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एंटी-स्लीपिंग पिल्स : सर्दी-जुकाम की दवा ने आपकी नींद तो नहीं उड़ा दी?

एंटी-स्लीपिंग पिल्स : सर्दी-जुकाम की दवा ने आपकी नींद तो नहीं उड़ा दी?

अक्सर आपने सुना होगा कि इस दवा के ज्यादा इस्तेमाल से लिवर की समस्या हो सकती है या फलाना मेडिसिन के उपयोग से गैस की समस्या होने लगती है। कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए लोग तरह-तरह की दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से एक दवा ऐसी होती ही है, जिससे आपकी नींद प्रभावित होने लगती है। दरअसल, कई हेल्थ कंडीशंस (health conditions) के उपचार के लिए ली जाने वाली कुछ दवाएं स्लीप साइकिल (sleep cycle) को प्रभावित करती हैं और सर्दी-जुकाम की दवाओं में ऐसा ज्यादा होता है। “हैलो हेल्थ” के इस आर्टिकल में जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी दवाएं हैं जो साइड इफेक्ट के रूप में एंटी-स्लीपिंग पिल्स का काम करने लगती हैं।

एंटी-स्लीपिंग पिल्स (anti-sleeping pills) का काम करने वाली दवाएं

नीचे कुछ दवाएं ऐसी हैं जो एंटी-स्लीपिंग पिल्स की तरह काम करती हैं-

एल्कोहॉल युक्त दवाएं (Alcohol based medicines)

सर्दी, खांसी और फ्लू की दवाओं में एल्कोहॉल होता है, जिससे नींद की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसी दवाएं रात की नींद में बाधा डालती हैं। ये मेडिसिन्स एंटी-स्लीपिंग पिल्स की तरह काम करने लगती हैं।

एंटी-एरथमिक ड्रग्स (Anti-arrhythmic drugs)

हार्ट रिदम समस्याओं (Heart rhythm problems) के उपचार के लिए दी जाने वाली दवाओं से व्यक्ति को दिन में थकान सी महसूस होती है। साथ ही ये दवाइयां रात में नींद की कठिनाइयों को भी ट्रिगर कर सकती हैं।

और पढ़ें : इन लक्षणों से पता चलता है कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है

कोलेलिनेस्टरेज इनहिबिटर (Cholinesterase inhibitors)

इन दवाओं का उपयोग आमतौर पर अल्जाइमर रोग और अन्य प्रकार के मनोभ्रंश वाले व्यक्तियों में मेमोरी लॉस (memory loss) और मानसिक परिवर्तनों (mental changes) के इलाज के लिए किया जाता है। गैलेंटामाइन (रेजडाइन) और रिवास्टिग्माइन (एक्सेलॉन) आदि दवाएं ऐसी हैं कि इन के मुख्य दुष्प्रभावों में दस्त, मतली और नींद में गड़बड़ी शामिल हैं। लम्बे समय तक इलाज के तौर पर इन दवाओं का प्रयोग किया जाता है तो ये एंटी-स्लीपिंग पिल्स (anti-sleeping pills) का काम करने लगती हैं।

एंटीहिस्टामाइन (Antihistamines)

anti sleeping pills

सर्दी और एलर्जी के लक्षणों को कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली ओवर-द-काउंटर दवा एंटीहिस्टामाइन से सुस्ती आना, एक सामान्य दुष्प्रभाव है। लेकिन, ये दवाएं लंबे समय तक उपयोग में लाई जाएं तो एंटी-स्लीपिंग पिल्स (anti-sleeping pills) से कम नहीं काम करती हैं। ये दवाएं आपकी नींद की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

और पढ़ें : स्लीपिंग सिकनेस (Sleeping Sickness) क्या है? जानें इसके लक्षण और बचाव उपाय

बीटा-ब्लॉकर्स (Beta blockers)

बीटा-ब्लॉकर्स दवाओं का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप (High blood pressure), अनियमित हार्ट बीट (दिल की धड़कन का असामान्य होना), एनजाइना (angina) जैसी गंभीर समस्याओं के लिए किया जाता है। लेकिन इनसे इंसोम्निया (insomnia) या नींद की अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा समय तक अगर इन दवाओं का सेवन जारी रखा जाए तो ये मेडिसिन एंटी-स्लीपिंग पिल्स का काम करने लगती हैं।

और पढ़ें : ब्लड प्रेशर की है समस्या, ऐसे करें घर पर ही बीपी चेक

ग्लूकोसामाइन और कोंड्रोइटिन (Glucosamine and chondroitin)

ग्लूकोसामाइन और कोंड्रोइटिन डायट्री सप्लिमेंट्स हैं जो जोड़ों के दर्द से राहत देने, जॉइंट्स फंक्शन में सुधार और सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि गठिया (अर्थराइटिस) के सप्लिमेंट्स में ग्लूकोसामाइन और कोंड्रोइटिन होते हैं। ग्लूकोसामाइन और कोंड्रोइटिन एंटी-स्लीपिंग पिल्स की तरह कैसे काम करते हैं। इस बारे में रिसर्चस पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं। लेकिन, अध्ययन बताते हैं कि कई तरह के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स के चलते मतली, दस्त, सिरदर्द और अनिद्रा की समस्या पैदा होने लगती है। फिर ये डायट्री सप्लिमेंट एंटी-स्लीपिंग पिल्स की तरह काम करने लगते हैं

कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स (Corticosteroids)

डॉक्टर अस्थमा के इलाज के लिए इन दवाओं को लिखते हैं लेकिन, इन दवाओं के दुष्प्रभाव के रूप में अनिद्रा देखने को मिलती है। ज्यादा दिनों तक ऐसी मेडिसिन का सेवन इन दवाओं में एंटी-स्लीपिंग पिल्स की प्रॉपर्टी को समाहित कर देता है।

और पढ़ें: किन वजहों से हमें रातों को नींद नहीं आती है?

स्टैटिन (Statins)

स्टैटिन हाई कोलेस्ट्रॉल (high cholesterol) के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। सबसे ज्यादा बिकने वाले स्टैटिंस में एटोरवास्टेटिन (लिपिटर), लोवास्टैटिन (मेवाकोर), रोसुवास्टेटिन (क्रेस्टर) और सिमवास्टेटिन (जोकोर) शामिल हैं। सभी प्रकार के स्टैटिन का सबसे आम दुष्प्रभाव मांसपेशियों में दर्द है, जिसकी वजह से रात में नींद की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। स्टैटिन की वजह से होने वाला दर्द बहुत ही खतरनाक हो सकता है।

और पढ़ें: नींद की दिक्कत के लिए ले रहे हैं स्लीपिंग पिल्स तो जरूर पढ़ें 10 सेफ्टी टिप्स

एंजियोटेंसिन II-रिसेप्टर ब्लॉकर्स (ARBs)

एंजियोटेंसिन II-रिसेप्टर ब्लॉकर्स अक्सर कोरोनरी धमनी की बीमारी या हार्ट फेल (heart fail) के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है। ये दवाएं टाइप 2 मधुमेह या गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को दी जाती हैं। कैंडेसेर्टन (एटाकैंड), इर्बेर्सेर्टन (एवाप्रो), लोसार्टन (कोजार), टेल्मिसर्टन (मिकार्डीस) और वाल्सार्टन (डायोवन) आदि दवाएं इस समूह के अंतर्गत आती हैं। एआरबी अक्सर शरीर में पोटेशियम की अधिकता का कारण बनते हैं, जिससे दस्त के साथ-साथ जोड़ों और पैर में ऐंठन, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द होता है। ये सभी मिलकर अनिद्रा का कारण बनते हैं।

और पढ़ें : दस्त होना कर देता शरीर का बुरा हाल, राहत पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

डाइयुरेटिक (Diuretics)

उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए इन ड्रग्स का उपयोग किया जाता है। इनके कुछ संभावित दुष्प्रभाव के रूप में नींद न आने की समस्या देखी जा सकती है। अनिद्रा की समस्या बार-बार यूरिन लगने की वजह से भी हो सकती है।

और पढ़ें: जानें नींद से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Interesting Facts About Sleep)

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीप्टेक इनहिबिटर्स (SSRIs)

सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीप्टेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई) ड्रग ग्रुप में शामिल दवाओं का इस्तेमाल अवसाद (डिप्रेशन) और एंग्जायटी (anxiety) के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है। लेकिन, इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे-दिन में नींद आना, रेम स्लीप (REM sleep) का समय कम होना।

यदि आपको लगता है कि जो दवाएं आप ले रहे हैं उससे आपको अनिद्रा, नींद कम आना, दिन में आना, नींद का बार-बार टूट जाना जैसी तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो अपने डॉक्टर से बात करें। नींद से जुड़ी समस्याएं दिखने पर चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर रहता है। हो सकता है डॉक्टर आपकी दवा की खुराक बदलें या फिर ऐसी मेडिसिन भी लिख सकते हैं जिससे नींद से संबंधित दुष्प्रभाव कम हों। उम्मीद है कि आपको ‘एंटी-स्लीपिंग पिल्स’ पर आधारित यह आर्टिकल पसंद आया होगा। हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही अगर आपका इस विषय से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है तो वो भी हमारे साथ शेयर करें।

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/01/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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