Weakness : कमजोरी क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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प्रकाशित हुआ June 12, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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परिचय

कमजोरी क्या है?

शारीरिक ताकत का उल्टा शब्द कमजोरी है। इसमें व्यक्ति शारीरिक गतिविधियों में मसल्स की सामान्य ताकत में भी कमी महसूस करता है। इसके साथ आपको थकान व ऊर्जा की कमी भी हो सकती है। क्योंकि, कमजोरी होने पर मसल्स को किसी भी कार्य को करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती, जिसके परिणामस्वरूप शरीर को थकान व ऊर्जा की कमी भी महसूस होने लगती है। इसके साथ ही, यह कमजोरी शरीर के किसी के अंग को भी प्रभावित कर सकती है। जैसे कि, पैरों की कमजोरी होने पर थोड़ा चलने पर ही दिक्कत महसूस होने लगती है। जब शरीर में लगातार और लंबे समय तक कमजोरी और थकान होने लगती है, तो उस स्थिति को अस्थेनिया (Asthenia) भी कहा जाता है।

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किसी खास अंग की कमजोरी भी दो प्रकार की हो सकती है। जैसे-

जैसा कि आप जानते हैं, कि जब हम अपने किसी अंग से कोई कार्य करते हैं, तो सबसे पहले दिमाग मांसपेशियों को संकेत भेजता है और फिर वह मसल कार्य करती है। लेकिन, न्यूरोमस्कुलर वीकनेस (neuromuscular weakness) में मांसपेशियों को किसी चोट या क्षति के कारण इन संकेतों को प्राप्त करने या फिर कार्य करने में कमजोरी महसूस होती है।

वहीं, नॉन-न्यूरोमस्कुलर वीकनेस (Non-Neuromuscular Weakness) में बिना किसी चोट या क्षति के कारण आपकी मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है।

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लक्षण

कमजोरी के लक्षण क्या-क्या होते हैं?

कमजोरी के कारण या उसके साथ आपको निम्नलिखित लक्षणों का भी सामना करना पड़ता है। जैसे-

  • थकावट होना
  • वजन कम होना
  • शारीरिक ऊर्जा की कमी
  • मसल्स क्रैंप
  • बुखार
  • जोड़ों में दर्द
  • शारीरिक अंगों में दर्द
  • मसल्स की मूवमेंट में देरी
  • शारीरिक अंग कांपना
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में समस्या
  • नजर कमजोर होना, आदि

ध्यान रखें कि, यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हर किसी में कमजोरी के कारण एक जैसे या यहां बताए गए सभी लक्षण दिखाई दें। इसके साथ ही, लोगों में ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा भी अन्य लक्षण भी दिख सकते हैं, जो कि यहां नहीं बताए गए हैं। अगर आपके मन में कमजोरी से जुड़े लक्षणों के बारे में कोई शंका या सवाल है, तो अपने डॉक्टर से जरूर चर्चा करें।

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कारण

कमजोरी होने के पीछे के क्या कारण हो सकते हैं?

कमजोरी होने के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे-

  • हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म जैसी थायरॉइड कंडीशन
  • शरीर के किसी अंग में चोट लग जाने या उसको क्षति पहुंच जाने के कारण
  • इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस जैसे शरीर में पोटैशियम की कमी होना, मैंग्नीज की कमी होना और रक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाने के कारण
  • ग्रेव्स डिजीज, मायस्थेनिया ग्रेविस जैसी ऑटोइम्यून डिजीज के कारण
  • मल्टीपल स्केलेरोसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस जैसी न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर
  • एनीमिया की समस्या के कारण
  • चिंता या डिप्रेशन के कारण
  • पर्याप्त नींद न मिलने के कारण
  • शरीर में विटामिन की कमी के कारण
  • पीलिया के रोग के कारण
  • बुखार के कारण
  • दिल के रोग के कारण
  • क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, आदि

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निदान

कमजोरी की जांच करने के लिए कौन-से टेस्ट की मदद ली जाती है?

अगर आपको कमजोरी की शिकायत है और उसके पीछे किसी सही कारण का पता नहीं लग पा रहा है, तो डॉक्टर उसकी छुपी हुई वजह का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट कर सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर आपकी मेडिकल व फैमिली की मेडिकल हिस्ट्री जान सकता है और उसके मुताबिक भी कुछ टेस्ट करवाने की सलाह दे सकता है। आइए, जानते हैं कि कमजोरी की जांच करने के लिए डॉक्टर किन टेस्ट की मदद ले सकता है।

  • शारीरिक जांच में डॉक्टर आपके शरीर के रिफ्लेक्सिस (सजगता), सेंसेज (होश) और मसल्स टोन की जांच कर सकता है। जिससे वह ऊपरी तौर पर कमजोरी के कारण का पता लगा पाए। अगर, इससे वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाता तो, वह आपको कुछ और टेस्ट करवाने की सलाह दे सकता है। जैसे-
  • आपके शरीर की आंतरिक स्थिति को समझने के लिए सीटी स्कैन या एमआरआई टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है।
  • किसी इंफेक्शन या विटामिन बी12, फोलेट या अन्य विटामिन व मिनरल की जांच के लिए कंप्लीट ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है।
  • ब्लड ग्लूकोज, सीरम इलेक्ट्रोलाइट्स, लिवर फंक्शन टेस्ट, रीनल फंक्शन टेस्ट, थायरॉइड फंक्शन टेस्ट आदि की जांच के लिए बायोकैमिकल टेस्ट करवाने के लिए कहा जा सकता है।
  • किसी ऑटोइम्यून डिजीज के खतरे का पता लगाने के लिए ऑटोएंटीबॉडी स्क्रीनिंग करवाने की सलाह भई दी जा सकती है।
  • क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी डिजीज के खतरे का पता लगाने के लिए टेस्ट करवाने की सलाह दी जा सकती है।
  • मसल्स की नर्व एक्टिविटी को टेस्ट करने के लिए इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) करवाने के लिए कहा जा सकता है।
  • यूरिन टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा सकता है।
  • इसके अलावा दिल के रोग व स्ट्रोक जैसी खतरनाक समस्याओं के खतरे का पता लगाने के लिए एचआईवी टेस्टिंग, ईसीजी, इको, ट्यूबरकुलिन टेस्टिंग, चेस्ट एक्स-रे, यूरिन टॉक्सिकोलॉजी स्क्रीन आदि भी करवाई जा सकती है।

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नियंत्रण और सावधानी

कमजोरी को नियंत्रित करने के लिए क्या करें?

कमजोरी की समस्या को नियंत्रित करने या उससे बचाव करने के लिए आपको निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे-

  • नियमित रूप से रोजाना करीब 30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। जिससे आपके शरीर की मसल्स मजबूत बनी रहें और उनकी ताकत में कमी न आए।
  • थकान और ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए पोषक आहार लें, जैसे फल, हरी सब्जियां आदि। कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिनयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से आपकी मसल्स को ताकत मिलती है और शरीर को कई बीमारियों से लड़ने में आसानी होती है।
  • एल्कोहॉल व कैफीन का सेवन करने से बचें।
  • रोजाना 8 से 9 घंटों की पर्याप्त नींद लें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पियें।

यहां दी गई सलाह किसी चिकित्सीय मदद का विकल्प नहीं है। इसलिए, अगर आप कमजोरी बहुत ज्यादा महसूस कर रहे हैं, तो डॉक्टर को जल्द से जल्द दिखाएं।

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उपचार

कमजोरी का इलाज कैसे किया जाता है?

कमजोरी का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है और उसमें निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे-

  1. ऑक्यूपेशनल थेरिपी की मदद से आपकी अपर बॉडी को मजबूत करने के लिए कुछ एक्सरसाइज की मदद ली जाती है। इसमें आपकी दैनिक गतिविधियों को मदद करने वाले कुछ डिवाइस या टूल्स का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी जा सकती है। यह स्ट्रोक से उबारने के लिए मरीजों को आमतौर पर दी जाती है।
  2. फिजिकल थेरिपी में मल्टिपल स्केलेरोसिस और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस जैसी समस्याओं से ग्रसित मरीजों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कुछ एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।
  3. पेरिफेरल न्यूरोपैथी, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और न्यूरोलॉजिया जैसी समस्याओं में आइबुप्रोफेन और एसिटामिनोफेन जैसी कुछ ओवर द काउंटर दवाओं का सेवन करने की भी सलाह दी जा सकती है। इसके अलावा, थायरॉइड के मरीजों के लिए थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट ट्रीटमेंट की सलाह ली जाती है।
  4. अगर आपको इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस की वजह से कमजोरी होती है, तो आपके डायट में बदलाव करके भी शरीर में किसी विटामिन, मिनरल की कमी को खत्म किया जाता है।
  5. अगर किसी ऐसी कंडीशन की वजह से आपको कमजोरी हो रही है, जो कि दवाओं या थेरिपी से ठीक नहीं हो पा रही है, तो उस स्थिति में सर्जरी की मदद भी ली जा सकती है।
  6. अगर डिहाइड्रेशन की वजह से कमजोरी है, तो आपको तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है और आपको इंट्रावेनस लाइन के द्वारा फ्लूड भी दिया जा सकता है।
  7. गंभीर एनीमिया की समस्या दूर करने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा सकता है, क्योंकि शरीर में खून की कमी कमजोरी का मुख्य कारण हो सकती है।
  8. कई मामलों में कैंसर की वजह से लोगों को कमजोरी का सामना करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में कैंसर का इलाज करना जरूरी है। लेकिन, कैंसर के इलाज का हर तरीका सभी मरीजों के लिए उचित नहीं होता है, इसलिए उसमें भी बदलाव किया जा सकता है।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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