बच्चों को खुश रखने के लिए फॉलो करें ये पेरेंटिंग टिप्स, बनेंगे जिम्मेदार इंसान

By Medically reviewed by Dr. Pranali Patil

बच्चों का सही पालन-पोषण एक चुनौतीपूर्ण काम साबित हो सकता है। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना कि वे खुश भी रहें काफी मुश्किल हो सकता है। यह भी जान लें कि बच्चे को खुश रखने के लिए सिर्फ खिलौने ही जरूरी नहीं है। एक खुशहाल बच्चे के पालन-पोषण के लिए आपको अपने पेरेंटिंग के तरीकों  में भी कुछ बदलाव करने की जरूरत होती है।

बच्चे के खुश रखने के लिए जरूरी टिप्स

अगर आप अपने बच्चे को खुश देखना चाहते हैं, तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि आपके बच्चे को किस चीज से खुशी मिलती है। इसके अलावा हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं कि जिनसे आपको बच्चे की जरूरतों को समझने में आसानी होगी और आप यह भी जान पाएंगे कौन सी चीजें उसे खुशी देती हैं। 

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बच्चों की खुशी के लिए सकारात्मक व्यवहार

बच्चों को कोई भी काम करने से पहले हर बात के लिए पेरेंट्स से परमिशन लेने की जरूरत होती है। बच्चों के लिए उनके माता-पिता एकमात्र उदाहरण होते हैं, जिनसे उन्हें यह जानना होता है कि वे किसी काम को ठीक ढ़ग से कर रहे हैं या नहीं। एक कॉन्फिडेंट और खुशहाल बच्चे को पालने के लिए सकारात्मक व्यवहार जरूरी है। यही कारण है कि जब भी वह कुछ सही करता है, तो अपने बच्चे की सराहना करना आवश्यक है। लेकिन गलत होने पर उसे उसकी गलती भी जरूर बताएं। झूठी प्रशंसा हानिकारक हो सकती है। यह आगे चलकर उसके जीवन में परेशानी का कारण बन सकता है।

धैर्य रखना सिखने से बच्चे रहते हैं खुश

आज के दौर में बच्चों को हर चीज बिना कहे मिल जाती है। आज की दुनिया में सब कुछ एक उंगली के इशारे पर उपलब्ध होने के साथ ही बड़ी से बड़ी जरुरतें तुरंत पूरी हो सकती है। अपने बच्चों को इन चीजों की आदत लगने से बचाएं और उन्हें बताएं की हर चीज पूरा होने में अपना समय लेती है। बच्चों में धैर्य विकसित करने से आपका बच्चा खुद का दुश्मन नहीं बनेगा और दुखी और निराश महसूस करने के बजाए जीवन में हर चीज के लिए तैयार रहेगा।

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अच्छे संबंध बनाने में मदद करें

हर कोई अपना जीवन व्यक्तिगत स्तर पर जीता है, लेकिन सामाजिक पहलू भी है, जो जीवन जीने का अर्थ लाता है। परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर हम बहुत सारी खुशियां और यादगार पल हमेशा के लिए संजोते हैं। बच्चे परिवार के साथ और यहां तक कि अपने दोस्तों के साथ भी आसानी से बंध सकते हैं। उन्हें यह भी सीखने की जरूरत है कि परिचितों या अपने पड़ोसियों के साथ कैसे व्यवहार करें। अपने बच्चे के लिए आपका खुद का प्यार ‘शर्तों पर लागू’ टैग के साथ नहीं आना चाहिए क्योंकि उसे अलग-अलग मामलों में आप पर भरोसा करने की जरूरत होती है। दूसरों के साथ संबंध विकसित करके उसे अपनी पहचान बनाने में और मदद मिल सकती है।

दया का भाव देता है बच्चे को खुशी

शुरुआती दिनों में हो सकता है बच्चा किसी की परवाह ना करें और केवल अपने परिवार को लेकर बहुत ज्यादा भावुक हो। समय के साथ आपके बच्चों को यह जानना आवश्यक है कि उनके जीवन में खुद से ज्यादा भी कई चीजें मायने रखती हैं। सहानुभूति और दूसरों के लिए दया का भाव रख कर वह एक अलग तरह की खुशी महसूस कर सकता है, जो केवल इन्हीं भावों से मिलती है। अपने बच्चे के साथ बातचीत करें, जब वह उस तरीके से व्यवहार करता है, जो आने वाले समय में उसके लिए गलत हो सकता है। बच्चे से बात करने से वह अपना नैतिक व्यवहार विकसित करेगा और धीरे-धीरे उसे दया का भाव महसूस करने में मदद मिलेगी।

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बच्चे के खुशहाल जीवन के लिए उसे स्वतंत्र बनाएं

कुछ माता-पिता अपने बच्चों के बारे में बहुत अधिक संवेदनशील हो जाते हैं और ड्रोन कैमरे की तरह उनके आसपास मौजूद रहते हैं। यह व्यवहार बच्चों को चिड़चिड़ा बना सकता है या उन्हें आप पर ज्यादा निर्भर बना सकता है। अपने बच्चे को कुछ ऐसा करने से रोकना जो उसके लिए गलत न हो, उसके लिए लंबे समय में तक हानिकारक हो सकता है। अगर आपका बच्चा खेलते समय गिर जाता है और आपको पता है कि उसे चोट नहीं लगी है, तो उसे गिरने दें और थोड़ी देर रोनें दे। वह धीरे-धीरे खुद को उठाएगा और फिर से खेलना शुरू कर देगा।

 सही रुटिन बच्चे को खुश रखने में करेगा मदद

छोटी उम्र में आपके बच्चे का दिमाग हर तरफ जाता है, जो उसके आसपास हो रही है। इससे वह भ्रमित हो सकता है और उसका ध्यान भटक सकता है, जिसकी वजह से वह लगातार सोचता रहता है कि वह क्या कर रहा है। एक रुटिन बनाने से आपके बच्चे को पता होगा कि उसे कब उठना, ब्रश करना, खाना, सोना, पढ़ाई करना या खेलना है। रुटिन होने से उसके अंदर भी कुछ पाने की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी। अपने दिन का रुटिन फॉलो करने पर उसके अंदर एक भावना आएगी की उसने हर वो चीज की जो उसे करनी थी। एक रुटिन उसके लिए जरुरी एक्टिविटी को दोहराने में मदद करती है और दोहराव उसकी अच्छी आदत में बदल जाएगा।

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कोई स्कील सीखना भी रखेगा बच्चे को खुश

हो सकता है कि आपके बच्चे को किसी चीज में खास रुचि हो। बच्चे की रुचि किसी भी तरह की हो सकती है। चाहें यह जानना हो कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट कैसे जाते हैं? वह पियानो पर अपना हाथ आजमा सकता है या वीडियो देखकर डांस मूव्स भी सीख सकता है। जो भी हो उसे इसे आगे बढ़ाने के लिए समय दें और आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन करें। वे जीवन में उस स्किल को आगे सीखें या नहीं लेकिन कम से कम उन्हें पता होगा कि यह क्या होता है। 

 बच्चों को भावनाओं को व्यक्त करने की आजादी दें

कई बच्चे अपने माता-पिता से अपनी भावनाओं के बारे में बात करते हैं। हालांकि, ये ज्यादातर बचपन में होता हैं और थोड़े बड़े हाने पर माता पिता इसे नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे ही आप ऐसा करना शुरु करते हैं, तो बच्चे में हीनता की भावना आनी शुरु हो जाती है। उसे यह जानने की जरूरत है कि वह आपसे किसी भी चीज के बारे में बात कर सकता है और आप वास्तव में समझ पाएंगे कि वह क्या कर रहा है। उसे समय दें, जो आप कर रहे हैं उसे एक पल के लिए छोड़ दें और उसे तब भी सुनें जब वह आपको बता रहा हो कि उसके पसंदीदा कार्टून एपिसोड में क्या हुआ था।

एक बच्चे को एक जिम्मेदार इंसान बनाना और उसके अंदर खुशहाल मानसिकता पैदा करना आसान काम नहीं है। बच्चों को खुश रखने के लिए उससे सही तरह से फीडबैक लेने, बातचीत करने और उसको गाइड करना जरुरी होता है। माता-पिता होने के नाते आपको एक टीम के खिलाड़ी, एक दोस्त और एक व्यक्ति जिसपर वह हमेशा भरोसा कर सकता है की भूमिका निभाते हैं। इन सारी बातों से आपका बच्चा अपने व्यक्तित्व को बेहतर ढ़ंग से विकसित कर सकता है और एक ऐसा एडल्ट बन सकता है जिसपर आपको नाज होगा।

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बच्चों के प्रति सख्त होने पर न फील करें गिल्टी

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रिव्यू की तारीख नवम्बर 7, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया नवम्बर 7, 2019

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