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Lumpectomy: कैंसर सेल्स को हटाने में मदद करती है लम्पेक्टॉमी सर्जरी

Lumpectomy: कैंसर सेल्स को हटाने में मदद करती है लम्पेक्टॉमी सर्जरी

लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी की सहायता से ब्रेस्ट के एब्नॉर्मल सेल्स या कैंसर की कोशिकाओं को हटाया जाता है। लम्पेक्टॉमी प्रोसीजर की जरूरत तब पड़ती है जब कैंसर की शुरुआत यानी अर्ली स्टेज होती है। अगर किसी महिला का ब्रेस्ट कैंसर बढ़ गया है, तो ऐसे में इस सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती है। इस सर्जरी को रेडिएशन थेरिपी के साथ किया जाता है ताकि ब्रेस्ट कैंसर को वापस आने से रोका जा सके। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही बताएंगे आखिर क्यों इस सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

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लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी की क्यों पड़ती है जरूरत?

ब्रेस्ट कैंसर में की जाने वाली सर्जरी यानी लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी की सहायता से ब्रेस्ट में पाए जाने वाले एब्नॉर्मल टिशू को हटाया जाता है। अर्ली स्टेज ब्रेस्ट कैंसर के दौरान रेडिएशन के साथ की जाने वाली लम्पेक्टॉमी सर्जरी न केवल कैंसर से बचाने का काम करती है बल्कि दोबारा होने वाले कैंसर के खतरे के साथ ही पूरे ब्रेस्ट को हटाए जाने की प्रक्रिया (Mastectomy) की संभावना को भी कम करती है। अर्ली स्टेज के कैंसर की जांच करने के दौरान डॉक्टर लम्पेक्टॉमी की सलाह दे सकते हैं। बिना बायोप्सी के ये काम संभव नहीं है। लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) का इस्तेमाल नॉनकैंसरस या प्रीकैंसरस ब्रेस्ट एब्नॉर्मलटी ( precancerous breast abnormalities) को दूर करने के लिए किया जा सकता है।

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लम्पेक्टॉमी से जुड़े रिस्क (Risks associated with Lumpectomy)

लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की प्रोसेस भले ही अर्ली स्टेज कैंसर से राहत दिलाने का काम करती हो लेकिन इस प्रोसेस से रिस्क भी जुड़े हुए हैं। ये एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें साइड इफेक्ट्स का जोखिम भी रहता है।

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अगर हैं ये समस्याएं, तो नहीं दी जाती है लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की सलाह

यहां हम आपको ऐसे कुछ कारण बता रहे हैं, जिसके लिए डॉक्टर लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की सलाह नहीं देते हैं।

  • जिन महिलाओं में स्क्लेरोडर्मा (scleroderma) की हिस्ट्री रही हो, उनकी त्वचा का ऊतक अधिक कठोर हो जाता है। ऐसे केसे में लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की प्रक्रिया अपनाने पर हीलिंग प्रोसेस धीमी हो सकती है, इसलिए इस सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती है।
  • जिन महिलाओं में क्रॉनिक इंफ्लामेट्री डिजीज (systemic lupus erythematosus) होती है, उनमें रेडिएशन की प्रोसेस (Radiation process) अधिक गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
  • जिन महिलाओं के ब्रेस्ट में दो या अधिक ट्यूमर डिफरेंट क्वाडरेंट्स (Quadrants) होते हैं, उनके लिए इस सर्जरी की सहायता से ट्यूमर को हटाना कठिन होता है, इसलिए लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती है।
  • अगर महिला पहले ही ब्रेस्ट कैंसर के लिए रेडिएशन ले चुकी है, तो ऐसे में दोबारा रेडिएशन प्रोसेस रिस्की हो जाता है।
  • जब ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) अधिक फैल जाता है और साथ ही स्किन में भी पहुंच जाता है, तो ऐसे में लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की प्रोसेस नहीं अपनाई जा सकती है।
  • अगर किसी महिला के ब्रेस्ट में लार्ज ट्यूमर बन चुका है, तो भी लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) की सलाह नहीं दी जाती है।

ब्रेस्ट कैंसर में की जाने वाली सर्जरी यानी लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी कब अपनाई जाती है और कब नहीं, आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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लम्पेक्टॉमी के लिए तैयारी (Preparing for Lumpectomy)

लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) सर्जरी के पहले आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। आपको अगर इस सर्जरी के संबंध में कोई प्रश्न पूछने हो, तो आपको पहले से ही एक लिस्ट तैयार कर लेनी चाहिए।आपको प्रोसीजर की जानकारी के साथ ही इसके रिस्क के बारे में पता होना चाहिए। आप सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद घर जा सकते हैं। आप डॉक्टर से जरूरी दवाइयों, सप्लिमेंट्स आदि के बारे में जानकारी जरूर शेयर करें, जो आप पहले से ले रहे हैं। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि कुछ दवाएं सर्जरी के समय समस्या पैदा कर सकती हैं। आपको सर्जरी के पहले एस्पिरिन (Aspirin) का सेवन बंद कर देना चाहिए। अगर आप पहले से ही ब्लड थिनिंग मेडिकेशन ले रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। आपको सर्जरी के करीब आठ से बारह घंटे पहले खाना या पीना नहीं चाहिए।

लम्पेक्टॉमी प्रोसीजर के दौरान क्या होता है?

सर्जरी के पहले डॉक्टर इमेजिंग टेस्ट करते हैं। साथ ही मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड की हेल्प से ट्यूमर की जानकारी ली जाती है और फिर एक पतली वायर या रेडियोएक्टिव सीड डाली जाती है। ऐसा करने से उस स्थान को हटाने के बारे में जानकारी मिलती है, जहां ट्यूमर (Tumor) है। अगर स्किन के माध्यम से ही मास या फिर लंप की जानकारी मिल जाती है, तो लोकेलाइजेशन प्रोसीजर की जरूरत नहीं पड़ती है।

सर्जन लिम्फ नोड्स की जांच करते हैं। अगर लिम्फ नोड्स कैंसरस नहीं हैं, तो डॉक्टर नोड्स को हटा देते हैं। डॉक्टर आर्म पिट की सहायता से लिम्फनोड्स हटाते हैं। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया (Anesthesia) दिया जाता है, इसलिए प्रोसीजर के दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता है। डॉक्टर इंसीजिन के बाद टांके लगाते हैं। सर्जरी के बाद पेशेंट को रिकवरी रूम में लाया जाता है। रिकवरी रूम में पेशेंट के ब्लड प्रेशर के साथ ही पल्स और ब्रीथिंग को चेक किया जाता है। अगर आपका एक्सिलरी लिम्फ नोड डिससेक्शन (axillary lymph node dissection) है, तो आपको कुछ दिन हॉस्पिटल में रहना पड़ सकता है। आपको सर्जरी के बाद हॉस्पिटल में फॉलोअप विजिट जरूर करनी चाहिए ताकि आप अपनी परेशानी डॉक्टर को बता सकें।

ब्रेस्ट कैंसर के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें डिजिटल वीडियो-

आपको अपने ब्रेस्ट की जांच खुद ही करनी चाहिए। अगर आपको किसी भी तरह की गांठ का अनुभव होता है, तो तुरंत जांच कराएं। ब्रेस्ट कैंसर को अर्ली स्टेज में डायग्नोज कर लिया जाए, तो ब्रेस्ट कैंसर का इलाज आसान हो जाता है। अगर कैंसर की रफ्तार बढ़ने लगती है, तो ये स्तन के साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती है। आपकी लापरवाही जानलेवा हो सकती है, इसलिए आपको इस संबंध में सजग रहने की आवश्यकता है।

आप ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी यानी लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड