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Menstruation: हर महीने होने वाले इस प्रोसेस के बारे में क्या आप जानती हैं ये बातें?

Menstruation: हर महीने होने वाले इस प्रोसेस के बारे में क्या आप जानती हैं ये बातें?

मेंस्ट्रुएशन (Menstruation) एक सायकल है, जिसमें नॉर्मल वजायनल ब्लीडिंग होती है। ये प्रक्रिया महिलाओं को हर महीने होती है। यानी हर महीने महिलाओं को इस मंथली सायकल से गुजरना पड़ता है। हर महीने महिलाओं का शरीर प्रेग्नेंसी के लिए प्रिपेयर होता है। अगर महिलाएं कंसीव नहीं करती हैं, तो यूट्रस या वॉम्ब ( womb) की लाइनिंग टूट जाती है। मेंस्ट्रुअल ब्लड में कुछ हिस्सा खून का और कुछ टिशू यानी यूट्रस के ऊतक शामिल होते हैं। ये वजायना के माध्यम से शरीर से बाहर निकलता है। पीरियड्स आमतौर पर 11 साल से 14 की उम्र में शुरू होते हैं और लगभग 51 साल की उम्र में बंद होता है। इस आर्टिकल के माध्यम से आपको मेंस्ट्रुएशन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएंगे और मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम के बारे में भी जानकारी देंगे।

जानिए हर महीने क्यों होता है मेंस्ट्रुएशन (Menstruation) प्रोसेस?

मेंस्ट्रुएशन

हर महीने महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल बदलाव के कारण पीरियड्स होते हैं। हॉर्मोंस शरीर में कैमिकल मैसेंजर की भूमिका निभाते हैं। ओवरीज फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजन (Estrogen)और प्रोजेस्ट्रॉन (Progesterone) रिलीज करती है। इस हॉर्मोन के कारण ही यूट्रस की लाइनिंग तैयार होती है। ये लाइनिंग फर्टिलाइज्ड एग के लिए तैयार रहती है। अगर फर्टिलाइजेशन हो जाता है, तो महिलाओं को पीरियड्स नहीं आते हैं। अगर महिलाएं कंसीव नहीं करती हैं, तो ये लाइनिंग ब्रेक हो जाती है, ब्लीडिंग होने लगती है। यहीं प्रोसेस हर महिने होती है। मेनोपॉज (Menopause) की प्रोसेस में महिलाओं के पीरियड्स बंद हो जाते हैं। 45 से 51 वर्ष तक की आयु तक महिलाओं में ये प्रोसेस बंद हो जाती है। जानिए मेंस्ट्रुएशन प्रोसेस होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

और पढ़ें: महिलाओं के लिए रेगुलर हेल्थ चेकअप है जरूरी, बढ़ती उम्र के साथ रखें इन बातों का ध्यान

मेंस्ट्रुएशन (Menstruation) शुरू होने पर क्या दिखते हैं लक्षण?

मेंस्ट्रुएशन शरीर की अन्य क्रियाओं की तरह ही एक आम क्रिया है। जब लड़कियों को मेंस्ट्रुएशन शुरू होने वाला होता है, तो उनके शरीर में कुछ परिवर्तन दिखाई पड़ते हैं। मेंस्ट्रुएशन की प्रोसेस कुछ लोगों में पांच दिन और कुछ लोगों में तीन दिन तक रहती है। जानिए मेंस्ट्रुएशन के दौरान कौन-से लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं।

  • पैल्विक क्रैम्पिंग पेन (Abdominal or pelvic cramping pain)
  • लोअर बैक पेन (Lower back pain)
  • ब्लोटिंग ( Bloating and sore breasts)
  • फूड क्रेविंग्स (Food cravings)
  • मूड में बदलाव (Mood swings and irritability)
  • सिर दर्द और थकान का एहसास (Headache and fatigue)

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ओव्युलेशन (Ovulation) का पीरियड्स से क्या है संबंध?

मेंस्ट्रुएशन

ओव्युलेशन (Ovulation) के दौरान एग रिलीज होता है। एग जिस ट्यूब से होकर यूट्रस तक पहुंचता है, उसे फैलोपियन ट्यूब (fallopian tube) कहते हैं। अगर एग स्पर्म से फर्टिलाइज्ड हो जाता है, तो एब्रियो का निर्माण होता है। अगर किन्हीं कारणों से ये प्रोसेस नहीं हो पाती है, तो मेंस्ट्रुएशन की प्रोसेस होती है। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि ओव्युलेशन (Ovulation) का पीरियड्स से क्या संबंध है। अगर आपको पीरियड्स नहीं हो रहे हैं या फिर रुक गए हैं, तो इस बारे में महिला रोग विशेषज्ञ से जानकारी जरूर प्राप्त करें। लड़कियों को अगर 16 साल तक पीरियड्स शुरू नहीं होते हैं, तो उन्हें डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि समस्या की जानकारी मिल जाए और डॉक्टर ट्रीटमेंट कर सकें।

इस बारे में परिधि मंत्री, कन्जयूमर इनसाईट्स एण्ड प्रोडक्ट इनोवेशन की, परी पीरियड्स के दौरान हैवी फ्लो होने को कुछ खास बातों का ध्यान रखा जा सकता है।पीरियड्स के दौरान हैवी फ्लो एक महिला को कई तरीके से परेशान करता है। दाग लगने की चिंता, क्रैम्प्स और मूड में बदलाव, इन सब के चलते महिलाओं को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि सभी महिलाओं के लिए पीरियड्स एक जैसे नहीं होते। कुछ महिलाओं को दर्द निवारक दवाओं या पानी की गर्म बोतल से आराम मिल जाता है, जबकि कुछ महिलाओं को यह चिंता सताती रहती है कि उनकी पैन्ट्स पर दाग न लग जाए, इसलिए वे बार-बार अपने आप को चैक करती रहती हैं।समय आ गया है कि महिलाएं अपनी इन परेशानियों के बारे में खुल कर बात करें। कई युवतियों को बहुत हैवी ब्लीडिंग होती है और वे समझ नहीं पाती कि इसे कैसे मैनेज करें। जिससे रोज़मर्रा के काम जैसे स्कूल, खेल-कूद और अन्य गतिविधियों में रूकावट आती है, वे पीरियड्स के दौरान इन सभी चीज़ों को मिस कर देना चाहती हैं। लेकिन अगर वे सही सैनिटरी पैड चुनें और समझ लें कि उन्हें हैवी फ्लो को किस तरह मैनेज करना है कि उनका यह तनाव कम हो सकता है।”

नॉर्मल मेंस्ट्रुअल सायकल (Normal menstrual cycle) का क्या मतलब है?

मेंस्ट्रुएशन

मेंस्ट्रुअल सायकल एक प्रोसेस है, जो महिलाओं की प्रेग्नेंसी के लिए हर महीने जरूरी होता है। नॉर्मल मेंस्ट्रुअल सायकल पीरियड्स के पहले दिन से शुरू हो जाती है। एवरेज सायकल 28 दिन की होती है। ये सायकल 21 दिन से 35 दिन की भी हो सकती है। मेंस्ट्रुअल सायकल के दौरान हॉर्मोन के लेवल में बदलाव होता रहता है। ब्रेन में उपस्थित पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाले हॉर्मोन के कारण ही रिप्रोडेक्टिव ट्रेक्ट रिस्पॉन्स करता है। मासिक धर्म चक्र यानी मेंस्ट्रुअल सायकल के दौरान होने वाली घटनाओं को निम्न प्रकार से समझाया जा सकता है।

महीने के चरण (The menses phase)

इस फेज में पीरियड के पहले दिन से पांचवे दिन को शामिल किया जाता है। इस समय गर्भाशय यानी यूट्रस लेयर वजायना के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाती है। ऐसा प्रेग्नेंसी न होने पर होता है। अधिकांश महिलाओं को तीन से पांच दिन तक ब्लीडिंग होती है। कुछ महिलाओं में पांच से सात दिन तक भी ये चरण हो सकता है, जिसे सामान्य माना जाता है।

फॉलिक्यूलर फेज (The follicular phase)

यह फेज आमतौर पर छह से 14 दिनों तक होता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन का लेवल बढ़ जाता है, जिसके कारण यूट्रस लाइनिंग बनती है। इसे एंडोमेट्रियम ( endometrium) कहते हैं। इस दौरान ये लाइनिंग ग्रो करती है और थिक बनती है। फिर फॉलिकल स्टिमुलेशन हॉर्मोन के कारण ओवरी में फॉलिकल ग्रो करते हैं। इसी दौरान विकसित हो चुके फॉलिकल से मेच्योर एग बनता है।

और पढ़ें :प्रजनन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए होम्योपैथिक ट्रीटमेंट है प्रभावशाली, जानिए

ओव्युलेशन (Ovulation)

मेंस्ट्रुअल सायकल के 14 से 28 दिनों के बीच ओव्युलेशन का फेज आता है। इस फेज में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (Luteinizing hormone) में वृद्धि होती है, जिसके कारण ओवरी से एग रिलीज होता है। इस प्रक्रिया को ओव्युलेशन (Ovulation) कहते हैं। जिन महिलाओं को पीरियड्स नहीं आते हैं, उनमें ये प्रोसेस नहीं हो पाती है।

ल्यूटियल फेज (The luteal phase)

ल्यूटियल फेज 15 से 28 दिन का होता है। जब एग ओवरी से रिलीज हो जाता है, तो ये फैलोपियन ट्यूब से होता हुआ यू्ट्रस में पहुंचता है। इस दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है और गर्भावस्था के लिए यूट्रस लाइनिंग को तैयार करने में मदद करता है। अगर एग स्पर्म से फर्टिलाइड हो जाता है और गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है, तो महिला प्रेग्नेंट हो जाती है। अगर प्रेग्नेंसी नहीं होती है, तो एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल गिरता है और पीरियड्स के दौरान गर्भाशय की मोटी परत खून और कुछ टिशू के रूप से वजायना से बाहर निकल जाती है।

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पीरियड्स के दौरान दिखें ये लक्षण, तो तुरंत दिखाएं डॉक्टर को

  • 16 साल की उम्र तक मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ हो।
  • अगर पीरियड्स अचानक से रुक जाए, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
  • ब्लीडिंग अगर पहले से ज्यादा हो, तो इसे इग्नोर न करें।
  • पीरियड्स के दौरान हल्के दर्द का एहसास आम होता है लेकिन अगर आपको ज्यादा दर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • ब्लीडिंग के दौरान अगर आपको बीमार होने का एहसास या बहुत कमजोरी लग रही है, तो भी डॉक्टर से संपर्क करें।
  • आपको लगता है कि आपका पीरियड्स समय पर नहीं आया है, तो आपको प्रेग्नेंसी की जांच जरूर करानी चाहिए।
  • अगर बर्थ कंट्रोल पिल्स बंद करने के बाद पीरिड्स सही से नहीं आ रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
  • आपको मेंस्ट्रुअल सायकल के बारे में किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंक डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मेंस्ट्रुअल सायकल (Menstrual cycle) के दौरान कब हो सकती हैं आप प्रेग्नेंट?

मेंस्ट्रुअल सायकल के दौरान जब ओवरी एग रिलीज करती है, तब प्रेग्नेंट होने के सबसे ज्यादा चांसेज होते हैं। इसे आमतौर पर फर्टाइल डेज ( Fertile days) भी कहा जाता है। ओव्युलेशन पीरियड्स के 14 दिन पहले शुरू होता है। सभी महिलाओं में ओव्युलेशन पीरियड्स आगे या पीछे हो सकता है। कहने का मतलब है कि सभी महिलाओं में ये प्रक्रिया निश्चित समय पर नहीं होती है। ये बात हर महिला की मेंस्ट्रुअल सायकल पर निर्भर करती है। अंडाशय से निकलने के बाद एग लगभग 1 दिन तक जीवित रहता है और स्पर्म सेक्स के बाद लगभग 6 दिनों तक यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब में रह सकते हैं। यानी आप प्रत्येक मेंस्ट्रुअल सायकल के छठे दिन तक प्रेग्नेंट हो सकती हैं। ओव्यूलेशन के एक दिन बाद प्रेग्नेंट होने के सबसे ज्यादा चांसेज रहते हैं।

और पढ़ें : जब सिर दर्द, सर्दी, बुखार कह सकते हैं, तो पीरियड्स को पीरियड्स क्यों नहीं?

पीरियड्स रेग्युलर न होने के कारण या मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम क्या है?

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम के कारण महिलाओं में पीरिड्स सही समय पर नहीं आते हैं। मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम के कारण कंसीव करने में समस्या होती है। ऐसा हॉर्मोनल गड़बड़ी के कारण होता है। हॉर्मोनल गड़बड़ी के लिए कई फैक्टर जिम्मेदार हो सकते हैं। जो महिलाएं हेल्दी लाइफस्टाइल नहीं जीती है, उन्हें मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ सकता है। जानिए मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम किन कारणों से हो सकती है।आपको निम्नलिखित मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम (menstrual problems)से गुजरना पड़ सकता है।

  • प्रीमेंट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome)
  • हैवी पीरियड्स (Heavy Periods)
  • पीरियड्स न होना (Absent Periods)
  • पेनफुल पीरियड्स (Painful Periods)

जानिए ऐसा किन कारणों से हो सकता है।

  • स्ट्रेस लेने के कारण शरीर के हॉर्मोनल लेवल में चेंजेस आने लगते हैं। इस कारण से यूट्रस लाइनिंग का भी निर्माण ठीक से नहीं हो पाता है, जिस कारण से पीरियड्स समय पर नहीं आते हैं।
  • जो महिलाएं खानपान में पौष्टिक आहार के बजाय अनहेल्दी फूड शामिल करती हैं, उन्हें भी मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम से गुजरना पड़ सकता है।
  • जिन महिलाओं को थायरॉयड की समस्या रहती है, उनको अक्सर पीरियड्स अनियमित होने की समस्या रहती है।
  • पी.सी.ओ.एस (Polycystic ovary syndrome) की समस्या से जूझने वाली महिलाओं को भी पीरियड्स की अनियमितता से जूझना पड़ता है।
  • जिन महिलाओं का वजन तेजी से गिरता या फिर बढ़ता है, उन्हें भी पीरियड्स समय पर न आने की समस्या हो सकती है।
  • पीरियड्स के दौरान होने वाली अधिक ब्लीडिंग भी मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम का हिस्सा है। इस समस्या को मेनोरेजिया (Menorrhagia) कहा जाता है।

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम कैसे की जाती है डायग्नोज? (Diagnosing Menstrual Problems)

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम को डायग्नोज करने के लिए डॉक्टर पहले महिला से उन लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं, जो वो पहले से महसूस कर रही हैं। आपको डॉक्टर को दिखाने जाने से पहले अनियमित पीरियड्स की डेट को जरूत ध्यान में रखना चाहिए, ताकि आप डॉक्टर को दिखा सके। डॉक्टर फिजिकल एग्जामिनेशन के साथ ही पेल्विक परिक्षण भी करते हैं। डॉक्टर पैप स्मीयर भी कर सकते हैं, ताकि उन्हें कैंसर या अन्य कंडीशन के बारे में जानकारी मिल सके। ब्लड टेस्ट की हेल्प से हॉर्मोनल इम्बैलेंस के बारे में जानकारी मिलती है। डॉक्टर एंडोमेट्रियल बायोप्सी (endometrial biopsy), हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy) या अल्ट्रासाउंड भी कर सकते हैं।

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम का ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम की ट्रीटमेंट बीमारी के अनुसार किया जाता है। बर्थ कंट्रोल पिल्स की हेल्प से पीएमएस (PMS) की समस्या से राहत मिलती है और साथ ही हैवी फ्लो की समस्या भी बंद हो जाती है। अगर मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम थायरॉयड के कारण है, तो डॉक्टर हॉर्मोन को संतुलित करने की कोशिश करेंगे। डॉक्टर पेल्विक इंफ्लामेटरी डिजीज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं को लेने की सलाह भी दे सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इस बारे में डॉक्टर से जानकारी प्राप्त करें।

  • महिलाओं को ट्रीटमेंट के साथ ही निम्नलिखित बातों का ध्यान भी रखना चाहिए।
  • अगर आप खाने में पौष्टिक आहार का सेवन करेंगी, तो आपको पीरियड्स के दौरान कम समस्या होगी।
  • रोजाना एक्सरसाइज और मेडिटेशन स्ट्रेस लेवल को कम करता है। आपको रोजाना इन्हें करना चाहिए।
  • पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख्याल रखें।
  • बेहतर होगा कि खाने में अधिक मसालेदार या तली चीजों का सेवन न करें।
  • पूरी नींद लें और कमजोरी का एहसास होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
  • खाने में आयरन वाले फूड्स शामिल करने के साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।

और पढ़ें : पीरियड्स के दौरान स्ट्रेस को दूर भगाने के लिए अपनाएं ये एक्सपर्ट टिप्स

क्या ट्रांसजेंडर (Transgender) को पीरियड्स आते हैं?

ट्रांसजेंडर में अगर यूट्रस, फैलोपियन ट्यूब, ओवरी और यूट्रस है, तो उन्हें भी पीरियड्स आ सकते हैं। कुछ ट्रांसजेंडर के लिए ये मुश्किल भी खड़ी कर देता है क्योंकि इस प्रक्रिया से उन्हें वास्तविक लिंग को लेकर परेशानी का एहसास भी होता है, जिस कारण से वो स्ट्रेस के शिकार हो सकते हैं। इसे जेंडर डिस्फोरिया ( gender dysphoria) भी कहा जाता है। कुछ ट्रांसजेंडर पीरियड्स को रुकवाने के लिए प्यूबर्टी ब्लॉकर्स (puberty blockers) लेते हैं। वहीं कुछ हॉर्मोनल रिप्लेसमेंट थेरिपी का सहारा भी लेते हैं। इससे पीरियड्स रुक जाते हैं। जो ट्रांसजेंडर जेंडर डिस्फोरिया ( gender dysphoria) का अनुभव करते हैं, उन्हें ट्रांस-फ्रेंडली डॉक्टर से बात करने की जरूरत है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह का ट्रीटमेंट शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम कर सकता है।

महिलाओं के साथ सेहत से जुड़ी चुनौतियां एक नहीं बल्कि कई हैं। ऐसे में शरीर में होने वाले परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर समय रहते समस्या का इलाज करा लिया जाए, तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और समय रहते अपनी परेशानियों का हल निकाला जा सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से मेंस्ट्रुएशन के बारे में जानकारी मिल गई होगी। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

ओव्यूलेशन कैलक्युलेटर

अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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सायकल की लेंथ

(दिन)

28

ऑब्जेक्टिव्स

(दिन)

7

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ घंटे पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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