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सेक्स और महिलाओं से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

सेक्स और महिलाओं से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई

21वीं सदी में भी सेक्स एक टैबू ही है, खासतौर पर महिलाओं के लिए। सेक्स के प्रति जागरुकता की भले ही कितनी भी बातें कर ली जाएं, लेकिन आज भी कहीें न कहीं इस टॉपिक से लोग बचते नजर आते हैं। खासतौर पर सेक्स और महिलाओं को लेकर आज भी कुछ मिथक हैं, जिन्हें लोग सच मानते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही कुछ मिथक और उनकी सच्चाई।

महिलाएं मास्टरबेशन नहीं करती

मिथक- एक फेमस इंटरनेशनल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक फिल्म अभिनेत्री सेक्शुअल प्लेजर के लिए वाइब्रेटर का इस्तेमाल करते हुए दिखाई जाती है, तो इस पर बहुत बवाल मचता है। सेक्स और महिलाओं की बात हो, तो एक तबका सोचता है कि महिलाओं के लिए सेक्स का मतलब सिर्फ पुरुषों को खुश करना है। महिलाओं की अपनी कोई इच्छा नहीं होती है।

सच्चाई- एक लॉन्जरी कंपनी द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक, 18 से 22 साल की उम्र की 92 प्रतिशत महिलाएं हर दिन मास्टरबेट करती हैं। औसतन महिलाएं पूरे दिन का 1.1% समय मास्टरबेशन में बिताती हैं।

वह अच्छी औरत नहीं, सेक्स के बारे में खुलकर बात करती है

मिथक- पुरुष सेक्स के बारे में खुलेआम बातें करते हैं, लेकिन सेक्स और महिलाओं का कॉम्बिनेशन लोगों की समझ में नहीं आता मतलब लोगों का मानना होता है कि महिलाएं ऐसा नहीं कर सकतीं। ऐसा करने पर उन्हें हाइपरसेक्शुअल माना जाने लगता है।

सच्चाई- महिलाएं भी सेक्स के मुद्दे पर उतने ही खुले तौर पर बात कर सकती हैं, जितना कि पुरुष। अपने सेक्शुअल आकर्षण और अनुभवों के बारे में बात करने में कोई बुराई नहीं है।

महिलाएं पॉर्न नहीं देखतीं

मिथक- पुरुषों के लिए पॉर्न देखना सामान्य है और ऐसा माना जाता है कि महिलाएं पॉर्न नहीं देखतीं, क्योंकि उन्हें यह नहीं देखना चाहिए। महिलाओं के लिए सेक्स सिर्फ भावनाओं से जुड़ा होता है, आनंद से नहीं।

सच्चाई- हर तीन में से एक महिला हफ्ते में कम से कम एक बार पॉर्न देखती है। पोर्नहब के आंकड़ों के अनुसार, एडल्ट साइट पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में 1:14 मिनट अधिक समय बिताती हैं।

यदि आप वर्जिन नहीं है तो कोई आपसे शादी नहीं करेगा

मिथक- महिलाओं की वर्जिनिटी को हमेशा संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है और लड़के हमेशा वर्जिन लड़की से ही शादी करना चाहते हैं। सेक्स और महिलाओं को लेकर यह मिथक आज के दौर में भी पुरुषों के एक बड़े तबके के दिमाग में रहता है।

सच्चाई- वर्जिनिटी के आधार पर किसी को जज नहीं किया जा सकता। अगर शादी से पहले कोई आपसे यह सवाल करता है, तो वह व्यक्ति आपके लिए सही नहीं है।

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बर्थ कंट्रोल महिलाओं की जिम्मेदारी होती है

मिथक- यह महिलाओं की जिम्मेदारी है कि वह अपने साथी को प्रोटेक्शन लेने को कहें, क्योंकि महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं। इसलिए पार्टनर को कॉन्डम के इस्तेमाल के लिए मनाने की जिम्मेदारी उनकी ही है।

सच्चाई- बात चाहे बर्थ कंट्रोल की ही यो सेक्शुअल हेल्थ की यह दोनों पार्टनर की ज़िम्मेदारी होती है किसी एक की नहीं।

महिलाओं को सेक्स की पहल नहीं करनी चाहिए

मिथक- समाज में बाकी चीज़ों की तरह ही बेड पर भी पुरुषों की ही मर्जी चलती है। महिलाओं को बस अपने साथी को आकर्षित करना चाहिए न कि सेक्स के लिए पहल, उन्हें अपनी सेक्शुअल डिजायर जाहिर नहीं करनी चाहिए।

सच्चाई- यदि कोई महिला अपने पार्टनर से सेक्स की पहल करती है, तो इसका मतलब है कि वह पार्टनर की तरफ आकर्षित है। रिसर्च के मुताबिक, जब दोनों पार्टनर सेक्स की पहल करते हैं तो वह एक-दूसरे के साथ ज्यादा खुश रहते हैं।

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पार्टनर को आपकी सहमति की जरूरत नहीं है

मिथक- आपका पार्टनर यदि आपको प्यार करना चाहता है तो उसे आपकी मर्जी जानने या सहमति की जरूरत नहीं है, क्योंकि आपके शरीर पर उसका हक बनता है।

सच्चाई- आपके शरीर पर सिर्फ आपका हक है किसी और का नहीं और आपको ना बोलने का पूरा अधिकार है, भले ही सामने आपके पति ही क्यों न हों।

शॉर्ट ड्रेस पहनने वाली लड़कियां आसानी से इंटीमेट हो सकती हैं

मिथक- छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियां सेक्स को लेकर बहुत खुली होती हैं और आसानी से इंटीमेट हो सकती हैं। छोटी स्कर्ट पहनकर वह मर्दों को उन्हें घूरने और छूने के लिए उकसाती हैं। सेक्स और महिलाओं को लेकर लोगों की सोच आज भी महिलाओं के कपड़ों पर अटकी है।

सच्चाई- किसी महिला को उसके कपड़ों के आधार पर जज करना बिल्कुल गलत है। कपड़ों का सेक्शुअल बिहेवियर से कोई लेना देना नहीं होता। महिलाएं अपनी पंसद और कंफर्ट के हिसाब से कपड़े पहनती हैं, इसलिए उनके कपड़ों के आधार पर उन्हें जज करने की गलती न करें।

मिथक – मेनोपॉज के कारण महिलाओं में कामेच्छा में कमी आती है। सेक्स और महिलाओं से जुड़ा यह मिथक भी काफी प्रचलित है।

सच्चाई – यह सच है कि मेनोपॉज के कारण महिलाओं की कामेच्छा कम हो जाती है या कई महिलाओं के लिए यह बिल्कुल खत्म भी हो जाती है। लेकिन, सभी महिलाओं के केस में ऐसा नहीं होता है। वहीं महिलाओं में कुछ थोड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। कई अध्ययनों में तो यह तक सामने आया है कि कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के बाद कामेच्छा और बढ़ गई है। मोनोपॉज का अनुभव व्यक्तिगत तौर पर अलग-अलग हो सकता है। जबकि कुछ महिलओं के अनुभवों में समानताएं हो सकती हैं। लेकिन, हर महिला के लिए यह अलग-अलग हो सकता है।

मिथक- महिलाओं के लिए वजायनल हेल्थ केवल सेक्स से ही जुड़ी है,

सच्चाई – योनि का स्वास्थ्य केवल सेक्स से जुड़ा नहीं है। यह महिलाओं की यूरिनरी सिस्टम और पेल्विक हेल्थ से भी जुड़ा हुआ है। यहां तक ​​कि अगर महिलाएं वर्तमान में यौन रूप से सक्रिय नहीं भी हैं, तो भी योनि की देखभाल करना आवश्यक है। इसके अलावा अगर जो महिलाएं मेनोपॉज से गुजरती हैं, वे योनि में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों का अनुभव करती हैं। इसके अलावा इस दौरान महिलाएं मूत्र रिसाव या मूत्र पथ के संक्रमण जैसे मुद्दों का अनुभव कर सकती हैं। इस वजह से महिलाओं को मेनोपॉज के बाद भी स्त्री रोग संबंधी देखभाल के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

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लेखक की तस्वीर
Kanchan Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/02/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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