Liver Disease : लिवर की बीमारी क्या है?

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Update Date मई 28, 2020
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परिचय

लिवर की बीमारी (Liver Disease) क्या है?

लिवर हमारे शरीर में एक फुटबॉल के आकार का अंग होता है। जो पेट के दाईं ओर पसलियों के नीचे होता है। यह भोजन को पचाने और शरीर के विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। लिवर की बीमारी आनुवांशिक हो सकती है। लेकिन, लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जैसे-कोई वायरस, शराब ज्यादा पीना या मोटापा आदि। लिवर की बीमारी लंबे समय तक के चलने के कारण सिरोसिस हो जाता है, जिससे लिवर फेल हो सकता है और जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

लिवर की बीमारी (Liver Disease) होने की कितनी संभावना है?

लिवर की बीमारी होना साधारण तौर पर काफी आम है। लेकिन इससे जुड़ी अधिक जानकारी जानने के लिए कृपया अपने डॉक्टर से मिलें। क्योंकि, वह ही आपके शरीर और बीमारी का अध्ययन करके आपको सही जानकारी दे सकता है।

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लक्षण

लिवर की बीमारी (Liver Disease) के क्या लक्षण हैं?

लिवर की बीमारी के सामान्य लक्षण हैं:

  • पेशाब का रंग गहरा हो जाना
  • त्वचा और आंखों का रंग पीला हो जाना
  • पैरों और टखनों में सूजन
  • पेट में दर्द और सूजन
  • खुजली वाली त्वचा
  • अत्यधिक थकान लगना
  • भूख नहीं लगना
  • आसानी से चोट लगना
  • मतली या उल्टी आना

ऊपर दिए गए लक्षणों में कुछ लक्षण शामिल नहीं हो सकते, इसलिए जरूरी नहीं कि आपको इन्हीं साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़े। यदि आपको किसी भी लक्षण के बारे में कोई चिंता है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।

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मुझे अपने डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

यदि आपको ऊपर बताया गया कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। हर किसी का शरीर अलग तरीके से काम करता है। इसलिए, सबसे अच्छा है कि आप अपने डॉक्टर से जाने कि आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा उपचार क्या है।

कारण

लिवर की बीमारी (Liver Disease) के क्या कारण हो सकते हैं?

लिवर की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

जेनेटिक्स के कारण

यह असामान्य जीन भी आपके लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है, जो आपके माता या पिता या दोनों से मिला कर बना हो। यह जीन आपके लिवर में अवांछनीय रसायनों का निर्माण कर सकता है। जीन की वजह से होने वाली लिवर की बीमारियों में शामिल हैं:

जेनेटिक लीवर रोगों के उदाहरण इस प्रकार हैं :

  • हेमोक्रोमैटोसिस
  • विल्सन रोग
  • हाइपरॉक्सालुरिया (Hyperoxaluria )और ऑक्सालोसिस (oxalosis)

कैंसर और अन्य रोगों के कारण लिवर बीमारी के उदाहरण हैं :

संक्रमण के कारण

वायरस की वजह से लिवर संक्रमित हो जाता है, जिससे लिवर में सूजन आ जाती है। लिवर की खराबी का कारण बनने वाले वायरस रक्त, स्पर्म, ​​दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क में आने से फैल सकते हैं। लिवर इंफेक्शन के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार ये हेपेटाइटिस वायरस होते हैं-

इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी के कारण

जो अन्य रोग हमारे इम्यून सिस्टम पर हमला करते हैं, वो हमारे लिवर को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऑटोइम्यून लिवर रोगों के उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस
  • प्राथमिक स्क्लेरोजिंग कोलेंजाइटिस (Primary sclerosing cholangitis)
  • प्राइमरी बिलियरी सिरोसिस (Primary biliary cirrhosis)

लिवर की बीमारी के दूसरे सामान्य कारण

  • शराब की पुरानी आदत
  • लिवर में फैट का जमना (नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज)

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जोखिम

किन कारणों से लिवर की बीमारी (Liver Disease) का खतरा बढ़ सकता है?

लिवर की बीमारी का खतरे बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • डायबिटीज
  • मोटापा
  • इंजेक्शन के लिए उपयोग की गई सुइयों का उपयोग दोबारा करना
  • टैटू या बॉडी पियर्सिंग
  • ज्यादा शराब पीना
  • असुरक्षित यौन संबंध
  • अन्य लोगों के रक्त और शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आना
  • विषाक्त पदार्थों या रसायनों के संपर्क में आना
  • खून में ट्राइग्लिसराइड्स (triglycerides) का उच्च स्तर।

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उपचार

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

लिवर की बीमारी का निदान कैसे किया जा सकता है?

सबसे पहले यह पता लगाना बहुत जरूरी है कि लिवर की खराबी का क्या कारण है और यह खराबी कितनी फैल चुकी है। इसके बाद इसका उपचार करना भी बहुत जरूरी है। इसके लिए आपका डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण के बाद उपचार शुरू कर सकता है। आपका डॉक्टर आप पर निम्न टेस्ट के लिए जोर डाल सकता है:

  • इमेजिंग परीक्षण- डॉक्टर आपके सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कह सकता है, जो कि लिवर में हुए नुकसान को दिखा सकते हैं।
  • रक्त परीक्षण- एक विशेष प्रकार के ब्लड टेस्ट के समूह को लिवर फंक्शन टेस्ट कहते हैं। इसका उपयोग लिवर रोग के निदान के लिए किया जाता है तथा इसके अलावा अन्य रक्त परीक्षण भी विशेष प्रकार की लिवर समस्याओं या उनकी आनुवांशिक स्थितियों को देखने के लिए किए जा सकते हैं।
  • ऊतक विश्लेषण (Tissue analysis)- आपके लिवर से टिशू सैंपल (बायोप्सी) निकाल कर जांच करने से लिवर की बीमारी का पता लगाने में मदद मिल सकती है। लिवर बायोप्सी में लिवर से ऊतक का नमूना निकालने के लिए एक लंबी सुई का उपयोग किया जाता है। फिर इस नमूने का प्रयोगशाला में विश्लेषण किया जाता है।

लिवर की बीमारी (Liver Disease) का इलाज कैसे होता है?

प्रत्येक लिवर की बीमारी का अपना एक विशेष उपचार होता है। उदाहरण के लिए, हेपेटाइटिस ए को हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। जबकि, इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ता है और उसे ठीक करता है। वहीं, गॉलब्लेडर के रोगियों को पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। अन्य बीमारियों में उनको नियंत्रित करने और कम करने के लिए लंबे समय तक चिकित्सा और देखभाल की आवश्यकता होती है।

कई मामलों में पेट में बड़ी मात्रा में द्रव जमा हो जाता है, जिसे सुई और सिरिंज (पैरासेन्टेसिस) की मदद से निकालना पड़ सकता है। जिसे लोकल एनेस्थेसिया का उपयोग करके, पेट की दीवार के माध्यम से एक सुई से निकाल लिया जाता है, क्योंकि यह तरल पदार्थ आसानी से संक्रमित हो सकता है और संक्रमण की पहचान और निदान के लिए पैरासेन्टेसिस (paracentesis) का भी उपयोग किया जा सकता है।

सिरोसिस और अंतिम चरण की लिवर की बीमारी के रोगियों में, आहार में अवशोषित प्रोटीन की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए विशेष दवाओं की आवश्यकता होती है। सिरोसिस से प्रभावित लिवर खाद्य पदार्थों और पानी को पचाने में सक्षम नहीं होता है। जिसके परिणामस्वरूप रक्त में अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है और मरीज को एन्सेफैलोपैथी (सुस्ती, भ्रम, कोमा) हो सकता है। इसलिए, मरीज की भोजन की आवश्यकता को संतुलित करने के लिए कम सोडियम वाला आहार और पानी की गोलियां (diuretics) इस्तेमाल की जा सकती है।

लिवर प्रत्यारोपण (Liver transplantation) उन मरीजों के लिए अंतिम विकल्प होता है, जिनका लिवर फेल हो जाता है।

उच्च रक्तचाप के इलाज और रक्तस्राव के रिस्क को कम करने के लिए भी ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है।

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घरेलू उपाय

लिवर की बीमारी से बचने या निपटने के लिए जीवनशैली में क्या बदलाव और घरेलू उपचार जरूरी हैं?

जीवनशैली में निम्नलिखित बदलाव और घरेलू उपचार आपको लिवर की बीमारी से निपटने में मदद कर सकते हैं:

  • टीका लगवाएं– यदि आप हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित हैं या आपको हेपेटाइटिस के संपर्क में आने का खतरा है तो अपने डॉक्टर से हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस बी के टीके लगवाने के बारे में बात करें।
  • सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें।
  • शराब का सेवन संयमित करें – सभी उम्र की महिलाओं और 65 साल से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए दिन में एक ड्रिंक और 65 और उससे कम उम्र के पुरुषों के लिए एक दिन में दो ड्रिंक पीने से कोई समस्या नहीं होती है। साथ ही 65 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं को अनहेल्दी पेय पदार्थों को एक दिन में तीन से अधिक या सप्ताह में सात बार से अधिक बार नहीं लेना चाहिए और 65 वर्ष से कम उम्र के पुरुष और महिलाएं दिन में चार से अधिक या सप्ताह में 14 बार से अधिक अस्वस्थ्य पेय पदार्थों का सेवन न करें।
  • यदि आप टैटू या बॉडी पियर्सिंग करवाते हैं, तो दुकान का चयन करते समय स्वच्छता और सुरक्षा के बारे में जानकारी लें।
  • अन्य लोगों के रक्त और शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचें। हेपेटाइटिस वायरस खून या शरीर के तरल पदार्थ के सही सफाई न करने से फैल सकता है।
  • दवाओं का प्रयोग समझदारी से करें– केवल आवश्यक होने पर ही डॉक्टर के पर्चे और गैर-पर्चे वाली दवाएं बताई गई खुराकों के अनुसार लें। दवा और शराब एक साथ न लें। हर्बल सप्लीमेंट और नॉन प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों को मिला कर खाने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
  • एरोसोल स्प्रे सावधानी से इस्तेमाल करें- पहले देखें कि कमरा हवादार है या नहीं और कीटनाशक, पेंट तथा दूसरे विषाक्त रसायनों का छिड़काव करते समय मास्क का उपयोग करें। हमेशा उस पर लिखे निर्देशों का पालन करें।
  • संतुलित वजन बनाए रखें- मोटापा फैटी लिवर रोग का कारण बन सकता है।
  • त्वचा की रक्षा करें-कीटनाशक और अन्य जहरीले रसायनों का उपयोग करते समय दस्ताने, लंबी आस्तीन के कपड़ें, टोपी और मास्क पहनें।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

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