ट्राइकोमोनिएसिस सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) है। पुरुषों की तुलना में यह महिलाओं में आम हैं। हालांकि यह बहुत गंभीर नहीं होता है और इलाज से पूरी तक ठीक हो जाता है। ट्राइकोमोनिएसिस क्या है और इसका इलाज कैसे किया जाता है जानिए इस आर्टिकल में।
यह महिलाओं में होने वाला बेहद आम सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन हैं, इसे ‘ट्रिक’ भी कहा जाता है। यह संक्रमण पैरासाइट से होता है, पैरासाइट वजायना, ओरल और एनल सेक्स के दौरान किसी व्यक्ति में प्रवेश कर जाते हैं। सेंटर ऑफर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) के मुताबिक, 3.7 प्रतिशत अमेरिकी इससे पीड़ित हैं। हालांकि ट्राइकोमोनिएसिस की अच्छी बात यह है कि एंटीबायोटिक्स के जरिए आसानी से इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन कई बार लक्षण न दिखने के बार इलाज नहीं किया जाता है। ऐसे में इलाज न होने पर ट्राइकोमोनिएसिस के कारण एचआईवी का खतरा बढ़ जाता है। ट्राइकोमोनिएसिस होने पर महिला के वजायना से बदबू आने लगती है और खुजली होती है, साथ ही पेशाब के समय दर्द होता है। यदि किसी प्रेग्नेंट महिला को ट्राइकोमोनिएसिस हो जाता है तो इसकी समय से पहले डिलीवरी की संभावना अधिक होती है। इस इंफेक्शन को दोबारा होने से रोकने के लिए दोनों पार्टनर का इलाज जरूरी है, साथ ही यौन संबंध बनाने के दौरान हर बार कॉन्डम का इस्तेमाल करें।

और पढ़ें: कैवर्नस साइनस थ्रोम्बोसिस क्या है?
[mc4wp_form id=’183492″]
ट्रिक एक ट्राइकोमोनास वेजिनेलिस नामक एक-कोशिका वाले प्रोटोजोआ जीव के कारण होता है। यह सेक्स के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जेनिटल कॉनटेक्ट के जरिए पहुंचता है। महिलाओं में यह जीव वजायना या मूत्रमार्ग या दोनों में संक्रमण का कारण बनता है। असुरक्षित यौन संबंध के कारण यह आसानी से फैलता है।
यह सामान्य शारीरिक संपर्क जैसे किस करने, गले लगाने, खाना शेयर करने, टॉयलेट सीट पर बैठने से नहीं होता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के 5 से 28 दिनों के अंदर ट्राइकोमोनिएसिस का संक्रमण विकसित होता है।
ट्राइकोमोनिएसिस के अधिकांश मामलों में महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, कम से कम शुरुआती कुछ दिनों तक बिल्कुल नहीं दिखते। जिन महिलाओं में इसके लक्षण दिखते हैं उसमें शामिल हैः
यदि आपको ट्राइकोमोनिएसिस का संदेह है तो आपको और आपके पार्टनर को जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
और पढ़ेंः यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) महिलाओं को ही क्यों होता है? क्विज खेलें और जानें

निम्न स्थितियों में ट्राइकोमोनिएसिस का जोखिम बढ़ जाता हैः
गर्भवती महिलाएं जिन्हें ट्राइकोमोनिएसिस होता है, निम्न जटिलताएं दिख सकती हैं।
ट्राइकोमोनिएसिस होने पर महिलाओं के एचआईवी संक्रमित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
और पढ़ेंः बैक्टीरियल वजायनल इंफेक्शन क्या है?
जिन महिलाओं में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण दिखते हैं वह अन्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन जैसे ही होते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर इसे डायगनोस नहीं किया जा सकता। इसके निदान के लिए शारीरिक परिक्षण और लैबोरेटरी टेस्ट किया जाजता है। निदान के लिए किए जाने वाले टेस्ट में शामिल हैः
पेल्विक टेस्ट- इस टेस्ट में कॉटन स्वैब पर आपके वजायना से निकलने वाला तरल सैंपल के लिए लिया जाता है और पैरासाइट की मौजूदगी के लिए माइक्रोस्कोप के नीचे उसकी जांच की जाती है।
फ्लूड कल्चर- कल्चर टेस्ट में यूरीन और वजायना से स्वैब का इस्तेमाल किया जाता है। पैरासाइट लैब में विकसित होते हैं। पैरासइट के दिखने लायक विकसित होने में एक हफ्ते तक समय लगता है।
ट्राइकोमोनिएसिस डीएनए की जांच के लिए टेस्ट।
यह भी पढ़ेंः प्रेग्नेंट होने से पहले मन में आते हैं कई सवाल, इस तरह से निकाल सकती हैं हल
इस बारे में शहानी हॉस्पिटल की डायरेक्टर की डाॅक्टर संतोष शहानी का कहना है कि ट्राइकोमोनिएसिस की स्थिति में दोनों पार्टनर को इलाज की जरूरत होती है। साथ ही इस दौरान सेक्स संबंध बनाने से पूरी तरह परहेज करें। जब तक संक्रमण पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता संबंध न बनाएं, वरना इसके दोबारा होने का खतरा बढ़ जाएगा। इसे ठीक होने में करीब एक हफ्ते का समय लगता है। ट्राइकोमोनिएसिस का सबसे आम इलाज है मेट्रोनिडाज़ोल (फ्लैगिल) या टिनिडाज़ोल (टिंडामैक्स) के एक मेगाडोज़ की गोली खाना। यह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी सुरक्षित होता है। कुछ मामलों में, डॉक्टर आपको 7 दिनों के लिए दिन में दो बार मेट्रोनिडाजोल की कम डोज लेने की सलाह दे सकता है।
मेट्रोनिडाज़ोल लेने के बाद 24 से 72 घंटों तक शराब का सेवन न करें, क्योंकि इससे मितली या उल्टी आ सकती है। उपचार के दो हफ्ते से लेकर तीन महीने के बीच डॉक्टर आपकी दोबारा जांच करके यह सुनिश्चित करता है कि कहीं इंफेक्शन फिर से तो नहीं हो गया। ट्राइकोमोनिएसिस का उपचार न करवाने पर से ठीक होने में कई महीने से लेकर एक सालतक का समय लग सकता है।
यदि गर्भवती महिला ट्राइकोमोनिएसिस से पीड़ित है तो प्रीमेच्योर डिलिवरी और जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही आगे चलकर अन्य स्वास्थ्य और विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
ट्राइकोमोनिएसिस होने पर प्रेग्नेंट महिला एंटीबायोटिक मेट्रोनिडाज़ोल का सेवन कर सकती है, इसका गर्भ पर कोई असर नहीं पड़ता है। दुर्लभ मामलों में संक्रमण के बच्चे तक पहुंचने की संभावना रहती है। यदि आपको ट्राइकोमोनिएसिस या अन्य सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का संदेह है तो जल्द से जल्द इस बारे डॉक्टर से बात करें। एंटीबोयटिक दवा को लेकर किसी तरह की शंका होने पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।
ट्राइकोमोनिएसिस पूरी तरह से बचा के लिए सेक्शुअल एक्टिविटी से दूर रहना जरूरी है।
उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और ट्राइकोमोनिएसिस से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।