कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट से बचने के लिए करें ये उपाय, मिलेगी राहत

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कैंसर से लड़ने के लिए पेशेंट और उसके परिवार को लंबा संघर्ष करना पड़ता है। कैंसर के दौरान दी जाने वाली कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट बहुत से होते हैं। खासतौर पर इम्यून इसकी वजह से कमजोर हो जाता है और बाल झड़ने लगते हैं। अधिकांश कैंसर रोगियों को कीमोथेरेपी के बाद गंजेपन से गुजरना पड़ता है। हालांकि, एक नई शोध में कीमोथेरेपी के दौर से गुजर रहे कैंसर के रोगियों के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दी है।

स्किन थेरेपी लेटर में प्रकाशित लेख के मुताबिक, ‘अध्ययन में कीमो ड्रग्स को बालों के झड़ने के पीछे का मुख्य कारण पाया गया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि कीमो के दौरान झड़ जाने वाले बाल शायद ट्रीटमेंट के बाद वापस आ जाएं। हां है जरूरी नहीं कि ऐसा सभी के साथ हो।

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कैंसर के उपचार के दौरान कुछ लोगों का शरीर इन दवाओं को सहन नहीं कर पाता है। इस कारण बालों का झड़ना शुरू हो जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के सेंटर फॉर डर्मेटोलॉजी रिसर्च के शोधकर्ताओं ने कहा कि, कीमो दवा बालों के रोम और स्टेम सेल्स को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जिससे बालों के रोम को नुकसान पहुंचता है और बालों का गिरना शुरू हो जाता है। इसके अलावा कीमोथेरेपी रोम छिद्रों को अपना टारगेट बनाती है, क्योंकि शरीर में यहां के सेल्स सबसे ज्यादा तेजी से विभाजित होते हैं।

यह देखने के लिए कि क्या कीमो दवाओं में कोई परिवर्तन करने से स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है, शोधकर्ताओं ने सीडीके 4/6-कीमोथेरेपी के लिए दवाओं का एक नया वर्ग चुना। इन अवरोधकों के गुणों का मानव खोपड़ी के बालों के रोम के साथ शोषण और स्नान किया गया।

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कीमोथेरेपी के दौरान होने वाली समस्याएं

1. न्यूरोपैथी

कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान साइड इफेक्ट के रूप में न्यूरोपैथी भी हो सकती है। इसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यह मांसपेशियों की कमजोरी, कॉर्डिनेशन की कमी, रक्तचाप(BP) में परिवर्तन और झुनझुनी सनसनी का कारण बन भी बन सकता है। दर्द निवारक दवा, तेल मालिश और एक्यूपंक्चर इससे निपटने में मदद कर सकता है।

उपाय – धूम्रपान का सेवन बंद कर दें। इसके साथ ही गर्म पानी में स्नान लें और नियमित रूप से व्यायाम करें।

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2. कब्ज

कीमोथेरेपी दवाएं उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं जो पाचन में सहायता करती हैं। ये कब्ज, दस्त और मतली जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। कीमोथेरेपी के बाद कब्ज और पाचन की समस्या को रोकने के लिए आपको अपने खाने की आदतों को बदलना चाहिए। मसालेदार भोजन, कॉफी और तले हुए फूड से बचें । ऐसे खाद्य पदार्थ जो आपके पेट में जलन पैदा कर सकते हैं उन्हें न लें। अपने आहार में हाई फाइबर फूड जैसे फल और सब्जियां शामिल करें। एवोकैडो, केला, छोला, हरी पत्तेदार सब्जियां, मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ भी ले सकते हैं। पानी को सेवन अधिक करें।

उपाय – प्रतिदिन नियमित रूप से तरल पदार्थ जैसे पानी के 8 ग्लास का सेवन करें। खाने के साथ पानी न पीएं। आसानी से पचने वाले आहारों का सेवन करें। जैसे की सीड, बेरी और पक्की हुई सब्जियां।

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3. सांस लेने में तकलीफ

कीमोथेरेपी की मेडिसिन लंग्स कैंसर पेशेंट को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह फेफड़ों के लिए ऑक्सीजन के अधिग्रहण को मुश्किल बनाता है। अगर आप कैंसर के इलाज के बाद सांस लेने में समस्या का सामना कर रहे हैं तो रोजाना कुछ व्यायाम करें। सोते समय शरीर को कुछ ऊंचा रखें, इससे आपको आराम मिलेगा।

उपाय – योगासन या हल्के व्यायाम करें। सांस संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर कुर्सी पर बैठ जाएं और कुछ समय तक लंबी व गहरी सांस लें।

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4. तंत्रिका प्रणाली में समस्या

हमारा नर्वस सिस्टम भावनाओं, विचारों और सामंजस्य को काबू करता है। कीमोथेरेपी के कारण मेमोरी संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं जिसके कारण व्यक्ति कार्यों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। इस लक्षण को आमतौर पर कीमो फॉग या कीमो ब्रेन भी कहा जाता है।

नर्वस सिस्टम के इस प्रकार के हल्के लक्षण समय के साथ सही इलाज से अपने आप चले भी जा सकते हैं तो कई बार कई वर्षों के लिए व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ दुलर्भ व गंभीर मामलों में यह व्यक्ति को उम्र भर के लिए एंग्जायटी और स्ट्रेस से भी ग्रसित कर सकते हैं।

उपाय – इन तरीकों से बनाएं अपनी तंत्रिका प्रणाली को मजबूत –

  • लंबी गहरी सांस लेना
  • नंगे पैर घास पर चलें
  • धूप सकें
  • योग और मेडिटेशन करें
  • व्यायाम
  • ओमेगा 3, सेंधा नमक और मैग्नीशियम का अधिक सेवन शुरू करें

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5. बालों, त्वचा और नाखूनों पर प्रभाव

कई प्रकार के कीमोथेरेपी ड्रग बालों के कूप को प्रभावित करती हैं जिसके कारण इलाज के कुछ ही हफ्तों में बाल झड़ने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। बाल झड़ने की समस्या शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। जैसे की भौहें से लेकर पैरों के बालों तक। बाल झड़ने की समस्या अस्थायी होती है और फाइनल ट्रीटमेंट के कुछ हफ्तों बाद बाल फिर से आने शुरू हो जाते हैं।

कीमोथेरेपी के दौरान त्वचा पर हल्की जलन, सूखापन, खुजली और चकत्ते हो सकते हैं। इस परेशानी से बचने के लिए डॉक्टर आपको मलहम लगाने की सलाह दे सकते हैं। जैसे-जैसे ड्रग के प्रभाव बढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे यह आपके हाथों और पैरों के नाखूनों को भी प्रभावित करने लगते हैं।

इलाज की प्रकिया के कुछ समय बाद आपके नाखूनों का रंग भूरे या पीले रंग का हो सकता है। इसके साथ ही कीमोथेरेपी के कारण नाखूनों की ग्रोथ में भी कमी आने लगती है। कुछ दुर्लभ मामलों में नाखून अपनी जगह से उखड़ भी सकते हैं। ऐसे में आपको अपने नाखूनों की ज्यादा देखभाल करने की जरूरत पढ़ सकती है।

उपाय – बालों का झड़ना कम करने के लिए रोजाना शैम्पू न करें। त्वचा पर आए चकत्ते या अन्य समस्याओं का समाधान पाने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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इन बातों का रखें ध्यान

कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं कैंसर कोशिकाओं को मारती हैं, लेकिन वे अपने आसपास की कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को भी खत्म कर देती हैं। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। इस कारण आपको और भी बीमारियां घेर सकती हैं।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ये खाएं

साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि प्रोसेस्ड, पैकेज्ड और जंक फूड के सेवन से आपको बचना चाहिए।

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व्यायाम

व्यायाम की मदद से सूजन, थकान और अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है जिससे इलाज की प्रक्रिया में तेजी आने लगती है। व्यायाम का तीव्र होना जरूरी नहीं है, आप चाहें तो नियमित रूप से टहलना, योग करना या अन्य हल्के व्यायाम भी कर सकते हैं। ध्यान रहे कि व्यायाम कि मदद से आपका रक्त प्रवाह सही ढंग से चलता रहना चाहिए।

इसके अलावा आप चाहें तो सपोर्ट ग्रुप या थेरेपी सेशन भी जॉइन कर सकते हैं। अगर आपको कीमोथेरेपी के दौरान या बाद में अवसाद, तनाव या अन्य कोई समस्या आती है तो आप काउंसलर की भी मदद ले सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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के द्वारा लिखा गया Govind Kumar
प्रकाशित हुआ दिसम्बर 5, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें