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क्या डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज के फायदों से अंजान हैं आप?

क्या डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज के फायदों से अंजान हैं आप?

डायबिटीज की बीमारी किसी भी उम्र में होने वाली बीमारी है। पहले ये बीमारी कुछ ही लोगों में हुआ करती थी या फिर अधिक उम्र में लोग इसका शिकार होते थे लेकिन अब बच्चों से लेकर वयस्कों और अधिक उम्र के लोगों में ये बीमारी आम हो गई है। इंसुलिन हॉर्मोन ब्लड में शुगर के लेवल को बेहतर बनाने में मदद करता है। अगर पैंक्रियाज से सिक्रीट होने वाला इंसुलिन हॉर्मोन किन्हीं कारणों से पर्याप्त मात्रा में सिक्रीट नहीं होता है, तो ब्लड में शुगर का लेवल (Blood sugar level) बिगड़ने लगता है। ऐसे में डायबिटीज की समस्या का सामना करना पड़ता है। डायबिटीज से निपटने के लिए खानपान में सुधार के साथ ही रोजाना एक्सरसाइज बहुत जरूरी होती है। डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) आपको एक नहीं बल्कि कई तरीकों से फायदा पहुंचाती है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको । डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही इससे जुड़ी सावधानियों के बारे में भी बताएंगे।

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डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes)

बैलेंस ट्रेनिंग फिटनेस के लिए क्रिटिकल एस्पेक्ट माना जाता है। अधिक उम्र के लिए ये ट्रेनिंग बहुत जरूरी होती है, क्योंकि उनके लिए बैलेंस करना बहुत मुश्किल का होता है। उम्र बढ़ने के साथ ही मसल्स मास और मसल्स स्ट्रेंथ (Muscle strength) कम हो जाती है। एक स्थान से दूसरे में जाने के लिए, कुछ उठाने के लिए मसल्स में स्ट्रेंथ का होना बहुत जरूरी है। मधुमेह रोगियों के लिए बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercise) बहुत जरूरी है। अधिक उम्र के लोगों में बैलेंस न कर पाने की अधिक समस्या होती है। उन्हें चलने या फिर झुकने में अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises) की हेल्प से उन्हें राहत मिलती है और वो आसानी से बैलेंस भी कर सकते हैं। बैलेंस न कर पाने के कारण गिर पड़ना या फिर चोट लग जाना आदि समस्या के रूप में सामने आता है। कई बार बैलेंस की कमी के कारण बैक पेन या ज्वाइंट्स पेन का सामना भी करना पड़ता है। जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए जानिए डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) को कैसे शामिल किया जा सकता है।

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डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज: कोर टारगेट (Core) है अहम

डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज

कोर में चेस्ट, एब्डॉमेन और बैक आते हैं, जो आपके शरीर स्टेबिलिटी देने का काम करते हैं। अगर आपका कोर वीक है, तो स्ट्रेंथ में कमी आ सकती है। आपको इससे बचने के लिए एक्सरसाइज करनी चाहिए। बैलेंस एक्सरसाइज की हेल्प से आप कोर बैलेंस कर सकते हैं। आप बैंडेड ट्रिप्लानर फुट टैप्स (Banded Triplanar Foot Taps),
सिंगल लेग क्रॉस-बॉडी पंच (Single-leg Cross-body Punches), स्टेबलिटी बॉल में एल्बो की हेल्प से प्लैंक एक्सरसाइज (Plank With Elbows on a Stability Ball), रोटेशन के साथ पालॉफ प्रेस (Paloff Press with Rotation) आदि एक्सरसाइज कर सकते हैं।

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डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज: पैरों की मजबूती के लिए ऐसे करें बैलेंस एक्सरसाइज

डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) में लैग्स की स्ट्रेथनिंग भी बहुत जरूरी है। ये बैलेंस ट्रेनिंग का अहम हिस्सा माना जाता है। जिन लोगों को मसल्स वीकनेस की समस्या होती है, खासतौर पर जो लोग पैरों की मसल्स वीकनेक को लेकर परेशान रहते हैं, उनके लिए लैग्स स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बहुत जरूरी हो जाती है। आप ताई ची (Tai chi), इनडोर बाइकिंग और वॉटर एरोबिक्स (Water aerobics) आदि की मदद से लैग्स की मसल्स को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। बिगनर्स के लिए एक पैर पर खड़े होकर बैलेंस बनाना बेहतर रहेगा। अगर आप इसकी शुरुआत कर देते हैं, तो आप इसे आसानी से कर सकते हैं। आप ब्रश करते समय या फिर खड़े रहकर कोई काम कर रहे हैं, तो इस एक्सरसाइज को कर सकते हैं।

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फीट और एंकल पर भी करें फोकस

डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) में आपको फीट और एंकल पर भी फोकस करने की जरूरत है। फीट और एंकल पूरी बॉडी को सपोर्ट करने का काम करते हैं, इसलिए उनका स्ट्रॉन्ग होना बहुत जरूरी है। अगर आप फीट और एंकल को मजबूत करना चाहते हैं, तो आपको कुर्सी में बैठने के बाद पैरों को उठाकर हवा में अल्फाबेट लिखने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करने से फीट और एंकल को मजबूती मिलेगी। अपना वजन दोनों पैरों से एक पैर पर शिफ्ट करें। कम से कम कुछ सेकंड के लिए रुकें और फिर वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

हील राइजेज (heel raises) की मदद से एंकल को मजबूत कर सकते हैं। इससे ज्वांट्स को भी मजबूती मिलती है। इसमें आपको सीधे खड़े हो के बाद कुर्सी का सहारा लेना पड़ता है। फिर पैर के एंकल को ऊपर की ओर उठाना होता है और अपने पैर की उंगलियों पर बैलेंस करना होता है। आप जितनी देर तक ऐसा कर सके, उतनी ही देर करें। आप कुछ रिलेक्स के बाद इस प्रोसेस को तीन से चार बार दोहरा सकते हैं।

बैलेंस एक्सरसाइज बैठ कर करें या खड़े होकर?

अक्सर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि बैलेंस एक्सरसाइज बैठकर करनी चाहिए या फिर खड़े रहकर। शरीर को बैलेंस करने के लिए खड़े होकर एक्सरसाइज करना बेहतर रहता है। ऐसा करने से बैलेंस करने में आसानी हो जाती है। ऐसे में सीटेड एक्सरसाइड को हेल्पफुल नहीं माना जाता है। अगर किसी कारण से खड़े होने में दिक्कत आ रही है, तो ऐसे में बैठकर एक्सरसाइज करना बेहतर विकल्प हो सकता है। बैलेंस एक्सरसाइज के दौरान अगर आपको किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको एक्सपर्ट से जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

डायबिटीज के पेशेंट को अगर चोट लग जाती है, तो खून तेजी से निकलता है। ऐसे में डायबिटिक पेशेंट को ध्यान देने की जरूरत है कि उसे चोट न लगे। बैलेंस एक्सरसाइज करते समय आप किसी की हेल्प भी ले सकते हैं। जो लोग इस एक्सरसाइज की शुरुआत कर रहे हैं, उनको शुरुआत में दिक्कत हो सकती है या फिर बैलेंस करने में समस्या आ सकती है। अगर आपको एक्सरसाइज के बाद शरीर में दर्द महसूस हो, तो एक साथ देर तक एक्सरसाइज करने की भूल न करें। बैलेंस एक्सरसाइज जब आप शुरू कर देंगे, तो धीमे-धीमे चीजे आसान लगने लगेंगी। आपके एक्सपर्ट से जानकारी लेने के बाद नेक्स्ट लेवल में जाना चाहिए ताकि आप अधिक बैलेंस बना सके। ओल्डर एडल्ट्स के लिए कठिन बैलेंस एक्सरसाइज का चुनाव करना ठीक नहीं रहता है क्योंकि ऐसा करना खतरनाक भी हो सकता है। बिना किसी की देखरेख के बैलेंस एक्सरसाइज न करें।

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हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है। इस आर्टिकल में हमने आपको डायबिटीज में बैलेंस एक्सरसाइज (Balance exercises in Diabetes) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड