
शरीर के बाहरी हिस्से में जैसे तिल और मस्सा होता है वैसे ही गर्भाशय में मस्से की तरह ट्यूमर हो जाता है, जिसे फाइब्रॉएड कहते है। फाइब्रॉएड जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसका इलाज बहुत जरूरी है। फाइब्रॉएड गर्भाशय में किस जगह पर है, इससे भी रिस्क कम ज्यादा हो जाते है। फाइब्रॉएड महिलाओं में बांझपन का प्रमुख कारण है इसलिए फाइब्रॉएड का समय पर इलाज किया जाना जरूरी है। अक्सर देखा जाता है फाइब्रॉएड शादीशुदा और 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को होता है लेकिन बदलते पर्यावरण, खान-पान, अनियमित दिनचर्या की वजह से हार्मोन असंतुलित हो जाने के कारण अब कम उम्र की लड़कियों को भी फाइब्रॉएड की समस्या होने लगी है। कई बार तो लक्षण न दिखाई देने पर बहुत समय के बाद फाइब्रॉएड होने के बारे में जानकारी मिलती है। जानिए फाइब्रॉएड्स का इलाज कैसे किया जाता है और इसके लक्षण क्या होते है।
वैसे फाइब्रॉएड की शिकार महिला को पीरिड्स के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि हैवी ब्लीडिंग या अनियिमित पीरियड्स आदि।। कई महिलाएं इस तरह की परेशानी होने पर उसे गंभीरता से नहीं लेती हैं, जो आगे चलकर बड़ी समस्या का कारण हो सकता है। इस तरह के लक्षण दिखने पर तो फाइब्रॉएड का इलाज शुरू कर ही दिया जाता है, लेकिन हर केस में महिला को फाइब्रॉएड के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसलिए समय-समय पर महिलाओं को फाइब्रॉइड का पता लगाने के लिए गर्भाशय की जांच जरूर करवाना चाहिए। अगर निम्न लक्षण दिखाई दें तो फाइब्रॉइड होने की संभावना हो सकती है-
फाइब्रॉएड का परीक्षण करने के लिए कई तरह की जांच की जाती है जिसके बाद फाइब्रॉएड का इलाज शुरू किया जाता है। फाइब्रॉइड होने का परीक्षण इस तरह से किया जाता है-
डॉक्टर फाइब्रॉएड का इलाज करने से पहले महिला की स्थितियों पर गौर करते है। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, लक्षण की गंभीरता, फाइब्रॉएड किस जगह पर है, उसका आकार, गर्भवती है या योजना बना रही है इन पहलुओं को ध्यान में रख कर डॉक्टर इलाज शुरू करते है। फाइब्रॉएड के इलाज में दवाओं और सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है।
महिलाएं सर्जरी कराने से पहले डॉक्टर से जरूर विचार-विमर्श कर लें, क्योंकि इनमें से कुछ सर्जरी करने पर महिला के प्रेग्नेंसी की गुंजाइश कम हो जाती है।
फाइब्रॉएड की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाएं, जैसे कि-
इस समस्या से निकलने के लिए सबसे पहले मैंने अपने अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित यानी एक टाइम टेबल सैट किया। अपने सोने व उठने का और खाने व पीने का समय निर्धारित किया। अच्छे स्वास्थ के लिए दिनभर में कम से कम 7- 8 घंटे की स्वस्थ नींद लिए बहुत जरूरी है। नींद पूरी होने पर शरीर में एनर्जी का लैवेल अच्छा बना रहता है।
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डॉक्टर के सलहानुसार फिट रहने के लिए हर व्यक्ति के लिए रोज कम से कम 20 मिनट की वॉक जरूरी है। इसके अलावा नियमित रूप से कोई न कोई एक्टिविटी या एक्सरसाइज करते रहना चाहिए। स्ट्रेचिंग भी करनी चाहिए, इससे बॉडी की स्ट्रेंथ बढ़ जाती है।
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए दिनभर में 3-4 लीटर पानी पीना आवश्यक है। उचित मात्रा में पानी पीने से शरीर से बैक्टीरिया भी बाहर निकल जाते हैं, साथ ही हमारे अंदर का सिस्टम भी क्लीन हो जाता है और हल्कापन महसूस होता है।
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फाइब्रॉएड किसी भी महिला के लिए बहुत बड़ी समस्या है, ऐसे में समय रहते डॉक्टर से जरूरी सलाह और फाइब्रॉएड का इलाज करवाना जरूरी है।उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
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