प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग क्यों होता है?

    प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग क्यों होता है?

    प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग्स होना सामान्य है, लेकिन इरिटेटिंग होता है। गर्भावस्था के दौरान मूड में बदलाव शारीरिक तनाव, थकान, गर्भवती महिला के मेटाबॉलिज्म में बदलाव या हॉर्मोन इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के कारण होता है। हैलो स्वास्थ्य के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग और इसे कैसे हेंडल किया जाए? के बारे में बता रहे हैं।

    प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग: कारण और उपचार

    प्रेग्नेंसी में हॉर्मोन के स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव न्यूरोट्रांस्मिटर के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। न्यूरोट्रांस्मिटर्स मस्तिष्क में पाए जाने वाले रसायन हैं जो मूड को नियंत्रित करते हैं। प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग ज्यादातर पहली तिमाही के दौरान छठे से दसवें सप्ताह के बीच और फिर तीसरी तिमाही में होता है, क्योंकि शरीर शिशु को जन्म देने के लिए तैयारी कर रहा है

    यदि आप गर्भवती हैं या आप गर्भावस्था के दौरान किसी की देखभाल कर रहे हैं तो उनके मूड में बदलाव अनुभव हुआ होगा। कभी-कभी गर्भावस्था में होना वाला मूड स्विंग्स महिला के साथ पार्टनर और परिवार के सामने समस्या खड़ी कर देता है। गर्भावस्था के दौरान 20 प्रतिशत महिलाएं इन प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग के कारण चिड़चिड़ी और परेशान रहती हैं। इस दौरान आपको लगातार चिंताएं होती हैं जो गर्भावस्था में मूड में बदलाव को बढ़ावा देती हैं।

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    गर्भावस्था में व्यवहार में बदलाव: प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग के लक्षणों में शामिल हैं:

    • लगातार एंग्जाइटी और बढ़ते चिड़चिड़ेपन को प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग का पहला लक्षण माना जाता है।
    • नींद संबंधी परेशानियां भी प्रेग्नेंसी में स्विंग के लक्षणों में से एक है।
    • खाने की आदतों में बदलाव को भी प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग का लक्षण माना जाता है।
    • बहुत लंबे समय तक किसी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता भी प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग का लक्षण है।
    • शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस को प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग का प्रमुख लक्षण माना जाता है।

    गर्भावस्था के दौरान मूड में बदलाव हो रहे हो तो अपनाएं ये उपचार

    इस दौरान आपको यह समझना महत्वपूर्ण है कि आप ऐसी अकेली नहीं हैं जो मूड स्विंग्स को महसूस कर रही हैं। यह गर्भावस्था के अनुभव का सिर्फ एक पहलू है। आप जो कुछ अनुभव कर रही हैं, वह सामान्य है और संभवतः अपेक्षित भी। यह सोचना आपको गर्भावस्था में होने वाले इन मूड स्विंग में सामान्य रखने में मदद करेगा।

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    गर्भावस्था में व्यवहार में बदलाव: मूड में बदलाव को मैनेज करने के लिए इन तरीकों को अपनाएं:

    • प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग से बचने के लिए अच्छी नींद लें।
    • प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग से बचने के लिए आराम करने के लिए दिन में ब्रेक जरूर लें।
    • नियमित शारीरिक गतिविधि करें। इससे प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग से बचा जा सकता है।
    • हेल्दी-फूड से नजदीकियां रखें। प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग से बची रहेंगी।
    • पार्टनर के साथ समय बिताएं। इससे ज्यादा फील होगा और मूड ठीक रहेगा।
    • पावर नैप लेती रहें । इससे भी तनाव कम होगा और प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग नहीं होगा।
    • वॉक करके तरोताजा महसूस करें। इससे स्ट्रेस भी कम होता है।
    • पार्टनर के साथ अच्छी फिल्में देखें। इससे भी प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग नहीं होता है।
    • गर्भावस्था में योगा या मेडिटेशन की कोशिश करें। इससे मूड काफी बेहतर रहेगा और प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग नहीं होगा।

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    प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग को लेकर क्या मुझे डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए और कब?

    गर्भावस्था के दौरान यदि आपके मूड में बदलाव दो सप्ताह से अधिक समय तक रहता है तो आप अपने डॉक्टर या काउंसलर से मिल सकती हैं।

    प्रेग्नेंसी के दौरान बेसिक सवाल होते हैं, जो गर्भवती महिलाओं के मन में बने रहते हैं। जिसके कारण उनमें चिंता और तनाव के भाव लगातार रहते हैं।

    जैसे:

    • क्या हम अच्छे पेरेंट्स की कसौटियों पर खड़े उतरेंगे?
    • शिशु के जन्म के बाद फाइनेंशियल मैनेजमेंट कैसे होगा?
    • क्या शिशु स्वस्थ होगा?
    • क्या मैं शिशु के स्वागत के लिए सही तैयारियां कर रही हूं?

    गर्भावस्था का समय शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों से भरा रहता है। इन परिवर्तनों को समझने से आपकी परेशानी दूर होगी। किसी काउंसर के साथ इन परिवर्तनों और चिंताओं पर बात करना मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा आप अपने पार्टनर से भी बात कर सकती हैं क्योंकि शिशु और आपके लिए सबसे अधिक चिंतित वह भी हैं। ऐसा करना निश्चित रूप से गर्भावस्था में होने वाले मूड में बदलाव से थोड़ी राहत देगा।

    आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग ही नहीं महिलाओं को कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जानते हैं उनके बारे में

    गर्भावस्था में व्यवहार में बदलाव: प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग ही नहीं थकान से भी परेशान रहती हैं महिलाएं

    गर्भ में बढ़ते हुए बच्चे को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान रक्त उत्पादन भी अधिक होता है। ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। प्रेग्नेंसी के कारण प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ जाता है जिस कारण नींद अधिक आती है। शरीर में होने वाले परिवर्तन के साथ ही भावनात्मक परिवर्तन भी कम ऊर्जा संचार का कारण बन जाते हैं। इस कारण महिलाओं को आलस आता है और प्रेग्नेंसी में थकान महसूस होती है।

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    प्रेग्नेंसी में मुंहासों से भी परेशान रहती हैं गर्भवती महिलाएं

    कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासे (Pregnancy Acne), पिंपल्स का अनुभव होता है। यह पहली और दूसरी तिमाही के दौरान होना सबसे आम है। गर्भावस्था में एंड्रोजन नामक हॉर्मोन में वृद्धि त्वचा में ग्लांड्स (ग्रंथियों) को बढ़ने और सीबम को अधिक मात्रा में उत्पन्न करने का कारण बन सकती है जो एक प्रकार का एक ऑयली तथा वैक्सी सब्सटेंस होता है। यह तेल छिद्रों को रोकता है जिससे त्वचा को जरूरी पोषण नहीं मिलता। परिणामस्वरूप चेहरा और स्किन में बैक्टीरिया, सूजन आदि हो सकता है। गर्भावस्था और प्रसव के बाद मुंहासे आमतौर पर अस्थायी होते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान मुंहासे जो परेशानी का कारण बनते हैं वे जब बॉडी हॉर्मोन सामान्य होते हैं खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं में से एक मुंहासे भी हैं। इनके कई कारण होते हैं, जैसे-

    1. एंड्रोजन स्तर में वृद्धि

    2. आहार में बदलाव

    3. जेनेटिक पैटर्न

    4. दवा

    5. तनाव

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    हथेली का लाल और खुजली होना भी है गर्भावस्था की समस्या

    प्रेग्नेंसी में पेट बढ़ रहा होता है जिससे पेट के आसपास की त्वचा में स्ट्रेचिंग की वजह से खुजली होती है। ऐसा ही हाथ और पैर के साथ भी होता है। रक्त प्रवाह बढ़ने और ईस्ट्रोजन का लेवल बढ़ने के कारण हथेलियां लाल हो जाती हैं और खुजली होती है। यह समान्य प्रेग्नेंसी के लक्षण है, लेकिन कोलेस्टेसिस या लिवर की कोई समस्या की वजह से भी पूरे शरीर में खुजली हो सकती है, आपको ये समस्याएं हैं या नहीं यह पता लगाने के लिए अपनी गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें।

    प्रेग्नेंसी में हेयरफॉल भी करता है परेशान

    प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल चेंजेस हेयरफॉल का बड़ा कारण हैं। हालांकि प्रेग्नेंसी में हेयरफॉल सभी महिला को हो यह जरूरी नहीं है क्योंकि इस दौरान बालों का टूटना कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। कई महिलाएं प्रसव के बाद भी हेयरफॉल को महसूस करती हैं। कुछ मेडिकल कंडिशन प्रेग्नेंसी में होने वाले हेयर फॉल को और भी ज्यादा बढ़ा देती हैं।

    हम उम्मीद करते हैं कि प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। इसमें हमने मूड स्विंग के अलावा गर्भावस्था में होने वाली अन्य परेशानियों के बारे में भी बताया है। किसी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr. Shruthi Shridhar


    Nikhil Kumar द्वारा लिखित · अपडेटेड 03/08/2020

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