गांधी जी से सीखी जा सकती है फिट रहने की तरकीब

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

2 अक्टूबर का दिन देश में ‘गांधी जयंती’ के नाम से मनाया जाता है, क्योंकि आज ही के दिन 2 अक्टूबर, 1869 में गुजरात के पोरबंदर में उनका जन्म हुआ था। देश के राष्ट्रपिता बापू यानी मोहनदास करमचन्द गांधी, जिन्हें आमतौर पर पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से भी जानती है। आज भले ही वो हमारे बीच नही हैं, लेकिन उनके आदर्श और सिद्धांत आज भी कायम है। और उनको याद करते हुए गांधी जयंती मनाई जाती है ताकि, उनके विचारों और समर्पण को हम आज भी अपने अंदर जिंद रख सकें। गांधी जी भारत और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक और आध्यात्मिक नेता थे। उन्होंने सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से भारतीयों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज ऊठाई। उनकी इस पहल के तहत अहिंसा के सिद्धान्त को मानते हुए ब्रिटिश सरकार के हुक्म को न मानने की नींव रखी गई।

बापू को क्यों कहा जाता है ‘महात्मा गांधी’

बापू को ‘महात्मा’ नाम के संबोधन के पीछे भी एक कहानी है। साल 1915 में पहली बार राजवैद्य जीवराम कालिदास ने उन्हें महात्मा के नाम से संबोधित किया था। संस्कृत भाषा में महात्मा का अर्थ है ‘महान आत्मा’। इसी तरह, उन्हें राष्ट्रपिता का सम्मान भी सुभाष चन्द्र बोस के जरिए मिला था। 6 जुलाई, 1944 को रंगून में एक रेडियो कार्यक्रम गांधी जी के नाम से प्रसारित किया गया था। इसी दौरान बोस ने उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया और आजाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिए उनका आशीर्वाद लिया और अपनी जीत के लिए शुभकामनाएं भी मांगीं थीं।

2 अक्टूबर को क्यों मनाई जाती है “गांधी जयंती”

भले ही भारत में 2 अक्टूबर को उनके जन्म दिन को ‘गांधी जयंती’ के रूप में मनाया जाता है, लेकिन हार साल इस दिन को पूरे विश्व में ‘अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के नाम से मनाया जाता है। क्योंकि, बापू अहिंसा के मार्ग को अपनाते थे। उनकी इस सोच से न सिर्फ भारत बल्कि, ब्रिटिश सरकार भी प्रभावित हुई थी।

स्वास्थ्य को लेकर थे बेहद सजग

अहिंसा के मार्ग पर चलने से लेकर देश को आजाद करने वाले बापू अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद सजग थे। वे कई मील पैदल चलते थे। सात्विक भोजन करते थे और व्रत उपवास का कड़ाई से पालन करते थे। यहां तक कि वे अपना टॉयलेट भी खुद ही साफ करते थे। देश का स्वच्छ रखने का नारा भी उन्होंने ही दिया था। गांधी जी से हमें कई सीख मिलती हैं जिनका पालन करके हम स्वस्थ रह सकते हैं। जानते हैं उनके बारे में।

अहिंसा का पालन दिमाग को रखता है स्वस्थ

गांधी जी अहिंसा के दम पर देश को आजाद कराया। वे खून खराबा या लड़ाई- झगड़े में विश्वास नहीं करते थे। रिसर्च के अनुसार इस तरह का अप्रोच से इंसान का दिमाग शांत रहता है और शांत दिमाग वाले शख्स को हायपरटेंशन और हार्ट डिसीज का खतरा बहुत काम होता है।

जल्दी सो और जल्दी जागो

गांधी जी रात में चार-पांच घंटे सोते थे और सूरज उगने के पहले उठ जाते थे। आज के युग में हम वयस्कों के लिए सात से आठ घंटे की नींद को महत्व देते हैं। हम आज भी उनके रूटीन को फॉलो कर एक प्रोडक्टिव दिन की शुरुआत कर सकते हैं।

अपनी डायट पर नजर रखो

गांधी जी कहा करते थे कि अपनी बॉडी को कभी भी ‘रिफ्यूज बिन’ मत समझों। इसमें वो सभी फूड्स न डालों जो जीभ डिमांड करती है। उन्होंने छह साल तक वीगन डायट फॉलो की थी। क्योंकि उनका विश्वास था कि हमारी डायट हेल्दी होनी चाहिए।

इस तरह हम गांधी जी का रूटीन फॉलो कर हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। गांधी जयंती पर हम यही कहेंगे कि इस गांधी जी के आदर्शों का पालन कीजिए और स्वस्थ रहिए।

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रिव्यू की तारीख अक्टूबर 2, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 2, 2019

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