स्तनपान के दौरान अतिरिक्त विटामिन की आवश्यकता कैसी पूरी करें, जानिए एक्सपर्ट से

    स्तनपान के दौरान अतिरिक्त विटामिन की आवश्यकता कैसी पूरी करें, जानिए एक्सपर्ट से

    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स (Breastfeeding and Minerals) में क्या संबंध है, इसके बारे में क्या पता है आपको? यह बात शायद सभी जानते हैं कि बच्चे के लिए मां का दूध बहुत महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इसी के साथ आपको इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि क्या बच्चे को मां के दूध से सभी आवश्यक पोषक प्राप्त हो रहे हैं। विटामिन, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मां और बच्चे दोनों के लिए ही जरूरी होता है। मां का दूध शिशुओं के लिए सबसे अच्छा भोजन है, क्योंकि इसके समृद्ध पोषक तत्व आसानी से बच्चे को मिल जाते है और जाे बच्चे के विकास में भी प्रभावकारी है। सभी नर्सिंग माताओं के लिए स्तनपान भी सबसे किफायती विकल्प है। यह है बच्चे के पोषण की स्थिति के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ में मां और बच्चे के बीच इमोशनल हेल्थ के लिए अच्छा है। स्तनपान मां की हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है। क्योंकि यह मधुमेह, हृदय रोग और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करता है; डिम्बग्रंथि के कैंसर, और वजन घटाने को बढ़ावा देता है। तो जानिए यहां ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स (Breastfeeding and Minerals) के बारे में:

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    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स (Breastfeeding and Minerals) : डायट में शामिल करें ये पोषक तत्व (Include these nutrients in the diet)

    बच्चे के जन्म के बाद के पहले छह महीनों में बच्चे को केवल स्तनपान ही कराना चाहिए, बच्चा अपने सभी पोषक तत्वों की जरूरतों के लिए मां पर निर्भर रहता है। मां के लिए स्तनपान के दौरान एक स्वस्थ आहार आवश्यक है, क्योंकि उसका आहार स्तन के दूध में विटामिन, ऊर्जा और पोषक तत्व को निर्धारित करता है। आहार न केवल पर्याप्त होना चाहिए, बल्कि आवश्यक विटामिन की अतिरिक्त आपूर्ति को भी सुनिश्चित करना चाहिए। इसलिए उन्हें सलाह दी जाती है कि वे पर्याप्त मात्रा में आयरन, प्रोटीन, विटामिन और कैल्शियम के साथ पौष्टिक भोजन करें।ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स का बहुत गहरा संबंध है, मां और शिशु दोनों के लिए ही हैं। मां को बच्चे की हेल्दी लाइफ के लिए इन आवश्यक पोषक तत्वों का ध्यान रखना चाहिए, जिनमें शामिल हैं:

    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स :आयरन (Iron)

    स्तनपान कराने वाली महिलाओं में खून की कमी या एनीमिया की रोकथाम के लिए आयरन से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। आहार में पर्याप्त आयरन की कमी से थकान होती है और संक्रमण के चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। आयरन के अच्छे आहार स्रोतों में सफेद तिल (तिल), काले तिल (तिल), नाइजर सीड्स (कराले), खजूर और चिकन आदि शामिल हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों में मौजूद आयरन काफी नहीं होता है। क्योंकि आयरन को एक ‘अच्छा’ स्रोत माना जाता है, क्योंकि मानव शरीर इस पोषक तत्व को ऐसी सब्जियों से अवशोषित नहीं कर सकता है।

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    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स : प्रोटीन (Protein)

    प्रोटीन शरीर में बच्चे की हड्डियों, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों के निर्माण में मदद करता है। बच्चे की शरीरिक पोषक की जरूरतों को पूरा करने के लिए माताओं को आहार में अतिरिक्त प्रोटीन लेने की जरूरत होती है। उन्हें प्रोटीन की औसत मात्रा की आवश्यकता होती है। स्तनपान कराने वाली मां 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम शरीर के वजन, प्रति दिन है। प्रोटीन के अच्छे स्रोतों में डेयरी उत्पाद , अंडे, मांस, दाल, सोयाबीन, फलियां और नट्स शामिल हैं।

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    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स : कैल्शियम (Calcium)

    शरीर में तंत्रिका तंत्र के कामकाज में कैल्शियम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मजबूत हड्डियों के निर्माण में भी मदद करता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को एक दिन में 1500 मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। दूध की पर्याप्त मात्रा में पनीर, दही और छाछ जैसे दुग्ध उत्पादों को आहार में शामिल करना चाहिए। इसके लिए आप
    कैल्शियम को अपने आहार सेवन सुनिश्चित करें।

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    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स : विटामिन बी12 (Vitamin B 12)

    स्तनपान कराने वाली महिलाएं जो शाकाहारी भोजन करती हैं, उनके शरीर में आवश्यक विटामिन बी12 की मात्रा की कमी हो सकती है। इसकी कम मात्रा उनके शिशुओं को B12 की कमी के कारण होने वाले जोखिम में डाल सकती है, जिससे बच्चे को न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम भी हो सकती है। हालांकि, विटामिन बी12 केवल नॉनवेज और अंडे जैसे पशु उत्पादों में पाया जाता है, इसलिए यदि मां शाकाहारी है, तो बी12 सप्लिमेंट को डॉक्टर से परामर्श कर के लेना चाहिए।

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    ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स : अन्य विटामिन (Other vitamins)

    विटामिन-बी6 लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के निर्माण में मदद करता है। वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को तोड़ता है, यह सामान्य मस्तिष्क के विकास और कार्य के लिए भी आवश्यक है। विट-बी6 मछली, केले और साबुत अनाज में पाया जाता है। बोन हेल्थ के लिए विट-सी आवश्यक है। यह ऊतक वृद्धि के साथ-साथ दांतों का विकास के भी मददगार है। खट्टे फल जैसे मीठा नींबू, संतरा, आंवला, अमरूद आदि विटामिन-सी के लिए अच्छा स्रोत हैं। इसके अलावा स्तनपान के दौरान हाइड्रेशन भी उतना ही महत्वपूर्ण है; स्तनपान कराने वाली माताओं को दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। हालांकि स्तनपान के दौरान कुछ पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ सकती है, लगभग सभी विटामिन और खनिज विभिन्न प्रकार के खाने से प्राप्त किए जा सकते हैं।

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    लैक्टेशन में गैलेक्टोगग्स का महत्व (Importance of Galactagogues in Lactation)

    गैलेक्टोगॉग ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो दूध पिलाने वाली मां के दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करते हैं। विभिन्न पारंपरिक खाद्य पदार्थ और जड़ी-बूटिया हैं जो गैलेक्टोगॉग्स के रूप में कार्य करती हैं। सबसे आम हैं मेथी के बीज, गार्डन क्रेस के बीज, जई, गहरी हरी सब्जियां, लहसुन, आदि। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए प्रसव के बाद उनकी डायट में इन खाद्य पदार्थों को शामिल करना महत्पूर्ण है।

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    स्तनपान के दौरान किन चीजों से बचना चाहिए (What should be avoided during breastfeeding) ?

    स्तनपान के दौरान शराब से बचें। स्तनपान के दौरान शराब के सेवन को शिशुओं में पोषक तत्वों की कमी से जोड़ा गया है। कैफीन (चाय और कॉफी में) को प्रति दिन 300 मिलीग्राम से अधिक नहीं लें, सीमित करें। तनाव और नींद का स्तन के दूध के उत्पादन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। माताएं अपने बच्चों को स्तनपान कराते समय हमेशा संघर्ष करती हैं यदि वे बहुत अधिक तनाव में हैं या नींद से वंचित हैं। कम से कम 7 घंटे की नींद जरूर लें।

    जैसा कि आपने यहां जाना कि ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स का बहुत गहरा संबंध है, इसलिए इसे लेते समय कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जैसे कि मां भरपूर डायट और नींद दोनों ही लें। डायट में हेल्दी फूड लें, जैसे कि नट्स, हरी सब्जियां और फल आदि। फलों में भी अलग-अलग रंग के फल लें। इससे आपको अलग-अलग तरह के विटामिन मिलेंगे। खाने में साबूत अनाज भी जरूर लें। इसमें आपको विटामिन के अलावा कई तरह के महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी मिलें, जो आपके और बच्चे दोनों के लिए शरीर के लिए जरूरी होंगे। ब्रेस्टफीडिंग और मिनरल्स का बहुत गहरा संबंध है, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

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    डाॅ. रसिका परब द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/01/2022 को