हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) यानी एच. पाइलोरी (H. pylori) एक तरह का बैक्टीरिया है। यह जर्म्स हमारे शरीर में एंटर करता है और डायजेस्टिव ट्रैक्ट में रहता है। कई सालों के बाद यह जर्म्स स्मॉल इंटेस्टाइन के ऊपर पार्ट या पेट की लायनिंग में घावों का कारण बन सकते हैं, जिन्हें अल्सर कहा जाता है। कई लोगों में इसके कारण होने वाला इंफेक्शन स्टमक कैंसर का कारण भी बन सकता है। इस बैक्टीरिया के कारण होने वाले इंफेक्शन को हेलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन के नाम से जाना जाता है। इस इंफेक्शन का ट्रीटमेंट संभव है। आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) के बारे में। एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) से पहले, इस समस्या के बारे में जान लेते हैं।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) यानी एच. पाइलोरी (H. pylori): पाएं इस बारे में जानकारी
एच. पाइलोरी (H. pylori) यानी हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) इंफेक्शन सामान्य है। ऐसा माना जाता है कि दुनिया की जनसंख्या का दो तिहाई लोगों में यह बैक्टीरिया पाया जाता है। अधिकतर लोगों में यह अल्सर और अन्य लक्षणों का कारण नहीं बनता है। अगर आपको यह समस्या है, तो जर्म्स को नष्ट करने और घावों को हील करने के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। अगर आपको अल्सर है, तो आप पेट में दर्द महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा इसके अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:
यह अल्सर पेट या इंटेस्टाइन में ब्लीड कर सकता है जो बेहद खतरनाक है। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें:
हालांकि, इस इंफेक्शन के कारण स्टमक कैंसर होना सामान्य नहीं है। लेकिन, अगर ऐसा हो तो जानलेवा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत उपचार जरूरी है। अब जानिए एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) के बारे में।
एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori)
एच. पाइलोरी ट्रीटमेंट के बारे में कई स्टडीज की गई हैं। ऐसा पाया गया है कि अधिकतर ट्रीटमेंट्स पेट में बैक्टीरिया की संख्या को कम कर सकते हैं। लेकिन, उन्हें परमानेंट रिमूव करने में यह ट्रीटमेंट प्रभावी नहीं हैं। ऐसे में एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) की शुरुआत से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें। क्योंकि डॉक्टर की सलाह के बाद बताए ट्रीटमेंट से एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) को रिप्लेस नहीं किया जा सकता है। डॉक्टर के अप्रूवल के बाद ही आप इन नेचुरल ट्रीटमेंट्स को एडजुवेंट थेरेपी के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पारंपरिक दवाओं का प्रभाव बढ़ सकता है। आइए, जानें एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) में किन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है:
शहद में कई एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं और इसका इस्तेमाल पुराने समय से ही दवाई के रूप में होता आया है। ऐसा भी माना जाता है कि होने के इस्तेमाल से गैस्ट्रिक एपिथेलियल सेल्स (Epithelial cells) में एच. पाइलोरी की ग्रोथ सप्रेस हो सकती है। यही नहीं, हनी के इस्तेमाल से स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट्स का ट्रीटमेंट टाइम भी कम हो सकता है। हालांकि, अभी इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी बाकी है।
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एलोवेरा एक हर्बल रेमेडी है जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों की स्थिति में किया जा सकता है, जैसे:
- कब्ज (Constipation)
- डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification)
- डायजेस्टिव हेल्थ (Digestive health)
- घावों को भरना (Wound-healing)
ऐसा माना जाता है कि एलोवेरा के पत्तों के अंदर का जेल इस इंफेक्शन की ग्रोथ और इसे नष्ट करने के लिए प्रभावी है। हालांकि, ऐसा भी माना जाता है किएलोवेरा को अगर एंटीबायोटिक्स के कॉम्बिनेशन में प्रयोग किया जाए, तो यह हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) यानी एच. पाइलोरी इंफेक्शन में अधिक असरदार साबित हो सकता है। अब जानते हैं एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) में अगले ट्रीटमेंट के बारे में।
ग्रीन टी हेल्दी और सबसे अधिक प्रयोग में लाया जाने वाला पेय है, जिसमें कई एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं। ऐसा पाया गया है कि इसके इस्तेमाल से हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) बैक्टीरिया की संख्या कम होती है। यही नहीं, इस ग्रीन टी के सेवन से स्टमक इंफ्लेमेशन से भी राहत मिलती है। इंफेक्शन के दौरान इस चाय को पीने से गैस्ट्रिटिस की गंभीरता भी कम होती है।
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प्रोबायोटिक्स (Probiotics)
प्रोबायोटिक्स लाइव माइक्रोऑर्गनिज्म्स को कहा जाता है, जो जिसके कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। प्रोबायोटिक्स कई तरह के होते हैं। कई लोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन (Gastrointestinal infection) से बचने के लिए बिफडोबैक्टीरियम (Bifidobacterium) का इस्तेमाल करते हैं जो डेयरी और फर्मेन्टेड प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया को रिप्लेनिश (Replenish) करने में मदद करते हैं। वे यीस्ट ओवरग्रोथ के जोखिम को भी कम कर सकते हैं।
एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) में दूध (Milk)
लैक्टोफेरिन (Lactoferrin) एक ग्लाइकोप्रोटीन जो दूध में पाया जाता है। यह ग्लायकोप्रोटीन इस इंफेक्शन से राहत पहुंचाने में मददगार है। इसके साथ ही मेलेनोइडिन नाम का कंपाउंड इस बैक्टीरिया के ग्रोथ को रोक सकता है। मेलेनोइडिन वो कंपाउंड है, जो शुगर लैक्टोज और डेयरी उत्पादों व दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन कैसिइन (Casein) के केमिकल रिएक्शन से बनता है। रीसर्च यह बताती हैं कि मेलेनोइडिन एच. पाइलोरी के ग्रोथ को कम कर सकता है।
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फोटोथेरेपी (Phototherapy)
एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट में अगला है फोटोथेरेपी (Phototherapy)। स्टडीज यह बताती हैं कि हेलिकोबैक्टर पाइलोरी यानी एच. पाइलोरी बैक्टीरिया अल्ट्रावॉयलेट लाइट के प्रति सेंसिटिव होते हैं। फोटोथेरेपी के दौरान, अल्ट्रावॉयलेट लाइट सोर्स पूरे पेट को एलुमिनेट करती है। फोटोथेरेपी से पेट में बैक्टीरिया की संख्या कम होती है। हालांकि, रोशनी के कुछ दिनों बाद बैक्टीरिया फिर से रिपॉपुलेट हो सकते हैं। यह ट्रीटमेंट उन लोगों के लिए बेहद प्रभावी है, जो एंटीबायोटिक्स नहीं ले सकते हैं।
एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) में ब्रोकोली स्प्राउट्स (Broccoli sprouts)
ब्रोकोली स्प्राउट्स में पाए जाने वाले एक कंपाउंड को सल्फोराफेन (Sulphoraphane) कहा जाता है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) के अगेंस्ट इस कंपाउंड को प्रभावी माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि इससे गैस्ट्रिक इंफ्लेमेशन कम होती है। यही नहीं, टाइप 2 डायबिटीज और एच. पाइलोरी दोनों समस्याओं से पीड़ित लोगों में ऐसा देखा गया है कि ब्रोकली स्प्राउट पाउडर बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार है और इसने कार्डियोवैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स में भी सुधार किया जा सकता है।
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यह तो थी जानकारी एच. पाइलोरी के नेचुरल ट्रीटमेंट (Natural Treatment for H. pylori) के बारे में। एच. पाइलोरी एक गंभीर गैस्ट्रिक इंफेक्शन जो कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। किंतु, एच. पाइलोरी का इलाज करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। क्योंकि बैक्टीरिया पारंपरिक एंटीबायोटिक दवाओं के लिए रेसिस्टेंट बन गए हैं। ऐसे में कुछ नेचुरल रेमेडीज रोगी के लिए लाभदायक हो सकती हैं। लेकिन इन नेचुरल तरीकों का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। अगर इसके बारे में आपके मन में कोई भी सवाल है तो डॉक्टर से इस बारे में अवश्य जानें।
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