home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

पियाजे के विकासात्मक चरण- क्या है बच्चों के विकास का यह सिद्धांत

पियाजे के विकासात्मक चरण- क्या है बच्चों के विकास का यह सिद्धांत

जन्म के बाद से बच्चे का न सिर्फ शारीरिक, बल्कि बौद्धिक विकास भी होता है और उनका यह बौद्धिक या संज्ञानामत्क विकास कई चरणों में होता है। बच्चों के इस विकास के बारे में जीन पियाजे ने अपने सिद्धांत में बताया है। उसके अनुसार पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development) क्या है और पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development) को किस तरह उम्र के अनुसार बांटा गया है? जानने के लिए पढ़िए यह आर्टिकल।

कौन थे जीन पियाजे? (Who was Jean Piaget)

जीन पियाजे (Jean Piaget) स्विस डेवलपमेंट साइकोलॉजिस्ट थे जिन्होंने 20वीं सदी में बच्चों के विकास के बारे में गहराई से अध्ययन किया और बच्चों के बौद्धिक या संज्ञानात्मक विकास का उनका सिद्धांत 1936 में पब्लिश हुआ, जो आज भी शिक्षा और साइकोलॉजी के कई क्षेत्रों मे इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने जन्म से लेकर प्री टीन तक बच्चों के विकास का बारीकी से अध्ययन किया। उनका सिद्धांत बताता है कि बच्चे 4 अलग-अलग मानसिक विकास के क्रम से गुजरते हैं इसे ही पियाजे के विकासात्मक चरण कहा जाता है। उनका सिद्धांत सिर्फ इस बात पर फोकस नहीं करता कि बच्चे कैसे ज्ञान प्राप्त करते हैं, बल्कि उनकी बुद्धि की प्रकृति समझने में भी मदद करता है। पियाजे के विकासात्मक चरण में शामिल है-

  • भाषा (language)
  • नैतिकता (morals)
  • याददाश्त (memory)
  • तर्क बुद्धि (Reasoning)

पियाजे ने अपने सिद्धांत में बच्चों के विकास के बारे में कई अनुमान लगाए जैसे:

  • बच्चे अपने अनुभवों के आधार पर ज्ञान अर्जित करते हैं।
  • बच्चे बड़े बच्चे या व्यस्कों से प्रभावित हुए बिना अपने आप चीजें सीखते हैं।
  • बच्चे कुदरती रूप से सीखने के लिए प्रेरित होते हैं, और उन्हें रिवार्ड या प्रेरणा (motivation) की जरूरत नहीं होती है।

और पढ़ें- माइक्रोसेफली- जब बच्चों के मस्तिष्क का नहीं होता सही विकास

पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development)

पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development)

बच्चों के विकास के संबंध में किए गए अपने अध्ययन के आधार पर पियाजे ने उनके विकास को 4 चरणों में बांटा है। आइए, जानते है पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development) के बारे में-

सेंसरिमोटर स्टेज (Sensorimotor Stage)

पियाजे के विकासात्मक चरण की इस स्टेज में जन्म से 2 साल तक के बच्चे आते हैं। इस स्टेज की कुछ विशेषताए हैं और इसमें बच्चों में विकास संबंधी निम्न बदलाव आते हैं-

  • नवजात अपनी गतिविधि और संवेदनाओं (sensations) के जरिए दुनिया को जानता है।
  • बच्चे चूसना, पकड़ना, सुनना और देखने जैसे बुनियादी काम के जरिए दुनिया के बारे में जानते हैं।
  • वह सीखते हैं कि जो चीजे दिखाई नहीं देती, वह भी मौजूद है।
  • वह अपने आसपास के लोगों और चीजों से अलग हैं।

संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) के इस शुरुआती चरण में नवजात (infants) और बच्चे (toddlers) अपने संवेदी अनुभव (sensory experiences) और चीजों को इधर-उधर करते सीखते हैं। इस शुरुआती चरण में बच्चे का पूरा अनुभव बुनियादी सजगता, इंद्रियों और मोटर प्रतिक्रियाओं (motor responses) के माध्यम से होता है। सेंसरिमोटर स्टेज के दौरान बच्चे नाटकीय विकास और सीखने के दौर से गुजरते हैं। जैसे-जैसे बच्चे पर्यावरण के संपर्क में आते हैं वह सीखते हैं कि दुनिया कैसे काम करती है।

इस दौरान होने वाला संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) अपेक्षाकृत कम समय में होता है। बच्चे न सिर्फ खिसकना और चलना सीखते हैं, बल्कि वह जिन लोगों के संपर्क मे आते हैं उनसे भाषा के बारे में भी बहुत कुछ सीखते हैं।

और पढ़ें- ब्लू बेबी सिंड्रोम के कारण बच्चे का रंग पड़ जाता है नीला, जानिए क्यों?

प्रीऑपरेशनल स्टेज (Preoperational Stage)

पियाजे के विकासात्मक चरण की इस स्टेज में 2 से 7 साल तक के बच्चे आते हैं। इस स्टेज की कुछ विशेषताए हैं और इसमें बच्चों में विकास संबंधी निम्न बदलाव आते हैं-

  • बच्चे प्रतीकात्मक (symbolically) रूप से सोचने लगते हैं और किसी चीज को रीप्रेजेंट करने के लिए शब्दों और चित्रों का उपयोग करना सीखते हैं।
  • इस स्टेज पर बच्चे थोड़े अहंकारी (egocentric) हो जाते हैं और दूसरों के नजरिए से किसी चीज को देखने में उन्हें मुश्किल होती है।
  • उनकी भाषा और सोच बेहतर होती है, फिर भी वह अभी बहुत ठोस शब्दों (concrete terms) में चीजों के बारे में सोचते हैं।
  • वैसे तो पिछले स्टेज में ही बच्चे भाषा सीखना शुरू कर देते हैं, लेकिन यह भाषा के विकास का अहम चरण है यानी इस दौरान वह अच्छी तरह से भाषा सीखते हैं।

इस स्तर पर बच्चे नाटक के माध्यम से सीखते हैं, लेकिन चीजों को तर्कसंगत ढंग से समझने और दूसरे के नजरिए से देखने में मुश्किल आती है। उदाहरण के लिए एक शोधकर्ता क्ले (clay) को दो बराबर भागों में बांट देता है। एक को गोल बनाता है और दूसरे को चिपटा बनाता है। और इस स्टेज पर बच्चे को चुनने के लिए कहता है तो क्योंकि चिपटा क्ले बड़ा दिख रहा है तो बच्चा उसे ही चुनता है, हालांकि दोनों का साइज समान ही है, लेकिन इस स्टेज पर बच्चे इस बात को नहीं समझ पाते हैं।

कॉन्क्रीट ऑपरेशनल स्टेज (Concrete Operational Stage)

पियाजे के विकासात्मक चरण की इस स्टेज में 7 से 11 साल तक के बच्चे आते हैं। इस स्टेज की कुछ विशेषताए हैं और इसमें बच्चों में विकास संबंधी निम्न बदलाव आते हैं-

  • इस स्टेज पर बच्चे तर्कसंगत (logically) ढंग से सोचने लगते हैं जैसे उन्हें समझ आ जाता है कि एक चौड़े कप में ज्यादा फैला हुआ दिख रहा लिक्विट एक लंबे और पतले कप में रखे लिक्विड की मात्रा समान है। सिर्फ कप के आकार के कारण वह अलग दिख रहा है।
  • उनकी सोच अधिक तर्कसंगत और ऑर्गनाइज्ड़ होती है, फिर भी ठोस नहीं होती।
  • बच्चे इनडक्टिव लॉजिक का इस्तेमाल करने लगते हैं या सामान्य सिद्धांत के लिए खास जानकारी के साथ तर्क करते हैं।

बच्चे इस स्टेज पर भी अपनी सोच में बहुत ठोस और शाब्दिक हैं, लेकिन वह तर्क का अच्छी तरह उपयोग करना सीख जाते हैं। पिछले स्टेज का अहंकार खत्म हो जाता है और वह इस बात को अच्छी तरह समझने लगते हैं कि दूसरे लोग किसी स्थिति को कैसे देख सकते हैं।

इस स्टेज पर बच्चे की सोच अधिक तार्किक हो जाती है, यह बहुत दृढ़ (rigid) भी हो सकती है जिसे बदलना आसान नहीं होता। इस स्टेज पर बच्चे अमूर्त (abstract) और काल्पनिक अवधारणाओं (hypothetical concepts) के साथ संघर्ष करते हैं।

और पढ़ें- संक्रमण से बचाव के लिए इन बातों का रोजाना रखें ध्यान, बच्चों के खिलौनों को न करें इग्नोर

फॉर्मल ऑपरेशनल स्टेज (Formal Operational Stage)

पियाजे के विकासात्मक चरण की इस स्टेज में 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चे आते हैं। इस स्टेज की कुछ विशेषताए हैं और इसमें बच्चों में विकास संबंधी निम्न बदलाव आते हैं

  • इस उम्र तक बच्चे/टीनेज असामान्य रूप से सोचना शुरू कर देते हैं और काल्पनिक समस्याओं (hypothetical problems) के बारे में तर्क देते हैं।
  • टीनेज मोरल, साइकोलॉजिकल, एथिकल, सोशल और पॉलिटिकल मुद्दों के बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं जिसमे थियोरेटिकल और एब्स्ट्रैक्ट रिजनिंग की जरूरत पड़ती है।

इस सिद्धांत के आखिरी चरण में लॉजिक में वृद्धि होती है, साथ ही इसमें डिडक्टिव रिजनिंग और अमूर्त विचार (abstract ideas) की समझ में वृद्धि होती है। बच्चे अधिक वैज्ञानिक तरीके से सोचने लगते हैं।

पियाजे बच्चों के बौद्धिक विकास (intellectual development) को मात्रात्मक प्रक्रिया यानी सिर्फ क्वांटिटी बढ़ाने के नजरिए से नहीं देखते हैं। सिर्फ बहुत अधिक जानकारी जुटाना ही उनके नजरिए में विकास नहीं है, बल्कि सोचने का तरीका बदलना महत्वपूर्ण है।

पियाजे के विकासात्मक चरण को बच्चों के सीखने और विकास के क्रम में कैसे लागू करें? (How to apply Piaget’s stages to learning and development)

पियाजे के विकासात्मक चरण (Piaget stages of development)

पियाजे के विकासात्मक चरण को बच्चों की शिक्षा में लागू करने के लिए यह समझना जरूरी है कि वह अभी विकास के किस चरण में है। टीचर्स और पैरेंट्स बच्चे को एक्सपेरिमेंट और वातावरण को एक्सप्लोर करने का मौका दें, तो वह अलग-अलग कॉन्सेप्ट्स को समझते हैं।

प्रीस्कूल (preschool) और किंडरगार्टेन (kindergarten) के बच्चों को प्ले बेस्ड स्कूल प्रोग्राम जरिए बहुत कुछ सिखाया जा सकता है जहां वह गलतियां करके सीखते हैं और असली दुनिया से उनका सामना होता है। पियाजे के सिद्धांत (Piaget’s philosophy) को किसी भी ऐजुकेशन प्रोग्राम में शामिल किया जा सकता है।

और पढ़ें- ऑटिज्म में डायट का भी ख्याल रखना है जरूरी, मिलेंगे सकारात्मक परिणाम

विकास के अलग-अलग चरणों में इस तरह शामिल करें पियाजे का सिद्धांत

सेंसरिमोटर (Sensorimotor)

  • खेलने के लिए असली चीजें दें।
  • खेल को पांच इंद्रियों (five senses) से जोड़े।
  • छोटे बच्चों के लिए रूटीन बनाएं। यह बच्चों में कम्यूनिकेशन स्किल डेवलप करने में मददगार है।

प्रीऑपरेशनल (Pre operational)

  • बच्चों कोई काम करके ही उसे अच्छी तरह सीखते हैं, तो उन्हें करने दें। उन्हें अपने आसपास की चीजों जैसे किताब, लोग, गेम और वस्तुओं से सक्रिय रूप से जुड़ने दें।
  • बच्चे जब अपने डेली रूटीन (daily routine) बिजी हो तो उनसे सवाल करें और खुद ही उन्हें इसका जवाब सोचने दें।
  • नई चीजे दिखाएं और उसके बारे में सवाल करने के लिए बच्चे को प्रेरित (encourage) करें।

कॉन्क्रीट ऑपरेशनल (Concrete operational)

  • टाइमलाइन बनाएं, 3 डायमेंशन वाले मॉडल, साइंस एक्पेरिमेंट्स और ऐसे ही दूसरे तरीके एब्स्ट्रैक्ट कॉन्सेप्ट (abstract concepts) को समझाएं।
  • विश्लेषणात्मक सोच (analytical thinking) के विकास के लिए ब्रेन टीजर (brain teasers) और पहेलियों की मदद लें।

फॉर्मल ऑपरेशनल (Formal operational)

  • किसी कॉन्सेप्ट को स्टेप बाय स्टेप समझाएं और इसके लिए चार्ट और दूसरी विजुअल चीजों का इस्तेमाल करें।
  • काल्पनिक स्थितियों (hypothetical situations) को एक्सप्लोर करने के लिए प्रेरित करें। आप उसे वर्तमान आयोजन या सोशल मुद्दे से जोड़ सकते हैं

बच्चों का बौद्धिक विकास क्रमवार तरीके से होता है और उनकी तर्कशक्ति व कल्पनाशक्ति उम्र के हिसाब से अपने आप बढ़ती है। बच्चा खुद ब खुद अपने आसपास से चीजे सीखता है और उसकी बुद्धि का विकास होता है। पियाजे का सिद्धांत इसी अवधारणा पर आधारित है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर badge
Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/02/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
x