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बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत से आप नहीं कर सकते हैं इंकार!

बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत से आप नहीं कर सकते हैं इंकार!

जन्म के बाद के पहले पांच साल बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दौरान बच्चे की शारीरिक और मानसिक ग्रोथ तेजी से होती है। इस दौरान हर माता-पिता अपने बच्चे को कुछ नया सीखाने की कोशिश करते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इस दौरान सीखी गयी अच्छी आदतें पूरी उम्र बच्चे के साथ रहती हैं। पिछले कुछ सालों से प्री-स्कूल्ज का नाम तेजी से सामने आया है। कुछ पेरेंट्स बच्चों के लिए प्री-स्कूल एजुकेशन को लाभदायक मानते हैं, जबकि कुछ इसे इतना जरूरी नहीं मानते। आज हम बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में बात करने वाले हैं। आइए जानें बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) क्या होती है? अगर आपको प्री-स्कूल के बारे में जानकारी नहीं है, तो सबसे पहले इसके बारे में जान लेते हैं।

प्री-स्कूल (Preschool) से क्या मतलब है?

प्री-स्कूल फुल टाइम स्कूल से पहले चाइल्ड केयर और एजुकेशन ऑप्शंस में से एक है, जो इस समय अपने छोटे बच्चों के लिए पेरेंट्स के पास उपलब्ध है। प्री-स्कूल और प्री-स्कूल प्रोग्राम (Preschool program) को तीन से पांच साले के बच्चों को एजुकेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें लॉन्ग डे केयर की तुलना में कम समय बच्चे को रखा जाता है और खेल के माध्यम से उन्हें एजुकेट किया जाता है। बच्चे अपनी गति या क्षमता के अनुसार इसमें सीखते हैं। प्री-स्कूल में क्वालिफाइड टीचर्स द्वारा बच्चों को एजुकेट करने का काम किया जाता है। हालांकि, कई बार कई प्री-स्कूल प्रोग्राम के साथ ही लॉन्ग डे-केयर सेंटर (Long day care center) की सुविधा भी प्रदान करते है।

कई जगह इन्हें कई जगह किंडरगार्टन (kindergarten) भी कहा जाता है। प्री-स्कूल प्रोग्राम (Preschool program) का उद्देश्य बच्चों को सोशल स्किल्स और लर्निंग रिलेटेड स्किल ग्रहण करने में मदद करना होता है। इसके कोई संदेह नहीं है कि हर बच्चे के लिए यह प्री-स्कूल प्रोग्राम लाभदायक है। बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) से पहले किस उम्र में बच्चों को प्री-स्कूल भेजना चाहिए, यह जान लेते हैं।

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प्री-स्कूल के लिए बच्चे की सही उम्र क्या है? (Right age of Preschool)

जैसा की पहले ही बताया गया है कि प्री-स्कूल एजुकेशन के लिए सही उम्र तीन से पांच साल के बीच की है। हालांकि, हर प्री-स्कूल में इस उम्र में थोड़ा-बहुत बदलाव हो सकता है। रीसर्च से यह बात साबित हुई है कि प्री-स्कूल के दो साल बच्चे को स्कूल के लिए अच्छे से तैयार करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर साक्षरता, भावनात्मक और सामाजिक स्किल उन्हें सिखाने में भी यह बेहद मददगार है। यानी, प्री-स्कूल में बच्चे को भेजने को अतिरिक्त सपोर्ट मिलती है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट की राय ले सकते हैं। अब जानिए बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में।

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बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत के बारे में जानें (Role of Preschool)

प्री-स्कूल वो पहली ऐसी जगह होती है जहां बच्चा अपने माता-पिता की सुरक्षा और आराम से बाहर निकलता है। एक तरह से कहा जाए तो यह बच्चों के लिए सेकंड होम की तरह होता है। प्री-स्कूल भेजने से पहले हर माता-पिता के मन में कई चिंताएं और शंकाएं होना स्वाभाविक है। प्री-स्कूल में बच्चे न केवल सीखते हैं बल्कि सुरक्षित और आरामदायक भी महसूस करते हैं। यह ऐसी जगह है जहां बच्चे अपनी सेल्फ-एस्टीम को बिल्ट करते हैं। यही नहीं, बच्चे अपने नाम, चीजों और दोस्तों के महत्व को भी समझते हैं। इसके बाद प्री-स्कूल का बच्चा अपनेटीचर्स और सहपाठियों के साथ भी कम्यूनिकेट करना भी सीख जाता है। यह वो सही जगह है जहां बच्चे की लाइफ लॉन्ग प्रोसेस की नींव रखी जाती है।

प्री स्कूल एजुकेशन पर की गयी रिसर्च के अनुसार जिन बच्चों को कम उम्र में सिखाना शुरू कर दिया जाता है, आमतौर पर उसके सोशल स्किल्स जल्दी सुधर जाते हैं। इसके साथ ही भविष्य में उन्हें किसी भी तरह की बिहेवियरल प्रॉब्लम (Behavioral problem) नहीं होती। प्लेफुल तरीके से सीख कर बच्चों को जो सेल्फ कॉन्फिडेंस (Self confidence) मिलता है, वो उनकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट (Personality development) में भी मदद करता है। इस दौरान बच्चे का पॉजिटिव लर्निंग एटीट्यूड (Positive learning attitude), लैंग्वेज में बेसिक फाउंडेशन, कॉम्प्रिहेंशन और मैनेजमेंट और अध्यापकों की मदद करना, उन्हें एजुकेशन के हाय लेवल तक मदद करता है। यह तो थी बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में जानकारी संक्षेप में। अब जानते हैं कि प्री-स्कूल के साइलेंट फीचर्स क्या होते हैं?

बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत

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प्री-स्कूल के साइलेंट फीचर्स क्या हैं? (Silent features of Preschool)

वैसे तो प्री-स्कूल के कई लाभ हैं। जिनमें से कुछ के बारे में आप जान ही गए होंगे। लेकिन, अब हम इनके साइलेंट फीचर्स के बारे में बात कर लेते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • लर्निंग की एक अच्छी शुरुआत होना
  • बच्चों का फन-फिल्ड (Fun-filled) और प्ले मेथड से सीखना
  • बच्चे को लाइफ लॉन्ग लर्निंग का सही मार्ग दिखाना
  • लैंग्वेज और मेथेमैटिकल्स स्किल्स में हाय डेवलपमेंट (High development)
  • सोशल स्किल को डेवलप करने का अच्छा अवसर
  • उनके कम्युनिकेशन स्किल्स का बेहतर होना

बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में अब विस्तार से बात करते हैं। जानिए प्री-स्कूल के लर्निंग गोल्स के बारे में।

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बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत और प्री-स्कूल के लर्निंग गोल्स क्या होते हैं? (Goals of Preschool)

जब बच्चा थोड़ा बड़ा होता है तो इसका अर्थ है कि वो बाहर की दुनिया में समय बिताने के लिए तैयार है। ऐसे में ऐसी जगह उन्हें भेजना जहां न केवल वो अधिक चीजों के बारे में जानें या सीखें बल्कि उसके साथ ही उनका सही विकास भी हो, एक बेहतरीन विचार है। इसमें प्री-स्कूल का नाम सबसे पहले आता है। बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) में उनके लर्निंग गोल्स के बारे में जान लेते हैं:

  • बच्चे प्री-स्कूल में दूसरों से डील करना सीख जाते हैं, जिसका प्रभाव उनकी कॉग्निटिव डेवलपमेंट (Cognitive development) पर पड़ता है। क्योंकि, यहां बड़े ग्रुप में बच्चे प्रैक्टिस और इंटरैक्शन करते हैं
  • प्री-स्कूल एजुकेशन (Preschool education) का दूसरा सबसे जरूरी फीचर है सोशल इंटरैक्शन (Social interaction)। इसमें बच्चे अपनी उम्र के बच्चों और टीचर्स के साथ इंटरैक्ट करना सीखते हैं। प्री-स्कूल जाने वाले बच्चे जल्दी अन्य लोगों से बात करने लगते हैं।
  • क्ले के साथ खेलना, क्रेयॉन्स को पकड़ना सीखना, फ्री कलरिंग की प्रैक्टिस और बोर्ड में लिखने से उनके मोटर डेवलपमेंट (Motor development) में भी सहायता मिलती है। फाइन मोटर और ग्रॉस मोटर डेवलपमेंट भी इस दौरान क्लासरूम में होने वाली विभिन्न एक्टिविटीज के माध्यम से होती है।
  • बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। लेकिन, इसकी विशेषताएं यहीं खत्म नहीं होती। प्री-स्कूल में बच्चे अपनी चीजों की पहचान करना सीख जाते हैं जैसे बैग, टिफिन, वॉटर बॉटल आदि। यह इस उम्र के बच्चों के लिए किसी बड़ी चीज से कम नहीं है।
  • बच्चे ग्रुप में कैसे बात करनी हैं या अपनी बात को कैसे दूसरे के सामने रखना है यह भी सीखते हैं। इससे उनमें छोटे ग्रुप्स में बोलने का आत्मविश्वास पैदा होता है।

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  • इसके अलावा भी इसके कई अन्य लाभ हैं। प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों में पॉजिटिव बदलाव आसानी से देखे जा सकते हैं। बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) यह भी है कि इसमें बच्चे टॉयलेट ट्रेंड हो जाते हैं।
  • टाइम मैनेजमेंट प्री-स्कूल का एक और महत्वपूर्ण फीचर है। असेंबली टाइम, टिफिन टाइम, स्टोरी टाइम, लर्निंग टाइम या फन टाइम आदि के बारे में वो जान जाते हैं।
  • ध्वनि माध्यम से जागरूकता यानी फोनोलॉजिकल अवेयरनेस (Phonological awareness) भी प्री-स्कूल का एक फीचर है। जिसमें बच्चे अल्फाबेट की साउंड को पहचानना शुरू कर देते हैं। वो अल्फाबेट की आवाज को सुन कर उसे पहचानना सीख जाते हैं।
  • प्री-स्कूल में बच्चे को खुद के साथ-साथ अन्य लोगों का ख्याल रखना सिखाया जाता है। शिक्षक बच्चों को दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह स्किल बच्चे के लिए पूरी उम्र लाभदायक सिद्ध होगा।
  • तीन से पांच साल की उम्र के बच्चे जिज्ञासा से भरे होते हैं। उनके सवालों के जवाब कई बार माता-पिता के पास भी नहीं होता। लेकिन, प्री-स्कूल में उन्हें उनके इन सवालों के जवाब आसानी से मिल जाएंगे। इससे न केवल उनकी जिज्ञासा शांत होगी। बल्कि, एक्सप्लोरेशन, एक्सपेरिमेंटेशन और कन्वर्सेशन के माध्यम से वो और भी बहुत कुछ सीखेंगे।
  • संक्षेप में कहा जाए तो बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) बहुत अधिक है। क्योंकि, प्री-स्कूल से बच्चे बहुत अधिक सीखते हैं। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्ली एजुकेशन रिसर्च (National Institute of Early Education Research) के अनुसार भी जो बच्चे किसी अच्छे प्री-स्कूल में जाते हैं उनमें रीडिंग, मैथ और साइंस स्किल्स उन लोगों की तुलना में बेहतर होते हैं जो प्री स्कूल नहीं जाते।

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उम्मीद है कि बच्चों की लाइफ में प्री-स्कूल की एहमियत (Role of Preschool) के बारे में आप जान गए होंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्री-स्कूल में पाई गयी एजुकेशन और स्किल्स पूरी उम्र उनका साथ देते हैं। इस दौरान वेल-ट्रेंड टीचर जो नींव रखते हैं, वो बच्चों को न केवल जीवन में सफल बनाने में मदद करती है, बल्कि उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाने में भी मददगार है। एक क्वालिटी चाइल्डहुड एजुकेशन बच्चे को कॉग्निटिव बिहेवियरल (Cognitive behavioral) और सोशल स्किल्स (Social skills) सिखाती है, जो वो घर में नहीं सीख सकता।

अगर आपका बच्चा भी तीन से पांच साल का है और आप निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं कि आपको उसे प्री-स्कूल में भेजना चाहिए या नहीं। तो इसके फायदों के बारे में विचार करें। अपने बच्चे के लिए प्री-स्कूल सेलेक्ट करते हुए भी कई चीजों का ध्यान रखें जैसे साफ-सफाई, ट्रेंड स्टाफ, सुरक्षा आदि। क्योंकि, एक अच्छे प्री-स्कूल में भेज कर ही उसका सही विकास होगा और आप भी निश्चिन्त रहेंगे। अगर आपके मन में इस बारे में कोई भी सवाल है तो किसी एक्सपर्ट से इस बारे में बात करना न भूलें।

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सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड