पाचन के लिए ट्रिप्सिन एंजाइम क्यों जरूरी है? जानिए इसके कार्य

    पाचन के लिए ट्रिप्सिन एंजाइम क्यों जरूरी है? जानिए इसके कार्य

    ट्रिप्सिन एक एंजाइम है जो प्रोटीन के डायजेशन में मदद करता है। छोटी आंत में ट्रिप्सिन प्रोटीन को तोड़ता है और पेट में शुरू हो चुकी पाचन की प्रक्रिया को जारी रखता है। इसे प्रोटियोलायटिक एंजाइम (Proteolytic enzyme) या प्रोटीनेज (Proteinase) भी कहा जाता है। ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) के कार्य में प्रमुख पाचन में मदद करना है। इसके अलावा भी इसके अन्य कार्य हैं जिनके बारे में इस लेख में जानकारी दी जा रही है।

    ट्रिप्सिन के कार्य क्या हैं? (Trypsin function)

    बता दें कि ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) इनएक्टिव फॉर्म में पैंक्रियाज के जरिए निर्मित किया जाता है। जिसे ट्रिप्सिनोजेन (Trypsinogen) कहा जाता है। यह कॉमन बाइल डक्ट के जरिए स्माल इंटेस्टाइन में प्रवेश करता है और एक्टिव ट्रिप्सिन में कंवर्ट हो जाता है। एक्टिव ट्रिप्सिन दूसरे दो डायजेस्टिव प्रोटीनेजेस जैसे कि पेप्सिन (Pepsin) और कायमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin) के साथ क्रिया करता है और डायट्री प्रोटीन को पेप्टाइडस ओर एमिनो एसिड्स (Amino acids) में तोड़ देता है। ये एमिनो एसिड मसल ग्रोथ, हॉर्मोन प्रोडक्शन और दूसरे शरीर के कार्यों के लिए जरूरी हैं। ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं। जिनमें निम्न शामिल हैं।

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    कुअवशोषण (Malabsorption)

    अगर पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) का निमार्ण नहीं करता है तो डायजेस्टिव से संबंधित परेशानियां होने लगती हैं जिसमें एक है कुअवशोषण। जिसमें खाने को पचाने और खाने से पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है। समय के साथ यह आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का कारण बन सकता है जिसकी वजह से कुपोषण (Malnutrition) और एनीमिया (Anemia) हो सकता है।

    पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis)

    डॉक्टर ब्लड में ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) के लेवल को चेक करेंगे और पैंक्रियाटाइटिस का निदान करेंगे। पैंक्रियाटाइटिस पैंक्रियाज पर होने वाली इंफ्लामेशन है जो निम्न का कारण बन सकती है।

    सिस्टिक फ्राइब्रोसिस (Cystic fibrosis)

    डॉक्टर्स ब्लड और स्टूल में मौजूद ट्रिप्सिन और कायमोट्रिप्सिन की जांच करते हैं। ब्लड में अधिक मात्रा में मौजूद ये दोनों एंजाइम जेनेटिक डिसऑर्डर साइटिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis) का संकेत होते हैं। व्यस्कों में स्टूल में ट्रिप्सिन और कायमोट्रिप्सिन की कम मात्रा सिस्टिक फ्राइब्रोसिस (Cystic fibrosis) और पैंक्रियाटिक डिजीज का संकेत होती है।

    ट्रिप्सिन और कैंसर (Trypsin and cancer)

    कैंसर के इलाज में ट्रिप्सिन का उपयोग को लेकर की गई रिचर्स के नतीजे मिले जुले हैं। कुछ रिसर्च में बताया गया है कि ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) कैंसर के विकार की दर को धीमा करता है वहीं कुछ रिसर्च में कहा गया है कि यह कुछ प्रकार के कैंसर को फैलने को बढ़ावा देता है। इस विषय पर अभी और रिसर्च किए जाने की आवश्यकता है।

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    ट्रिप्सिन एंजाइम की उपलब्धता (Trypsin enzyme availability)

    कई प्रकार के सप्लिमेंट्स उपलब्ध है जिनमें ट्रिप्सिन पाया जाता है और जिनको लेने के लिए प्रिस्क्रिप्शन होना अनिवार्य नहीं होता। ज्यादातर जिन सप्लिमेंट़स में ट्रिप्सिन होता है उसे मीट प्रोड्यूसिंग एनिमल के पैंक्रियाज से निकाला जाता है। इन सप्लिमेंट्स के कुछ उपयोगों में शामिल हैं:

    • अपच का इलाज
    • आस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) से होने वाले दर्द और सूजन को कम करना
    • स्पोर्ट्स इंजरी से रिकवरी को प्रमोट करना

    किसी भी प्रकार की दवा या सप्लिमेंट़स का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें।

    ट्रिप्सिन एंजाइम के साइड इफेक्ट्स (Trypsin Enzyme Side Effects)

    टिप्सिन को सुरक्षित माना जाता है जब जिसे क्लीनिंग और घाव को भरने के लिए स्किन पर लगाया जाता है, लेकिन इस पर पर्याप्त रिसर्च नहीं हुई है कि यदि इसे ओरली लिया जाए तो यह कितना सुरक्षित है? कुछ अध्ययनों में ऐसा माना गया है कि ट्रिप्सिन को जब दूसरे डायजेस्टिव एंजाइम्स के साथ लिया जाता है तो यह किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स का कारण नहीं बनता। जब ट्रिप्सिन को स्किन पर अप्लाई किया जाता है तो यह दर्द और अस्थाई जलन का कारण बनता है। ओवर द काउंटर एंजाइम्स के ओरली हाय डोज से जीआई ट्रेक्ट में डिसकंफर्ट होता है।

    बता दें कि ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) के उपयोग से एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis) के मामले बेहद दुर्लभ हैं जो एक प्रकार का सीवियर एलर्जिक रिएक्शन है। एनाफिलेक्सिस का लिंक ओरल कायमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin) से है। जो कि एक मेडिकल इमरजेंसी कंडिशन है। जिसमें निम्न लक्षण शामिल हैं।

    • सांस लेने में तकलीफ और घरघराहट की आवाज आना
    • जीभ या गले में सूजन
    • गले में जकड़न (Constricted throat)
    • बात करने में परेशानी
    • खांसी आना
    • चक्कर आनाअगर ट्रिप्सिन सप्लिमेंट को लेने के बाद किसी को ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) डायट्री सप्लिमेंट्स को अप्रूव नहीं करता है। इसलिए सप्लिमेंट लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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    ट्रिप्सिन एंजाइम लेने से पहले इन बातों का ध्यान रखें (Things to keep in mind before taking trypsin enzyme)

    कॉन्ट्राइंडिकेशन (Contraindication) वह स्थिति है जिमसें कोई दवा, ट्रीटमेंट और ड्रग या सप्लिमेंट इसके पोटेंशियल हार्म के चलते नहीं दिया जाता है। अक्सर दो दवाएं और सप्लिमेंट्स एक साथ नहीं लिए जाते हैं। वहीं किसी विशेष स्थिति का सामना कर रहे व्यक्ति को दवाएं और सप्लिमेंट्स नहीं दिए जाते क्योंकि ये स्थिति को और भी बुरा बना सकते हैं। ट्रिप्सिन के कॉन्ट्राइंडिकेशन में निम्न शामिल हैं।

    • गर्भावस्था (गर्भवती महिलाओं और उनके अजन्मे बच्चों के लिए ट्रिप्सिन की सुरक्षा को साबित करने के लिए पर्याप्त नैदानिक शोध डेटा उपलब्ध नहीं है)।
    • स्तनपान कराने वाली महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए ट्रिप्सिन की सुरक्षा को साबित करने के लिए पर्याप्त नैदानिक अनुसंधान डेटा उपलब्ध नहीं है।
    • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को ट्रिप्सिन लेने से पहले एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करना चाहिए।
    • सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले बच्चे: फाइब्रोसिंग कॉलोनोपैथी नामक एक दुर्लभ स्थिति को पाचन एंजाइमों की उच्च खुराक लेने से जोड़ा जाता है।
    • सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्ति को ट्रिप्सिन लेने से पहले हमेशा अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करना चाहिए।
    • किसी भी सप्लिमेंट या दवा को डॉक्टर द्वारा निर्धारित किए गए डोज से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। साथ ही इसकी खुराक में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए।

    ट्रिप्सिन एंजाइम इसलिए है बेहद जरूरी

    ट्रिप्सिन एक एंजाइम है जो आपके शरीर को प्रोटीन को पचाने के लिए आवश्यक है, हड्डियों, मांसपेशियों, त्वचा और रक्त सहित ऊतक के निर्माण और मरम्मत के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। जब काइमोट्रिप्सिन के साथ मिलाया जाता है, तो ट्रिप्सिन चोट को ठीक करने में मदद कर सकता है। आपके शरीर में ट्रिप्सिन की मात्रा को मापने से अग्नाशयशोथ और सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी स्वस्थ समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। कैंसर या ट्यूमर को बढ़ावा देने या उस पर हमला करने के संबंध में ट्रिप्सिन की भूमिका निर्धारित करने के लिए अध्ययन चल रहा है।

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    उम्मीद करते हैं कि आपको ट्रिप्सिन एंजाइम (Trypsin enzyme) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड