लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) के बाद नॉर्मल डिलिवरी के लिए ध्यान रखें इन बातों का

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 14, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

बदलती जीवनशैली में आजकल बहुत कुछ बदल चुका है। यहां तक कि आजकल लोग बेबी डिलिवरी भी अपने अनुसार प्लान कर लेते हैं। ऐसे में लोग सिजेरियन डिलिवरी का सहारा लेते हैं। दिल्ली की रहने वाली 35 वर्षीय मीनाक्षी शर्मा लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) डिलिवरी के बारे में कहती हैं कि, ”उन्होंने भी सिजेरियन डिलिवरी प्लान की थी जो सक्सेफुल रही।” इसके साथ ही मीनाक्षी बताती हैं कि उनकी इच्छा थी कि उनके शिशु का जन्म उनके अनुसार डेट और टाइम पर हो इसलिए उन्होंने लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन का सहारा लिया। हालांकि, ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी संभव है?

क्या लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) के बाद नॉर्मल डिलिवरी से शिशु का जन्म हो सकता है?

डॉक्टर्स का मानना है कि लोगों में एक धारणा बन गई है कि लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी नहीं हो सकती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार पहली डिलिवरी सी-सेक्शन होने के बाद दूसरी डिलिवरी नॉर्मल डिलिवरी हो सकती है, लेकिन इसके लिए गर्भवती महिला के सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा और अगर प्रेग्नेंट लेडी की सेहत ठीक रहती है, तो नॉर्मल डिलिवरी हो सकती है। एनसीबीआई के रिसर्च के अनुसार 128 गर्भवती महिलाओं की पहली डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन हुई थी, लेकिन उनमें से 76 गर्भवती महिलाओं की दूसरी डिलिवरी नॉर्मल हुई।

ये भी पढ़ें: नॉर्मल डिलिवरी में मदद कर सकते हैं ये 4 आसान योगासन

लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी के लिए क्या हैं उपाय?

निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद शिशु का जन्म नॉर्मल डिलिवरी से किया जा सकता है। इनमें शामिल है-

1. दोनों प्रेग्नेंसी के बीच सही अंतराल होना

अगर आपकी पहले डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन से हुई है तो दूसरी बेबी डिलिवरी के प्लानिंग में कम से कम 18 महीने का गैप रखें। दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान करने के पहले डॉक्टर से मिलें और उन्हें ये जरूर बताएं कि आपको नॉर्मल डिलिवरी प्लान करना है। ध्यान रखें डिलिवरी के वक्त मां और शिशु दोनों की सेहत को ध्यान में रख कर डॉक्टर नॉर्मल डिलिवरी या सिजेरियन डिलिवरी कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: नॉर्मल डिलिवरी के लिए फॉलो करें ये 7 आसान टिप्स

2. पहली प्रेग्नेंसी में सिजेरियन का कारण

नवजात के जन्म के दौरान सबसे पहले उसका सिर बाहर आता है। प्रेग्नेंसी के 36वें हफ्ते या 37वें हफ्ते में शिशु का सिर नीचे की ओर आ जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा नहीं होता है तो इस स्थिति में लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन से बच्चे का जन्म होता है। इस समय सी-सेक्शन का सहारा इसलिए लिया जाता है क्योंकि ब्रीच बेबी (गर्भ में उल्टा बच्चा) को डिलिवरी के दौरान ऑक्सिजन की कमी हो सकती है और मां को ज्यादा देर तक लेबर पेन रह सकता है जो एक नई परेशानी का कारण बन सकता है। इन सभी परेशानियों को ध्यान में रखकर डॉक्टर डिलिवरी प्लान करते हैं।

ये भी पढ़ें: न नॉर्मल न सिजेरियन, वॉटर बर्थ से दिया मॉडल ब्रूना ने बेटी को जन्म

3. पहले सी-सेक्शन में हुई कोई परेशानी

दूसरी डिलिवरी के दौरान डॉक्टर यह भी ध्यान रखते हैं कि पहली सर्जरी पूरी तरह से ठीक हुई है या नहीं। एक्सपर्ट्स की मानें तो दूसरी प्रेग्नेंसी प्लानिंग के पहले पहली सर्जरी की भी पूरी जानकारी लेनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि कोई घाव तो नहीं है।

ये भी पढ़ें: इन 8 बातों से बढ़ सकता है प्रेग्नेंसी में रिस्क, जानें बचाव के तरीके

4. बच्चे का वजन

डिलिवरी के दौरान अगर बच्चे का वजन ज्यादा है तो ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर सी-सेक्शन का सहारा लेते हैं।

5. शरीर को रखें फिट

पहली प्रेग्नेंसी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन होने के बाद नियमित योगा, एक्सरसाइज और वॉक से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। प्रेग्नेंसी के बाद भी बॉडी के शेप को ठीक रखा जा सकता है। इसके साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन भी जरूरी है। इन सबकी मदद से दूसरी प्रेग्नेंसी नॉर्मल हो सकती है।

ये भी पढ़ें: क्या सिजेरियन के बाद व्यायाम किया जा सकता है?

6. नौवें महीने में बच्चे का वजन

अगर वजायनल बर्थ का विकल्प चुनना है तो इसके लिए नोवें माह में बच्चे के वजन पर नजर रखना जरूरी है। बच्चे का वजन काफी हद तक यह तय करता है कि डिलिवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन

ये भी पढ़ें: गर्भावस्था के दौरान नींद न आने के कारण और उपाय

लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी की संभावना कम होने के कारण

सी-सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी की संभावनाओं को कम करने वाले कारण हैं:

  • गर्भवती महिला की उम्र अधिक होना
  • गर्भवती महिला का वजन ज्यादा होना
  • होने वाले बच्चे का वजन जन्म के समय अधिक होना (4 किलो से अधिक)
  • गर्भकाल 40 सप्ताह से अधिक समय तक हो जाना
  • पहली प्रेग्नेंसी और दोबारा गर्भधारण करने के बीच का अंतराल कम होना (18 महीने या उससे कम)

सिजेरियन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी की सफलता के विषय पर अपने डॉक्टर से बात करें और इसके फायदे व जोखिम के बारे में भी पूरी जानकारी प्राप्त करें।

यह भी पढ़ें: नॉर्मल डिलिवरी के लिए बरतें यह सावधानियां

पेल्विक की हड्डी पर निर्भर है नॉर्मल डिलिवरी

जन्म लेने से पहले शिशु पेल्विक की हड्डी में से होकर गुजरता है। यदि महिला की पेल्विक हड्डी सामान्य अवस्था में या चौड़ी है तो नॉर्मल डिलिवरी की जा सकती है। पेल्विक की हड्डी चौड़ी होने से बच्चा आसानी से उसमें से निकल आता है। हालांकि, यदि महिला की पेल्विक की हड्डी एकदम छोटी और संकुचित है तो हर बार सिजेरियन सर्जरी ही करनी पड़ सकती है।

यह भी पढ़ें: सिजेरियन डिलिवरी प्लान करने से पहले ध्यान रखें ये 9 बातें

लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी के जोखिम

  • सी-सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी के पक्ष में होने के बावजूद भी कई तरह के जोखिम की संभावनाएं बनी रहती हैं। इस दौरान पहले की सिजेरियन डिलिवरी में लगाए गए चीरे की जगह पर गर्भाशय फटने की संभावना होती है। इससे आपका ज्यादा खून बह सकता है और गर्भ में पलने वाले बच्चे को ऑक्सिजन पहुंचने में मुश्किल हो सकती है।
  • अनप्लांड सिजेरियन डिलिवरी में ऑपरेशन से संबंधी अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, साथ ही अधिक ब्लीडिंग की वजह से आपको खून चढ़ाने की संभावनाएं भी बन जाती हैं।
  • कुछ दुर्लभ मामलों में आपको हिस्टेरेक्टॉमी का भी सामना करना पड़ सकता है। इससे गर्भाशय और चीरे के घाव में इंफेक्शन की संभावना भी बढ़ जाती हैं।

इन बातों को ध्यान में रखकर नेक्स्ट प्रेग्नेंसी नॉर्मल (वजायनल) हो सकती है अगर पहली डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) से हुई है फिर भी। 

अगर आप लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी से जुड़े किसी तरह के सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

और पढ़ेंः

हेल्दी फूड्स की मदद से प्रेग्नेंसी के बाद बालों का झड़ना कैसे कम करें?

आयुर्वेद व पोस्ट डिलिवरी देखभाल और इससे जुड़े तथ्य और मिथ क्या हैं?

डिलिवरी के बाद बच्चे को देखकर हो सकती है उदासी, जानें बेबी ब्लूज से जुड़े फैक्ट्स

स्टडी: लड़के की डिलिवरी होती है ज्यादा पेनफुल

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy"
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

पॉलिहाइड्रेमनियोस (गर्भ में एमनियोटिक फ्लूइड ज्यादा होना) के क्या हो सकते हैं खतरनाक परिणाम?

पॉलिहाइड्रेमनियोस (Polyhydramnios) क्या है? क्यों इसके बढ़ने से गर्भवती महिला के साथ-साथ शिशु की बढ़ सकती है परेशानी? कब और कैसे किया जाता है इसका इलाज?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr Sharayu Maknikar
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
डिलिवरी केयर, प्रेग्नेंसी मई 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

‘इलेक्टिव सी-सेक्शन’ से अपनी मनपसंद डेट पर करवा सकते हैं बच्चे का जन्म!

क्या आसान है इलेक्टिव सी-सेक्शन (Elective C-section) से शिशु का जन्म? इलेक्टिव सिजेरियन डिलिवरी ले नुकसान क्या हैं?आप जानते हैं इससे होने वाले मां और शिशु को नुकसान? c-section birth plan in hindi

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr Sharayu Maknikar
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha

Quiz: नॉर्मल डिलिवरी के बारे में आप जानती हैं ये बातें ?

आसान डिलिवरी या नॉर्मल डिलिवरी के बारे में कई महिलाएं सोचकर घबरा जाती हैं। महिलाओं ...

के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
क्विज जनवरी 13, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

एपिसीओटॉमी इंफेक्शन से बचने के 9 टिप्स  

एपिसीओटॉमी इंफेक्शन में घाव को साफ रखने और इंफेक्शन से बचना चुनौतीपूर्ण होता है ऐसे में कई तरह की सावधानियां रखनी पड़ती है। आइये जानते है कैसे एपिसीओटॉमी इंफेक्शन से बचा जा सकता है।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr Sharayu Maknikar
के द्वारा लिखा गया sudhir Ginnore
डिलिवरी केयर, प्रेग्नेंसी जनवरी 12, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

सी सेक्शन के बाद सेक्स कितने दिन बाद करें

सी सेक्शन के बाद सेक्स लाइफ एन्जॉय करने के कुछ बेहतरीन टिप्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Anu Sharma
प्रकाशित हुआ अगस्त 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
विभिन्न प्रसव प्रक्रिया का स्तनपान और रिश्ते पर प्रभाव - How do Different Birthing Practices Impact Breastfeeding and Bonding

विभिन्न प्रसव प्रक्रिया का स्तनपान और रिश्ते पर प्रभाव कैसा होता है

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
डिलिवरी के वक्त दाई

डिलिवरी के वक्त दाई (Doula) के रहने से होते हैं 7 फायदे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
प्रकाशित हुआ मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
प्रेग्नेंसी में बुखार - fever in pregnancy

प्रेग्नेंसी में बुखार: कहीं शिशु को न कर दे ताउम्र के लिए लाचार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr Sharayu Maknikar
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
प्रकाशित हुआ मई 11, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें