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बच्चों का झूठ बोलना बन जाता है पेरेंट्स का सिरदर्द, डांटें नहीं समझाएं

बच्चों का झूठ बोलना बन जाता है पेरेंट्स का सिरदर्द, डांटें नहीं समझाएं

हम सभी अपने जीवन में कभी न कभी झूठ बोलते हैं। लेकिन, बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) माता-पिता को परेशान कर सकता है। हम समझते हैं कि कभी-कभी हर किसी को झूठ बोलना पड़ता है, जिससे सामने वाले की भावनाओं को ठेस ना पहुंचें। लेकिन कई बार माता-पिता को बच्चों का झूठ बोलना समझ नहीं आता।

कई बार बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) ऐसे कारणों से होता है, जो घर के बड़ों के लिए चौंकाने वाला होता है। छोटी-छोटी बातों पर बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) उनके माता-पिता को परेशान करता है। लेकिन, बच्चे झूठ बोलते क्यों हैं और इसके पीछे क्या कारण होता हैं, ये सुनकर आप चौंक जाएंगे। बच्चों का सच न बोलना कई कराणों से जुड़ा हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आपका बच्चा आपसे क्यों झूठ बोल सकता है।

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इन कारणों से आपका बच्चा आपसे झूठ बोलता है

दूसरों को खुश करने के लिए बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying)

हर बच्चा चाहता है कि उसके माता-पिता उससे खुश रहें। हमेशा अपने बच्चे को गलत समझना सही नहीं है। कई बार आपको खुश करने के लिए भी आपका बच्चा झुठ बोल सकता है। उनके साथ समय बिताएं और उनको समझें। कई बार अगर उसने कुछ ऐसा किया है, जो वह जानता है कि आप इससे नाखुश होंगे, तो वह आपकी नाराजगी से बचने के लिए इसके बारे में झूठ बोल सकता है। इस झूठ बोलने की वजह बच्चे का आपको खुश करना है, बिना यह सोचे कि वह झूठ बोल रहा है। आपको खुश करने के लिए कई बार बच्चे आपसे झूठ बोल देते हैं और ऐसे में पेरेंट्स को समज नहीं आता कि इस स्थिति में कैसे रिएक्ट करना है।

अपने फायदे के लिए बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying)

बच्चों का सच न बोलना डर से भी जुड़ा हो सकता है। कई बार बच्चे इसलिए भी झूठ बोल देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने सच बोला तो उन्हें उनकी गलती की सजा मिल जाएगी। मां-बाप से मिलने वाली सजा के डर से बच्चे बहुत बार झूठ बोल देते हैं। इस सजा का डर बच्चों में इतना ज्यादा होता है कि उन्हें पता भी नहीं चलता कि वो झूठ बोल रहें हैं और वे आपके सामने अपनी गलती से मुकर जाते हैं।

माता-पिता से सीख सकते हैं झूठ बोलना (Children’s lying)

बच्चे सफेद झूठ की अवधारणा को नहीं समझते हैं। घर में अपने माता-पिता को देखकर बच्चे उनकी आदतें और उनका व्यवहार फॉलो करते हैं। वो आपकी छोटी-छोटी चीजें नोटिस करते हैं। आप आपस में एक-दूसरे से कैसे बात करते हैं या एक-दूसरे से किस तरह से चीजें छिपाते हैं यह सब उनके दिमाग में बैठ जाता है। आप भले ही मजाक में छोटी-छोटी बात के लिए एक दूसरे से झूठ बोलें लेकिन बच्चों में झूठ बोलना यहीं से आता है।

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वास्तिवकता को न समझने की वजह से झूठ बोलना

जब तक बच्चा तीन या चार साल का नहीं हो जाता, तब तक आपका बच्चा वास्तव में झूठ बोलने की अवधारणा को नहीं समझ पाएगा, क्योंकि वह अभी तक सच को भी नहीं समझ पाता है। उसके लिए वास्तविकता और फैंटसी में ज्यादा अंतर नहीं होता। बच्चों को अक्सर ऐसा लगता है कि जो वो कार्टून और टीवी में देख रहें हैं वही सही है। उनके लिए इस बात को समझना उस उम्र में मुश्किल होता है कि जो स्क्रीन पर आ रहा उससे रियल लाइफ अलग है। उनके सच और झूठ को समझने का फंडा अलग हो सकता है इसलिए कई बार उनका झूठ उनकी समझ की हिसाब से सही होता है।

सच को अपने हिसाब से घूमा-फिरा कर बोलना

कभी-कभी आपका बच्चा चाहता है कि एक चीज के बजाय दूसरी चीज होती तो वह सच को घूमा फिरा कर बोलता है। जैसे कि उसकी बहन उसे उसके धक्का देने से नहीं गिरी बल्कि तेज दौड़ने की वजह से गिरी। हालांकि, सच उसे भी पता है। लेकिन, सच बोलने के परिणाम से बचने के लिए वह झूठ बोलता है और उस झूठ को थोड़ा बदल कर बोलता है। वह जैसा चाहता है वैसे उस सच को अपने घरवालों के सामने दिखाता है। बच्चों का सच न बोलना उन्हें कई बार आसान काम लगने लगता है।

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अटेंशन डेफेसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (एचडीएचडी)

अटेंशन डेफेसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (एचडीएचडी) भी बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) का कारण होता है जिस वजह से वह झूठ बोलते हैं। इस बीमारी में बच्चा छोटी-छोटी बातों पर भी झूठ बोलता है। यही नहीं इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों को हर बात सच बोलने की भी आदत होती है। वक्त के साथ उनमें यह आदत बढ़ती ही चली जाती है। इन बच्चों का झूठ बोलना जब पकड़ा जाता है तब भी ये लोग कभी सच नहीं बोलते। भारत में करीबन एक करोड़ से ज्यादा बच्चे इस बीमारी से पीड़ित हैं।

यदि आपका बच्चा भी इस बीमारी के चलते झूठ बोल रहा है तो उसे ऐसे डील करें:

बच्चे का झूठ बोलना किसी मां बाप को पसंद नहीं होता लेकिन कभी भी बच्चे के झूठ को व्यक्तिगत न लें। यह समझने की कोशिश करें कि उसने यह झूठ आपका अनादर करने के लिए नहीं बोला है। यह एक बीमारी की वजह से है। बच्चा आपसे जितनी बार झूठ बोले उसके झूठ के पैटर्न को याद रखें। इस बात के बारे में पता लगाएं कि क्या सारे पैटर्न में झूठ बोलने की वजह एक ही थी या अलग-अलग। इसके अलावा कोशिश करें कि बच्चे के लिए ऐसी परिस्थिती ही न हो जिसमें उसे झूठ बोलना पड़े। उसे प्यार से हैंडल करें।

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बच्चों का झूठ बोलना इस तरह करें हैंडल

जब इस तरह के मामलों से निपटने की बात आती है, तो बच्चों को झूठ बोलने के लिए सजा देने की बजाय उन्हें सच्चाई का महत्व सिखाएं। बच्चों के लिए झूठ बोलने की अवधारणा नई है और उनके हिसाब से इसमें कुछ गलत नहीं है। इसलिए अपने बच्चों को यह समझाने पर जोर डालें कि वो अपनी गलतियां बताएं और उन्हें बताएं कि माता-पिता उनके सच बोलने पर ज्यादा खुश होंगे।

बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) एक मानव स्वभाव का उदाहरण है। ऐसे में पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे अपने को समझाएं कि झूठ बोलना एक गलत आदत है और इससे सिर्फ भविष्य के लिए परेशानियां ही खड़ी होती हैं। अगर आप बच्चे को झूठ बोलने पर मारते रहेंगे, तो उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझ में नहीं आएगा। बच्चों को मार के समझाने से बेहतर है कि आप उन्हें प्यार से समझाएं। बच्चों को मारने पर वो जिद्दी हो जाते हैं और फिर बात भी नहीं मानते हैं। बच्चों का मन बहुत कोमल होता है इसलिए हमेशा प्यार से व्यवहार करना चाहिए। अगर आपको फिर भी समझ नहीं आ रहा है कि बच्चों की इस आदत को कैसे छुड़ाएं, तो आप एक्सपर्ट की हेल्प ले सकते हैं।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में बच्चों का झूठ बोलना (Children’s lying) और उसे हैंडल करने को लेकर जानकारी दी गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी चाहते हैं तो आप हमसे कमेंट कर पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

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Lucky Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड