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डायबिटीज और यूटीआई : पेशंट की स्थिति को बिगाड़ सकता है बीमारियों का ये मेल!

डायबिटीज और यूटीआई : पेशंट की स्थिति को बिगाड़ सकता है बीमारियों का ये मेल!

डायबिटीज की समस्या एक ऐसी समस्या है, जिसमें व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती है। एक ओर खान-पान में परहेज और दूसरी ओर डायबिटीज (Diabetes) और उससे जुड़े कॉम्प्लिकेशंस से रूबरू होना पड़ता है। डायबिटीज की स्थिति तब ज्यादा खराब हो जाती है, जब इससे जुड़ी हुई और भी परेशानियां व्यक्ति को चारों ओर से घेर लेती हैं। आज हम डायबिटीज से जुड़ी एक ऐसी ही परेशानी के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो किसी की भी परेशानी का सबब बन सकती है। डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) ऐसी समस्या है, जो एक दूसरे के साथ चलती है। इस आर्टिकल में हम बात करने जा रहे हैं डायबिटीज और यूटीआई (UTI) के बारे में। लेकिन इससे पहले जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) से जुड़ी कुछ खास बातें।

क्या है डायबिटीज की समस्या? (Diabetes)

डायबिटीज (Diabetes) उस समस्या को कहते हैं, जिसमें रोगी के शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। डायबिटीज की समस्या में पैंक्रियाज इंसुलिन ठीक ढंग से पैदा नहीं कर पाती और इसलिए शरीर में इंसुलिन की कमी होती है। यही कारण है कि शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और व्यक्ति डायबिटीज की समस्या से ग्रसित हो जाता है। मुख्यतः डायबिटीज के दो प्रकार माने गए हैं, टाइप वन डायबिटीज (Type 1 Diabetes) और टाइप टू डायबिटीज (Type 2 Diabetes)। टाइप वन डायबिटीज में शरीर के इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है और इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। वहीं टाइप टू डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन पैदा नहीं कर पाता और शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। हालांकि डायबिटीज का रोग एक आम रोग हो चला है। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में इस रोग के शिकार ज्यादा से ज्यादा लोग हो रहे हैं। भारत में रोजाना डायबिटीज के मरीजों के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, इसलिए हमारे देश में डायबिटीज (Diabetes) एक गंभीर और चिंताजनक विषय बन गया है। आइए अब जानते हैं डायबिटीज के लक्षण कौन से हैं।

और पढ़ें : जानें कैसे स्वेट सेंसर (Sweat Sensor) करेगा डायबिटीज की पहचान

डायबिटीज और यूटीआई : क्या हो सकते हैं लक्षण? (Symptoms of Diabetes)

टाइप टाइप वन डायबिटीज के मुकाबले टाइप टू डायबिटीज (Type 2 Diabetes)के रोगियों में लक्षण धीरे-धीरे और कम दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में आपको डायबिटीज से जुड़े इन लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी माना जाता है –

  • बार-बार यूरिनेशन होना
  • बार-बार प्यास लगना
  • बहुत भूख लगना
  • अत्यधिक थकान
  • धुंधला दिखना
  • किसी चोट को ठीक होने में ज्यादा समय लगना
  • लगातार घटता वजन (टाइप1)
  • हाथ / पैर में झुनझुनी या दर्द (टाइप 2)

यदि आप ये लक्षण आमतौर पर खुद में देखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर अलग-अलग टेस्ट के जरिए पता लगाएंगे कि आपको डायबिटीज (Diabetes) की समस्या है या नहीं। समय पर डायबिटीज का इलाज हो, तो इसे संतुलित किया जा सकता है। आइए अब जानते हैं डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) एक दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं।

डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and uti)

डायबिटीज और यूटीआई : एक-दूसरे से जुड़ी है दोनों समस्याएं (Diabetes and uti)

डायबिटीज एक ऐसी समस्या है, जिसमें व्यक्ति का डिफेंस मैकेनिज्म धीरे धीरे कमजोर होता चला जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को आसानी से इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। जैसा कि आप जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) का सीधा असर हमारे ब्लैडर के काम पर पड़ता है, जिसे ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी (Autonomic neuropathy) का नाम दिया गया है। इस स्थिति में ब्लैडर धीरे-धीरे खाली होता है। वहीं कुछ स्थितियों में ब्लैडर पूरी तरीके से खाली नहीं हो पाता। खराब मेटाबॉलिक कंट्रोल की वजह से यह स्थिति पैदा होती है, जिसके कारण यूरिन इन्फेक्शन का खतरा डायबिटीज में सबसे ज्यादा देखा जाता है। हालांकि कुछ एंटीबायोटिक दवाइयों के चलते डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की स्थिति से निपटा जा सकता है। लेकिन आमतौर पर लोगों में डायबिटीज और यूटीआई की इस समस्या को देखा जा सकता है।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक यूटीआई टाइप टू डायबिटीज (Diabetes) में होने वाली एक आम समस्या मानी जाती है। कुछ पेशेंट में ये समस्या गंभीर हो जाती है, क्योंकि उनमें ज्यादातर रेजिस्टेंट पथोजेंस पाए जाते हैं। ऐसी स्थिति में बैक्टीरियल रजिस्टेंस को बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल करना पड़ता है। डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की वजह से कई बार पेशेंट को किडनी से जुड़ी तकलीफ हो का भी सामना करना पड़ सकता है। वहीं किडनी इन्फेक्शन होने पर अन्य कॉम्प्लिकेशंस भी बढ़ जाते हैं, जिसमें हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), किडनी डैमेज, प्रेगनेंसी में प्रीमेच्योर डिलीवरी और ब्लड इंफेक्शन की समस्या हो सकती है। आमतौर पर डायबिटीज और यूटीआई की तकलीफ एंटीबायोटिक्स की मदद से 7 से 14 दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन यह समय तब बढ़ जाता है जब यह समस्या गंभीर हो जाती है।

डायबिटीज और यूटीआई (UTI) की समस्या से निपटने के लिए दवाइयों के साथ-साथ कुछ बातों का ख्याल व्यक्ति को रखना होता है। आइए जानते हैं डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या से निपटने के लिए कौन सी बातों का ध्यान रखें।

डायबिटीज और यूटीआई : ऐसे रखें अपना ध्यान (Diabetes and UTI)

डायबिटीज और यूटीआई की समस्या से निपटने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जिसमें सबसे पहला काम है शुगर कंट्रोल करना। जब आप अपना ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) कंट्रोल रखते हैं, तो डायबिटीज (Diabetes) की समस्या में अपने आप आराम मिल जाता है और इसकी वजह से ब्लैडर पर दबाव नहीं पड़ता। जिससे डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या कम हो सकती है।

और पढ़ें : Diabetes insipidus : डायबिटीज इंसिपिडस क्या है ?

दूसरा काम है ज्यादा पानी पीना। डायबिटीज और यूटीआई (UTI) की समस्या में आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। ज्यादा पानी पीने से ब्लैडर पूरी तरह से साफ होता है और समय-समय पर आपको यूरिनेशन के लिए जाना पड़ता है। जिससे पानी के जरिए खराब बैक्टीरिया ब्लैडर से बाहर निकल जाते हैं। जब आप बार-बार यूरिनेशन के लिए जाते हैं, तो ब्लैडर अच्छी तरह से साफ होने लगता है और इसकी वजह से डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) होने का खतरा कम हो जाता है।

तीसरा काम है कॉन्स्टिपेशन से ख़ुद को बचाना। जब आप कॉन्स्टिपेशन (Constipation) से ग्रसित होते हैं, तो आपके गट पर दबाव बढ़ता चला जाता है। जिसकी वजह से ब्लैडर ठीक तरह से साफ नहीं हो पाता। इसलिए डायबिटीज और यूटीआई (UTI) की समस्या में आराम पाने के लिए आपको कॉन्स्टिपेशन से बचना बेहद जरूरी है। सही खान-पान और रोजाना एक्साइज की मदद से आप कॉन्स्टिपेशन में राहत पा सकते हैं।

और पढ़ें : रिसर्च: हाई फाइबर फूड हार्ट डिसीज और डायबिटीज को करता है दूर

चौथा काम है बार बार यूरिन के लिए जाना। यदि आप डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या से बचना चाहते हैं, तो आपको समय-समय पर यूरिनेशन के लिए जाना चाहिए। कई बार लोग यूरिन को रोक कर रखते हैं, जिसकी वजह से इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। ब्लैडर के समय पर खाली ना होने पर इन्फेक्शन हो जाता है और डायबिटीज और यूटीआई की समस्या होने में देर नहीं लगती।

पांचवा और सबसे जरूरी काम है टॉयलेट हाइजीन बनाए रखना। डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या में बड़ा रोल अदा करता है टॉयलेट हाइजीन (Toilet hygiene)। यदि आप यूरिनेशन के दौरान सही हाइजीन का ध्यान ना रखें, तो आपको यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है। हाइजीन की कमी के चलते आपके गुप्तांगों के आसपास इन्फेक्शन हो सकता है और डायबिटीज में इन्फेक्शन तेजी से बढ़ता है। इसलिए डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या से बचने के लिए आपको सही टॉयलेट हाइजीन अपनानी चाहिए।

इसके अलावा आपको एक और बात का खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है, वो काम है है सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को अच्छी तरह से साफ करना। सेक्स करने के बाद खासतौर पर महिलाओं में यूटीआई (UTI) होने का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, इसलिए सेक्स के बाद महिलाओं को प्राइवेट पार्ट को साफ करने की हिदायत दी जाती है।

ध्यान रहे कि डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की समस्या एक दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर आपको जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर डायबिटीज और यूटीआई की समस्या (Diabetes and UTI) में एंटीबायोटिक दवाइयों की मदद से आपका इलाज कर सकते हैं। इसलिए डायबिटीज और यूटीआई (Diabetes and UTI) की दिक्कत को नजरअंदाज ना करते हुए इसका इलाज जल्द से जल्द करवाना आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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