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आईवीएफ से जुड़े मिथक, जान लें क्या है इनकी सच्चाई?

आईवीएफ से जुड़े मिथक, जान लें क्या है इनकी सच्चाई?

आज युवाओं में देर से शादी करने का प्रचलन चल पड़ा है। इसकी वजह से महिलाओं को प्रेग्नेंसी में परेशानी होती है और बाद में आईवीएफ (In-Vitro Fertilization) का विकल्प चुनना पड़ता है, लेकिन आईवीएफ से जुड़े मिथक (IVF Facts) इस कदर प्रचलित है कि लोग इसको लेकर कंफ्यूज रहते हैं। इनके पीछे का कारण अधिकतर युवाओं के लिए करियर के क्षेत्र में एम्बिशयस होना होता है, जो बाद में चलकर अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी तथा कई वजहों से इनफर्टिलिटी (Infertility) की समस्या से घिर जाते हैं। इनमें से कुछ लोग आईवीएफ का विकल्प चुनते हैं, लेकिन आईवीएफ से जुड़े मिथक की वजह से अपने पैर पीछे खिंच लेते हैं। कितने कपल्स इस समस्या से छुटकारा के लिए क्लिीनिक के चक्कर लगाते रहते हैं। हालांकि इसमें दो राय नहीं कि आज इस समस्या से बचने के ट्रीटमेंट व उपचार मार्केट में मौजूद हैं, लेकिन आज भी इंफर्टिलिटी के बारे में कई तरह की गलत धारणाएं बनी हुई हैं। यह धारणाएं इस परेशानी से जूझ रहे कपल्स को दुविधा में डाल देती हैं। ऐसी ही कुछ बातें आईवीएफ (IVF) तकनीक को लेकर फैली हुई हैं। आईवीएफ से जुड़े मिथक (Myths of In-Vitro Fertilization) के बारे में आज हम आपको बताएंगे जो आपके दिमाग में आने वाले सवालों के सभी जवाब देगा।

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आईवीएफ से जुड़े मिथक (Myths of In-Vitro Fertilization)

डायरेक्टर ऑफ एससीआई हेल्थकेयर तथा आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. शिवानी सचदेव गौर के अनुसार आईवीएफ से जुड़े मिथक (Myths of IVF) और इन धारणाओं के पीछे प्राचीन कहानियां फैली हुई गलत सूचनाएं हैं।”

आईवीएफ की जानकारी: आईवीएफ (IVF) क्या है?

जो कपल्स पैरेंट्स बनने का सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं, वो आईवीएफ प्रॉसेस अपनाकर सकते हैं। आईवीएफ के दौरान महिला के एग को शल्य चिकित्सा द्वारा डोनर या फिर पुरुष साथी के स्पर्म के साथ निषेचित किया जाता है। फर्टिलाइज्ड एग को डेवलप होने के लिए छोड़ दिया जाता है। कुछ समय बाद वापस इसे महिला के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है। लेकिन बहुत से लोगों के दिमाग में आईवीएफ से जुड़े मिथक हैं जिनके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है।

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आईवीएफ से जुड़े मिथक:

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराने वाली महिलाएं जुड़वां या तीन बच्चों को जन्म दे सकती हैं

मिथक 1

यह है फैक्ट:

दरअसल इनफर्टिलिटी के उपचार के मामले में ट्विन्स (Twins) के जन्म की संभावना सामान्य से अधिक होती है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में अधिकतर महिलाओं ने एक ही बच्चे को जन्म दिया है। आईवीएफ (IVF) की मदद से व आईसीएसआई की मदद से एवरेज तौर पर 22.6 प्रतिशत प्रेग्नेंसी के मामलों में जुड़वां और 1.5 प्रतिशत मामलों में ट्रिप्लेट्स के मामले सामने आए हैं। डॉ शिवानी के मुताबिक इसका संबंध उम्र से भी हो सकता है। आईवीएफ की मदद लेने वाली 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के लगभग एक तिहाई मामलों में जुड़वां (Twins) बच्चों का मामला सामने आया है जबकि 42 वर्ष से अधिक की महिलाओं में यह 10 से भी कम है, तो यहां पर आपके दिमाग से आईवीएफ से जुड़े मिथक को कम करने में हम मददगार साबित हुए है या नहीं इसपर जरूर सोचें।

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मिथक 2

आईवीएफ से जुड़े मिथक हैं कि तनाव और चिंता इसकी सक्सेस रेट को कम करता है

यह है फैक्ट:

आईवीएफ से जुड़े मिथक में सबसे कॉमन यह मिथक है। डेली लाइफ का चिंता और तनाव आईवीएफ (IVF) के ट्रीटमेंट के रिजल्ट्स पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालता है। अगर कोई गर्भवती महिला तनावग्रस्त है, तो इसका प्रभाव उसके दैनिक कार्यों व पारिवारिक जीवन पर पड़ता है। जिसका दुष्प्रभाव फर्टिलिटी सिस्टम पर पड़ सकता है। यहां यह जानना बहुत जरूरी है कि तनाव अपने आप में एक समस्या है न कि इनफर्टिलिटी का कारण। आईवीएफ से जुड़े मिथक में इसके होने का सबसे बड़ा कारण है कि आजकल हर कोई किसी ना किसी तरह के स्ट्रेस से घिरा होता है जिसको लोग आईवीएफ से जोड़ देते हैं।

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मिथक 3

आईवीएफ से जुड़े मिथक यह भी है कि यह महिला के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है

यह है फैक्ट: आईवीएफ की जानकारी

देखा जाए तो यह नुकसानदायक नहीं है। अच्छे डॉक्टर की निगरानी में यह बिलकुल सुरक्षित है। सिर्फ 1.2 प्रतिशत मरीजों में ओवेरियन हाइपरस्टीमुलेशन की वजह से समस्या हो सकती है। कुछ खास रोकथाम की मदद से इसकी संभावना कम भी की जा सकती है। आजकल बहुत से लोग पेरेंट बनने के लिए आईवीएफ का विकल्प चुन रहे हैं ऐसे में आईवीएफ से जुड़े मिथक यह भी है कि यह महिलाओं के स्वास्थ के लिए हानिकारक है, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई यह आपका डॉक्टर आपसे बता सकता है। अगर आप आईवीएफ के बारे में सोच रहे हैं, तो आईवीएफ (IVF) के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

मिथक 4

भ्रूण हस्तांतरण के बाद पूर्ण आराम जरूरी है

यह है फैक्ट:

ऐसी कोई सलाह नहीं दी जाती बल्कि सलाह दी जाती है कि महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस लौट सकती हैं। आईवीएफ से जुड़े मिथक (Myths of IVF) में एक यह भी है कि महिलाओं को इसके बाद पूरी तरह से रेस्ट की जरूरत है बल्कि ऐसा कुछ नहीं है। अगर महिला चाहें तो वह अपने रूटिन में वापस आ सकती है।

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मिथक 5

आईवीएफ से जुड़े मिथक यह भी पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता

यह है फैक्ट:आईवीएफ की जानकारी

आईवीएफ से जुड़े मिथक हैं कि कुछ पुरुषों में जिनमें किसी कारणवश शुक्राणुओं की संख्या कम या ना के बराबर होती है तो ऐसी स्थिति का उपचार संभव होता है। इस स्थिति में पुरुष के प्रजनन अंग से सीधे शुक्राणु एकत्र कर आईवीएफ में इस्तेमाल किया जा सकता है।

मिथक 6

आईवीएफ से जुड़े मिथक यह भी है कि आईवीएफ की मदद से डिजाइनर बेबी हासिल किया जा सकता है

यह है फैक्ट:

कद-काठी, आंखों का रंग, बालों का रंग आदि जैसे सौंदर्य लक्षण का चयन संभव नहीं है लेकिन, प्रीइम्लान्टेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (पीजीडी) एक प्रक्रिया है जिससे भ्रूण में वंशानुगत गड़बड़ियों की पहचान में मदद मिलती है और इसकी वजह से बच्चे को खास वंशानुगत बीमारियों से बचाया जा सकता है। आईवीएफ से जुड़े मिथक में यह भी बहुत प्रचलित है कि इसके जरिए आपको एक डिजाइनर बच्चा मिल सकता है।

और पढ़ें: क्या है प्रेग्नेंट होने का प्रॉसेस है? जानिए कैसे होता है भ्रूण का निर्माण

मिथक 7

अगर आप आईवीएफ से गर्भधारण करते हैं, तो प्रेग्नेंसी में हाई-रिस्क हो सकता है

यह है फैक्ट: आईवीएफ की जानकारी
आईवीएफ की मदद से गर्भधारण करने वाली अधिकांश महिलाओं में सामान्यतः सेफ गर्भावस्था ही होती है। हालांकि, उन महिलाओं में यह कॉम्प्लिकेटेड हो सकता है जिन्होंने अधिक उम्र में उम्र में गर्भावस्था प्लान की हो। बाकी महिलाएं जो उम्र संबंधी पैमाने से हटकर किसी शारीरिक या प्रजनन समस्या के कारण आईवीएफ से प्रेग्नेंट होती हैं, उनके लिए यह सुरक्षित होता है। ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं है। आईवीएफ से जुड़े मिथक में एक बात यह भी है कि इसकी वजह से प्रेग्नेंसी में हाई रिस्क (High risk pregnancy) हो सकता है, जबकि यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

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और पढ़ें :क्या स्पर्म एलर्जी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है?

मिथक 8

आईवीएफ से जुड़े मिथक यह भी है यह केवल युवा जोड़ों के लिए उपयुक्त है

यह है फैक्ट:

यह बिलकुल सच है कि उम्र गर्भधारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो प्रजनन क्षमता को निर्धारित करती है। यह प्रक्रिया रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में उतनी ही इफेक्टिव हो सकती है, जितनी एक यंग महिला के लिए। अधिक उम्र में, यंग महिलाओं के डोनटेड एग का उपयोग किया जाता है। हालांकि, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि सामान्य रूप से भी छोटी महिलाओं की तुलना में वृद्ध महिलाओं में गर्भावस्था की दर कम है।

मिथक 9

आईवीएफ से जुड़े मिथक ये भी है कि बच्चे जन्म दोष और विकृतियों के साथ पैदा होते हैं

यह है फैक्ट:

आईवीएफ से जन्म लेने वाले बच्चों में विकृतियों और जन्मजात दोषों के साथ पैदा होने का जोखिम कम होता है। अगर आप इनफर्टिलिटी से जूझ रहे हैं तो उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और उन्हें किसी आईवीएफ विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। आईवीएफ से जुड़े मिथक (Myths of IVF) आपके आसपास बहुत सारे हैं जिनके लिए किसी तरह की स्टडी नहीं हुई है। ऐसे में आईवीएफ से जुड़े मिथक को कितना मानना है यह पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है।

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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सायकल की लेंथ

(दिन)

28

ऑब्जेक्टिव्स

(दिन)

7

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

World Embryologists Day: Myths and facts about IVF/ https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3455307//Accessed on 10/10/2019

10 common myths about in vitro fertilization,/ https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/myths-and-facts-fertility/Accessed on 10/10/2019

Some common IVF myths and facts/cdc.gov/nchs/fastats/infertility.htm/Accessed on 10/10/2019

MYTHS AND FACTS ABOUT ART/https://resolve.org/what-are-my-options/treatment-options/myths-and-facts-about-art//Accessed on 10/10/2019

10 Myths About Fertility / https://www.cdc.gov/reproductivehealth/infertility/index.htm/Accessed on 10/10/2019

लेखक की तस्वीर
Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/04/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड