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क्यों प्लेसेंटा और प्लेसेंटा जीन्स को समझना है जरूरी?

क्यों प्लेसेंटा और प्लेसेंटा जीन्स को समझना है जरूरी?

सबसे पहले प्लेसेंटा (Placenta) क्या है यह समझना जरूरी है। प्लेसेंटा को सामान्य भाषा में गर्भनाल कहते हैं। दरअसल गर्भनाल महिला के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। इसी गर्भनाल या प्लेसेंटा की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु को न्यूट्रिशन की प्राप्ति होती है। शिशु के विकास में प्लेसेंटा की अहम भूमिका होती है। प्लेसेंटा के बिना शिशु के विकास की कल्पना संभव ही नहीं है। जिस तरह से प्लेसेंटा के बिना गर्भ में शिशु का विकास संभव नहीं है, ठीक वैसे ही प्लेसेंटा जीन्स की भी अहम भूमिका होती है।

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प्लेसेंटा जीन्स (Placenta genes) क्या है?

प्लेसेंटा जीन्स मेल और फीमेल बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मददगार होता है। रिसर्च के अनुसार प्लेसेंटा सेल्स और प्लेसेंटा जीन्स फीटल डेवलप्मेंट के लिए अनिवार्य होते हैं। वहीं प्लेसेंटा जीन्स ट्रोफोब्लास्ट इन्वेंशन (trophoblast invasion), एंजीओजेन्सिस (angiogenesis) और स्पायरल आर्ट्री (spiral artery) के विकास में अहम भूमिका निभाता है। ट्रोफोब्लास्ट इंवेसन, एंजीओजेन्सिस और स्पायरल आर्ट्री के अपने अलग-अलग कार्य होते हैं। जैसे:-

ट्रोफोब्लास्ट इन्वेंशन- गर्भावस्था के दौरान गर्भ में ट्रोफोब्लास्ट इंवेसन का निर्माण होता है। अगर इस दौरान या गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद हाई ब्लड प्रेशर और यूरिन में अधिक मात्रा में प्रोटीन का शामिल होना प्रीक्लेमप्सिया (preeclampsia) का कारण बन सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार पांच से आठ प्रतिशत प्रेग्नेंट लेडी प्रीक्लेमप्सिया की समस्या से पीड़ित होती हैं

एंजीओजेन्सिस- इसे अगर सामान्य भाषा में समझें तो इससे यूट्रस में ब्लड वेसल्स का निर्माण होता है।

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स्पायरल आर्ट्री- स्पायरल आर्ट्री प्लेसेंटा मेटरनल ब्लड सप्लाई करने का काम करता है।

प्लेसेंटा जीन्स से जुड़े रिसर्च के अनुसार गर्भ में पल रहे बेबी बॉय, बेबी गर्ल की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं। वहीं प्लेसेंटा जीन्स के कारण ही बेबी गर्ल की तुलना में जन्म लेने वाले शिशु खासकर बेबी बॉय शारीरिक रूप से ज्यादा स्ट्रॉन्ग होते हैं। इसके साथ ही प्लेसेंटा जीन्स से जुड़े रिसर्च में यह भी कहा गया है की बेबी गर्ल या बेबी बॉय दोनों में ही प्लेसेंटा जीन्स इम्यून पावर को स्ट्रॉन्ग करने में मददगार होता है। इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होने की वजह से बीमारियों का खतरा कम से कम हो सकता है।

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प्लेसेंटा जीन्स को रखना है हेल्दी तो लें पौष्टिक आहार

प्लेसेंटा, प्लेसेंटा जीन्स या खुद को हेल्दी रखने के लिए गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को निम्नलिखित आहार अपने डेली डायट में शामिल करना चाहिए। जैसे-

अगर कपल प्रेग्नेंसी प्लानिंग कर रहें या अचानक से गर्भ ठहर भी गया हो, तो इसकी जानकारी मिलते ही सबसे पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट से मिलें। क्योंकि गर्भधारण से पहले और बाद में भी बॉडी के लिए विटामिन जरूरी होते हैं क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी में विटामिन्स की कमी महिला के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती है। यही नहीं विटामिन की कमी शिशु में बर्थ डिफेक्ट्स को भी जन्म दे सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की माने तो विटामिन की कमी के कारण इनफर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है।

गर्भधारण से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान भी फोलिक एसिड की कमी परेशानी का कारण बन सकती है। दरअसल फोलिक एसिड जन्म लेने वाले शिशु में न्यूरल बर्थ डिफेक्ट के रिस्क को कम कर देता है। गर्भवती महिलाओं को प्रति दिन 600-800 mcg फोलिक एसिड की जरूरत होती है। गर्भावस्था के पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान फोलिक एसिड की जरूरत होती है। जिन महिलाओं की न्यूरल ट्यूब बर्थ डिफेक्ट हिस्ट्री रह चुकी है, उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान 4000 mcg फोलिक एसिड की जरूरत होती है। फोलिक एसिड हरी सब्जियों समेत अन्य खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।

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प्लेसेंटा की जानकारी : क्या आपको भी हो रही है दिक्कत ?

प्लेसेंटा से जुड़ी अगर कोई परेशानी महिला महसूस करती है, तो ऐसी स्थिति में वजायनल ब्लीडिंग, एब्डॉमिनल पेन या बैक पेन की परेशानी ज्यादा होती है। इन परेशानियों को गर्भवती महिलाओं को बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्लेसेंटा से जुड़ी परेशानी न हो इसलिए महिलाओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे:-

  1. प्रेग्नेंसी के दौरान अपने डॉक्टर से संपर्क में रहें और कोई भी परेशानी होने पर इसकी जानकारी अपने हेल्थ एक्सपर्ट को दें।
  2. अगर किसी भी महिला को प्रेग्नेंसी के पहले या गर्भधारण के दौरान हाई ब्लड प्रेशर या प्रेग्नेंसी के किसी भी स्टेज में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, तो इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को दें।
  3. गर्भावस्था के दौरान या प्रेग्नेंसी से पहले भी महिला को स्मोकिंग नहीं करना चाहिए। इसका पालन पुरुषों को भी उतना ही करना चाहिए जितना महिलाएं करती हैं। क्योंकि जीन्स सिर्फ मां ही नहीं बल्कि पिता के भी वाहक होते हैं।
  4. सिजेरियन डिलिवरी की अगर संभावना बनती है और या यह पहले से तय होता है, तो ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर से प्लेसेंटा या प्लेसेंटा जीन्स से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है।

प्लेसेंटा जीन्स से जुड़ी एक जानकारी कॉर्नेल यूनिवेर्सिटी द्वारा हालही में किये गए रिसर्च के अनुसार यह बताया गया है की प्लेसेंटा फीटस और गर्भधारण कर चुकी महिला दोनों के लिए मददगार है। इस रिसर्च में यह भी कहा गया है की पिता से आये हुए जीन्स भी प्लेसेंटा (प्लेसेंटा जीन्स) के विकास में सहायक होता है। प्लेसेंटा न सिर्फ भ्रूण को पोषण देने का काम करता है बल्कि जरूरी ऑक्सीजन भी बच्चे तक पहुंचाने का काम करता है। ये वेस्ट प्रोडक्ट को भी बाहर करने में मदद करता है।

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प्लेसेंटा से मिल सकती है अहम जानकारी

शिशु के जन्म के बाद उसके प्लेसेंटा को रखा जाने लगा है। ऐसे इसलिए किया जाता है क्योंकि प्लेसेंटा की वजह से आनुवांशिक बीमारियों के साथ-साथ मेडिकल हिस्ट्री समझना आसान हो जाता है। ऐसा करने से किसी भी बीमारी का सही इलाज करने में सहायता मिलती है और इलाज भी बेहतर होता है। शिशु के जन्म के साथ-साथ प्लेसेंटा भी बाहर आ जाता है लेकिन, कुछ केसेस ऐसे भी देखे जाते हैं जब प्लेसेंटा गर्भ से बाहर नहीं आ पाता है। ऐसी स्थिति को रीटेंड प्लेसेंटा (Retained placenta) कहते हैं।गायनोकोलॉजिस्ट के अनुसार जब गर्भवती महिला लेबर के समय पुश करती हैं, तो बच्चे के बाद प्लेसेंटा भी बाहर आता है। जब किसी महिला के शरीर में डिलिवरी के बाद भी प्लेसेंटा यूट्रस में रह जाता है, तो ब्लीडिंग कम मात्रा में होने की संभावना होती है। महिला के वजायना से प्लेसेंटा न निकल पाने की स्थिति में डॉक्टर्स की टीम कुछ समय के लिए इंतजार करती है और फिर इसे निकलती है।

अगर आप प्लेसेंटा जीन्स से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और प्लेसेंटा से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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सूत्र

What is Placenta / https://www.pregnancybirthbaby.org.au/what-is-the-placenta / Accessed on 27/04/2020

Gene Expression in the Placenta/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2830734/Accessed on 27/04/2020

Placenta: How it works, what’s normal/https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/pregnancy-week-by-week/in-depth/placenta/art-20044425/Accessed on 27/04/2020

Folic Acid/https://www.cdc.gov/ncbddd/folicacid/features/folic-acid.html/Accessed on 27/04/2020

 

 

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/11/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड