सरोगेसी के बारे में सोच रहे हैं? तो पहले जान लें इससे जुड़े कुछ फैक्ट्स

By Medically reviewed by Dr. Pranali Patil

सरोगेसी एक तरह की तकनीक है, जिसमें एक महिला और कपल (हसबैंड और वाइफ) के बीच अग्रीमेंट होता है। दरअसल इसमें ऐसी महिलाएं मां बन पाती हैं, जो गर्भ न ठहरने या IVF सक्सेसफुल नहीं होने के कारण बच्चों को जन्म दे पाने में असफल होती हैं। सरोगेसी में पुरूष के स्पर्म (शुक्राणु) को सरोगेट मदर के ओवम (अंडाणु) के साथ फर्टिलाइज किया जाता है।

इसके अलावा सरोगेसी फैक्ट के अनुसार जेस्‍टेशनल सरोगेसी में माता और पिता दोनों के अंडाणु और शुक्राणु को टेस्ट ट्यूब प्रॉसेस से फर्टिलाइज करवा कर भ्रूण (Embryo) को यूट्रस में इम्प्लांट किया जाता है। इसमें बच्‍चे का जैनेटिक संबंध माता-पिता दोनों से होता है। जन्म के बाद बच्चे पर उस महिला का अधिकार नहीं होता है जो गर्भ में शिशु को रखती हैं। सरोगेसी के फैक्ट ये हैं कि इसे ‘किराय की कोख’ भी कहते हैं क्योंकि सरोगेट मदर भ्रूण (शिशु) का विकास अपने गर्भाशय में करती हैं और इसके बदले उन्हें पैसे दिए जाते हैं।

सरोगेसी फैक्ट:

1. सरोगेसी दो तरह की होती है

सरोगेसी में पुरूष के स्पर्म (शुक्राणु) को सरोगेट मदर के ओवम (अंडाणु) के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। इसके अलावा, जेस्‍टेशनल सरोगेसी में माता और पिता दोनों के अंडाणु और शुक्राणु को टेस्ट ट्यूब प्रॉसेस से फर्टिलाइज करवा कर भ्रूण (Embryo) को यूट्रस में इम्प्लांट किया जाता है।

2. सरोगेसी सिर्फ अमीर लोगों के लिए है?

सरोगेसी से शिशु का जन्म के बारे में ज्यादातर सिर्फ धनी लोगों या सेलेब्रिटी के बारे में सुनते हैं। हेल्थकेयर वेबसाइट इएलावीमन आईवीएफआईयूआई सरोगेसी (ElaWoman IVF.IUI Surrogacy) के अनुसार सरोगेसी की प्रॉसेस में 10 लाख से 17 लाख रुपए तक खर्च हो सकते हैं। ये सरोगेसी फी स्ट्रक्चर भारत का है। वैसे सरोगेसी से बेबी डिलिवरी के लिए इंश्योरेंस प्‍लान जैसे अन्य प्रावधान भी हैं। हाल ही में भारत में सरोगेसी से जुड़े नए नियम भी आ चुके हैं

3. सरोगेसी से पैदा हुए शिशु के साथ बॉन्डिंग पर पड़ता है असर

कई लोगों और कपल्स को ऐसा लगता है कि गर्भावस्था के दौरान से शिशु के साथ बॉन्डिंग नहीं हो पाती है। ऐसे में सरोगेट मदर के संपर्क में रहें। कपल अपनी आवाज रिकॉर्ड कर या अपना वीडियो रिकॉर्ड कर सरोगेट मदर को दे सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान म्यूजिक सुनना लाभदायक होता है। अगर आप इस तरह के विकल्प नहीं अपना सकते तो शिशु के जन्म के बाद पैरेंट्स की बॉन्डिंग शिशु के साथ बनने लगती है। इसलिए शिशु के साथ बॉन्डिंग  को लेकर परेशान न हो।

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4. भारत और अमेरिका हैं सरोगेसी-फ्रेंडली देश

भारत में सरोगेट मदर की मदद से बेबी प्लानिंग की जाती है और हाल ही में भारत में सरोगेसी से जुड़े नए नियम भी आ चुके हैं। वहीं विदेशों की बात करें तो यूनाइटेड स्टेटस विश्व में सबसे ज्यादा सरोगेसी-फ्रेंडली देश माना जाता है।

5. सरोगेट मदर का एक बच्चे की मां होना अनिवार्य

सरोगेट मदर के चयन से पहले कुछ बातों को ध्यान जरूर रखना चाहिए जैसे महिला की उम्र 21 से 40 वर्ष होनी चाहिए, महिला स्मोकिंग या एल्कोहॉल का सेवन नहीं करती हो और उसने पहले शिशु को जन्म दिया हो या उसका खुद का बच्चा हो।

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रिव्यू की तारीख नवम्बर 29, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया दिसम्बर 3, 2019

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