जानिए ब्रेस्ट कैंसर के बारे में 10 बुनियादी बातें, जो हर महिला को पता होनी चाहिए

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 7, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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कैंसर शरीर में फैलने वाली सबसे खतरनाक बीमारी में से एक है। कोई भी कैंसर का नाम सुनकर सहम जाता है। हैलो हेल्थ में बात करेंगे महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर  की। देश में महिलाओं को होने वाले कैंसर के प्रकार में ब्रेस्ट कैंसर दूसरे पायदान पर है। हर साल के आंकडे़ पर नजर डाले तो महिलाओं में एक लाख केस ब्रेस्ट कैंसर के पाए गए हैं। देश के शहरी हिस्सों में 30 में से 1 महिला ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है। वहीं गांव में यह आंकड़ा 65 में से 1 महिला का है। ब्रेस्ट कैंसर में सबसे अहम बात यह है कि अगर शुरुआत में ही इसकी जांच हो जाए तो इसमें पीड़ित की 80% बचने की संभावना बनी रहती है।

बता दें कि बॉलीवुड में कुछ एक्ट्रेस इसकी सरवाइवर हैं जिनमें अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप और अभिनेत्री लीजा रे का नाम शामिल है। अक्टूबर का महीना ‘ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ  कहलाता है। गौरतलब है कि पिछले दशक में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है। इससे पहले मेट्रो शहरों की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्रतिशत सबसे अधिक था लेकिन अब ब्रेस्ट कैंसर ने नंबर वन की पॉजिशन ले ली है।

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साल 2008 में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 90 हजार मरीजों में से 48 हजार मरीजों ने दम तोड़ दिया था। वहीं, वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) के अनुसार साल 2030 तक ब्रेस्ट कैंसर (Breast Caner) के मरीजों का आंकड़ा 2 करोड़ से ज्यादा होगा जिसमें मरने वालों की संख्या का अनुमान लगभग एक करोड़ का है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के सबसे बडे़ कारण में उनके लाइफस्टाइल में होने वाला बदलाव है। इधर, महिलाओं के खान-पान की अनियमितता और शहरों में उपलब्ध भोजन में पेस्टिसाइड की मात्रा होना आदि भी इसकी वजह बनते हैं। ब्रेस्ट कैंसर का खतरा उन महिलाओं में कम होता है जो बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं।

विशेषकर महिलाओं से जुड़े ब्रेस्ट कैंसर (Breast Caner) से जुड़ी ये 10 बातें पता होना बेहद आवश्यक हैं। इसलिए हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में बता रहे हैं ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी वो 10 अहम बातें जो आपको इससे सतर्क रहने और समय पर जांच पड़ताल करवाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

स्तन कैंसर के लिहाज से स्त्रियों के जीवन में उम्र के तीन पड़ाव बेहद अहम होते हैं 

  • पहला- ये पता करना होता है कि उसे पहली माहवारी कब हुई ? यदि 11 या 12 साल की उम्र में माहवारी शुरू हुई है तो इन स्त्रियों में स्तन कैंसर की आशंका सबसे अधिक होती है।
  •  दूसरा- यह है कि माहवारी बंद कब हुई यानि रजोनिवृत्ति? अगर माहवारी जल्द ही बंद हो गई है तो ऐसी स्त्रियों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बहुत कम होता है।
  • तीसरा- पहली गर्भावस्था में उम्र कितनी थी। यदि कोई स्त्री 18 से 20 साल के बीच में गर्भवती हुई हो तो उसे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है.

पड़ाव या तिथियां अहम क्यों है जानिए?

दरअसल, माहवारी पर नियंत्रण हार्मोंस से होता है, क्योंकि इनमें प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन आदि हार्मोन्स शामिल होते हैं। बता दें कि स्तन कैंसर एक हार्मोन्स आधारित कैंसर है तो इसलिए इसमें पड़ाव और तिथिया स्त्रियों के लिए अहम माने जाते हैं।

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हार्मोंस के अलावा ये कारण भी बढ़ाते हैं स्तन कैंसर का खतरा ?

महिलाओं के खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव स्तन कैंसर के कारणों में से एक है। ऐसे में ज्यादा कैलोरी और घी-तेल वाली डाइट लेना स्तन कैंसर का कारण बनती हैं। नियमित अल्कोहल का सेवन और मीनोपॉज ( रजोनिवृत्ति) के बाद किसी ‘हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरिपी’ भी स्तन कैंसर का बड़ा कारण है। साथ ही रेड मीट भी स्तन कैंसर के करणों में से एक है।

 क्या गर्भ निरोधक गोलियां यानी ओरल कंट्रासेप्टिव पिल्स भी कैंसर कारक हैं?

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि गर्भ निरोधक गोलियों पर कैंसर कारक होने का संदेह जताया गया है। इसके साथ ही हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के विषय में भी ऐसी चिंताएं व्यक्त की जा चुकी हैं। हालांकि कोई भी शोध इन संदेहों की पुष्टि नहीं कर पाया हैं। इसलिए अभी भी ये गोलियां दी जाती हैं। औरतें अभी भी इन्हें गर्भ निरोधक के रूप में या मीनोपॉज के बाद लेती ही हैं।

क्या स्तन कैंसर को शुरुआती स्टेज पर ही पहचाना जा सकता है?

सेल्फ चेक: इसकी शुरुआत में ही पहचान संभव है और ऐसा बहुत जरूरी भी है क्योंकि तब  इसका पूरा इलाज आसानी से हो सकता है। बता दें कि ब्रेस्ट कैंसर की अधिकतर शिकायत 15 से 34 साल की उम्र महिलाओं में होती है। वहीं, 40 की उम्र से कम की औरतों में से सिर्फ 7 प्रतिशत महिलाएं ही इसकी जांच करवाती हैं। जरूरी है कि समय-समय पर महिलाएं ब्रेस्ट का सेल्फ चेक करें। किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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तो कैसे ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाएं?

  • स्तन कैंसर स्त्री के शरीर के लिए बेहद गंभीर बीमारी है। इसलिए शर्म और लिहाज को अलग रखकर स्वयं अपने स्तनों को नहाते वक्त या किसी भी समय अच्छी तरह से दबाकर, सब तरफ टटोलकर नियमित रूप से जांचना चाहिए। स्त्रियां स्तन दबाते समय गौर करें कि कहीं कोई गांठ तो महसूस नहीं हो रही। ऐसा महिलाओं को महीने में एक बार जरूर करना चाहिए। स्तनों में गांठ महसूस होने पर डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
  • साथ ही यह वह जांच करें कि स्तन के निप्पल से कहीं कोई डिस्चार्ज तो नहीं हो रहा, स्तन की चमड़ी नीचे की ओर चिपकी या अंदर की तरफ खिंची सी तो नहीं है। अगर आपको इसमें से ऐसा कुछ संदिग्ध लगे तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरुरत है।
  • मीनोपॉज की उम्र से पहले तो अक्सर ऐसी गांठ कैंसर न होकर फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट डिसीज  (Fibrocystic Breast Disease) के कारण होती है। ऐसे में डॉक्टर आपको इसे देखने के लिए बुला सकता है जिससे कि वो यह तय कर सके कि इस गांठ को और आगे जांच की आवश्यकता है भी या नहीं।

स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए करवाएं अहम जांचें

  • स्तन कैंसर में सबसे अहम जांच बायोप्सी  होती है। बायोप्सी ऐसी प्रक्रिया से है जिसमें मानव-शरीर के किसी टिशू को निकालकर उसकी जांच प्रयोगशाला में की जाती है। ऐसे में हम बायोप्सी से घबरा जाते हैं जबकि हमे ऐसा नहीं करना चाहिए। स्तन कैंसर में गांठ की बायोप्सी की जांच बहुत अहम होती है। इस छोटे से ऑपरेशन द्वारा ही तो तय हो पाता है कि यह गांठ कैंसर की है या नहीं।
  • स्तन की मैमोग्राफी, एमआरआई या अल्ट्रासाउंड भी स्तन कैंसर की अहम जांचों मं शामिल हैं, लेकिन यह बायोप्सी से पहले की जांच हैं जो यह तय करती हैं कि बायोप्सी की जाए या नहीं । ये जांचें अंतिम तौर पर कभी तय नहीं कर सकतीं कि गांठ कैंसर की है या नहीं? ये जांचें सर्जन को केवल इस मामले में सहायता करती हैं कि आगे बायोप्सी करें कि नहीं।
  • कभी-कभी यह भी मान लिया जाता है कि गर्भवती स्त्री या वह स्त्री, जो बच्चे को अपना दूध पिलाती हो, यदि ऐसी स्त्री के स्तन में कोई गांठ हो तो इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, ऐसा सोचना गलत है क्योंकि ऐसी स्त्रियों के स्तन में भी यदि कभी कोई गांठ मिले तो उसके बारे में भी वही चिंतायें, वो ही जांचें होंगीं जो ऐसे मामले में किसी भी अन्य स्त्री की होंगी।

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क्या स्त्रियों को अपने स्तनों की नियमित मैमोग्राफी जांच करवाते रहना चाहिए?

दावा किया जाता रहा है कि मैमोग्राफी  के जरिए शुरुआती स्तर का स्तन कैंसर पकड़ जाता है। इसलिए अधेड़ उम्र की महिलाओं के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि वे हर साल मैमोग्राफी के जरिए ये पता करती रहें कि स्तन कैंसर तो नहीं पनप रहा।

लेकिन अब 40 साल की उम्र की महिलाओं के लिए भी मैमोग्राफी की सलाह दी जाने लगी है। इसे वे स्क्रीनिंग मैमोग्राम कहते है। शुरुआती स्क्रीनिंग करने पर यदि कोई शक पैदा करने जैसी चीज दिखे तो फिर उसे एमआरआई और डायग्नोस्टिक मैमोग्राफी द्वारा आगे जांचा जाता है। परंतु कई लोग इतनी नियमित मैमोग्राफी के खिलाफ भी हैं।  वे कहते हैं कि बार-बार एक्सरे द्वारा जांच करना भी स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार कारक हो सकता है।

तो क्या सोनोग्राफी द्वारा यह स्क्रीनिंग हो सकती है?

सोनोग्राफी तो एकदम सुरक्षित, सुलभ तथा सस्ती जांच है यह गलत है। क्योंकि सोनोग्राफी में मैमोग्राफी जैसी अहम जानकारी नहीं मिल पातीं। कोई गांठ यदि वह सिस्टिक गांठ है अर्थात उसमें कोई द्रव्य पदार्थ है तो यह जरूर सोनोग्राफी द्वारा तय हो सकता है। उसके सहारे नीडिल डालकर उसका द्रव्य पदार्थ जांच के लिए जरूर निकाला जा सकता है।

 अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानें

अपने परिवार के लोगों की बीमारी के बारे में हर किसी को जानना जरूरी है। इसका फायदा ये है कि आप उन बीमारियों के लिए पहले से सावधान रहते हैं। ब्रेस्ट कैंसर भी जेनेटिक बीमारी हो सकती है। अगर आपकी करीबी महिलाओं जैसे मां, दादी, नानी या बहन को कभी ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो तो आपको भी ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसीलिए शुरू से ही अपने ब्रेस्ट्स को अच्छे से समझें और समय-समय पर मैमोग्राफी और दूसरी जरूरी जांच करवाती रहें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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