Anemia, hemolytic: एनीमिया हेमोलिटिक क्या है?

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अपडेट डेट मई 29, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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हेमोलिटिक एनीमिया क्या है?

परिचय

आजकल कई प्रकार के बिमारी निकलकर सामने आ रही है जिसके बारे में अच्छे से जानकारी नही होती, उनमें से एक हेमोलिटिक एनीमिया है जिसके बारे में जानेंगे ये है क्या और इसका इलाज कैसे करें।  आपके बोन मैरो इन रेड ब्लड सेल्स को बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब रेड ब्लड सेल्स का विनाश आपके बोन मैरो के सेल्स के उत्पादन को बाहर कर देता है तब एनीमिया हेमोलिटिक होता है। ये हेमोलिटिक एनीमिया दोनों प्रकार से हो सकता है बाहरी या आंतरिक हो सकता है-

बाहरी एनीमिया हेमोलिटिक 

बाहरी हेमोलिटिक एनीमिया कई तरीकों से विकसित होती है जैसे की स्पलीन   रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है या एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया होती है। ये रेड ब्लड सेल्स के नष्ट होने से भी हो सकता है-

1-इंफेक्शन

2-ट्यूमर

3-ऑटोइम्यून डिसऑर्डर

4-दवा के दुष्प्रभाव

6-लिंफोमा

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हेमोलिटिक एनीमिया के लक्षण

हेमोलिटिक एनीमिया के बहुत सारे कारण होते हैं और सभी व्यक्ति के अपने अलग लक्षण होते हैं। माना की कुछ साझा लक्षण हैं जो कई लोग अनुभव करते हैं खासकर जिन्हें एनीमिया हेमोलिटिक होता है।

वहीं हेमोलिटिक एनीमिया के कुछ लक्षण एनीमिया के अन्य रूपों के लिए समान हैं।

ये सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

1-त्वचा का पीलापन

2-थकान

3-बुखार

4-उलझन

5-चक्कर आना

6-शारीरिक गतिविधी करने में कमजोरी या अक्षमता

अन्य सामान्य लक्षण जो हेमोलिटिक एनीमिया में देखा जाता है जैसे-

1-गहरा पेसाब (Dark urine)

2-त्वचा का पीला पड़ना और आंखों का सफेद होना (पीलिया)

3-दिल की असामान्य ध्वनि

4- हार्ट रेट का बढ़ना

5-बढ़ता हुआ स्पलीन

6-बढ़ता लीवर

हेमोलिटिक एनीमिया के कारण

ये मुमकिन हो सकता है कि डॉक्टर एनीमिया हेमोलिटिक के स्त्रोत को पता करने में सफल न हो। हालांकि, कई बिमारियां और कुछ दवाएं इस स्थिति के उत्पन्न का कारण बन सकती है।

बाहरी एनीमिया हेमोलिटिक के निम्न कारणों में शामिल हैं:

1-बढ़ते स्पलीन

2-संक्रामक हिपेटाइटिस

3-एपस्टीन बार वायरस

4-टाइफाइड बुखार

5-ई. कोली टोक्सीन (E. coli toxin)

6-लोकिमिया

7-लिंफोमा

8-ट्यूमर

10-विस्कॉट-एल्ड्रिच सिंड्रोम, एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर

11-एचईएलएलपी (HELLP) सिंड्रोम (इसकी विशेषताओं के लिए नामित, जिसमें हेमोलिसिस, ऊंचा यकृत एंजाइम और कम प्लेटलेट काउंट शामिल हैं)

कुछ मामले में हेमोलिटिक एनीमिया कुछ दवाएं लेने का असर होता है जिसे ड्रग-इंड्यूस्ड हेमोलिटिक एनीमिया के नाम से जाना जाता है। कुछ उदाहरण जो ऐसी स्थिती का कारण बन सकता है-

1-एसिटामिनोफेन (Tylenol)

2-एंटीबायोटिक्स, जैसे सेफैलेक्सिन, सीफ्रीएक्सोन, पेनिसिलिन, एम्पीसिलीन या मेथिसिलिन

3-क्लोरप्रोमज़ाइन (Thorazine)

4-इबुप्रोफेन (Advil, Motrin IB)

5-इंटरफेरॉन अल्फा

6-प्रोकेनमाइड (Procainamide)

7-क्वीनडाइन (Quinidine)

8-रिफैम्पिन (Rifadin)

हेमोलिटिक एनीमिया के कई रुप होते हैं जो एक गलत प्रकार के रेड ब्लड सेल प्राप्त करने के वजह से होता है।

हर एक व्यक्ति का अलग ब्लड टाइप होता है (A, B, AB, or O). यदि आप एक अलग प्रकार के ब्लड प्राप्त करते है तो एंटीबॉडी नामक विशेष प्रकार का प्रोटीन विदेशी रेड ब्लड सेल पर हमला करता है जिसका परिणाम बहुत तेजी से रेड ब्लड सेल को नष्ट करता है जो बहुत ही घातक हो सकता है। इसी वजह से जरुरतो को ब्लड देने से पहले ब्लड के प्रकार की जांच करना जरुरी होता है। कुछ कारणों की वजह से एनीमिया हेमोलिटिक अस्थाई होता है जिसका इलाज योग्य हो सकता है यदि डॉक्टर कई कारणों की पहचान कर इसका इलाज कर सके।

हेमोलिटिक एनीमिया के उपचार

शिकागो विश्वविद्यालय के अनुसार, आमतौर पर बच्चों में एनीमिया हेमोलिटिक एक वायरल बीमारी के बाद होता है। इसका कारण वयस्कों में पाए जाने वाले के समान हैं:

1-संक्रमण

2-स्व-प्रतिरक्षित रोग (autoimmune diseases)

3-कैंसर

4-दवाएं

5-एक दुर्लभ सिंड्रोम जिसे इवांस सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है।

हेमोलिटिक एनीमिया के उपचार

एनीमिया हेमोलिटिक की शुरुआत अक्सर चिकित्सा इतिहास और लक्षणों की समीक्षा के साथ शुरू होता है। इसका उपचार शारीरिक टेस्टिंग के दौरान, डॉक्टर आपके शरीर की चेकिंग करते है जैसे कि पीला रंग या आपके स्कीन का पीला होना साथ ही जांच के लिए आपके पेट के आस-पास पर धीरे से दबाकर जांच करते हैं कि जो बढ़ते हुए लीवर या स्पलीन (Spleen) का संकेत दे सकता है।

यदि कोई डॉक्टर एनीमिया का परीक्षण करते हैं तो वे उपचार का आदेश देंगे जो ये ब्लड परीक्षण आपके एनीमिया हेमोलिटिक को मापने में मदद करेगा- 

बिलीरुबिन (Bilirubin)ये परीक्षण रेड ब्लड सेल हीमोग्लोबिन के स्तर को मापता है जैसे लीवर का टूटना जो आगे की और प्रोसेस करता है।

हीमोग्लोबिन- यह परीक्षण अप्रत्यक्ष रूप से आपके ब्लड में फैलने वाली रेड ब्लड सेल की मात्रा को दर्शाता है। (आपके रेड ब्लड सेल के भीतर ऑक्सीजन ले जाने वाले प्रोटीन को मापकर)

रेटिकुलोसाइट काउंट (Reticulocyte count) यह परीक्षण इमेच्योर (immature) रेड ब्लड सेल को मापता है, जो समय के साथ रेड ब्लड सेल को मेच्योर (mature) के साथ बदलता है जो आपके शरीर का उत्पादन करता है।

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपकी स्थिति एक आंतरिक एनीमिया हेमोलिटिक से संबंधित है, तो जांच करने के लिए माइक्रोस्कोप में ब्लड के सेंपल द्वारा जांच करते हैं।

दूसरे परीक्षण में यूरीन टेस्ट शामिल है जिसमें रेड ब्लड सेल होने की संभावना होती है। कुछ मामलों में डॉक्टर बोन मैरो एसपाइरेसन (Aspiration) या बायोप्सी का आदेश दे सकते हैं। ये परीक्षण रेड ब्लड सेल के बनाने और उनके आकार के बारे में जानकारी देता है।

हेमोलिटिक एनीमिया के उपचार

इसका उपचार अलग प्रकार के लोगों पर निर्भर रहता है जैसे स्थिति की गंभीरता, आयु, स्वास्थ्य और दवाएं।

हेमोलिटिक एनीमिया के उपचार में शामिल हो सकते हैं:

1-रेड ब्लड सेल ट्रांसफ्यूसन- इसमें रेड ब्लड सेल की संख्या को जल्दी से बढ़ाने और नष्ट हो चुके रेड ब्लड सेल को नए लोगों के साथ बदलने के लिए दिया जाता है।

2-आईवीआईजी (IVIG)यदि शरीर का इम्यून प्रोसेस हेमोलिटिक एनीमिया के लिए जरुरी है तो अपके शरीर के लिए अस्पताल में इम्युनोग्लोबुलिन (immunoglobulin) दिया जा सकता है।

3-कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids)- हेमोलिटिक एनीमिया के मामले में आपको कॉर्टिकोस्टेरॉइड निर्धारित किया जा सकता है। ये रेड ब्लड सेल को नष्ट होने से बचाने में मदद करता है और एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अन्य प्रतिरक्षादमनकारियों (immunosuppressants) का उपयोग किया जा सकता है।

4-सर्जरी-

बहुत से मामले में आपके स्पलीन (spleen) को हटाने की आवश्यकता हो सकती है। स्पलीन (spleen) वहां होता है जहों रेड ब्लड सेल नष्ट हो जाती हैं। इस स्पलीन (spleen) को हटाने से रेड ब्लड सेल को कितनी तेजी से नष्ट किया जा सकता है। यह आमतौर पर इम्यून हेमोलिसिस के मामलों में उपयोग किया जाता है जो कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroids) या अन्य इम्यूनोसप्रेस्सेंट (immunosuppressants) का रिस्पोंस नहीं देता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह का चिकित्सा परामर्श और इलाज नहीं देता।

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हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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