डिजेनेरिटिव डिस्क डिजीज वास्तव में कोई बीमारी नहीं है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें उम्र के हिसाब से स्पाइनल डिस्क में परिवर्तन आता जाता है। उम्र के हिसाब से डिस्क में मौजूद पानी की मात्रा कम हो जाती है। उम्र के बढ़ने से यह अपनी लंबाई कम हो जाती है। रीढ़ में स्थित वर्टिब्रा एक दूसरे के करीब आ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप स्पाइन में खुलने वाली तंत्रिकाएं और सिकुड़ जाती हैं। यह स्थिति पैदा होने पर डिस्क किसी भी झटको को सहन नहीं कर पाती हैं। विशेषकर चलने, दौड़ने या कूदने की स्थिति में लगने वाले झटके को सहना मुश्किल होता है।

डिजेनेरिटिव डिस्क डिजीज पूरी स्पाइन में फैल सकती है, लेकिन अक्सर यह लोअर बैक (लुंबर सेक्शन) और गर्दन (सर्वाइकल सेक्शन) में होती है।
इस प्रकार की स्थितियां स्पाइनल कॉर्ड और नर्व पर दबाव डालती हैं। इससे दर्द पैदा होता है और संभावित रूप से तंत्रिका का कार्य प्रभावित होता है।
डिजेनेरिटिव डिस्क डिजीज किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, बुजुर्गों में इसका ज्यादा खतरा रहता है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।
डिजेनेरेटिव डिस्क से आपको कमर या गर्दन में दर्द हो सकता है। लेकिन यह हर व्यक्ति के मामले में अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों को दर्द नहीं होता है, जबकि कुछ लोगों की स्पाइन में समान नुकसान पहुंचने पर गंभीर दर्द होता है। उन्हें अपनी दिनचर्या को सीमित करना पड़ता है। डिस्क में दर्द कहां होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिस्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित है।
गर्दन में डिजनेरिटिव डिस्क होने पर गर्दन दर्द या बाजुओं में दर्द हो सकता है। जबकि लोअर बैक में डिस्क के प्रभावित होने पर कमर, बटक या पैरों में दर्द हो सकता है। आगे झुकने, ऊपर पहुंचने या मुड़ने से दर्द बदतर हो जाता है। किसी गंभीर चोट (जैसे कार दुर्घटना) के बाद दर्द शुरू हो जाता है। वहीं, एक हल्की चोट (कम ऊंचाई से गिरना) या सामान्य मोशन (जैसे आगे झुककर कुछ उठाना) में हल्का दर्द होता है। बिना किसी कारण के यह दर्द धीरे-धीरे और बढ़ जाता है।
कुछ मामलों में आपको पैरों और बाजुओं में सुन्नता या कंपकंपी हो सकती है। उपरोक्त लक्षण के अलावा भी डिजेनेरिटिव डिस्क के कुछ लक्षण हो सकते हैं। इसकी अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
उपरोक्त लक्षणों में से किसी का अहसास होने पर या किसी सवाल की विस्तृत जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लें। हालांकि, डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज में हर व्यक्ति की बॉडी अलग ढंग से प्रतिक्रिया देती है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप बेहतर सलाह के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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उम्र बढ़ने से स्पाइनल डिस्क में नुकसान पहुंचता है या यह डिजेनेरेट होती है। नतीजतन कुछ लोगों में डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज सामने आती है।
उम्र से संबंधित यह परिवर्तन निम्नलिखित हैं:
अचानक लगने वाली चोट (जैसे गिरना) से हेरिनेटेड डिस्क (herniated disc) हो जाती है, जो डिजेनेरिटिव डिस्क डिजीज की शुरुआत होती है।
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डिजेनेरिटव डिस्क से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
जैसे आपकी उम्र बढ़ती है आपकी डिस्क जैसे जॉइंट्स का ब्रेकडाउन होना शुरू हो जाता है। यह एक बड़ी समस्या होती है। हालांकि, डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज 20 वर्ष के लोगों में भी सामने आ सकती है। हकीकत में कुछ मामलों में लोगों को समय से पहले रीढ़ की उम्र बढ़नी की समस्या वंशानुगत मिलती है।
यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
इस समस्या से बचने के लिए आप इस तरह बदलाव अपने जीवनशैली में अपना सकते हैं:
इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
डिस्क्लेमर
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Current Version
03/09/2020
Sunil Kumar द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Nidhi Sinha