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जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट, जो टाइप 2 डायबटीज पेशेंट को बचाते हैं बड़े कॉम्प्लीकेशंस से!

जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट, जो टाइप 2 डायबटीज पेशेंट को बचाते हैं बड़े कॉम्प्लीकेशंस से!

टाइप 2 डायबिटीज की कंडीशन को मैनेज करने के कई ऑप्शन होते हैं। कुछ ऑप्शन जैसे कि प्रिस्क्रप्शन ड्रग्स का सेवन, लाइफस्टाइल में बदलाव आदि टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं में से एक है ग्लूकेगॉन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (Glucagon-like peptide-1), जो टाइप 2 डायबिटीज को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अन्य एंटीडायबिटिक ड्रग के मुकाबले जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट हाइपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia) का कारण नहीं बनता है और न ही वेट को बढ़ने देता है। इसका सेवन वेट को घटाने में मदद करता है। ये हार्ट और किडनी हेल्थ के लिए भी लाभदायक होते हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको GLP-1 के बारे में जानकारी देंगे और बताएंगे कि कैसे ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं। जानिए जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) के बारे में अधिक जानकारी।

और पढ़ें: क्या टाइप 2 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है या नहीं?

क्या है जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists)?

GLP-1 एक इन्क्रीटिन ( incretin) है, जो गट हॉर्मोन में शामिल है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) का काम इस नैचुरल हॉर्मोन को बढ़ाना या फिर रिप्रोड्यूस करना है। जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) कई तरह से काम करता है, जिनमें शामिल है, ये पैनक्रिएटिक बीटा सेल से मील डिपेंडेंट इंसुलिन सिक्रीशन को बढ़ाने का काम करता है। ये ग्लूकागन (glucagon) के सिक्रीशन को कम करने के लिए काम करता है। ग्लूकागन हॉर्मोन ब्लड में शुगर को बढ़ाने का काम करता है।

जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) गैस्ट्रिक को खाली करने का काम करता है। ये भूख को कम करने और पेट में भरेपन का एहसास करवाता है।जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट का सीधा प्रभाव ब्रेन हंगर सेंटर पर होता है, जिसके कारण भूख कम होती है और साथ ही वेट कम होता है। इसका मुख्य काम ब्लड शुगर की स्पाइक को कम करना है और खाने के दौरान बॉडी में बनने वाली इंसुलिन को ये मुख्य रूप से नियंत्रित करता है। लोग आमतौर पर अन्य दवाओं के संयोजन के साथ जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट का सेवन करते हैं। जानिए कुछ जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के बारे में।

जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट: विक्टोजा सॉल्यूशन फॉर इंजेक्शन (Victoza Solution for Injection)

विक्टोजा सॉल्यूशन फॉर इंजेक्शन का इस्तेमाल ब्लड शुगर के लेवल को कम करने के लिए किया जाता है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज पेशेंट्स में किया जाता है। ये इंजेक्शमन सीरियस कॉम्प्लीकेशन से बचाने का काम करता है और किडनी डैमेज के साथ ही अंधेपन से भी बचाता है। जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज होती है, उन्हें हार्ट अटैक (Heart attack) या फिर स्ट्रोक का भी खतरा रहता है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक के खतरे (Stroke) को कम करने में मदद मिलती है। जब इंजेक्शन पेशेंट को दिया जाता है, तो ये इंसुलिन प्रोड्यूस करने में हेल्प करता है और साथ ही भूख को कम करने में भी मदद करता है।

किसी भी व्यक्ति को विक्टोजा सॉल्यूशन फॉर इंजेक्शन का कितना डोज दिया जाएगा, ये उस व्यक्ति की बीमारी और साथ ही में ली जाने वाली मेडिसिन पर निर्भर करता है। इस बात का निर्धारण डॉक्टर ही करते हैं कि पेशेंट को इंजेक्शन देना है या फिर नहीं। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से वॉमिटिंग, डायरिया (Diarrhea) या फिर भूख न लगने जैसे दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इस इंजेक्शन में एक्टिव इंग्रीडिएंट के रूप में लिराग्लूटाइड (Liraglutide) होता है। एक इंजेक्शन की कीमत 4260 रु होती है। अगर डॉक्टर ने आपको ये इंजेक्शन लगाया है और आपको इसके बाद किसी प्रकार की समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज के लिए मिनरल सप्लिमेंट्स: ब्लड शुगर को लेवल में रखने में कर सकते हैं मदद

डायबिटीज के बारे में अधिक जानने के लिए देखें ये 3डी मॉडल:

ट्रुलिसिटी 1.5 एमजी प्री-फिल्ड पेन (Trulicity 1.5mg Pre-Filled Pen)

जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) ग्रुप में ट्रुलिसिटी शामिल है। ट्रुलिसिटी 1.5 एमजी प्री-फिल्ड पेन एक इंजेक्टिबल मेडिसिन है। इसका इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए किया जाता है। ट्रुलिसिटी में एक्टिव इंग्रीडिएंट के रूप में डूलाग्लूटाइड (Dulaglutide) होता है। शरीर में जाने के बाद ये शरीर में इंसुलिन प्रोड्यूस करता है और साथ ही शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने का काम करता है। इस इंजेक्टिबल मेडिसिन का इस्तेमाल सप्ताह में एक बार किया जाता है। आपको इस बारे में डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए क्योंकि किसी भी इंजेक्शन या फिर दवा की डोज बीमारी के अनुरूप ही तय की जाती है। अगर आप समय पर इसे नहीं लगवाते हैं, तो आपके शरीर में कई तरह के कॉम्प्लीकेशन पैदा हो सकते हैं। आपको इस इंजेक्शन का इस्तेमाल करने के साथ ही डायट और लाइफस्टाइल में ध्यान देना भी जरूरी है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कुछ दुष्प्रभाव जैसे कि डायरिया, पेट में दर्द या भी भूख में कमी आदि हो सकते हैं।

और पढ़ें: टाइप 1 डायबिटीज में एंटीडिप्रेसेंट का यूज करने से हो सकता है हायपोग्लाइसिमिया, और भी हैं खतरे

नोट – ब्रैंड्स का प्राइज थोड़ा कम या फिर ज्यादा हो सकता है। आप जहां से से प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, वहां का प्राइज अन्य जगह से अलग हो सकता है।

जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट: एक्साप्राइड 250mcg/2ml इंजेक्शन (Exapride 250mcg/2ml Injection)

एक्साप्राइड 250mcg/2ml इंजेक्शन का इस्तेमाल टाइप 2 डायबटीज पेशेंट्स में ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए किया जाता है। ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ ही सीरियस कॉम्प्लीकेशन जैसे कि किडनी डैमेज या फिर अंधेपन की समस्या को रोकने में भी मदद करता है। ये इंजेक्शन जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) ग्रुप के अंतर्गत आता है। अगर व्यक्ति का वजन बढ़ रहा है, तो भी इस इंजेक्शन की सहायता से उसे कंट्रोल करने में मदद मिलती है। ये इंजेक्शन को दिन में दो बार इंजेक्ट करने की जरूरत पड़ सकती है। बेहतर होगा कि आप इंजेक्शन की डोज के बारे में डॉक्टर से जानकारी लें। साथ ही डॉक्टर से ये भी पूछें कि इंजेक्शन लेने का सही समय क्या है। इस इंजेक्शन में एक्टिव इंग्रीडिएंट के रूप में एक्सैनाटाइड (Exenatide) होता है।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज के लिए विटामिन डी सप्लिमेंट्स के बारे में जानने के लिए पढ़ना होगा ये लेख

ओजेम्पिक 2 एमजी/1.5 एमएल इंजेक्शन

ये इंजेक्टिबल प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन है, जिसका इस्तेमाल टाइट 2 डायबिटीज पेशेंट के लिए किया जाता है। ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ ही कार्डियोवस्कुल इवेंट्स जैसे कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक और मौत के खतरे को कम करने का काम करता है। इस इंजेक्शन में एक्टिव इंग्रीडिएंट के रूप में सेमाग्लूटाइड (semaglutide) होता है। ये इंसुलिन के सिकरीशन को बढ़ाने का काम करता है। इस इंजेक्शन को कैसे लिया जाता है, आप इस बारे में डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं।

इस आर्टिकल में दिए गए ब्रांड के नाम का हैलो स्वास्थ्य प्रचार नहीं कर रहा है। डॉक्टर से परामर्श के बाद ही दवाओं या फिर इंजेक्टबल मेडिसिंस का इस्तेमाल करना चाहिए। टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए दवाओं के साथ ही आपको खानपान पर भी ध्यान देने की जरूरत है। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (GLP-1 receptor agonists) के संबंध में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड