कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के फायदे क्या हैं? बैंक का चुनाव करते वक्त इन बातों का रखें ख्याल

    कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के फायदे क्या हैं? बैंक का चुनाव करते वक्त इन बातों का रखें ख्याल

    प्रेग्नेंसी के दौरान मां से बच्चे को जोड़नेवाली गर्भनाल (Umbilical Cord) में जमा रक्त को कॉर्ड ब्लड कहते हैं। कॉर्ड ब्लड नॉर्मल ब्लड (खून) की तरह होता है लेकिन, अंतर बस इतना होता है कि इसमें स्टेम सेल अत्यधिक मौजूद होती हैं। स्टेम सेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका विकास अलग-अलग सेल्स और टिशू में हो सकता है। एक सिरिंज की मदद से गर्भनाल से ब्लड निकाला जाता है। फिर इसे कॉर्ड ब्लड बैंक में जमा किया जाता है। इससे हेमेटोलॉजिकल या इम्यूनोलॉजिकल डिसऑर्डर की समस्या ठीक हो सकती है। गर्भनाल में 70 से 75 ml ब्लड रहता है। ये टिश्यू या ऑर्गेन के बनने में काफी सहायक होता है। हम जान चुके हैं कि कॉर्ड ब्लड क्या होता है। हैलो स्वस्थ्य के इस आर्टिकल में कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के लाभ के बारे में चर्चा करेंगे।

    कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के लाभ क्या हैं?

    कॉर्ड ब्लड से बोन मैरो से अधिक स्टेम सेल्स दी जा सकती हैं। एक बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तुलना में कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट का उपयोग करने पर अधिक मेल संभव हैं। कॉर्ड ब्लड में स्टेम सेल्स का उपयोग कैंसर के उपचार के दौरान इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।

    कॉर्ड ब्लड बैंकिंग से शिशु को भविष्य में इन बीमारियों के होने पर बचाया जा सकता है:

    • कॉर्ड ब्लड बैंकिंग से भविष्य में होने वाले ब्लड कैंसर से शिशु को बचाया जा सकता है।
    • कॉर्ड ब्लड बैंकिंग से कैंसर के उपचार में सहायता मिलती है।
    • कॉर्ड ब्लड बैकिंग में स्टोर किया गया कॉड ब्लड शिशु को मायलोमा से बचाने में मदद करता है।
    • लिम्फोमा से बचाने में भी कॉर्ड ब्लड बैकिंग मदद करती है।
    • जेनेटिकल ब्लड डिसऑर्डर का इलाज कॉर्ड ब्लड बैकिंग से स्टोर किया गए ब्लड से प्रभावी तरीके से हो सकता है।
    • सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम में कॉर्ड ब्लड बैकिंग के जरिए स्टोर किया गया ब्लड काम आता है।

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    कॉर्ड ब्लड बैकिंग से ब्लड को बैंक करके आप अपने बच्चों को भविष्य में होने वाले लगभग 80 प्रकार के बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं। वर्तमान उपचारों के अलावा, स्ट्रोक, हृदय रोग, डायबिटीज आदि के उपचारों में भी कॉर्ड ब्लड के उपयोग के लिए क्लीनिकल टेस्ट किए जा रहे हैं। कॉर्ड ब्लड, पब्लिक कॉर्ड ब्लड बैंकिंग और बोन मैरो ट्रांसप्लांट में भी फायदेमंद साबित हुआ है। इनके अलावा कॉर्ड ब्लड बैकिंग के अन्य लाभ हैं जो इस आर्टिकल में आगे बताए जाएंगे।

    कॉर्ड ब्लड किसलिए इस्तेमाल किया जाता है?

    यह स्टेम सेल को बनाने के लिए होता है। बोन मैरो में इसका ट्रांसप्लांट करने में इसका इस्तेमाल होता है। कॉर्ड ब्लड का इस्तेमाल खून का निर्माण करने वाले स्टेम सेल को ट्रांसप्लांट करने में किया जाता है। कॉर्ड ब्लड, ब्लड डिसऑर्डर और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए बहुत उपयोगी होता है।

    अगर कोई ब्लड कैंसर या कोई और हेमोटॉलॉजिकल डिसऑर्डर से गुजर रहा हो तो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट या बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जाती है। इस तरह के केस में कॉर्ड ब्लड हमेशा फायदेमंद होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कॉर्ड ब्लड सेल अनुभवहीन कोशिकाएं होती है। वो नुकसान नहीं पहुंचा सकती। अगर कॉर्ड ब्लड पूरी तरह से नहीं मिल रहा फिर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कॉर्ड ब्लड बैकिंग में ब्लड को कलेक्ट करना है आसान

    गर्भनाल से ब्लड निकालने में मां या शिशु के लिए कोई दर्द या जोखिम नहीं होता है। कॉर्ड ब्लड बैंकिंग में यह महत्वपूर्ण है कि कॉर्ड ब्लड को गर्भनाल को काटते समय ही एक साथ कलेक्ट किया जा सकता है। दूसरी ओर बोन मैरो कलेक्शन, सर्जिकल प्रॉसीजर और जनरल एनेस्थीसिया में भी इसकी आवश्यकता होती है, जो अपने जोखिमों के साथ आता है।

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    कॉर्ड ब्लड बैकिंग से बैंक किए गए ब्लड का होता है बेहतर मिलान

    स्टेम कोशिकाओं को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित करने के लिए उनका रिसीवर के साथ मिलान होना बहुत जरूरी होता है। ये मैच किए गए स्टेम सेल्स कुछ सार्वजनिक डेटाबेस में पाए जा सकते हैं। कई बार यह मैच करना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई सार्वजनिक मिलान नहीं होता है, तो अक्सर अपने स्वयं के स्टेम सेल या परिवार के सदस्य से बेहतर मिलान की उम्मीद कर सकते हैं।

    किसी की खुद की स्टेम कोशिकाएं एक सही मेल होती हैं। सिबलिंग के साथ कंप्लीट मैच होने का 25 प्रतिशत और आंशिक मैच होने का 50 प्रतिशत चांसेस होते हैं। चूंकि प्रत्येक माता-पिता इसमें उपयोग किए जाने वाले मार्कर प्रदान करते हैं, इसलिए माता-पिता के पास आंशिक मेल होने की 100 प्रतिशत संभावना है। इसमें भी कॉर्ड ब्लड बैकिंग काम आती है।

    कॉर्ड ब्लड बैकिंग से ट्रांसप्लांट के बाद रिस्क कम

    शरीर द्वारा पूरी तरह से एक्सेप्ट किए जाने के अलावा कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल्स ने पोस्ट-ट्रांसप्लांट ग्राफ्ट-वर्सेज-होस्ट-डिजीज (जीवीएचडी) के जोखिम को काफी कम करता है। जीवीएचडी तब होता है जब ट्रांसप्लांट किए गए सेल्स शरीर पर नकारात्मक प्रभाव करती हैं। यह स्टेम सेल प्रत्यारोपण की एक बड़ी जटिलता है। स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद जीवीएचडी का जोखिम राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार डोनर और रिसीवर के बीच संबंध पर निर्भर करता है:

    • आइडेंटिकल ट्विन्स: जीवीएचडी से पीड़ित होने की संभावना बहुत कम है
    • ब्लड रिलेशन वाले फैमिली मेंबर: जीवीएचडी होने के 35% -45% संभावना
    • असंबंधित: 60% -80% जीवीएचडी की संभावना

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    कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के लाभ यह है कि एक बच्चे की कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल्स एक दिन के लिए मां या पिता की मदद के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। यह डॉक्टर को निर्धारित करना होता है कि ट्रांसप्लांट करने के लिए मैच को कितना करीब होना चाहिए।

    बीते कुछ वर्षों में कॉर्ड ब्लड बैकिंग एक ऐसा विषय बन कर उभरा है जिसके बारे में हर पेरेंट जानना चाहते हैं। कॉर्ड ब्लड का चलन शहरी माता-पिता को आकर्षित भी कर चुका है तो कुछ इसके फायदे के बारे में जानना चाहते हैं। वहीं कई कपल्स ऐसे भी हैं जो इस बात को लेकर चिंतित होते हैं कि जरूरत पड़ने पर कॉर्ड ब्लड बैंक का चयन कैसे करें। विभिन्न आनुवंशिक और ब्लड संबंधी बीमारियों में अंबिलिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल ब्लड ट्रांसप्लांट ट्रीटमेंट एक प्रमुख विकल्प के तौर पर उभरा है। डॉक्टरों का कहना है कि 95 प्रतिशत रक्त संबंधी विकारों को रक्तदाता से मिले अंबिलिकल कॉर्ड ब्लड (यूसीबी) यानी गर्भनाल में जमा रक्त से दूर किया जा सकता है। अगर आप भी माता-पिता बनने जा रहे हैं और मन में सवाल है कि कौन सा कॉर्ड ब्लड बैंक का चयन किया जाए तो हम आपका कंफ्यूजन दूर करने जा रहे हैं।

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    कॉर्ड ब्लड बैंक को चुनने से पहले इन बातों को जानना है जरूरी

    क्या कॉर्ड ब्लड बैकिंग के लिए प्राइवेट बैंक को चुनना चाहिए?

    आपको कॉर्ड ब्लड बैकिंग के लिए बैंक का चुनाव करते समय पब्लिक और प्राइवेट बैंकिंग के बीच के अंतर को समझना होगा। लोगों को पता होना चाहिए कि आज के समय में कॉर्ड ब्लड सिर्फ 80 हेल्थ कंडिशन में ही उपयुक्त माना गया है। जो खून से जुड़े डिसऑर्डर हैं।

    कॉर्ड ब्लड बैकिंग करते वक्त में प्राइस करती है मैटर

    कॉर्ड ब्लड बैंकिंग की लागत नए माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। खासकर जब वे शिशु के जन्म के दौरान और प्रेग्नेंसी के दौरान अन्य खर्चों का सामना कर रहे होते हैं। ऐसी स्थिति में यह जानना बहुत जरूरी है कि सार्वजनिक बैंकों में एक ही यूनिट का मेल हो इसकी की गारंटी नहीं है। निजी कॉर्ड ब्लड बैंक में इस बात की कोई चिंता नहीं होती, लेकिन यहां की लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है। हालांकि पेमेंट मेथड इस लागत को सस्ती मासिक दरों में तब्दील कर सकता है।

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    कॉर्ड ब्लड बैकिंग करते वक्त स्टॉक के बारे में पता करें

    ध्यान रखें कि एक सफल कॉर्ड ब्लड बैंक वह है जिसके पास अच्छी संख्या में कॉर्ड ब्लड यूनिट्स का स्टॉक हो।

    कॉर्ड ब्लड बैकिंग करते वक्त स्टोरेज को लेकर पता करें ये बात

    स्टोरेज और प्रॉसेसिंग फी सभी लैबोरेट्रीज में अलग होती है। कॉर्ड ब्लड की स्टोरेज दर को हमेशा सस्ता होना चाहिए। जब भी किसी कॉर्ड ब्लड स्टोरज कराने वाली संस्था का चयन करें यह ध्यान रखें कि ऐसी कंपनी की तलाश करें जो सभी लागतों के साथ पारदर्शी हो और जिसमें कोई हिडन फीस न हो।

    पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में यूसीबी प्रतिरोपण की संख्या बेहद कम है। यह सिर्फ खर्चीला होने और सार्वजिक ब्लड बैंकों में पर्याप्त संख्या में अनुकूल यूसीबी यूनिटों की अनुपलब्धता के कारण है। अतः जब भी कॉर्ड ब्लड बैंक का चुनाव करें ऊपर बताए गई बातों को ध्यान में रखें।

    हम उम्मीद करते हैं कि कॉड ब्लड बैकिंग पर लिखा गया यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा और कॉड ब्लड बैकिंग को समझने में इससे मदद मिलेगी। किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Nikhil Kumar द्वारा लिखित · अपडेटेड 04/08/2020

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