शिशु को तैरना सिखाने के होते हैं कई फायदे, जानें किस उम्र से सिखाएं और क्यों

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट May 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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जब एक बच्चा मां के गर्भ में पल रहा होता है, उसका परिवार तभी से उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की परवाह करना शुरू कर देता है। इसके बाद, जब बच्चे का जन्म होता है, तो वे उसकी परवरिश के दौरान भी सभी जरूरी बातों का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपने कई जाने-पहचाने कलाकारों को उनके छोटे शिशु को तैरना सिखाते हुए भी देखा होगा। आमतौर पर लोगों को लगता है कि एक छोटे बच्चे को तैरना सिखाना हाई क्लास फैमिली दिखावे के लिए कर सकती हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है।

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छोटे शिशु को तैरना सिखाना क्या है?

बता दें कि छोटे शिशु को तैरना सिखाने के बहुत फायदे हैं। शिशु को तैरना सिखाना उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कई प्रकार की गतिविधि की ही तरह हो सकती है। यहां तक कि तैराकी पूरे शरीर के लिए एक अच्छी एक्सरसाइज भी मानी जाती है। नवजात बच्चों को तैरना सिखाने के कई शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं, जिसके बारे में आप यहां पर जान सकते हैं।

छोटे शिशु को तैरना सिखाने की सही उम्र क्या है?

वैसे तो बच्चे को आप चार साल तक की उम्र से तैरना सिखाना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, बच्चे को अचानक से तैरना सिखाने के बजाय जब वह दो साल का हो जाए, तो उसे अपने साथ पूल में लें जाएं। ताकि बच्चे का भी रूझान तैराकी में हो। इसके अलावा अगर आपका बच्चा तीन साल में भी पूरी तरह से चलना सीख जाता है, तो भी आप अपने शिशु को तैरना सिखा सकते हैं।

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शिशु को तैरना सिखाने के क्या फायदे हैं?

कई अध्ययनों से दावा किया गया है नवजात को तैरना सिखाने से उसमें आत्मविश्वास बढ़ता है और उसके ब्रेन के कार्य करने की क्षमता भी तेज होती है। शिशु को तैरना सिखाने के और भी निम्न फायदे हैं, जिनमें शामिल हैंः

1. किसी काम में मन लगाने की क्षमता बढ़ती है

बच्चो में तैराकी के परिणाम जानने के लिए ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय द्वारा 7,000 से अधिक बच्चों पर एक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में शामिल बच्चों पर चार सालों तक शोध किया गया। जिसमें अलग-अलग उम्र के तीन से पांच साल के बच्चे शामिल थे। अध्ययन में पाया गया कि तैरने वाले बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास की गति उनके उम्र के अन्य बच्चों से ज्यादा तेजी से होती है।

इन बच्चों में अन्य बच्चों के मुकाबले कुछ बदलाव देखे गए हैं, जैसेः

  • बच्चे ज्यादा हंसमुख थे
  • इनका मौखिक कौशल बेहतर था
  • कोई भी नया काम सीखने में आगे थे
  • उनमें भाषा का विकास बेहतर था।

ऐसा क्यों होता है?

दरअसल, तैरने की प्रक्रिया के दौरान क्रॉस-पैटर्निंग मूवमेंट होता है, जो पूरे मस्तिष्क में न्यूरॉन्स और कॉर्पस कॉलोसम का निर्माण करते हैं। यह ब्रेन के एक तरफ से दूसरे तक संचार, प्रतिक्रिया और मॉड्यूलेशन की सुविधा प्रदान करने में मदद करता है।

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2. पानी का डर खत्म होता है

कई बच्चों को पानी से काफी चिड़ होती है। उन्हें पानी में जाने से भी डर लगता है। ऐसे में तैरने के दौरान वे पानी से अच्छी दोस्ती कर सकते हैं।

3. लाइफ सेफ्टी ट्रिक

शिशु को तैरना सिखाने का सबसे बड़ा लाभ होता है कि वे मुसीबत के समय में खुद की और दूसरों की जान बचा सकते हैं। यानी पानी में डूबने का खतरा  काफी हद तक कम हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) के अनुसार, चार साल से छोटे बच्चों में मृत्यु का एक बड़ा कारण पानी में डूबना भी होता है।

4. अस्थमा के जोखिम को कम करे

शोध के मुताबिक शिशु को तैरना सिखाने से भविष्य में बच्चे में अस्थमा का जोखिम कम हो सकता है। तैरने से फेफड़ों की कार्यक्षमता और कार्डियोपल्मोनरी फिटनेस में सुधार आती है। कार्डियोपल्मोनरी फिटनेस दिल और फेफड़ों के कार्य से जुड़ी होती है।

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5. आत्मविश्वास में सुधार ला सकता है

साल 2010 के किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, ऐसे बच्चे जिन्हें दो साल से चार साल तक के बीच में तैरना सिखाया गया था, अन्य बच्चों के मुताबले उनका आत्मविश्वास काफी अधिक था। ऐसे बच्चे अपनी हर जरूरत के लिए अपने माता-पिता या किसी अन्य पर निर्भर रहना नहीं पसंद करते हैं। और ऐसे बच्चे खुद को हमेशा स्वतंत्र महसूस करते हैं। इनका खुद पर आत्म नियंत्रण अधिक होता है। साथ ही, इनमें अन्य बच्चों के मुकाबले अपने कार्य में सफल होने की इच्छा भी काफी अधिक होती है।

6. स्वस्थ मांसपेशियों का निर्माण होता है

शिशु को तैरना सिखाने से उनमें मांसपेशियों के विकास और उनके नियंत्रण को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा उनके शरीर के जोड़ें भी स्वस्थ होते हैं।

7. नींद के पैटर्न में सुधार आता है

तैराकी सीखने के दौरान पूल में बच्चा शारीरिक रूप से अपनी बहुत अधिक ऊर्जा खर्चा करता है। जिससे बाहर निकलने के बाद उनका शरीर काफी थक गया होता है। शरीर की थकान दूर करने के लिए उन्हें अच्छी नींद आ सकती है। तो अगर आप अपने शिशु को तैरना सिखाना शुरू करते हैं, तो जल्द ही उसके जागने, सोने का समय भी अपने आप निश्चित हो सकता है।

छोटे बच्चों को तैराकी सिखाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

छोटे बच्चों को तैराकी सिखाने के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • पूल का पानी क्लोरीन युक्त हो सकता है। जिसमें तैरने से आंखों में और त्वचा पर जलन की समस्या हो सकती है।
  • क्लोरीनयुक्त पानी में तैरने से सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
  • बहुत ज्यादा तैरने से हृदय प्रणाली प्रभावित हो सकती है।

छोटे बच्चों को तैराकी सिखाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

छोटे बच्चों को स्विमिंग सिखाते समय आपके कुछ खास बातों को ध्यान में रखना चाहिए, जैसेः

  • नवजात को स्विमिंग कराते समय आपको हमेशा बच्चे के साथ रहना चाहिए। ताकि, अगर उसे किसी तरह की समस्या हो, तो आप उसकी मदद कर सकें।
  • आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फर्स्ट एड की उचित सुविधा और अनुभवी या लाइफ गार्ड बच्चे के तैरने वाली स्थान पर होने चाहिए।
  • शिशु को कभी भी अकेले न तैरने दें।
  • बच्चे को हमेशा पूल में ही तैरना सिखाएं।
  • पूल के आस-पास पानी रहता है। जिससे बच्चा फिसल सकता है। इसलिए बच्चे को पूल के आस-पास धीरे-धीरे चलने के लिए कहें।
  • स्विमिंगकरते समय बच्चे को कुछ भी खाने के लिए न दें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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