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आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से आसानी से मजबूत होती हैं मसल्स, जानें इसके फायदे

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी · डेंटिस्ट्री · Consultant Orthodontist


Shikha Patel द्वारा लिखित · अपडेटेड 18/10/2021

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से आसानी से मजबूत होती हैं मसल्स, जानें इसके फायदे 

10 से 11 घंटे के लॉन्ग वर्किंग आवर्स के कारण लोगों में बैक से जुड़ी समस्या, मोटापा, जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, स्पॉन्डिलाइटिस जैसी अनेकों गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिलती हैं। लेकिन रोजाना सिर्फ दो मिनट की एक्सरसाइज से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। आज हम “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के फायदे (benefits of isometric exercises) बता रहे हैं, जिसको फॉलो कर आप भी फिट रह सकते हैं। 

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आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (Isometric exercise) क्या हैं?

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज में मेहनत कम करनी पड़ती है और इसका फायदा भी शरीर को मिलता है। उदाहरण के तौर पर आप नमस्कार करते हुए हाथ को जोर से जोड़ें और दस सेकंड तक उसी अवस्था में रहें, तो आपके हाथ के मसल्स पर जोर पड़ेगा यानी आपने आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज की। इसलिए कामकाजी लोगों के लिए यह कमाल का वर्कआउट है। इसमें की जानी वाली एक्सरसाइज पूरे शरीर को सक्रिय कर देती है, जिससे बॉडी फिट हो जाती है। ये वर्कऑउट्स मसल लेंथ को प्रभावित नहीं करती हैं। ये व्यायाम मांसपेशियों की स्थिर स्थिति में काम करते हैं। बिना किसी मूवमेंट के मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ ही आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज ब्लड फ्लो को बढ़ाने में भी मदद करती है। 

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज-Isometric exercises

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के अंतर्गत किया जाने वाला एक्सरसाइज कौन-कौन सा है?

निम्नलिखित व्यायाम आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के अंतर्गत आते हैं। जैसे:

प्लैंक एक्सरसाइज (Plank exercise)

लगातार बैठे रहने की वजह से मांसपेशियों में तनाव होता है। इसकी वजह से गर्दन में दर्द, कमर दर्द की समस्या होने लगती है। मांसपेशियों के खिंचाव को कम करने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज करना बेहतर माना जाता है। प्लैंक एक्सरसाइज कई तरह से कर सकते हैं जैसे फुल प्लैंक, एल्बो प्लैंक, हाफ प्लैंक आदि। याद रखें अगर गर्दन में ज्यादा दर्द है, तो प्लैंक करना अवॉयड करें। इन शारीरिक अंगों में दर्द के दौरान एक्सरसाइज करने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। 

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आइसोमेट्रिक पुश-अप्स (Isometric push-ups)

शरीर की स्ट्रेंथ बढ़ाने और फ्लैक्सीबिलिटी को बढ़ाने के लिए आइसोमेट्रिक पुश-अप्स किए जा सकते हैं। पुश-अप्स करते हुए जब शरीर को नीचे ले जाया जाता है, तो पीठ की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं और जब बॉडी को ऊपर लाते हैं, तो बाइसेप्स की मसल्स स्ट्रेच होती हैं। ऐसे में लगातार इसकी प्रैक्टिस से शरीर का लचीलापन बढ़ता है। बॉडी फ्लैक्सिबल होने की वजह से अपर बैक, लोअर बैक एवं शोल्डर पेन से बचाया जा सकता है।  

वॉल-ग्राउंड पुश (Wall ground push)

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के अंतर्गत वॉल-ग्राउंड पुश करने के लिए सबसे पहले किसी दीवार से अपने पैर के तलवों को सटाकर पुश-अप्स करने की पुजिशन में आ जाएं। फिर हाथों पर जोर लगाते हुए पैरों को दीवार पर थोड़ी उंचाई पर टिकाएं। हाथों को बिल्कुल सीधा रखते हुए पैरों से दीवार को धक्का दें। इस आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से पैरों की मांसपेशियों पर दबाव बनता है, जिससे वे मजबूत बनती हैं। ग्राउंड पुश एक्सरसाइज हाथों के साथ-साथ पैरों के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है।

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आइसोमेट्रिक शोल्डर प्रेस (Isometric Shoulder Press)

आइसोमेट्रिक शोल्डर प्रेस को आप ऑफिस टाइम में भी आसानी से कर सकते हैं। इसे करने के लिए सिर्फ दो मिनट का ही समय लगेगा। एक हाथ सर के ऊपर सीधा कर लें। इसी पुजिशन में 30 सेंकड के लिए रुकें और फिर पहले वाली स्थिति में आ जाएं। फिर दूसरे हाथ के साथ भी ऐसे ही करें। इससे कंधों में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है। अगली बार से बैठे-बैठे काम के साथ-साथ आइसोमेट्रिक शोल्डर प्रेस करना ना भूलें। 

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बैक स्ट्रेच (Back Stretch)

बैक स्ट्रेच आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से जॉइंट फ्लैक्सीबिलिटी के लिए फायदेमंद है। इसके लिए बाजुओं को बाहर की ओर करके हाथों को इंटरलॉक करते हुए कंधों को पीछे की तरफ खींचें। फिर कोहनी को फ्लेक्स करते हुए इंटरलॉक्ड हाथों को नाभि तक लाने की कोशिश करें। इस स्थिति में दो सेकंड के लिए रुकें और फिर धीरे-धीरे पहली वाली स्थिति में आ जाएं।

लेग एक्सटेंशन (Leg Extensions)

क्वार्ड या क्वाड्रिसेप्स मसल्स बॉडी का फ्रंट अपर पार्ट है। इन मसल्स को टोन करने के लिए लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है। लगातर बैठकर काम करने की वजह इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है। इसलिए लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज कर आप अपनी फ्रंट बॉडी को अट्रैक्टिव बनाने के साथ-साथ स्ट्रॉन्ग भी बना सकते हैं।

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काफ राइज होल्ड (Calf Raise Hold)

बड़े ही आसानी से वर्कआउट को किया जा सकता है। आप सिर्फ किसी दिवार के सामने खड़े हो जाएं। अब दोनों हाथों से वॉल को पुश करते हुए बॉडी को ऊपर की ओर लिफ्ट करें। इस दौरान आप अपने पैर के पंजों के सहारे बॉडी को अपवर्ड डायरेक्शन में पुश करें और एड़ियों को ऊपर की ओर उठाये रखें। 30 सेकेंड होल्ड करें और फिर नॉर्मल पुजिशन में आ जाएं। ऐसा करने से आप रिलैक्स महसूस करेंगे।

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स्टेटिक लंज (Static Lunge)

स्टेटिक लंज भी बड़े ही आसानी से किया जा सकता है। इस वर्कआउट के दौरान स्ट्रेट खड़े हो जाएं। अपने हाथों को कमर पर रखें और 90 डिग्री का कोण बनाते हुए एक-एक पैर आगे बढ़ाएं और बैठें। इस एक्सरसाइज की मदद से पैरों को स्ट्रॉन्ग किया जा सकता है।

प्रेयर पोज (प्रार्थना मुद्रा)

ऑफिस में लगातार एक ही पुजिशन में बैठे रहने से ऑस्टियोअर्थराइटिस, गर्दन दर्द, जोड़ों के दर्द जैसी समस्या हो सकती है। इन प्रॉब्लम्स को होने से रोकने के लिए प्रेयर मुद्रा कर सकते हैं। यह हाथों की सबसे आसान एक्सरसाइज है। इसे करने के लिए आप कुर्सी पर बैठ सकते हैं। हाथों को ऐसे जोड़ें जैसे आप प्रार्थना करते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपके हाथ सीने के नीचे हों और कोहनी से हथेलियों की पुजिशन बिल्कुल सीधी हो। 20 सेकंड इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य हो जाएं।

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आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज-Isometric exercises

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के फायदे (Benefits of Isometric exercises)

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के फायदे इस प्रकार हैं। जैसे:

  • आइसोमेट्रिक व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत और कंडीशनिंग करने में मदद करते हैं।
  • ये निष्क्रिय मांसपेशियों के ऊतकों को मजबूत करती हैं।
  • इससे बॉडी पॉश्चर में सुधार आता है।
  • लीन मसल्स के विकास में मदद मिलती है।
  • आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से बोन डेंसिटी को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
  • रोग प्रतिरोध शक्ति बढ़ती है।
  • आइसोमेट्रिक व्यायाम शरीर की सभी प्रमुख इकाइयों को सक्रिय करता है।
  • अधिकांश आइसोमेट्रिक अभ्यासों के लिए किसी भी उपकरण की जरूरत नहीं होती है।
  • ये व्यायाम बुजुर्गों के लिए भी अच्छा माना जाता है।

बढ़ता मोटापा, ब्लड प्रेशर, जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, हार्ट डिसीज, स्पॉन्डिलाइटिस जैसी कई ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जो आज लॉन्ग वर्किंग आवर्स की वजह से बढ़ रही हैं। ऐसे में आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (लो स्क्वॉट्स, हाई प्लैंक आदि) काफी फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के अलावा अपनाएं ये टिप्स

  1. कोशिश करें ज्यादा से ज्यादा चलें- जब आप ऑफिस आते हैं और काम खत्म होने के बाद घर जाते है इस दौरान अगर आपका स्टॉफ ऑफिस से पांच से दस मिनट के अंतर पर है, तो आप पैदल चलकर आने पर जोर दें, जिससे आप दस मिनट की वॉक भी करते हैं। ऑफिस में लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, लंच ब्रेक में खाने के बाद सीढ़ियों का इस्तेमाल करें इससे आपका खाना पच जाएगा और आप आगे काम करने में फ्रेश महसूस करेंगे।
  2. चेयर एक्सरसाइज करे- वजन घटाने के तरीके में डेस्क पर ही आप कुछ एक्सरसाइज कर सकते हैं जोआपकी बॉडी को कंर्फटेबल बनाएगी जैसे कि स्ट्रेचिंग, नेक रोटेशन, सीटेड टोरसो टिव्स्ट, क्रॉस्ड लेग टो रीच, शोल्डर रोटेशन आदि।
  3. शरीर के हाइड्रेट करते रहें- पानी ज्यादा पीएं। ऑफिस पहुंचते ही अपने डेस्क पर पानी की बोतल रखें और समय-समय पर खुद को हाइड्रेट करें। इससे दो फायदे होते हैं, पहले आप खुद को हाइड्रेट रख पाते हो, जिससे आप फ्रेश महसूस करेंगे और दूसरा पानी पीने से आपको टॉयलेट जाना पड़ेगा, जिसकी वजह से आप वॉक कर सकते हैं।
  4. बॉडी पॉश्चर का रखें ख्याल- जब भी आप काम करते हैं, तो पीठ को हमेशा सीधा रखें इससे आप को पीठ, कंधे और गर्दन में दर्द नहीं होगा। अगर आपकी कुर्सी आरामदायक नहीं है, तो एक कुशन का उपयोग करें। क्योंकि सही बॉडी पॉश्चर भी वजन घटाने के तरीके में शामिल हो सकता है।

अगर आप आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज बनने से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

डिस्क्लेमर

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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