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चैन की नींद सोना है बहुत जरूरी, जानिए क्या होते हैं अच्छी नींद के फायदे?

चैन की नींद सोना है बहुत जरूरी, जानिए क्या होते हैं अच्छी नींद के फायदे?

अच्छी नींद आना क्या आपके लिए भी सपने जैसा है ? कम ही लोग हैं, जो आज के समय में ये कहें कि ‘मुझे आज अच्छी नींद आई’। इसका कारण है कि हम लोगों के काम करने का तरीका बिल्कुल बदल चुका है। भागदौड़ भरी जिंदगी में इतने काम होते हैं कि आराम करने का समय कम ही लोगों को मिल पाता है। देर रात तक काम करने के कारण नींद का समय भी तय नहीं हो पाता है। ऐसे में अच्छी नींद (Healthy sleep) की कल्पना करना बहुत मुश्किल हो गया है। पहले लोग काम और नींद के बीच अच्छी तरह से बैलेंस बना लेते थे लेकिन अब नींद लेने के समय में काम को प्राथमिकता दी जाती है।

शरीर के लिए अच्छी नींद दवा की तरह काम करती है। अगर आप नींद में कमी कर देंगे या फिर रोजाना नींद पैटर्न में बदलाव करेंगे, तो शरीर को रिलेक्स नहीं मिल पाएगा और आपको शारीरिक के साथ ही मानसिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ेगा। आपके मन में कुछ प्रश्न आ सकते हैं, जैसे कि नींद कितनी लेनी चाहिए, कब लेनी चाहिए, कौन-से फैक्टर नींद को प्रभावित करते हैं, अच्छी नींद की जरूरत (Healthy sleep) आखिर क्यों है ? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं, तो हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से अहम जानकारी देने की कोशिश करेंगे। जानिए नींद लेने और अच्छी नींद लेने में क्या अंतर है ?

और पढ़ें : महिला और पुरुषों के स्लीप पैटर्न क्यों होते हैं अलग?

नींद लेने और अच्छी नींद लेने में क्या है अंतर? (Healthy sleep)

अच्छी नींद

अब आप सोच रहे होंगे कि नींद तो नींद होती है, नींद लेने या अच्छी नींद लेने में भला क्या फर्क हो सकता है ? अगर आपके मन में ये बात आई है, तो आपको इस बारे में जानकारी आवश्यकता है। जी हां ! अच्छी नींद का मतलब पूरी नींद लेने से है। नींद लेने में आधी-अधूरी नींद या फिर कम समय के लिए ली गई नींद शामिल है, वहीं अच्छी नींद पर्याप्त समय के लिए ली जाती है। आपको मालूम होगा कि बच्चों के सोने के लिए पर्याप्त समय अलग होता है, वहीं वयस्कों के लिए और ओल्ड पर्सन के लिए पर्याप्त नींद लेने का समय अलग होता है। अगर आप नीचे दिए गए पॉइंट से एग्री करते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको अच्छी नींद आती है। अगर ऐसा नहीं है, तो अब आपको अच्छी नींद (Healthy sleep) के लिए प्रयास करना शुरू कर देना चाहिए।

  • आपको लेटने के बाद 15 से 20 मिनट में नींद आ जाती है।
  • आप 24 घंटे में कम से कम सात से नौ घंटे की नींद लेते हैं।
  • आप जब सोते हैं, तो आधी रात में आपकी नींद नहीं टूटती है।
  • आपको रात में सोने का मन करता है।
  • जब आप सोकर उठते हैं, तो रिफ्रेश महसूस करते हैं।
  • आपको वर्किंग आवर में नींद नहीं आती है और साथ ही आप अच्छे मूड के साथ काम करते हैं।
  • आपके परिवार के किसी भी सदस्य ने आपको स्नोरिंक (खर्राटे ) करते हुए , सोते समय तेज सांस लेते हुए या फिर नींद में बोलते हुए नहीं सुना है।

हेल्दी स्लीप के बारे में डॉ. प्रीतम मून, सलाहकार चिकित्सक, वॉकहार्ट अस्पताल मीरा रोड का कहना है,” अच्छी नींद (Healthy sleep) के लिए बायीं करवट सोना आपके लिए ज्यादा अच्छा माना जाता है। क्योंकि यह खर्राटों को कम करने के साथ पाचन में सुधार करने में भी काफी मददगार हो सकता है। इसके अलावा, अच्छे श्वसन स्वास्थ्य के लिए प्रवण स्थिति में सोएं। इसके अलावा अच्छी नींद के लिए आपको कुछ जरूरी टिप्स का पालन करना होगा, जैसे कि सोने के ठीक पहले खाना न खाना, टीवी देखने से परहेज करना, किताबें पढ़ने की कोशिश करना या सोते समय संगीत सुनना, सोते समय किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल न करना, एक अच्छी नींद के वातावरण को बनाता है।”

और पढ़ें : जानें कैसे पा सकते हैं 10, 60 और 120 सेकंड में नींद

जानें हेल्दी लाइफ के लिए अच्छी नींद की जरूरत क्यों है? (Healthy sleep)

अच्छी नींद क्यों जरूरी है ? ये बात आपको भी अब समझ आ ही गई होगी। एडल्ट के कंपेयर में बच्चे ज्यादा नींद लेते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही कई ऐसे कारण होते हैं, जो नींद में रुकावट पैदा करने का काम करते हैं। बुजुर्गों को रात में कम नींद आती है। ऐसा उनकी बीमारी के कारण भी हो सकता है। अगर तय समय के अनुसार नींद नहीं ली गई, तो शरीर में कई प्रकार की बीमारियां भी जन्म ले सकते हैं। अगर अच्छी नींद (Healthy sleep) नहीं आती है, तो आपको अगले दिन इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है,

आखिर कितना सोना चाहिए?

उम्र के अनुसार सोने का समय भी बदल जाता है। नवजात शिशु से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सोने का एक तय समय होता है। अगर आपको दिए गए समय से कम नींद आ रही है या फिर आप कम नींद ले रहे हैं, तो इसे गुड स्लीप नहीं कहा जाएगा। जानिए किस उम्र से किस उम्र तक के लोगों को, कितनी नींद लेनी चाहिए।

0 –3 साल के शिशु के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 14 से 17 घंटे
4 – 11 (Infant) महीने के शिशु के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे: 12 – 15 घंटे
1 -2 (Toddler) साल के बच्चों के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 11 – 14 घंटे
3 – 5 (Preschool) साल के बच्चो के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 13 घंटे
6 – 13 (School-age) साल के बच्चों के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 9-11 घंटे
14 -17 (Teen) साल के बच्चों के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 7 – 9 घंटे
18 – 25 (Young Adult) साल के एडल्ट के लिए अच्छी नींद के लिए जरूरी घंटे : 7 – 9 घंटे
26 – 64 (Adult) साल के लोगों के लिए उपयुक्त नींद के घंटे : 7 – 9 घंटे
अदर एडल्ट -65 साल से अधिक उम्र के लिए : 7 – 8 घंटे

बच्चों के लिए जरूरी नींद

बेबी स्लीप
बेबी स्लीप

न्यूबॉर्न बेबी करीब 16 घंटे की नींद या फिर उससे अधिक की नींद लेते हैं। वहीं उम्र बढ़ने के साथ ही बच्चों की नींद में भी कमी आने लगती है। तीन से चार महीने के बच्चे एक बार में तीन से चार घंटे की नींद लेते हैं। सब बच्चों की नींद अलग होती है। बच्चे रात में करीब दस घंटे की नींद लेते हैं। ये कम या फिर ज्यादा हो सकती है। यूएस के एनआईसीएचडी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलपमेंट) के अनुसार, बच्चे को पीठ के बल सुलाना सुरक्षित होता है। अगर बच्चे को अच्छी नींद (Healthy sleep) में सुलाना चाहते हैं, तो उसे पीठ के बल सुलाना सुरक्षित रहेगा। कुछ बच्चों की आदत होती है कि उन्हें पीठ के बल सुलाया जाता है लेकिन फिर वो पेट के बल सो जाते हैं। ऐसा ठीक नहीं होता है। पेट के बल सोने से अच्छी नींद नहीं आती है। पेट के बल सोने पर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और घुटन भी महसूस हो सकती है। बच्चे की गर्दन सोते समय सीधी रहे, इसके लिए आप सरसों के दानों से बनी तकिया या फिर फॉम का बना हुआ सपोर्टिव तकिया इस्तेमाल कर सकते हैं। बच्चे को आप तकिया न लगाएं। ऐसा करने से उसे दिक्कत भी महसूस हो सकती है। सोते समय बच्चे की स्लीपिंग पुजिशन अच्छी नींद में अहम भूमिका निभाती है। अगर आपका बच्चा सही से नहीं सो पा रहा है, तो इस बारे आप डॉक्टर से जानकारी जरूर लें।

बड़ों के लिए जरूरी नींद

एडल्ट स्लीप
एडल्ट स्लीप

अगर हम आपसे पूछें कि आप रोजाना कितने घंटे सोते हैं, तो आप जवाब शायद सात या आठ घंटे होगा। बॉडी को रिलैक्स करने के लिए सोना बहुत जरूरी होता है। एडल्ट में नींद एक तय समय पर आती है और साथ ही समय पूरा होने पर नींद खुल भी जाती है। नींद का आना मेलाटोनिन हार्मोन से जुड़ा हुआ है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि महिलाओं और पुरुषों के स्लीप पैटर्न डिफरेंट हो सकते हैं। सर्केडियन रिदम एक तरह की प्रोसेस है, जो स्लीप वेक साइकिल को रेगुलेट करने का काम करती है। ये एक तरह का बायोलॉजिकल प्रोसेस है। अगर आप किसी प्रकार का स्ट्रेस न लें और अच्छी लाइफस्टाइल अपनाएं तो आपको रात में अच्छी नींद (Healthy sleep) आ सकती है। वहीं, जो लोग दिन में ज्यादा सोते हैं, उनकी रात की नींद खराब हो सकती है। जो एडल्ट बिना स्ट्रेस लिए अच्छी लाइफस्टाइल अपनाते हैं, उन्हें अच्छी के साथ ही गहरी नींद भी आती है और शरीर को रिफ्रेश करने में अहम रोल निभाती है। एडल्ट को रात में सात से नौ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए।

बुजर्गों के लिए जरूरी नींद

एल्डर स्लीप
एल्डर स्लीप

उम्र बढ़ने के साथ ही स्लीप पैटर्न में भी अंतर होता है। मिडिल एज में स्लो स्लीप वेव में रिडक्शन होता है। उम्र बढ़ने के साथ ही नींद में कमी आने लगती है। करीब 1000 लोगों में की गई स्टडी (NCBI) में ये बात सामने आई है कि बुजुर्गों को 24 घंटे में केवल सात घंटे ही नींद आती है। बुजुर्ग पुरुष महिलाओं की अपेक्षा अधिक सोते हैं। बुजुर्गों में कम नींद के कई कारण हो सकते हैं। कम नींद लेने के कारण शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता है। ये कहना गलत नहीं होगा कि जवान लोग गहरी नींद लेते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए ये आसान नहीं होता है। अधिक उम्र होने पर शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन भी कम बनने लगता है, जो नींद में कटौती का काम करता है। अमेरिका नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार ‘एडल्ट लोगों को सात से नौ घंटे की नींद चाहिए होती है, वहीं बुजुर्गों को सात से आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ कई बीमारियां भी नींद उड़ाने का काम करती हैं।’

और पढ़ें : ज्यादा सोने के नुकसान से बचें, जानिए कितने घंटे की नींद है आपके लिए जरूरी

हेल्दी स्लीप क्यों नहीं ले पा रहे हैं आप? (Healthy sleep)

हेल्दी स्लीप न ले पाने के एक नहीं बल्कि बहुत से कारण हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को किसी बात की चिंता सता रही है, तो उसकी रातों की नींद उड़ सकती है। काम का अधिक प्रेशर भी इंसान को सोने नहीं देता है। आपने महसूस किया होगा कि जब आप रात में सोने के लिए बेड में जाते हैं, तो आपके मन में दिन भर की गतिविधिया और अगले दिन क्या करना है, इस बात की चिंता लगी रहती है। यहीं कारण है कि नींद नहीं आती है। लंबे समय से स्ट्रेस के कारण डिप्रेशन की समस्या होने पर भी नींद प्रभावित होती है। जो लोग नींद को भगाने के लिए चाय अधिक पीते हैं, उनकी नींद भी डिस्टर्ब होती है। नींद आने के लिए बाहरी वातावरण के सुकून के साथ ही मन में भी सुकून की जरूरत पड़ती है। अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो अनिद्रा की समस्या शुरू हो जाती है। अगर आपको अभी तक नहीं पता चल पाया है कि आपकी अनिद्रा का क्या कारण है, तो आपको नीचे दिए गए कारणों को जरूर पढ़ना चाहिए।

चिंता और तनाव के कारण

जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि नींद न आने की समस्या के कारण शरीर में कई बीमारियां जन्म ले सकती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी भी बारे में अधिक सोचने के कारण आपको नींद न आने की समस्या हो सकती है। स्ट्रेस और टेंशन आज के जीवन का सच है। यहीं कारण है लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। अवसाद या डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की सोच में बार-बार बदलाव होता है, जो नींद न आने का कारण बन जाता है। इस कारण से मस्तिष्क में भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

शराब और नशे की लत के कारण

जिन लोगों को रोजाना शराब पीने की आदत होती है, उनको भी अनिद्रा की समस्या हो सकती है। अधिक मात्रा में शराब पीने से भले ही शरीर असंतुलित हो जाता हो लेकिन ये नींद को बाधित करने का काम करता है। शराब शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाने का काम करती है।

चाय और कॉफी के अधिक सेवन के कारण

आजकल की लाइफस्टाइल में देर तक जागना मानों फैशन-सा बन गया है। जो लोग जल्दी सोते हैं, उनका मजाक भी उड़ाया जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अच्छी नींद (Healthy sleep) न ले पाने के कारण आजकल अधिकतर लोग किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं। चाय और कॉफी यानी कैफीन की अधिक मात्रा लेने पर नींद प्रभावित होती है।

सही वातावरण न होने के कारण

नींद के लिए सभी को शांत वातावरण की जरूरत होती है। अगर सोते समय तेज आवाजें आएंगी या फिर रात में आप मोबाइल चलाओगे, तो आपकी नींद छूमंतर हो जाएगी। सोने के लिए अच्छा वातावरण चुनना बहुत जरूरी है। रात में तेज लाइट भी आपकी नींद उड़ा सकती है। आपको अच्छी नींद (Healthy sleep) चाहिए, तो कुछ बातों को जरूर ध्यान रखें, जो आपकी समस्या को कम कर सके।

और पढ़ें : इस दिमागी बीमारी से बचने में मदद करता है नींद का ये चरण (रेम स्लीप)

स्लीपिंग डिसऑर्डर के प्रकार (Types of sleeping disorders)

स्लीप डिसऑर्डर के कारण नींद की क्वालिटी, टाइमिंग और अमाउंट में समस्या होने लगती है। इस कारण से डे टाइम डिस्ट्रेस और रोजाना के कामों में दिक्कत शुरू होने लगती है।बेड में लेटने के बावजूद नींद न आना, थकान का अधिक एहसास, बार-बार करवटें बदलना, खर्राटें लेना, नींद में बातें करना आदि स्लीपिंग डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

स्लीप एपनिया (Sleep apnea)

स्लीप एपनिया स्लीपिंग डिसऑर्डर है। आपने देखा होगा कि कुछ लोगों की सोते समय अचानक से सांस रुक जाती है और फिर तेजी से सांस लेनी पड़ती है। साथ ही व्यक्ति को सोने में परेशानी होती है और करवतें भी बदलनी पड़ सकती है। स्लीप एपनिया स्लीपिंग डिसऑर्डर के कारण लोग सोते समय अधिक आवाज भी करते हैं जिसे खर्राटे के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा अधिक उम्र के लोग, ज्यादा वजन वाले लोगों में अधिक होता है। आपने गौर किया होगा कि ऐसा पुरुषों के साथ ज्यादा होता है जबकि महिलाओं के साथ कम होता है।

इंसोम्निया (Insomnia)

अनिद्रा

इंसोम्निया (Insomnia) यानी अनिद्रा भी स्लीपिंग डिसऑर्डर है। इंसोमेनिया की वजह से नींद नहीं आती है या फिर नींद आने में समस्या होती है। अगर
इंसोम्निया की समस्या लंबे समय तक रहती है, तो इसे क्रॉनिक इंसोम्निया कहते हैं। अनिद्रा की समस्या के कारण शरीर में अन्य रोग भी हो सकते हैं। ये स्लीपिंग डिसऑर्डर किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण भी अनिद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण से डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है।

हाइपर सोमनिया (Hypersomnia)

हाइपर सोमनिया (hypersomnia) एक कंडीशन है, जिसके कारण व्यक्ति को अधिक नींद आती है। इसे एक्सेसिव डे टाइम स्लीपनेस (EDS) भी कहते हैं। हाइपर सोमनिया प्राइमरी के साथ ही सेकेंड्री कंडीशन भी हो सकती है। इस समस्या पीड़ित लोगों को थकावट का अधिक एहसास होता है। साथ ही रोजमर्रा के अन्य काम भी प्रभावित होते हैं। सेकेंड्री हाइपर सोमनिया अन्य मेडिकल कंडीशन के कारण भी हो सकता है। इसके कारण स्लीप एपनिया, पार्किंसन डिजीज, किडनी फेलियर या फिर क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम भी हो सकता है।

डिलेड स्लीप डिसऑर्डर (Delayed sleep phase syndrome)

डिलेड स्लीप डिसऑर्डर के कारण व्यक्ति को देर से नींद आती है। ऐसा इंटरनल बॉडी क्लॉक प्रॉब्लम की वजह से होता है। अगर आपको डिलेड स्लीप डिसऑर्डर है, तो आप तय समय (जब सब लोग सोते हैं ) में नहीं सो सकते हैं। ऐसा तब भी हो सकता है जब व्यक्ति को बहुत थकान महसूस हो रही हो। ऐसा होने से व्यक्ति सुबह भी जल्दी सोकर नहीं उठ पाता है। इस कारण से दिनचर्या में बहुत-सी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। इस कारण से व्यक्ति स्ट्रेस या फिर डिप्रेशन का शिकार भी हो सकता है।

और पढ़ें : नींद न आने की समस्या से हैं परेशान तो आजमाएं ये 6 नींद के उपाय

समझें अपनी स्लीपिंग सायकल को

शरीर को रिपेयर करने के लिए नींद बहुत जरूरी होती है। जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर रिलेक्स करता है। जब आप सोते हैं, तो आपकी नींद चार स्टेप से होकर गुजरती है, जिसे स्लीप साइकल कहा जाता है। पहली तीन स्टेज को नॉन रेपिड आई मूवमेंट स्लीप (NREM) कहा जाता है। वहीं लास्ट स्टेज को रैपिड आई मूवमेंट स्लीप (REM) कहा जाता है।

स्लीप सायकल का पहला स्टेप

फस्ट स्टेप में नींद बहुत हल्की होती है यानी अगर आपसे कोई तेजी से कुछ कहेगा, तो आपकी नींद खुल सकती है। ऐसे में मसल्स अपना काम थोड़ा धीमा कर देती हैं।

स्लीप सायकल का सेकेंड स्टेप

स्लीप साइकल के सेकेंड स्टेप में नींद पहले चरण की तुलना में अधिक गहरी हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति को अपने आस-पास होने वाली गतिविध का पता नहीं चल पाता है। अब व्यक्ति की हार्टबीट कम हो जाती है और साथ ही शरीर का तापमान भी कम होने लगता है।

और पढ़ें : एंटी-स्लीपिंग पिल्स : सर्दी-जुकाम की दवा ने आपकी नींद तो नहीं उड़ा दी?

स्लीप सायकल का थर्ड स्टेप

स्लीप साइकल के थर्ड स्टेप में माइंड से डेल्टा वेव्स निकलती हैं। व्यक्ति इस चरण में गहरी नींद ले रहा होता है। इस स्टेज में बॉडी रिपेयर होना शुरू होती है और साथ ही टिशू बनने का काम भी होता है। तीसरा चरण इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम भी करता है।

रैपिड आई मूवमेंट स्लीप (REM)

अंतिम चरण को REM स्लीप भी कहा जाता है। सोने के 90 मिनट बाद की नींद को REM स्लीप कहा जाता है। ये केवल 10 मिनट के लिए होता है। ये पूरी स्लीप का 25 परसेंट होता है। ऐसे में आई मूवमेंट होता है।

स्लीप एंग्जायटी क्या है?

सोने से डरना स्लीप एंग्जायटी कहलाता है। ऐसा कई कारणों से होता है। कई कारणों से नींद नहीं आती है। ऐसे में व्यक्ति के मन के अंदर नींद न आने का एक डर बैठ जाता है। इसे ही स्लीप एंग्जायटी कहते हैं।

और पढ़ें : नींद की दिक्कत के लिए ले रहे हैं स्लीपिंग पिल्स तो जरूर पढ़ें 10 सेफ्टी टिप्स

स्लीपिंग ट्रीटमेंट किस तरह से करता है काम? (Sleeping Treatment)

जिन लोगों को नींद न आने की समस्या होती है, डॉक्टर उन्हें बिहेवियरल थेरिपी (behavioral therapy) लेने की सलाह दे सकते हैं। स्लीपिंग डिसऑर्डर से निपटने के लिए डॉक्टर साथ ही कुछ मेडिसिन्स, ओरल स्प्रे (oral spray) या डिजाल्विंग टेबलेट्स लेने की सलाह भी दे सकते हैं। दवाइयों के सेवन के बारे में डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की गोलियां लेना हानिकारक हो सकता है। कुछ बीमारियों के दौरान प्रिस्क्रिप्शन स्लीपिंग पिल्स लेने की सलाह नहीं दी जाती है। बेहतर होगा कि आप डॉक्टर को बताएं कि आपको पहले से कौन-सी बीमारी है। आप अच्छी नींद (Healthy sleep) के लिए मेडिटेशन भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक्सपर्ट की राय जरूर लेनी चाहिए। आप डॉक्टर से नींद की गोलियों से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में भी जानकारी ले सकती हैं।

अच्छी नींद के लिए आपको पहले कुछ नियम बनाने चाहिए। ऐसा करने से ही आप अच्छी नींद (Healthy sleep) ले पाएंगे।

  • नींद का निश्चित समय तय करें। देर रात तक काम के लिए अपनी नींद को कुर्बान न करें।
  • नींद लेने के करीब दो से तीन घंटे पहले डिनर लें।
  • रात में सोने से पहले आप बाहर वॉक पर जा सकते हैं।
  • कमरे में तेज लाइट का यूज बिल्कुल न करें। ऐसा करने से नींद खराब हो सकती है।
  • मोबाइल का यूज लेटते समय बिल्कुल भी न करें।
  • रात के समय चाय या फिर कॉफी का सेवन भूल कर भी न करें। ये आपकी नींद उड़ाने का काम करेगा।
  • सोने से पहले किसी भी बात पर विचार न करें। मन अगर कुछ सोचने लगता है, तो नींद उड़ जाती है।

कुछ बातों का ध्यान रख आप अच्छी और गहरी नींद ले सकते हैं। अगर आपको स्लीपिंग डिसऑर्डर है, तो आपको डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए। आपको ये आर्टिकल कैसा लगा, आप हमें जरूर बताएं। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

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सूत्र

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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