बच्चों के कान में पियर्सिंग (Ear Piercing) करवाने की सही उम्र जानिए

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 29, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

जैसे-जैसे बच्चे अपने बचपन से किशोर अवस्था (जिसे टीनेज कहते हैं) में प्रवेश करते हैं उन्हें कई नए अनुभव मिलते हैं। ऐसे ही कुछ अनुभवों में से एक है कान में पियर्सिंग करवाना। भारत में लड़कों की तुलना में लड़कियों के कान में पियर्सिंग करवाने का चलन ज्यादा है। छोटी से लेकर बड़ी उम्र तक की लड़कियों के कान में पियर्सिंग करवाना आम बात है। इसे कर्णवेध संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं क्या है कर्णवेध संस्कार।

यह भी पढ़ें: बेबी बर्थ अनाउंसमेंट : कुछ इस तरह दें अपने बच्चे के आने की खुशखबरी

कर्णवेध संस्कार:

हिंदू धर्म में कुल 16 संस्कार हैं और उन्हीं में से नौवां संस्कार है, कर्णवेध संस्कार। इसका मतलब होता है, कान छेदना, कर्ण यानी कान और वेध मतलब छेदना। लोगों का मानना है, कि कर्णवेध संस्कार से न सिर्फ सुंदरता बढ़ती है बल्कि बुद्धि में भी विकास होता है। इतना ही नहीं, शास्त्रों के अनुसार तो इतना तक कहा गया है, कि जिनका कर्णवेध संस्कार नहीं हुआ है, वो अपने रिश्तेदारों के अंतिम संस्कार तक का अधिकारी नहीं होगा।

शुरूआत में, कर्ण छेदन संस्कार लड़के और लड़कियों दोनों के किए जाते थे, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बदलता गया, इसमें बदलाव होने लगे और लड़कों के लिए यह कम हो गया। हालांकि, यह लोगों की इच्छा पर निर्भर करता है। पहले लड़कियों के लिए कर्णवेध संस्कार के साथ-साथ नाक छेदन संस्कार भी होते थे। हालांकि, आज के युग में यह सब अपनी इच्छा अनुसार हो चुका है।

वैसे देखा जाए तो लड़कियों के लिए यह जरूरी है क्योंकि कान में पियर्सिंग करवाने के बाद उनमें पहने जाने वाले आभूषण उनके शृंगार का साधन है जो, उनकी सुंदरता बढ़ाते हैं। पियर्सिंग की सही उम्र क्या है? कान में पियर्सिंग करने  के दौरान और बाद में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि, आए दिन कान में पियर्सिंग करवाने से होने वाले इंफेक्शन और समस्याओं के बारे में सुनने को मिलता है।

यहां बताए गए सुझावों को अपनाकर आप कान में पियर्सिंग की प्रक्रिया को और आसान और सुरक्षित बना सकते हैं।

यह भी पढ़ें: Say Cheese! बच्चे की फोटोग्राफी करते समय ध्यान रखें ये बातें

बच्चों के कान में पियर्सिंग (Ear Piercing) करवाने से पहले रखें ध्यान:

कभी भी छह महीने से कम के बच्चे का कान में पियर्सिंग न करवाएं। विशेषज्ञों के अनुसार दस वर्ष की उम्र कान में पियर्सिंग करवाने के लिए सही है। कान के नीचे का हिस्सा जहां छेद किया जाता है, वो बहुत ही नाज़ुक और नर्म होता है। कान में पियर्सिंग करवाने से पहले उस हिस्से को अच्छी तरह से साफ कर लें और जांच लें कि कहीं उस जगह या उसके आस-पास किसी तरह की कोई चोट न हो।

यह भी पढ़ें: कपड़े के डायपर का इस्तेमाल हमेशा से रहा है बेहतर, जानें इसके बारे में

 बच्चों के कान में पियर्सिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान:

  1. बच्चों के कान में पियर्सिंग के समय उन्हें स्थिर होकर बैठने के लिए कहें: कान में पियर्सिंग करवाने की प्रक्रिया में थोड़ा दर्द होता है, जिस वजह से बच्चों को डर लगाना बहुत ही आम बात है। ऐसी स्थिति में बच्चे हिलते हैं और भागने लगते हैं। ऐसा करने से कान कटने का डर तो रहता ही है और कभी-कभी तो छेद की जगह भी बदल जाती है। इसलिए बहुत ज़रूरी है की कान छिदवाते समय आराम से बिना हिले बैठा जाये।
  2.  बच्चों के कान में पियर्सिंग करवाते वक्त नीडल की जांच करें: कान में पियर्सिंग के लिये प्रयोग की जाने वाली नीडल की जांच अवश्य करें। पहले से इस्तेमाल की गयी नीडल से कान में पियर्सिंग करवाए। पहले से इस्तेमाल की हुई नीडल से संक्रमित रोग होने की संभावना रहती है।  
  3. बच्चों के कान में पियर्सिंग करते वक्त कान को बार-बार न छुएं: कान में पियर्सिंग करवाने के बाद कान को बार-बार की कोशिश न करें। इससे कान में खिंचाव आने और कान में संक्रमण होने का डर रहता है।
  4. बच्चों के कान में पियर्सिंग करते वक्त देखभाल कैसे करें: कान के छेद में एंटीबैक्‍टीरियल दवाई भी लगाए। कान की बाली को बीच-बीच में घुमाते रहें ताकि वह एक जगह पर न जमें। साथ ही ऐसा करने से छेद वाली जगह पर गंदगी नहीं जमती।
  5. बच्चों के कान में पियर्सिंग के बाद कान को पानी से बचाएं: कान के छेद को पानी से बचा के रखें। स्विमिंग करने से बचें। कान छिदवाने के चार हफ्तों तक स्विमिंग न करें क्‍योंकि स्विमिंग करने से पूल का पानी से संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  6. बच्चों के कान में पियर्सिंग के बाद उने कपड़े पहनते और उतारते समय ध्यान रखें: कपड़े बदलते समय विशेष ध्यान रखें, की कान का पिछला भाग कपड़े या तौलिए में न फंस जाए। भारी ज्‍वैलरी पहनने से बचें। जब तक कान का छेद पूरी तरह से ठीक न हो जाए तब तक कानों में बहुत बड़े टॉप्‍स या बड़ी बाली जैसी भारी ज्‍वैलरी न पहने।

दी गई सभी बातों का ध्यान रखते हुए कान में पियर्सिंग करवाने के बाद उसे किसी तरह के इंफेक्शन्स या बीमारियों से बचाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें: बेबी बर्थ पुजिशन, जानिए गर्भ में कौन-सी होती है बच्चे की बेस्ट पुजिशन

बच्चों के कान में पियर्सिंग के बाद होने वाले फायदे क्या हैं? 
  • माना जाता है कि कान छिदने से लकवा जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
  •  इससे मस्तिष्क में रक्त का संचार समुचित प्रकार से होता है। इससे दिमाग तेज चलता है।
  •  पुरुषों के द्वारा कान छिदवाने से उनमें होने वाली हर्निया की बीमारी दूर हो सकती है।
  • यह भी कहा जाता है कि पुरुषों के अंडकोष और वीर्य के संरक्षण में भी कान छिदवाने का फायदा मिलता है।
  • मान्यता अनुसार बच्चों के कान में पियर्सिंग से व्यक्ति के रूप में निखार आता है।
  • कान छिदवाने से बुद्धि बेहतर होती है तभी पुराने समय में गुरुकुल जाने से पहले कान छिदवाने की परंपरा थी।
  • ऐसा माना जाता है कि कान छिदवाने से सुनने की क्षमता बढ़ जाती है।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि कान छिदवाने से आंखों की रोशनी तेज हो सकती है।
  • कान छिदने से तनाव भी कम होता है।
हम उम्मीद करते हैं कि बच्चों के कान में पियर्सिंग पर आधारित यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा। इससे आप समझ सकते हैं कि बच्चों के कान में पियर्सिंग कराने के फायदे क्या हैं और इसकी सही उम्र क्या है। किसी प्रकार का डाउट होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार या निदान प्रदान नहीं करता।

और पढ़ें :

Clonidine : क्लोनिडीन क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

Clonazepam : क्लोनाज़ेपाम क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

न्यूबॉर्न ट्विन्स को पालने में हो रही है समस्या तो एक बार पढ़े लें ये आर्टिकल

शिशुओं की सुरक्षा के लिए फॉलो करें ये टिप्स, इन जगहों पर रखें विशेष ध्यान

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

संबंधित लेख:

    शायद आपको यह भी अच्छा लगे

    जानिए मैटरनिटी लीव एक्ट (मातृत्व अवकाश) से जुड़े सभी नियम और जानकारी

    न्यू मैटरनिटी लीव एक्ट 2020, मैटरनिटी लीव कितने दिन की होता है, प्रसूति मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन कैसे करते हैं, matritva avkash application in Hindi, Maternity leave act 2017, prasuti avkash application in Hindi PDF.

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    प्रेग्नेंसी प्लानिंग, प्रेग्नेंसी अप्रैल 30, 2020 . 8 मिनट में पढ़ें

    बच्चों में ग्रोइंग पेन क्या होता है?

    जानें बच्चों में ग्रोइंग पेन क्या होता है। साथ ही छोटे बच्चों के पैरों में दर्द की कैसे पहचान करें। इस लेख में पढ़ें Groin pain के कारण और इलाज के बारे में।

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    बच्चों के लिए मोबाइल गेम्स खेलना फायदेमंद है या नुकसानदेह

    जानें बच्चों पर मोबाइल गेम्स का क्या प्रभाव पड़ता है। क्या बच्चों में गेमिंग एडिक्शन को कम किया जा सकता है? Side effects of mobile games in hindi.

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    पेरेंटिंग टिप्स, पेरेंटिंग अप्रैल 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    बच्चों में ब्रोंकाइटिस की परेशानी क्यों होती है? जानें इसका इलाज

    जानें बच्चों को ब्रोंकाइटिस की परेशानी क्यों होती है और इससे कैसे पहचाने। बच्चों में ब्रोंकाइटिस के घरेलू उपाय। Bronchitis in child in Hindi

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    बच्चों की देखभाल, पेरेंटिंग अप्रैल 27, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें

    Recommended for you

    Online Education- बच्चों के लिए ऑनलाइन एज्युकेशन

    कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एज्युकेशन का बच्चों की सेहत पर क्या असर हो रहा है?

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
    के द्वारा लिखा गया Kanchan Singh
    प्रकाशित हुआ अगस्त 12, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    दांत दर्द का आयुर्वेदिक इलाज

    दांत दर्द का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें कौन सी जड़ी-बूटी है असरदार

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
    के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
    प्रकाशित हुआ जून 26, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
    आईसीयू में बच्चे की देखभाल

    कैसे करें आईसीयू में एडमिट बच्चे की देखभाल?

    के द्वारा लिखा गया shalu
    प्रकाशित हुआ मई 13, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
    cough in kids : बच्चों में खांसी में न दें यह आहार

    बच्चों में खांसी होने पर न दे ये फूड्स

    चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
    के द्वारा लिखा गया Shivam Rohatgi
    प्रकाशित हुआ अप्रैल 30, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें