प्रेग्नेंसी वीक 4 यानी गर्भधारण के सात दिन बाद जाइगोट यूट्रीन लाइनिंग के अंदर दाखिल हो जाता है। जाइगोट को ब्लास्टोसिस्ट भी कहते हैं। जब ब्लास्टोसिस्ट फ्लूड (Fluid) से भर जाता है तो यह भ्रूण में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद शिशु के विकास के लिए जरूरी पोषण को भ्रूण तक पहुंचाने और उसके वेस्ट रिमूवल के माध्यम के रूप में गर्भ कार्य करता है। गर्भावस्था के चौथे सप्ताह के समय आपका शिशु खसखस के आकार यानी करीब 2 एमएम जितना बड़ा होता है।

गर्भधारण के सात दिन बाद यानी प्रेग्नेंसी वीक 3 के अंत तक जाइगोट खुद को यूट्रस की लाइनिंग (Uterus Lining) से जोड़ लेता है। इस चरण में जाइगोट ब्लास्टोसिस्ट कहलाता है। सबसे पहले ब्लास्टोसिस्ट खोखला बनने लगता है और फिर इसके बाद इसके अंदर फ्लूड भर जाता है और भ्रूण के रूप में बदल जाता है। यूट्रीन लाइनिंग प्लासेंटा बनाती है, जो कि विकासित हो रहे भ्रूण को पोषण पहुंचाने और उसके वेस्ट को निकालने का माध्यम बनती है।
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यूट्रीन लाइनिंग के अंदर दाखिल होने के बाद शिशु ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (HCG) हॉर्मोन उत्पादित करता है, जो कि यूट्रस की लाइनिंग को मेंटेन रखने में मदद करता है। इसके अलावा, यही हॉर्मोन ओवरी को हर महीने एग उत्पादित करने से रुकने के संकेत भी देता है, जिससे मासिक धर्म रुक जाता है। हालांकि, कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी वीक 4 के दौरान भी क्रैंपिंग और ब्लड के स्पॉट हो सकते हैं, जिसे महिलाएं अक्सर पीरियड्स समझने की भूल करती हैं। क्योंकि, यह ब्लड के स्पॉट अक्सर पीरियड्स की ड्यू डेट के आसपास होते हैं।
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HCG की मदद से ही प्रेग्नेंसी टेस्ट का नतीजा आता है। हालांकि, अगर आप प्रेग्नेंट हैं भी, तो भी प्रेग्नेंसी वीक 4 (गर्भावस्था के 4 सप्ताह) में प्रेग्नेंसी का पता लगाना मुश्किल होता है। डॉक्टर, Last Menstrual Period से 6 हफ्ते बाद ही प्रेग्नेंसी का पता लगा सकते हैं। प्रेग्नेंसी वीक 4 में थकान, इचिंग ब्रैस्ट (स्तनों पर खुजली), जी मिचलाना आदि प्रेग्नेंसी के लक्षण दिख सकते हैं। लेकिन, इन लक्षणों को पीरियड्स के लक्षण मानने की भी गलती की जा सकती है। हालांकि, अगर प्रेग्नेंसी वीक 4 के अंत तक आपके संभावित पीरियड्स नहीं होते तो आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना होती है।
यहां हम आपको उन लक्षणों के बारे में बता रहे हैं कि जो कि प्रेग्नेंसी वीक 4 में आपके प्रेग्नेंट होने के संकेत हो सकते हैं।
ब्रेस्ट में दर्द और सूजन- पीरियड्स के दौरान भी ब्रेस्ट में दर्द और सूजन हो सकती है। लेकिन, प्रेग्नेंसी के मामले में यह दर्द और सूजन ज्यादा गंभीर होती है।
थकान: आपको अचानक ही थकान बढ़ने लग जाती है। शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन (Progesterone Hormone) के बढ़ते कंसंट्रेशन और प्लांड प्रेग्नेंसी की वजह से होने वाली शारीरिक मेहनत और चिंता की वजह से महिलाएं ज्यादा थकावट महसूस करने लगती है।
बार-बार पेशाब आना: आपको बार-बार तेज पेशाब का दबाव बन सकता है।
स्मेल के प्रति सेंसिटिव- कई गर्भवती महिलाओं को अक्सर किसी भी तरह की स्मेल (गंध) आने पर घबराहट होने लगती है। दरअसल, यह शरीर में इस समय अचानक बढ़ रहे एस्ट्रोजेन लेवल के कारण होता है।
भूख न लगना: प्रेग्नेंसी वीक 4 में आपको खाने पर खट्टी डकारें और उल्टी आ सकती है। आपको लग सकता है कि कुछ समय पहले जो चीजें खाना आपको पसंद था, अब उसे देखते ही उल्टी आने को महसूस होने लगती है।
मतली या उल्टी: गर्भावस्था के चौथे सप्ताह में मॉर्निंग सिकनेस ज्यादा परेशान करने लगेगी। इसलिए, अगर आपको भी ऐसा महसूस हो रहा है, तो यह गर्भावस्था के चौथे सप्ताह (प्रेग्नेंसी वीक 4) का संकेत हो सकता है।
उच्च शारीरिक तापमान: यदि आपका बेसल बॉडी टेंपरेचर लगातार 18 दिनों तक हाई रहता है तो यह गर्भवती होने का प्रमुख संकेत हो सकता है। बेसल बॉडी टेंपरेचर शरीर के उस न्यूनतम तापमान को कहते हैं, जो कि आराम करते वक्त या किसी शारीरिक गतिविधि से पहले अनुमानित किया जाता है।
रक्तस्राव या खून के धब्बे: प्रेग्नेंसी वीक 4 में कुछ महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दौरान लाल या लाल भूरे रंग के धब्बे दिख सकते हैं। यदि आपको रक्तस्राव के समय ज्यादा दर्द हो रहा है, तो अपने डॉक्टर को तुरंत बुलाएं, क्योंकि यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का संकेत हो सकता है।
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अगर आपको अपने मासिक धर्म के दौरान सामान्य से ज्यादा दर्द, बुखार या मतली परेशान कर रही हो, तो तुरंत किसी गाइनेकोलॉजिस्ट को दिखाएं जो प्रेग्नेंसी और चाइल्ड डिलीवरी में स्पेशलाइज्ड हो।
प्रेग्नेंसी वीक 4 में आप यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकती हैं। हालांकि, हम जैसा बता चुके हैं कि प्रेग्नेंसी का पता लगाने के लिए कम से कम आपके पिछले मासिक धर्म (LMP) से 6 हफ्ते पूरे हो जाने चाहिए। तभी, सही रिजल्ट पता लग सकता है, लेकिन प्रेग्नेंसी के 4 हफ्ते में आप ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट करवा सकती हैं, जो कि खून में HCG हॉर्मोन की जांच करता है। लेकिन, हम आपको फिर कहते हैं कि इसके लिए कई बार ब्लड प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाना पड़ सकता है, क्योंकि बिल्कुल सही रिजल्ट पिछले मासिक धर्म के 6 सप्ताह बाद ही सामने आते हैं। इसलिए अगर, इस टेस्ट में आपका रिजल्ट नेगेटिव भी आता है, तो उदास होने की जरूरत नहीं है।
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चाहे आपको गर्भावस्था के 4 सप्ताह तक अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर साफ-साफ जानकारी न मिली हो, लेकिन फिर भी इस दौरान ब्लड डोनेट मत कीजिए। क्योंकि, अगर आप प्रेग्नेंसी प्लानिंग कर रही हैं या हैं तो ब्लड डोनेट करने से आपके शरीर में एनीमिया (शरीर में खून कम होना) की बीमारी हो सकती है, जिससे आपकी इम्यूनिटी पर बुरा असर पड़ सकता है और आप बीमार पड़ सकती है। जिसके बाद आपके द्वारा आपका शिशु भी उसी बीमारी की चपेट में आ सकता है।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Stages of pregnancy – https://www.womenshealth.gov/pregnancy/youre-pregnant-now-what/stages-pregnancy – Accessed on 16 Dec, 2019
Month by Month – https://www.plannedparenthood.org/learn/pregnancy/pregnancy-month-by-month – Accessed on 16 Dec, 2019
Pregnancy – week by week – https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/pregnancy-week-by-week – Accessed on 16 Dec, 2019
Fetal development – https://medlineplus.gov/ency/article/002398.htm – Accessed on 16 Dec, 2019
Current Version
08/01/2021
Shivani Verma द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr Sharayu Maknikar
Updated by: Sanket Pevekar
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr Sharayu Maknikar