवालों के जवाब ठीक से देने के लिए।
    • किसी चित्र का उसके अर्थ से मिलान कराने के लिए।
    • सही टोन का उपयोग करने के लिए।
    • बोलने का तरीका सही करने के लिए।
    • आवाज में उतार चढ़ाव लाने के लिए।

    इसके अलावा बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) का इन बीमारियों के कारण भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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    भाषण विकार क्या हैं?(What Are Speech Disorders?)

    जिन लोगों में बात करने की क्षमता अर्थात बोलने में किसी भी प्रकार की समस्या होती है, जिससे वो अपनी बात सही रूप से व्यक्ति से नहीं कर पाते हैं। तो इस समस्या को भाषण विकार यानि स्पीच डिसआर्डर कहते हैं। इनके इलाज के लिए डॉक्टर स्पीच थेरेपी (Speech therapy) करने की सलाह देता है। भाषण विकार कई कारणों से और कई प्रकार का हो सकता है। जो इस प्रकार से हैं-

    आर्टिक्यूलेशन डिसऑर्डर

    बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) का इस्तेमाल तब भी किया जा सकता है, जब उन्हें आर्टिक्यूलेशन विकार (Articulation disorder) हो। आर्टिक्यूलेशन विकार के कारण पीड़ित कुछ शब्द ध्वनियों को ठीक से बनाने में असमर्थत होते है। इसमें शब्दों का गलत उच्चारण होता है जिससे सुनने वाला समझ नहीं पा रहे हैं कि आप कहना क्या चाह रहे हैं।

    प्रवाह संबंधी विकार

    इस विकार के कारण बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) की जरूरत पड़ सकती है। इस विकार में हकलाने जैसी समस्याएं शामिल हैं, जिसमें असामान्य ठहराव, शब्दों का दोहराव, शब्दों में अटकना आपके बात करने के स्टाइल को खराब कर देता है।

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    अनुनाद या ध्वनि विकार

    अनुनाद विकार तब होता है जब नाक या मौखिक गुहाओं में नियमित रूप से वायु प्रवाह की रुकावट या आवाज की गुणवत्ता के कंपन को बदल देती है। ये आवाज की पिच, मात्रा या गुणवत्ता के साथ समस्या के कारण होती है। इस प्रकार के विकार बच्चे के लिए दर्द या परेशानी का कारण हो सकते हैं।

    संज्ञानात्मक-संचार विकार

    संज्ञानात्मक संचार विकार वो है जिसमें मस्तिष्क के उस हिस्से पर चोट लगने के कारण संचार करने में कठिनाई होती है जो आपके सोचने की क्षमता को नियंत्रित करता है, जिसे संज्ञानात्मक-संचार विकार कहा जाता है। इसका परिणाम मेमोरी इश्यू, प्रॉब्लम सॉल्विंग और बोलने में दिक्कत या सुनने में दिक्कत हो सकती है। यह कई समस्याओं जैसे, असामान्य मस्तिष्क विकास, कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों, मस्तिष्क की चोट या स्ट्रोक के कारण हो सकता है।

    एक्सप्रेसिव विकार

    इस विकार में बच्चे अपने अंदर की बाते किसी के सामने पूरी तरह से एक्सप्रेस करके उसे समझा नहीं पाते है। स्पीच थेरेपी इसमें बच्चों की बहुत मदद कर सकती है।

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    ऑटिज्म डिसऑर्डर

    यह बच्चों में होने वाली एक बीमारी है,जिसमें बच्चे सही रूप से बात नहीं कर पाते हैं। ऑटिज्म बच्चों में भी स्पीच थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार के कई अन्य कारणों से स्पीच थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।

    वाचाघात विकार

    यह एक संचार विकार है जो किसी व्यक्ति की दूसरों के सामने बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह अक्सर किसी व्यक्ति की पढ़ने और लिखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। स्ट्रोक वातस्फीति का सबसे आम कारण है, हालांकि मस्तिष्क के अन्य विकार भी इसका कारण बन सकते हैं।

    ग्रहणशील विकार

    यह तब हो सकता है जब आप किसी को बोल रहे हैं,और वो आपकी बात पर कोई भाव नहीं प्रकट कर रहा है। ग्रहणशील भाषा विकार वाले व्यक्ति को दूसरों की कही बात को समझने में परेशानी होती है।

    स्पीच थेरेपी के दौरान क्या होता है?

    भाषण चिकित्सा यानि स्पीच थेरेपी आमतौर पर एक एसएलपी द्वारा निदान के साथ शुरू होती है जो संचार विकार के प्रकार और इसके इलाज में मदद करता है।

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    बच्चों के लिए भाषण चिकित्सा

    बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) का उपयोग करने से पहले यह जानना आवश्यक होता है, की आपके बच्चे को बोलने में समस्या किस कारण से ही रही है। बच्चों के भाषण विकार के आधार पर, स्पीच थेरेपी तय कि जाती है। स्पीच थेरेपी और बाकी गतिविधियां आपके बच्चे के विकार, उम्र और जरूरतों के आधार पर भिन्न होती हैं। बच्चों के लिए भाषण चिकित्सा के दौरान, एसएलपी हो सकता है।

    • बच्चों की स्पीच थेरेपी में बातचीत और खेल के माध्यम से उन्हें बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
    • बच्चों की स्पीच थेरेपी में बच्चों से बात करने के लिए उन्हें आसानी से अपनी बात समझाने के लिए चित्रों का उपयोग भी किया जाता है।
    • बच्चों में स्पीच थेरेपी के दौरान उनकी पसंद के खेल द्वारा भी थेरेपी की जाती है। उनके साथ ऐसे खेल खेलने से वो आपके साथ इनवॉल्व होने लगते हैं।
    • स्पीच की प्रैक्टिस कराई जाती है।
    • बच्चों के साथ उनके हिसाब से फन करते हुए भी उनकी थेरेपी सेशन ली जाती है।
    • शब्दों का सही उच्चारण कराया जाता है।

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    घर पर बच्चे की स्पीच थेरेपी कैसे करें

    ऐसे कई तरीके हैं, जिनकी मदद से आप घर पर ही अपने बच्चे की स्पीच थेरेपी करवा सकते हैं। आइए जानते हैं,घर पर बच्चे की स्पीच थेरेपी कैसे कि जा सकती है।

    • सबसे पहले तो अपने बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं।
    • उससे उसके जैसे छोटे बनकर ही बात करें,जैसे की वो आपके दोस्त हैं।
    • कोई मजेदार गेम खेलें।
    • यदि आप उसे कुछ समझाना चाहते हैं, तो उसे गेम के माध्यम से समझाने की कोशिश करें।
    • ऐसे बच्चों पर चिल्लाएं नहीं।
    • उनके साथ उनकी पसंद का खेल खेलकर उन्हें बोलने की प्रैक्टिस करवा सकते हैं।
    • हर छोटे बड़े काम के लिए उन्हें बुलाएं और उनसे बात करें।
    • बच्चों को अकेला न छोड़ें।

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    • घर पर बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) करते समय उन्हें बाकी बच्चों से मिलाने ले जाएं। जिससे वो आपस में बात करने की आदत डालें।
    • उनके साथ उनकी तरह डांस करें।
    • गाना गाएं।
    • जिससे वो आपकी बात सुनकर आपसे खुलकर आपसे बात कर सकें।
    • जब वो अपने स्पेशल क्लास से आएं तो जानबूझ कर उनसे दिन भर की बाते पूछें। जहां वो बोलने में समस्या महसूस कर रहे हो, वहां उनकी मदद करें।

    ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

    वयस्कों के लिए भाषण चिकित्सा

    वयस्कों के लिए भाषण चिकित्सा भी आपकी आवश्यकताओं और सर्वोत्तम उपचार को निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन के साथ शुरू होती है। वयस्कों के लिए स्पीच थेरेपी में स्पीच प्रैक्टिस, भाषा,शब्दों के प्रवाह और कई चीजों में आपकी सहायता कर सकता है।यदि आपको चोट या चिकित्सीय स्थिति, जैसे पार्किंसंस रोग या मुंह के कैंसर के कारण बोलने में कठिनाई होती है, तो स्पीच थेरेपी से यह ठीक किया जा सकता है।

    व्यायाम से स्पीच थेरेपी

    बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) में व्यायाम भी शामिल हो सकते हैं। जो इस प्रकार हो सकते हैं।

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    स्पीच थेरेपी के फायदे

    • जिन लोगों को बोलने में समस्या होती है, स्पीच थेरेपी उनको बोलने में मदद करता है। केवल बोलने में नहीं बल्कि साफ और शुद्ध रूप से बोलने में मदद करती है।
    • जो लोग नहीं बोल पाते हैं, यह थेरेपी उनको भी पढ़ने के काबिल बनाता है। यह आपको आम लोगों की तरह ही बोलने और अपनी बात रखने के काबिल बनाता है।
    • स्पीच थेरेपी से सुनने और समझने की क्षमता बढ़ती है जिससे अक्षरों और सामने वाले की बात को समझना, उनको बोलने में फर्क करना आसान हो पाता है।
    • यदि शुरूआती दौर में ही बच्चों को स्पीच थेरेपी दी जाए तो यह उनकी भाषा पर बेहतर कमांड बनी रह सकती है।

    स्पीच थेरेपी सेवाएं कहां प्रदान की जाती हैं?

    बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) के लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। स्पीच थेरेपी कई जगह पर हो सकती है,जैसे

    • निजी क्लिनिक में किया जा सकता है।
    • स्कूल में, एक व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम (IEP) के माध्यम से हो सकता है।
    • घर पर, 3 से कम उम्र के बच्चों के लिए एक शुरूआती इंटरनेशन कार्यक्रम के रूप में किया जा सकता है।
    • इसी प्रकार के लोगों के किसी एक समुदाय में किया जा सकता है।

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    स्पीच थेरेपी कितनी सफल है?

    इसके बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी (Speech therapy for babies) ज्यादा सफल है। जबकि वयस्कों में जल्दी सुधार नहीं देखा जा सकता है। कई बार स्पीच थेरेपी के साथ-साथ माता-पिता की सही देखभाल भी बहुत जरूरी होती है। केवल स्पीच थेरेपी के भरोसे बच्चों में बदलाव की चाहत रखना सही नहीं है। थेरेपी के साथ-साथ परिवार का माहौल और बर्ताव भी मायने रखता है। दोनों जब एक साथ बच्चों पर काम करते हैं,तो परिणाम जल्दी और बेहतर मिलता है।

    ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

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    सूत्र

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    What You Need to Know About Speech Therapy

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    shalu द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/06/2021 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड