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लॉकडाउन में महिलाओं को अधिक हो रहा है स्ट्रेस, जानिए क्या हैं मुख्य कारण

लॉकडाउन में महिलाओं को अधिक हो रहा है स्ट्रेस, जानिए क्या हैं मुख्य कारण

अगर आपको एक साथ कई काम दे दिए जाए और साथ ही में आपको सभी कामों में सौ प्रतिशत देना हो तो आपका रिएक्शन क्या होगा ? घर हो या फिर ऑफिस, एक तय समय सीमा में ही इंसान को काम करना होता है। अगर कोई महिला रोज ऑफिस जाती है तो वो घर के कामों को ऐसे मैनेज करती है कि घर और बाहर सभी तगह बैलेंस बना लें। फिलहाल देशभर में लॉकडाउन चल रहा है। लॉकडाउन के कारण पुरुष हो या फिर महिला, सभी को वर्क फ्रॉम होम करना पड़ रहा है। वर्क फ्रॉम होम भले ही कुछ समय पहले तक लोगों को अच्छा ऑप्शन नजर आता था, लेकिन अब एक साथ घर का काम और ऑफिस का काम संभालना चुनौती बनता जा रहा है। महिलाओं के लिए लॉकडाउन का समय अधिक चुनौतीपूर्ण है। वजह साफ है कि उनको कई कामों को संभालना पड़ रहा है। लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस ज्यादा हो रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में किए गए सर्वे के आधार पर ये बात सामने आई है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस ज्यादा क्यों हो रहा है।

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लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस अधिक क्यों हो रहा है ?

जब एक साथ कई काम करने पड़ते हैं तो स्ट्रेस हो सकती है। फिलहाल लॉकडाउन में ऐसा ही चल रहा है। इस बात को जानने के लिए हैलो स्वास्थ्य ने मुंबई में वर्किंग मदर आकांक्षा तिवारी से बात की। अकांक्षा फिलहाल वर्क फ्रॉम होम कर रही हैं और साथ ही घर की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। आकांक्षा कहती हैं कि जब मैं ऑफिस जाती थी तो मेड सुबह जल्दी आकर खाना बनाती थी और साथ ही घर की सफाई की जिम्मेदारी भी उसी की थी। जो काम रह जाता था, मैं करती थी। बच्चों को स्कूल भेजने के बाद मैं ऑफिस जाती थी। फिर शाम को काम मेड की वजह से आसान हो जाता था। कोरोना महामारी के कारण डर भी रहता है कि आखिर कल क्या होगा।

फिलहाल लॉकडाउन की वजह से जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है। बच्चे ऑनलाइन स्टडी करते हैं और फिर उन्हें अलग से पढ़ाने के लिए टाइम देना पड़ता है। सुबहर जल्दी उठकर पहले घर का पूरा काम करना पड़ता है और फिर ऑफिस का। दिन से कब रात हो जाती है, पता ही नहीं चल पाता है। आकांक्षा कहती हैं कि लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस अधिक हो सकता है क्योंकि उन्हें अपने लिए समय ही नहीं मिल पा रहा है। लॉकडाउन के कारण मेंटल प्रॉब्लम भी अहम मुद्दा बनता जा रहा है।

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इस कारण से ज्यादा हो रही है लॉकडाउन में महिलाओं को टेंशन

लॉकडाउन में महिलाओं को टेंशन इसलिए ज्यादा हो रही है क्योंकि उन्हें एक साथ कई कामों में अपना बेस्ट देने का प्रेशर है। कानपुर की अमीता सिंह जो कि वर्किंग वुमन है, कहती हैं कि घर के काम जैसे कि खाना सही से नहीं बना तो घरवालों को समस्या, अगर ऑफिस के किसी काम में गड़बड़ हो गई तो बॉस नाराज, काम के दौरान अचानक से इंटरनेट का इश्यू हो जाना, घर के कई कामों को करने के कारण ऑफिस के काम में बेस्ट न दे पाना ऐसे कारण हैं, जो लॉकडाउन में महिलाओं को टेंशन दे रहे हैं। लॉकडाउ की वजह से फिलहाल मेड छुट्टी पर हैं और 23 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, जब सभी कामों को करना पड़ रहा है। अमीता का कहना है कि ऑफिस का काम करने के लिए एक माहौल की जरूरत पड़ती है, जो कि फिलहाल मुझे नहीं मिल पा रहा है। लॉकडाउन की वजह से मानसिक रूप से भी खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं।

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लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस : नींद न आने की समस्या

ये बात सच है कि आज के समय में कुछ पुरुषों ने भी महिलाओं के साथ घरेलू काम में हांथ बंटाना शुरू कर दिया है। लेकिन ऐसे पुरुषों का प्रतिशत कम ही है। मुंबई की रजनी शर्मा हाउस वाइफ हैं। रजनी कहती हैं लॉकडाउन का समय बढ़ा दिया गया है। ज्यादा काम की वजह से रात में नींद भी ठीक से नहीं ले पा रहे हैं। रोजाना जल्दी उठना और रातो को सही से नींद न ले पाने के कारण दिनभर थकान बनी रहती है। ये मेरी टेंशन का मुख्य कारण है। रजनी आगे कहती हैं कि फिलहाल मैं जॉब नहीं कर रही हूं लेकिन फिर भी मुझे लॉकडाउन में स्ट्रेस की समस्या हो रही है। मेरे ख्याल से लॉकडाउन में महिलाओं को स्ट्रेस की समस्या अधिक झेलनी पड़ रही है।

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इन बातों का रखें ध्यान

कोरोना महामारी के कारण मानसिक बीमारियां भी बढ़ रही हैं। लॉकडाउन बढ़ने से लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। अगर आप स्ट्रेस का उपाय चाहते हैं तो जरूरत से ज्यादा चिंता न करें और अपने दिमाग को शांत रखें। अपने आपको हर मुश्किल से लड़ने के काबिल समझें और दिमाग में नेगेटिव विचारों को न आने दें। इससे आपको बुरे और नेगेटिव ख्याल नहीं आएंगे और मन शांत रहेगा। आपको यह तय करना होगा कि जिस भी बात को लेकर आप चिंतित हैं, उसका कोई समाधान है या नहीं। यदि है, तो उसके बारे में सोचे और उसे लागू करें।अगर आपको काम ज्यादा करना पड़ रहा है तो बेहतर होगा कि घर के सभी सदस्यों में काम बांट दें। अकेले ही सारा काम न करें।अपनी चिंताओं के बारे में अपने करीबी से बात करें। इससे आप के भीतर की एंग्जायटी कम हो सकती है। दिनभर में अपने लिए समय जरूर निकाले, ताकि आपको फ्रेशनेस फील हो।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित
अपडेटेड 18/04/2020
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