Contraceptive Pills: क्या आप गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं?

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Update Date जून 25, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
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कभी-कभी असुरक्षित इंटरकोर्स करने के बाद महिलाओं को अनचाहे गर्भ का डर सताने लगता है। यह डर आपको किसी भी वजह से हो सकता है। हो सकता है आप और आपका पार्टनर अभी या एक और बच्चे के लिए तैयार न हों या आपका स्वास्थ्य प्रेग्नेंसी के लिए उचित न हो। इसके बाद आप अनचाहे गर्भ को रोकने के तरीकों के बारे में सोचने लगते हैं। अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए सबसे ज्यादा गर्भनिरोधक गोली (Garbh Nirodhak Goli) का उपयोग किया जाता है। इसे कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (Contraceptive Pills) या बर्थ कंट्रोल पिल्स (Birth Control Pills) भी कहा जाता है।

गर्भनिरोधक गोली आखिर क्या है?

गर्भनिरोधक गोली कॉन्ट्रासेप्टिव का ओरल मेथेड है। लेकिन गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने के साथ ही महिलाओं के मन में कई सवाल उठते हैं। जैसे, क्या कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या बर्थ कंट्रोल पिल्स लेना सुरक्षित है? कहीं इसके कोई दुष्प्रभाव तो नहीं हैं? या इसके लेने का सही समय कब है?, आदि। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह आता है कि, क्या गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद भी प्रेग्नेंसी हो सकती है? तो आइए, हम आपको बर्थ कंट्रोल के लिए गर्भनिरोधक गोली के सेवन से जुड़ी पूरी जानकारी देते हैं।

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99 प्रतिशत प्रभावी है गर्भनिरोधक गोली

बर्थ कंट्रोल के लिए गर्भनिरोधक गोली की बात करें, तो इसे 99.9 प्रतिशत प्रभावशाली माना जाता है। हालांकि, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन करने से एचआईवी (HIV) जैसे यौन संचारित रोगों से बचाव नहीं होता। गर्भनिरोधक गोली मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं, पहली सामान्य कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स और दूसरी एमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (Emergency Contraceptive Pills; ECP) होती हैं। एमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स असुरक्षित सेक्स के कुछ घंटों के भीतर लेनी होती है। जो कि अनचाहे गर्भ को रोकने में मदद करती है। दूसरी तरफ सामान्य कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन करने से आपको गर्भधारण नहीं करने में मदद मिलती है।

बर्थ कंट्रोल में गर्भनिरोधक गोली कैसे काम करती हैं?

प्रेग्नेंट होने के लिए महिलाओं के शरीर में मौजूद हॉर्मोन्स के कारण ओवरी एग रिलीज करती है, जो कि असुरक्षित यौन संपर्क के बाद पुरुष पार्टनर के स्पर्म के द्वारा फर्टिलाइज होता है। यह फर्टिलाइज एग महिला के गर्भ में पहुंचकर पोषण प्राप्त करता है और शिशु के रूप में विकसित होना शुरू हाेता है। जब महिला अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए या बर्थ कंट्रोल करने के लिए गर्भ निरोधक गोली का सेवन करती हैं, तो उसमें मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हॉर्मोन महिलाओं के शरीर में गर्भधारण के लिए जिम्मेदार हॉर्मोन्स को बाधित करते हैं।

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यह हॉर्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव आमतौर पर महिला के ऑव्युलेशन को रोक देते हैं। इसके साथ ही यह सरवाइकल म्यूकस को मोटा कर देता है, जिससे स्पर्म इसमें से गुजरकर गर्भ तक नहीं पहुंच पाता।

गर्भनिरोधक गोली कितने प्रकार की होती है?

कॉम्बिनेशन पिल्स

कॉम्बिनेशन पिल्स में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हॉर्मोन्स की सिंथेटिक फॉर्म होती है। जो कि 21 डे पैक, 28 डे पैक और 91 डे पैक में उपलब्ध होती हैं। 21 डे पैक में 21 एक्टिव टैबलेट्स, 28 डे पैक में 21 एक्टिव टैबलेट्स व 7 इंएक्टिव टैबलेट्स और एक्टेंडेड 91 डे पैक में 84 एक्टिव टैबलेट्स व 7 इंएक्टिव टैबलेट्स होती हैं। इंएक्टिव टैबलेट्स मासिक धर्म के पीरियड्स के दौरान ली जाती हैं। एक पैक के बाद दूसरा पैक सही समय से शुरू करना होता है।

मिनि पिल्स या प्रोजेस्टिन-ऑनली पिल्स

मिनि पिल्स को प्रोजेस्टिन-ऑनली पिल्स भी कहा जाता है। इसमें सिर्फ प्रोजेस्टिन हॉर्मोन होता है। इसमें सिर्फ एक्टिव टैबलेट्स होती हैं। प्रोजेस्टिन पिल्स के सेवन के दौरान मासिक धर्म के आखिरी हफ्ते में पीरियड्स होते हैं या नहीं भी हो सकते या फिर आपको महीने के अंदर स्पॉटिंग हो सकती है। इन गर्भनिरोधक गोली का सेवन नियमित रूप से जारी रहता है।

एमरजेंसी कॉन्ट्रासप्टिव पिल्स

एमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स हॉर्मोन्स पिल्स होती हैं, जिन्हें ‘मॉर्निंग-आफ्टर पिल्स’ भी कहा जाता है। इसमें बर्थ कंट्रोल पिल्स में मौजूद गर्भधारण को रोकने वाले हॉर्मोन्स की उच्च मात्रा होती है। इन गर्भनिरोधक गोली को असुरक्षित यौन संपर्क (Unprotected Sex) के कुछ घंटों के भीतर लेना होता है। अपने लिए बेस्ट एमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के चुनाव या कितने घंटों के भीतर का सेवन करने से जुड़ी जानकारी के लिए डॉक्टर से बात करें।

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मुझे कौन-सी गर्भनिरोधक गोली का सेवन करना चाहिए?

हर किसी महिला के स्वास्थ्य को ध्यान रखते हुए अलग-अलग गर्भनिरोधक गोली का सेवन सुरक्षित रहता है। अपने लिए उचित गर्भनिरोधक गोली का चुनाव करने के लिए डॉक्टर से बात करें। बर्थ कंट्रोल पिल्स का चुनाव करने के लिए निम्नलिखित फैक्टर ध्यान रखे जा सकते हैं। जैसे-

क्या गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने पर भी प्रेग्नेंट होने की संभावना होती है?

बर्थ कंट्रोल के लिए गर्भनिरोधक गोली का सही तरीके से सेवन करना 99 प्रतिशत प्रभावशाली होता है। सही तरीके से सेवन करने का मतलब है कि, आप इन कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स को बिना किसी अपवाद के नियमित दिन और समय पर लें। लेकिन, अधिकतर महिलाएं इसका टिपिकल यूज करती हैं। टिपिकल यूज से मतलब है कि इन गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने में उनके समय में बदलाव हो जाता है या फिर गलती से किसी दिन दवाई लेना भूल जाती हैं, जिससे इसका प्रभाव सिर्फ 91 प्रतिशत रह जाता है।

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इन गर्भनिरोधक गोली के प्रभाव का उच्च प्रतिशत होने के बावजूद आपके प्रेग्नेंट होने की संभावना होती है। दो या दो दिन से ज्यादा दवाई लेना भूलने से बर्थ कंट्रोल फेल हो जाता है। जिससे, इस दौरान महिलाओं का ऑव्युलेशन पीरियड शुरू हो जाता है और इस समय में असुरक्षित सेक्स करने से आपके गर्भवती होने की संभावना हो जाती है।

क्या गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से बांझपन का खतरा होता है?

ऐसी कई किस्से-कहानियां हैं, जिनमें गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से बाद में गर्भवती होने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर, इसे बांझपन समझने की गलती भी की जाती है। एक शोध के मुताबिक, गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से आपका ऑव्यूलेशन पीरियड दोबारा शुरू होने में कुछ देरी लग सकती है। क्योंकि, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन बंद करने के बाद प्रेग्नेंसी के लिए जिम्मेदार हॉर्मोन्स को नियमित रूप से रिलीज होने में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन, इन बर्थ कंट्रोल पिल्स का सेवन करने से बांझपन का खतरा नहीं होता।

गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से होने वाले फायदे क्या हैं?

बर्थ कंट्रोल के लिए गर्भनिरोधक गोली के सेवन से निम्नलिखित फायदे होते हैं। जैसे-

  • आपको 24/7 सुरक्षा मिलती है। जिससे आपको इंटरकोर्स के दौरान अनचाहे गर्भ का डर नहीं रहता।
  • यह असरदार होती हैं। यह अन्य किसी बर्थ कंट्रोल विकल्प से ज्यादा प्रभावशाली होती हैं।
  • इससे आपके पीरियड्स नियमित होते हैं। इसलिए अनियमित पीरियड्स वाली महिलाओं के लिए यह फायदेमंद होती है।
  • इनका सेवन कभी भी रोककर आप सामान्य रूप से गर्भधारण कर सकती हैं।

कॉम्बिनेशन पिल्स के कुछ अन्य फायदे-

  1. मुंहासों से छुटकारा
  2. कमजोर हड्डियों में लाभदायक
  3. एनीमिया से बचाव, आदि

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मिनि पिल्स के कुछ अन्य फायदे-

  1. स्मोकिंग करने वाली महिलाएं इस्तेमाल कर सकती हैं।
  2. 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं इस्तेमाल कर सकती हैं।
  3. स्तनपान करवाने वाली महिलाएं इस्तेमाल कर सकती हैं।
  4. ब्लड क्लॉट्स की हिस्ट्री वाली महिलाएं इस्तेमाल कर सकती हैं।

गर्भनिरोधक गोली की सीमाएं क्या हैं?

बर्थ कंट्रोल पिल्स से यौन संचारित रोग (Sexually transmitted Diseases) से बचाव नहीं मिलता है। इसलिए, इन संक्रमण से बचाव के लिए आपको गर्भनिरोधक गोली के साथ कॉन्डम जैसे अतिरिक्त विकल्प का उपयोग करना पड़ेगा। इसके अलावा, आपको कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन रोजाना करना पड़ता है। इसलिए, आपको पहला पैक खत्म होने से पहले दूसरे नये पैक का अपने पास रखना चाहिए। क्योंकि, नया पैक शुरू करने में देरी से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से आपको निम्नलिखित दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, जरूरी नहीं कि आपको इन साइड इफेक्ट्स का सामना करना ही पड़े या आपको सिर्फ इन्हीं नुकसान को झेलना पड़े। कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन करने से अन्य नुकसान भी हो सकते हैं। इससे संबंधिक पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए आप डॉक्टर से परामर्श करें। आइए, गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से होने वाले नुकसान जानते हैं।

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हृदय संबंधी बीमारी

कॉम्बिनेशन गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से दिल पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्लड क्लॉट्स जैसे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। अगर, आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है या आपके घर में किसी को है, तो आपको गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से अच्छी तरह बात कर लेनी चाहिए। ताकि, वो इसका कुछ और विकल्प सुझा सकें।

इंटरमेंस्ट्रुअल स्पॉटिंग

गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने के दौरान संभावित पीरियड के दौरान आपको वजायनल ब्लीडिंग हो सकती है। आमतौर पर, यह समस्या गर्भनिरोधक गोली का सेवन शुरू करने के तीन महीनों के भीतर सही हो जाती है। मगर, जबतक आप बर्थ कंट्रोल पिल्स का सेवन नियमित रूप से करती रहती हैं, तबतक स्पॉटिंग के दौरान भी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स असरदार रहती है। अगर, यह स्पॉटिंग 5 दिन या उससे ज्यादा या तीन दिन या उससे ज्यादा हैवी ब्लीडिंग हो, तो आपको तुरंत किसी डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

आंखों में बदलाव

बर्थ कंट्रोल पिल्स में मौजूद हॉर्मोन्स की वजह से आंखों में मौजूद कोर्निया मोटा हो सकता है। हालांकि, यह ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन आपको कॉन्टैक्ट लेंस पहनने में दिक्कत हो सकती है।

सिरदर्द और माइग्रेन

गर्भनिरोधक गोली में मौजूद हॉर्मोन्स सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इनकी लो-डोज लेने से इसमें राहत मिल सकती है। इसके अलावा, आपको गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन के दर्द में डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

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मूड चेंज

कुछ शोध में बताया गया है कि, ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव लेने से महिलाओं में डिप्रेशन या अन्य मूड चेंज का खतरा बढ़ सकता है। अगर आपको भी ऐसा लग रहा है, तो डॉक्टर से मिलें।

लिबिडो में कमी

गर्भनिरोधक गोली में मौजूद हॉर्मोन कुछ महिलाओं में सेक्स ड्राइव या लिबिडो को कम कर सकते हैं। अगर, आपके लिबिडो में ज्यादा कमी आ रही है, तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

वजायनल डिस्चार्ज

गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से वजायनल डिस्चार्ज में बदलाव आ सकता है। इसकी वजह से वजायनल ल्यूब्रिकेशन में कमी या इजाफा हो सकता है या डिस्चार्ज के नेचर में बदलाव आ सकता है। अगर, वजायनल ड्राइनेस हो रही है, तो सेक्स के समय अतिरिक्त ल्यूब्रिकेशन इस्तेमाल किया जा सकता है। आमतौर पर, यह खतरनाक नहीं होता, लेकिन वजायनल डिस्चार्ज के रंग या गंध में बदलाव आना इंफेक्शन का लक्षण हो सकता है। पूरी जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

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क्या गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से वजन बढ़ता है?

कई महिलाओं को यह चिंता रहती है कि, क्या गर्भनिरोधक गोली का सेवन करने से वजन में बढ़ोतरी होती है। दरअसल, यह बहुत ही दुर्लभ समस्या होती है। जिसमें, कुछ महिलाओं में गर्भनिरोधक गोली का सेवन शुरू करने के बाद कुछ हद तक वजन बढ़ जाता है। लेकिन, यह बढ़ा हुआ वजन एक्स्ट्रा फैट की वजह से नहीं, बल्कि फ्लूड रिटेंशन की वजह से होता है और यह बढ़ा हुआ वजन गर्भनिरोधक गोली का सेवन शुरू करने के 2-3 महीने के बाद सामान्य हो जाता है। हालांकि, पहले दौर में जब गर्भनिरोधक गोली का निर्माण होता था, तो उसमें एस्ट्रोजन की मात्रा उच्चा होती थी, जिससे फ्लूड रिटेंशन और भूख में बढ़ोतरी होती थी। इसी कारण से वजन बढ़ने की समस्या देखी जाती थी। लेकिन, वर्तमान में गर्भनिरोधक गोली में हॉर्मोन्स सीमीत मात्रा में होते हैं।

गर्भनिरोधक गोली के विकल्प क्या हैं?

गर्भनिरोधक गोली के विकल्प कई हैं, जिनमें से निम्नलिखित मुख्य हैं।

कॉन्डम

कॉन्डम अनचाहे गर्भ और यौन संचारित रोगों से बचाव करने में काफी मददगार होता है। यह फीमेल और मेल दोनों के लिए मार्केट में उपलब्ध है। आमतौर पर, मेल कॉन्डम सबसे ज्यादा प्रयोग में लाए जाते हैं। जिससे, स्पर्म महिला पार्टनर की वजायना में दाखिल नहीं हो पाता और अनचाहा गर्भ का खतरा नहीं होता। फीमेल कॉन्डम के सिरे पर एक रिंग होती है, जो कि वजायना के अंदर लगाया जाता है।

नुवारिंग (NuvaRing) वजायनल रिंग

नुवा रिंग एक प्लास्टिक रिंग होती है, जिसे वजायना के अंदर लगाया जाता है। यह ऑव्युलेशन को बाधित करने वाले हॉर्मोन्स रिलीज करती है। हर मासिक धर्म में तीन हफ्ते यह वजायना के अंदर लगी रहने दी जाती है और पीरियड्स होने के लिए आखिरी हफ्ते हटा दी जाती है।

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