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Menstrual Hygiene Day : मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर से लड़ने और हाइजीन मेंटेन करने के लिए जानिए क्या हैं आयुर्वेदिक टिप्स

Menstrual Hygiene Day : मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर से लड़ने और हाइजीन मेंटेन करने के लिए जानिए क्या हैं आयुर्वेदिक टिप्स

महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। शरीर में बदलाव हार्मोनल चेंजेस की वजह से होते हैं। शरीर में कुछ बदलाव ऐसे होते हैं जिनमें किसी खास तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है, जबकि कुछ शारीरिक बदलाव के दौरान कॉम्लीकेशन होती है। इन्हीं में से एक है मेंस्ट्रुअल साइकिल। मेंस्ट्रुअल साइकिल शुरू होने के दौरान सभी लड़कियों और महिलाओं को ऐंठन की समस्या होती है। जिन लोगों को अनियमित पीरियड्स (Periods) की समस्या होती है या फिर हैवी ब्लीडिंग की समस्या होती है, उन्हें पीरिड्स में अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए आयुर्वेदिक टिप्स (Ayurvedic tips for Menstrual Disorder) अपनाकर समस्या का समाधान किया जा सकता है।

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मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए आयुर्वेदिक टिप्स (Ayurvedic tips for Menstrual Disorder)

जानिए क्यों होता है मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर (What is Menstrual Disorder?)

मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए आयुर्वेदिक टिप्स (Ayurvedic tips for Menstrual Disorder)

मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर (Menstrual disorder) कई कारणों से हो सकता है।मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार खट्टा, नमकीन,तीखा खाना, गरिष्ठ भोजन और फरमंटेड फूड है। डोमेस्टिक और फैटी एनिमल का मीट, एल्कोहलिक बेवरेज का सेवन, भोजन पचने में समस्या, खट्टी डकार का बार-बार आनाआदि कारणों से भी मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है। कई अन्य कारण जैसे कि बार-बार गर्भपात होना, एक्सेसिव सेक्शुअल एक्टिविटी, अधिक शारीरिक परिश्रम जैसे कि ज्यादा चलना, घुड़सवारी करना, वजन उठाना आदि भी मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। कुछ साइकोलॉजिकल कंडीशन जैसे कि दुखी होना, गुस्सा ज्यादा आना, चिंता होना आदि भी पीरियड्स के समय समस्याओं को बढ़ाने का काम करते हैं।

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मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए आयुर्वेदिक टिप्स (Ayurvedic tips for Menstrual Disorder) क्यों महत्वपूर्ण है ?

आयुर्वेद के अनुसार खराब डायट (Diet) और इनसफिशिएंट डायजेशन मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर (Digestion Menstrual Disorder) का कारण होते हैं। जब शरीर में खाने का पाचन सही तरह से नहीं हो पाता है, तो शरीर में टॉक्सिन (Toxin) बनने लगते हैं। शरीर में पैदा हुए टॉक्सिन ब्लड के माध्यम से शरीर के अन्य टिशू और चैनल्स में भी जाने लगते हैं जिस कारण से ब्लॉकेज और स्थिरता आ जाती है। इस कंडीशन की वजह से ही वात दोष (वायु) और रक्त दोष (ब्लड) की समस्या हो जाती है। जब टॉक्सिन युक्त ब्लड चैनल में जाता है तो मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान हैवी फ्लो होने लगता है।

जानिए क्यों जरूरी हैं आयुर्वेदिक टिप्स

आयुर्वेद में पीरियड्स की समस्याओं (Periods problem) को ठीक करने के लिए बहुत से ट्रीटमेंट हैं। जानिए कैसे आयुर्वेद की हेल्प से मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर (Menstrual Disorder) को ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद में नरिसिंग और टोनिंग हर्ब के साथ ही रिजुविनेटिव ट्रीटमेंट की हेल्स से उपचार किया जाता है। मसाज और योग की सहायता से समस्या का समाधान निकाला जाता है। पीरियड्स के दौरान एक महिला के शरीर से ब्लड के साथ ही टॉक्सिक और वेस्ट भी बाहर आता है। अगर इसका थोड़ा हिस्सा भी शरीर में रह जाए तो ये शरीर में ब्लॉकेज की समस्या को पैदा कर देगा।

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मेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर के लिए आयुर्वेदिक टिप्स जानिए (Ayurvedic tips for Menstrual Disorder)

आयुर्वेदिक टिप्स की सहायता से पीरियड्स की समस्याओं से निपटा जा सकता है। आप इन टिप्स की सहायता ले सकती हैं।

  • पीरियड्स (Periods) के दौरान एक लहसुन (पिसा हुआ), दो लौंग को दिन में दो बार लें।
  • अगर आपको पीरियड्स में ऐंठन महसूस हो रही है तो एक चम्मच एलोवेरा जेल (Aloe Vera gel) में, एक चुटकी काली मिर्च या दालचीनी पाउडर (Cinnamon Powder) मिला लें और इसका सेवन करें। ऐसा करने से ऐंठन में आराम मिलेगी।
  • जिंगर हर्बल टी पीने से भी आपको बहुत आराम मिलेगा। अगर आपके पास जिंजर हर्बल टी (Herbal Tea) नहीं है तो गर्म पानी में एक चम्मच अदरक पाउडर मिला कर पी सकती हैं।
  • दो ग्लास पानी में एक चम्मच जीरा को उबाले। पानी तब तक उबाले जब तक वो आधा न रह जाए। अब इस पानी को छान लें और फिर इसमे एक चम्मच शहद मिलाएं। अब इस गर्म पानी का सेवन करें।
  • पीरियड्स के दौरान हाइजीन (Periods Hygen) का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है। दिन में एक से दो बार नहाना चाहिए। आप चाहे तो चन्दन और पुदीने के रस से युक्त पानी से नहा सकती हैं। ऐसा करने से शरीर को रिलेक्स फील होगा।
  • खाने में जीरा (Cumin), मेथी (Fenugreek), काली मिर्च (Black Pepper), लौंग (Clove), धनिया और मिंट (Mint) को जरूर शामिल करें।
  • खाने में पंपकिन सीड्स (Pumpkin seeds) , कुकंबर (Cucumber) यानी खीरा, आलू (Potato), गोभी, और मटर को जरूर शामिल करें।

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पीरियड्स में हाइजीन (Period Hygiene) का इस तरह रखें ख्याल

पीरियड्स के दौरान अगर हाइजीन यानी साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। जो महिलाएं पैड्स को समय से चेंज नहीं करती हैं या फिर गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें गंभीर बीमारी से जूझना पड़ सकता है। बिन शर्माए महिलाओं को कुछ टिप्स फॉलो करने चाहिए ताकि गंदगी को दूर किया जा सके।

  • अगर किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स आ रहा है, तो एक मां की जिम्मेदारी है कि उसे पीरियड्स (Periods) से जुड़ी जानकारी दें।
  • पीरियड्स के दौरान दिन भर एक ही पैड न लगाएं रखें। चार से पांच घंटे में पैड जरूर चेंज करें।
  • अगर टैम्पोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उससे जुड़ी सावधानी भी बरतें।
  • अगर आपको थकावट महसूस हो रही है तो गुनगुने पानी से नहाएं। ऐसा करने से सफाई भी हो जाएगी और साथ ही बॉडी को रिलेक्स भी मिलेगा।
  • हमेशा साफ अंडरगारमेंट्स का यूज करें।
  • पीरियड्स (Periods) में साफ-सफाई का ख्याल रखने के इंफेक्शन (Infection) के चांसेज कम हो जाते हैं। अगर आपको पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द महसूस होता है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

 

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अपने पीरियड सायकल को ट्रैक करना, अपने सबसे फर्टाइल डे के बारे में पता लगाना और कंसीव करने के चांस को बढ़ाना या बर्थ कंट्रोल के लिए अप्लाय करना।

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डॉ. प्रताप चौहान द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/03/2021 को
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