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डायबिटीज की है समस्या, तो लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स करेंगी आपकी परेशानियों को कम!

डायबिटीज की है समस्या, तो लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स करेंगी आपकी परेशानियों को कम!

जब तक हमे किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती है या फिर हम पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं, तो खानपान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर कम ही ध्यान जाता है। टाइप 2 डायबिटीज होने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप खाने में सब्जियों को खाना बंद कर दें। आप पोर्शन साइज़ में कंट्रोल कर और न्यूट्रिएंट्स को बैलेंस कर सकते हैं। डायबिटीज पेशेंट को खाने में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स स्केल वाली वेजीटेबल्स को शामिल करना चाहिए। सब्जियों में फाइबर होता है और साथ ही नाइट्रेट भी होता है, जो हाय ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए आपको लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) जरूर शामिल करनी चाहिए। इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) या डायबिटीज में वेजीटेबल्स के बारे में अहम जानकारी देंगे।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज और GI इशूज : क्या है दोनों के बीच में संबंध, जानिए

लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) क्या होती हैं?

लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स

ग्लाइसेमिक इंडेक्स के अंतर्गत कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड्स को एक नंबर दिया जाता है, जो इस बात की जानकारी देता है कि प्रत्येक फूड ब्लड शुगर को कितना बढ़ा सकते है। सभी फूड्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अलग हो सकता है। खाने में विभिन्न प्रकार की वेजीटेबल्स को शामिल करने से डायबिटीज पेशेंट की ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है। लो जीई वेजीटेबल्स के बारे में जानने से पहले आपको जीई वैल्यू के बारे में जानकारी होनी चाहिए। किसी भी फूड की जीआई (GI) वैल्यू का मतलब है कि शरीर कितनी जल्दी उस फूड से ग्लूकोज अवशोषित करता है। हाय जीआई (GI) फूड्स की अपेक्षा शरीर लो जीआई फूड्स (Low GI Foods) से कम मात्रा में ग्लूकोज अवशोषित करता है। जिन लोगों को मधुमेह (Diabetes) की समस्या है, उन्हें लो जीआई वैल्यू फूड्स (Low GI Foods) खाना चाहिए। डायबिटीज में सभी वेजीटेबल्स खाना सुरक्षित नहीं होता है क्योंकी सभी वेजीबल्स लो जीआई वैल्यू नहीं होते हैं। कुछ सब्जियों की जीआई वैल्यू (GI value) अधिक होती है। जैसे कि उबली हुई आलू की जीआई वैल्यू 78 होती है। जानिए कुछ लो जीआई वैल्यू वेजीटेबल्स के बारे में।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज के लॉन्ग टर्म कॉम्प्लीकेशन में शामिल हो सकती हैं ये समस्याएं!

लो जीआई वैल्यू में शामिल कर सकते हैं ये सब्जियां (Low-GI vegetables)

लो जीआई वैल्यू या लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) में एक या दो नहीं बल्कि बहुत सी सब्जियां शामिल हैं। आप खाने में अपनी पसंद के अनुसार सब्जियां शामिल कर सकते हैं। जानिए कुछ सब्जियों के बारे में।

आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक फूड्स की जीआई वैल्यू भिन्न हो सकती है। ये शुगर कंटेंट के बारे में जानकारी नहीं देता है। ग्लाइसेमिक लोड (जीएल) से तात्पर्य है कि भोजन की एक सर्विंग में शरीर में कितना ग्लूकोज जाएगा।

जानना चाहते हैं डायबिटीज के बारे में, तो देखें ये 3डी मॉडल-

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज और जंक फूड : यह स्वादिष्ट आहार कहीं बन ना जाए जी का जंजाल!

लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स: डायबिटीज में हाय नाइट्रेट कंटेंट (High-nitrate content)

नाइट्रेट कैमिकल होता है, जो कुछ सब्जियों में पाया जाता है। कुछ विक्रेता नाइट्रेट को प्रिजर्वेटिव्स के रूप में इस्तेमाल करते हैं। अगर आप नैचुरल नाइट्रेट रिच वेजीटेबल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो ये ब्लड प्रेशर को इंप्रूव करने के साथ ही ओवरऑल सर्कुलेटरी हेल्थ को भी बेहतर बनाती है। प्रोसेसिंग के समय इस्तेमाल किए जाने वाले नाइट्रेट से बचना चाहिए और नैचुरल नाइट्रेट युक्त सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए। डायबिटीज (Diabetes) में नाइट्रेट युक्त सब्जियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। आपको सब्जियों में चुकंदर (Beetroot), आर्गुला (Arugula), अजमोदा (Celery) आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। बेहतर होगा कि एक बार इस बारे में डॉक्टर से जानकारी जरूर लें।

डायबिटीज पेशेंट के लिए प्रोटीन युक्त सब्जियां हैं लाभदायक

प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरूरी न्यूट्रिएंट्स में शामिल है, जो बॉडी टिशू को बनाने में हेल्प करता है। प्रोटीन युक्त फूड्स खाने से लंबे समय तक पेट में भरेपन का एहसास रहता है। अगर आप नाश्ते में प्रोटीन युक्त लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) शामिल करते हैं, तो ये आपको एक्टिव करने के साथ ही सेल्स के फॉर्मेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप खाने में पालक के साथ ही एस्परैगस (Asparagus), सरसों का साग (mustard greens), ब्रसल स्प्राउट (Brussels sprouts) आदि शामिल कर सकते हैं। आपको अगर किसी सब्जी से एलर्जी है, तो बेहतर होगा कि उसका सेवन बिल्कुल न करें।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज का आयुर्वेदिक उपचार: क्या इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है, जानें एक्सपर्ट की राय

डायबिटीज में लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) क्यों है जरूरी?

गुड कार्बोहायड्रेट न सिर्फ न्यूट्रिएंट्स देते हैं बल्कि इनसे एनर्जी भी मिलती है। डायबिटीज पेशेंट खाने का चयन करते समय पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियों का चयन कर सकते हैं। लो टू मॉडरेट वेजीटेबल्स जैसे कि गाजर ब्लड ग्लूकोज को कंट्रोल करने के साथ ही वेट गेन के रिस्क को भी कम करने का काम करती है। नाइट्रेट युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कि चुकंदर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए बेहतर विकल्प में शामिल हैं। ये हार्ट डिजीज के खतरे को भी कम करने का काम करता है।
आपको डायट में ब्रेड या मीठे स्नैक्स की जगह सब्जियों को स्थान देना चाहिए। सब्जियां आपको नुकसान नहीं पहुंचाएंगी और न ही ब्लड में शुगर लेवल को कम होने देंगी। लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स (Low glycemic vegetables) के बारे में डॉक्टर से जानकारी जरूर लें।

और पढ़ें: क्या टाइप 2 डायबिटीज होता है जेनेटिक? जानना है जवाब तो पढ़ें यहां

डायबिटीज पेशेंट को आहार में पर्याप्त मात्रा में फाइबर और प्रोटीन शामिल करना चाहिए। आप खाने में हरे पत्तेदार साग में मेथी की सब्जी के साथ ही पालक को जरूर शामिल करें। ये फाइबर, प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। आप इन्हें सूप या फिर सब्जी के रूप में खा सकते हैं। फाइबर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। सब्जियों, फलों, मेवा और फलियों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर शामिल होता है। आप चाहे तो इस बारे में डॉक्टर से भी जानकारी ले सकते हैं और अपना डायट चार्ट प्रिपेयर कर सकते हैं। वेजीटेबल्स हेल्दी कोलेस्ट्रॉल (Healthy cholesterol) लेवल को मेंटेन करने का काम भी करते हैं और साथ ही ब्लड प्रेशर को भी मेंटेन करते हैं। प्रोटीन की तरह, फाइबर का सेवन लंबे समय तक भरेपन का एहसास कराता है और जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती है।

लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स का चयन आप एक्सपर्ट की हेल्प से भी कर सकते हैं। एक बात का ध्यान रखें कि सब्जियों का सेवन करने के दौरान उन्हें अधिक न पकाएं और न ही सब्जियों को कच्चा खाएं। आप को सब्जियों को फ्राय करके भी नहीं खाना चाहिए। आप सब्जियों को उबाल कर या फिर उनका सूप बनाकर पी सकते हैं। आप खाने में नॉन स्टार्ची चुनें, क्योंकि इन वेजटेबल्स में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह उपलब्ध नहीं कराता है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से लो ग्लाइसेमिक वेजीटेबल्स ( Low glycemic vegetables) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल गई होगी। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

डायबिटीज के बारे में है जानकारी, तो खेलें क्विज

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 04/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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