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कैंसर के इलाज के लिए किए जाने वाले एडवांस ट्रीटमेंट के बारे में जान लीजिए

कैंसर के इलाज के लिए किए जाने वाले एडवांस ट्रीटमेंट के बारे में जान लीजिए

अपने आसपास कैंसर (Cancer) जैसी खतरनाक बीमारी का नाम सुनते ही दिमाग में कई तरह के नकारात्मक ख्याल आने लगते हैं। कैंसर, एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है और सबसे दर्दनाक स्थिति तब होती है, जब इस बीमारी के बारे में पता आखिरी चरण में जाकर लगता है। समय पर ठीक इलाज और देखभाल कर ली जाए, तो कैंसर को आसानी से मात दिया जा सकता है। कैंसर के उपचार (Treatment) के लिए आज के समय कई नए और एडवासं ट्रीटमेंट उपलब्ध हैं। ऐसी बहुत सी ऐसी थेरिपीज आ चुकी है, जो कैंसर के लिए इलाज के लिए बेस्ट साबित हुई हैं। हम यहां बात करेंगें उन कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट ( Advanced Treatments of Caner) के बारे में।

और पढ़ें : जानें शरीर में तिल और कैंसर का उससे कनेक्शन

कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट (Advanced Cancer Treatment)

कैंसर, एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिसका पता अगर किसी मरीज को शुरुआत में ही लग जाए, तो दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन जैसे-जैसे इसकी स्टेज बढ़ती जाती है, लोगों के जान का जोखिम बढ़ जाता है। एडवांस स्टेज के कैंसर में लोगों को कई तरह की थेरिपी दी जाती है। जिसमें कुछ एडवांस ट्रीटमेंट शामिल हैं, जैसे कि-

1-पर्सनलाइज्ड और प्रीसीजन मेडिसिन (Personalized And Precision Medicine)

कई शोधकर्ताओं ने पाया है कि कैंसर हर मरीज में अलग-अलग एक्टिविटिज करता है। ऐसे में पर्सनलाइज्ड और प्रीसीजन मेडिसिन ट्रीटमेंट में डॉक्टर्स ट्यूमर को आसानी से समझ पाते हैं। इसमें जीव परिवर्तन और म्यूटेशन की मदद से डॉक्टरों को यह तय करने में आसानी हो जाती है कि कैंसर का इलाज किस तरह से किया जा सकता है। इसे ‘टार्गेटेड ट्रीटमेंट’ भी कहते हैं जिसमें डॉक्टर बीमारी की जड़ तक पहुंचने में कामयाब होते हैं।

टार्गेटेड ट्रीटमेंट्स (Targeted Treatments)

कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट में टार्गेटेड ट्रीटमेंट की अहम भूमिका है। इसमें उन जीन, प्रोटीन्स और रक्त कोशिकाओं पर गौर किया जाता है, जो कैंसर सेल्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यह कैंसर के पुराने ट्रीटमेंट कीमोथैरेपी से बहुत अलग है, क्योंकि कैंसर का इलाज करने का यह सबसे एडवांस तरीका माना गया है जो, कैंसर की बढ़ती हुई सेल्स को पहचानने का काम करती है। इस विधि में डॉक्टर्स कैंसर के ट्यूमर को आसानी से पहचान लेते हैं।

टार्गेटेड ट्रीटमेंट्स के उदाहरण

  • त्रास्तुज़ुमाब (Trastuzumab) या हरसेप्टिन (Herceptin) दवाई के जरिए कैंसर का इलाज होता है जिसमें एचईआर -2 जीन म्यूटेशन होता है। हरसेप्टिन इम्यून टार्गेटेड थैरेपी का एक उदाहरण है। यह मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज की श्रेणी में आता है।
  • एफेटीनिब (Afatinib) या गिलोट्रिफ (Gilotrif) और सेटूक्सीमैब (Cetuximab) या इरबिटुक्स (Erbitux) जैसी दवाईयां कैंसर में ईजीएफआर (EGFR) नामक पदार्थ को बढ़ने से रोकती है, जो कोलेरेक्टल और लंग कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं
  • डाब्राफेनिब (Dabrafenib) या टेफिन्लर (Tafinlar) और वेमुराफेनिब (Vemurafenib) या जेल्बोरफ (Zelboraf) जैसी दवाईयां कैंसर में मेलानोमा (स्किन कैंसर) का इलाज करती हैं, जिसमें एक म्यूटेशन बीआरएफ (BRF) जीन होता है।

और पढ़ें : Gallbladder Cancer: पित्त का कैंसर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

2- इम्यूनोथेरिपी (Immunotherapy)

कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट में इम्यूनोथेरिपी का अलग महत्व है। इलाज के इस तरीके में इम्यून सिस्टम यानि प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से सुरक्षित किया जाता है।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज (Monoclonal Antibodies)

इम्यून सिस्टम उन प्रोटीन्स का निर्माण करते हैं जिन्हें एंटीबॉडीज कहा जाता है, जो कि शरीर में पनप रहीं कैंसर कोशिकाओं को तलाशने का काम करते हैं। सभी एंटीबॉडीज कैंसर सेल्स से मिलकर लड़ते हैं। कुछ एंटीबॉडीज अकेले भी यह काम करते हैं और कुछ कीमोथेरेपी जैसे टॉक्सिस पदार्थ से जुड़े होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं का नाश करने काम करते हैं।

और पढ़ें : Gallbladder Cancer: पित्त का कैंसर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

चेकप्वाइंट इनहिबिटर्स (Checkpoint Inhibitors)

इम्यूनोथेरेपी में ‘चेकप्वाइंट इनहिबिटर्स’ पदार्थों को खत्म किया जाता है। क्योंकि, चेकप्वाइंट सतह के पीछे कुछ कैंसर कोशिकाओं जमी होती हैं जिन्हें इम्यून सिस्टम ढूंढने में कामयाब नहीं हो पाता है। ऐसे में इनहिबिटर्स इन चेकप्वाइंट को हटाने का काम करते हैं ताकि, इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स को ढूंढ इसका प्रभाव कम कर सके।

कैंसर वैक्सीन (Cancer Vaccine)

  • कैंसर के दौरान नियमित रूप से दिए जाने वाले कैंसर वैक्सीन इम्यून सिस्टम को कण्ठमाला (Mumps) या खसरा ( Measles) जैसी बीमारी में लड़ने में मदद करता है। बता दें कि कैंसर वैक्सीन के दो प्रकार हैं।
  • प्रीवेंटिव वैक्सीन (Preventive Vaccine) जिसे प्रोफिलेक्टिक वैक्सीन (Prophylactic Vaccine) भी कहते हैं, यह कैंसर को रोकने में मददगार होती है।
  • ट्रीटमेंट वैक्सीन (Treatment Vaccine) जिसे थेराप्यूटिक (Therapeutic) वैक्सीन भी कहा जाता है। इसमें कैंसर रोगी का इम्यून सिस्टम मजबूत किया जाता है जो कैंसर से लड़ने मदद करता है।
  • बता दें कि अमेरिका में दो तरह की कैंसर प्रीवेंटिव वैक्सीन होती हैं। पहला ह्यूम पैपिलोमावायरस (HPV) और दूसरी हेपाटाइटिस बी वायरस। वहां, मेटास्टेटिक और प्रोस्टेट कैंसर के लिए भी ट्रीटमेंट वैक्सीन उपलब्ध है।

साइटोकिन्स (Cytokines)

साइटोकिन्स नामक प्रोटीन्स इम्यून सेल्स की वृ्द्धि और कार्यक्षमता को नियंत्रित करता है। यह कैंसर के खिलाफ इम्यून सिस्टम को मजबूत भी करता है। इसमें दो तरह के प्रोटीन्स पहला इन्टरफेरोन्स (Interferons) जो कैंसर से लड़ने वाली इम्यून सेल्स का निर्माण करते हैं। दूसरा इंटरन्यूकिंस (Interleukins) जो कि इम्यून सेल्स में एक-दूजे में संपर्क बनाने का काम करता है।

और पढ़ें : स्तनपान करवाने से महिलाओं में घट जाता है ओवेरियन कैंसर का खतरा

3-सीएआर-टी-सेल्स थेरिपी (CAR-T Cells Therapy)

इम्यून सिस्टम में मौजूद टी सेल्स को फाइटर सेल्स भी कहते हैं, जो शरीर को वायरस और अन्य बीमरियों से बचाती हैं। CAR T- सेल्स थेरिपी कैंसर में एक ऐसा ट्रीटमेंट है, जिसमें ये सेल्स कैंसर से डटकर मुकाबला करती हैं। इस विधि में डॉक्टर्स सबसे पहले खून से टी-सेल्स को निकालते हैं। इसके बाद वे इन सेल्स के जीन को बदलते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि, शरीर में मौजूद कैंसर सेल्स को ढूंढकर उसे मिटाया जा सके। इसके बाद डॉक्टर्स शरीर में दोबारा टी-सेल्स को डालने का काम करते हैं।

4-रेडिएशन थेरिपी ( Radiation Therapy)

कैंसर के एडवांस ट्रीटमेंट में से एक रेडिएशन थेरिपी भी है। इसमें कैंसर कोशिकाओं को रेडिएशन के जरिए खत्म किया जाता है। कैंसर के रेडिएशन थेरिपी ट्रीटमेंट में नए तरीकों को जोड़ा गया है। आइए जान लेते हैं….

इंटेंसिटी माड्यूलेटेड रेडियो थेरिपी (IMRT)

इसमें मशीन की मदद से कैंसर वाली जगह पर भारी मात्रा में रेडिएशन छोड़ा जाता है, लेकिन इसमें आस-पास के कुछ हेल्दी टिश्यू को भी थोड़ा नुकसान पहुंचता है।

इमेज गाइडेड रेडिएशन थेरिपी (IGRT)

इस विधि में डॉक्टर इमेज स्केन जैसे कि एमआरआई और सीटी स्केन के जरिेए कैंसर वाली जगह की पहचान कर उसका इलाज करते हैं।

कैंसर के एडवांड ट्रीटमेंट

स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS)

इसमें कैंसर से प्रभावित शरीर के छोटे से हिस्से में भारी मात्रा में रेडिएशन छोड़ा जाता है। यह विधि ब्रेन और स्पाइन जैसे छोटे हिस्से से ट्यूमर को निकालने में बड़ी कारगार है।

और पढ़ें : जानिए ब्रेस्ट कैंसर के बारे में 10 बुनियादी बातें, जो हर महिला को पता होनी चाहिए

5-प्रोटॉन थेरिपी ( Proton Therapy)

कैंसर के इलाज के लिए ‘प्रोटॉन थेरिपी’ रेडियोथेरिपी में सबसे नई तकनीक है। कैंसर के मरीजों को रेडियोथेरिपी में रेडिएशन देने के लिए एक्सरे का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार की रेडिएशन थेरिपी में प्रोटॉन्स का इस्तेमाल किया जाता है जोकि कैंसर सेल्स को आसानी से खत्म कर देते हैं। प्रोटॉन थेरिपी का इस्तेमाल शरीर के इन हिस्सों से ट्यूमर निकालने में किया जाता है। जैसै कि..

  • ब्रेन
  • प्रोस्टेट
  • लंग
  • लिवर
  • ब्रेस्ट
  • इसोफागुस ( Esophagus)
  • कोलोन (Colon)
  • आंखें
  • सिर और गर्दन

और पढ़ें : इन टेस्ट से चलता है वजायनल कैंसर का पता, जानिए इनके बारे में विस्तार से

6- रोबोट असिस्टेड सर्जरी (Robot-Assisted Surgery)

बता दें कि ऑपरेशन आज भी कैंसर के इलाज का सबसे बड़ा उपचार है। वहीं, रोबोटिक सर्जरी में डॉक्टर्स शरीर में टूल्स और कैमरे की मदद से इलाज करते हैं। डॉक्टर्स रोबोटिक आर्म्स के जरिए कैंसर की सर्जरी करते हैं जोकि, एक असल सर्जियन से बेहतर मानी जाती है। इस विधि में शरीर के पेचीदा हिस्सों में आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस विधि में खून भी कम बहता है और दर्द का भी पता नहीं चलता है। वहीं, अस्पताल में भी ज्यादा दिन रुकना नहीं पड़ता है।

1. रोबोटिक सर्जरी इन कैंसर में है प्रभावी

  • ब्लैडर कैंसर
  • किडनी कैंसर
  • ओवेरीज कैंसर
  • प्रोस्टेट कैंसर
  • गले का कैंसर

ये सभी थेरिपी और ट्रीटमेंट रोगी के कैंसर के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। कैंसर का इलाज सभी के लिए अलग-अलग है, लेकिन इस तरह के नए ट्रीटमेंट कैंसर के मरीजों को जल्दी ठीक होने में मद्द कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

 

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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